Thursday, 27 May 2010

गजल


देह अहाँक केराक थंब सन गोर-नार लगैए
अड़हूलक फूल सन भकरार लगैए


नोर अहाँक बेली, चमेली, गेंदा, गुलाब
मुदा हँसी अँहाक सिंगरहार लगैए


मरनाइ हरदम मरनाइ होइत छैक केकरो लेल
मनुखक लाश सन कटल कचनार लगैए


शीशोक शीश कटल चSहुक चSहु टुटल
आमक नव पल्लव अंगार लगैए


आम लताम जाम शरीफा
जकरे देखू सभ अनचिन्हार लगैए

Wednesday, 19 May 2010

मैथिली गजलशास्त्र-८


आब एक धक्का फेरसँ मैथिलीक उच्चारण निर्देश आ ह्रस्व-दीर्घ विचारपर आउ।
जेना कहल गेल रहए जे अनुस्वार आ विसर्गयुक्त भेलासँ दीर्घ होएत तहिना आब कहल जा रहल अछि जे चन्द्रबिन्दु आ ह्रस्वक मेल ह्रस्व होएत।
माने चन्द्रबिन्दु+ह्रस्व स्वर= एक मात्रा

संयुक्ताक्षर: एतए मात्रा गानल जाएत एहि तरहेँ:-
क्ति= क् + त् + इ = ०+०+१= १
क्ती= क् + त् + ई = ०+०+२= २

आब आउ किछु आर शब्दपर:
जेना आएल, हएत, हैत
आब हैतकेँ हएत लिखब बेशी वैज्ञानिक अछि कारण हैतकेँ ह + ऐ + त पढ़ल जएबाक खतरा अछि (दोषपूर्ण)। आ ताहि रूपमे आएल क उच्चारण होएत
अ + ऐ + ल = १ + २ + १
तँ आएल = २ + १ + १ = ४

तहिना आओत क उच्चारण होएत
अ +औ + त= १ + २ + १
तँ आओत = २ + १ + १
हएबाक= १+२+२+१
होएबाक= २+१+२+१ (ओ क बाद ए क मान ह्रस्व)
हेबाक= २+२+१
नञि= १+१
नै= २
नहि=१+१
सएह= १+२+१ (ग्राह्य)
सैह= २+१ (दोषपूर्ण उच्चारण)
तखन निअम भेल: दीर्घक बाद वा क गणना १ मात्रा होएत।

आब पाँती वा पाँति खण्डक अन्तिम वर्णपर आउ।
एकरा लय मिलेबाक दृष्टिसँ हलन्तयुक्त रहलापर एक आ लघु रहलापर दीर्घ दू मात्रा लऽ सकै छी, मुदा से अपवादस्वरूप आ आवश्यकतानुसार, आपद् रूपमे।
जेना मनोज- एकर उच्चारण होइत अछि-
म+नो+ज्
मुदा संबोधनमे
म+नो+ज+अ+अ
तखन निअम भेल:
मैथिलीमे स्युक्ताक्षरमे हलन्तक अस्तित्वक अनुसार गणना होएत। मुदा जतए हलन्तयुक्त वर्णसँ पाँती वा पाँती खण्डक समापन होएत ततए हलन्तयुक्तकेँ एक मात्राक गणना लय मिलानी लेल कऽ सकै छी। संगहि लय मिलानी लेल पाँती वा पाँती खण्डक अन्तिम वर्ण ह्रस्व रहलापर ओकरा दीर्घ बुझि मात्रा गणना कऽ सकै छी।

क्ष= क् + ष= ०+१
त्र= त् + र= ०+१
ज्ञ= ज् + ञ= ०+१
श्र= श् + र= ०+१
स्र= स् +र= ०+१
शृ =श् +ऋ= ०+१
त्व= त् +व= ०+१
त्त्व= त् + त् + व= ० + ० + १
ह्रस्व + ऽ = १ + ०
अ वा दीर्घक बाद बिकारीक प्रयोग नहि होइत अछि जेना दिअऽ आऽ ओऽ (दोषपूर्ण प्रयोग)। हँ व्यंजन+अ गुणिताक्षरक बाद बिकारी दऽ सकै छी।
ह्रस्व + चन्द्रबिन्दु= १+०
दीर्घ+ चन्द्रबिन्दु= २+०
जेना हँसल= १+१+१
साँस= २+१
बिकारी आ चन्द्रबिन्दुक गणना शून्य होएत।
जा कऽ = २+१
क् =०
क= क् +अ= ०+१
किएक तँ क केँ क् पढ़बाक प्रवृत्ति मैथिलीमे आबि गेल तेँ बिकारी देबाक आवश्यकता पड़ल, दीर्घ स्वरमे एहन आवश्यकता नहि अछि।

आब आउ बहरे मुतकारिबमे एकटा गजल कही:

बहरे मुतकारिब:- सभ पाँतिमे पाँच-पाँच वर्णक संगीत-शब्द चारि बेर एहि क्रममे:
U । । अरकान सामिल पूर्णाक्षर

आब मैथिलीमे विभक्ति सटलासँ कनेक सुविधा अछि, तैयो शब्दक संख्या चारिसँ बेशी राखि सकै छी मुदा ह्रस्व दीर्घक क्रम वएह राखू।
लुन U।।
लुन फलुन लुन फलुन
लुन फलुन लुन फलुन

(क्रमशः)

Tuesday, 18 May 2010

मैथिली गजलशास्त्र-७

आब किछु शब्दावली देखी।

अरकान :अरकान सामिल पूर्णाक्षर:
अरकान सामिल पूर्णाक्षर: फ–ऊ–लुन U।। फा–इ–लुन।U। मफा–ई–लुन U।।। मुस–तफ–इ–लुन ।।U। फा–इ–ला–तुन ।U।। मु–त–फा–इ–लुन UU।U। मफा–इ–ल–तुन U।UU। मफ–ऊ–ला–तु ।।।U
सभ पूर्णाक्षरी घटक मारते रास प्रकार।
१० पूर्णाक्षरी(सालिम) अराकानसँ १९ बहर आ से दू प्रकारक:
मुफरद बहर माने रुक्नक बेर-बेर प्रयोगसँ।सात सालिम(पूर्णाक्षरी)बहर, संगीत शब्दावलीमे एकरा शुद्ध कहि सकै छी।सभ पाँतीमे २-८ बेर दोहरा कऽ शेरमे ४-१६ रुक्नी बहर बनत। ४ रुक्नक बहर- मुरब्बा ६ रुक्नक बहर- मुसद्दस ८ रुक्नक बहर- मुसम्मन / मुफ़रद(विशुद्ध) आठ–रुक्न, छह रुक्न आ चारि–रुक्नक सालिम बहर
हजज :-आठ–रुक्न म फा ई लुन (U।।।) – चारि बेर/ छः–रुक्न म फा ई लुन (U।।।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न म फा ई लुन (U।।।) – दू बेर
रजज़ आठ–रुक्न मुस तफ इ लुन (।।U।) – चारि बेर/ छः–रुक्न मुस तफ इ लुन (।।U।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न मुस तफ इ लुन (।।U।) – दू बेर/
रमल आठ–रुक्न फा इ ला तुन (।U।।) – चारि बेर/ छः–रुक्न फा इ ला तुन (।U।।)– तीन बेर/ चारि–रुक्न फा इ ला तुन (।U।।)– दू बेर
वाफ़िर आठ–रुक्न म फा इ ल तुन (U।UU।) – चारि बेर/ छः–रुक्न म फा इ ल तुन (U।UU।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न म फा इ ल तुन (U।UU।)– दू बेर
कामिल आठ–रुक्न मु त फा इ लुन (UU।U।)– चारि बेर/ छः–रुक्न मु त फा इ लुन (UU।U।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न मु त फा इ लुन (UU।U।) – दू बेर
मुतकारिब आठ–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – चारि बेर/ छः–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न फ ऊ लुन (U।।) – दू बेर
मुतदारिक आठ–रुक्न फा इ लुन (।U।) – चारि बेर/ छः–रुक्न फा इ लुन (।U।) – तीन बेर/ चारि–रुक्न फा इ लुन (।U।) – दू बेर
एहि सभक मारते रास अपूर्णाक्षरी रूप सेहो।
मुरक्कब बहर: दू प्रकारक अरकानक बेर-बेर अएलासँ १२ सालिम बहर,संगीतक भाषामे मिश्रित। तीन तरहक- ४ रुक्नक बहर, ६ रुक्नक बहर, ८ रुक्नक बहर / मुरक्कब (मिश्रित) पूर्णाक्षरी (सालिम) बहर
१२ टा –तवील,मदीद,मुनसरेह,मुक्तज़ब,मज़ारे,मुजतस,ख़फीफ,बसीत,सरी–अ,जदीद, क़रीब, मुशाकिल
अरकान :मुज़ाहिफ अरकान अपूर्णाक्षर :
मुज़ाहिफ अरकान अपूर्णाक्षर :फ–इ–लुन UU। मफा–इ–लुन U।U। फ–इ–ला–लुन UU।। म–फा–ई–लु U।।U मुफ–त–इ–लुन ।UU। फ–ऊ–लु U।U मफ–ऊ–लु ।।U मफ–ऊ–लुन ।।। फै–लुन ।। फा । फ–अल् U। फ–उ–ल् U।U फा अ । U फा इ लुन । U । फ ऊ लुन U । ।

मुक्तजब (अपूर्णाक्षरी आठ रुक्न):फ ऊ लु U । U फै लुन U । फ ऊ लु U।U फै लुन। ।
मज़ारे (अपूर्णाक्षरी आठ रुक्न):मफ ऊ लु । । U फा इ ला तु । U । U म फा ई लु U । । U फा इ लुन। U । / फा इ ला न। U । U

मुजतस (अपूर्णाक्षरी आठ–रुक्न):म फा इ लुन U । U । फ इ ला तुन U U । । म फा इ लुन U । U । फै लुन। ।/ फ–इ–लुन UU।
ख़फीफ़ (अपूर्णाक्षरी छः रुक्न):फा इ ला तुन । U । । म फा इ लुन U । U । फै लुन। । / फ इ लुन U U ।

मैथिली गजलशास्त्र-६



आब कनेक आर कठिनाह विषयपर आबी। पहिल खेपमे देल मात्रिक छन्द गणनापर आबी।
छन्दः शास्त्रमे प्रयुक्त गुरुलघुछंदक परिचय प्राप्त करू।
तेरह टा स्वर वर्णमे अ,,,,लृ ई पाँच ह्र्स्व आर आ,,,,ए.ऐ,,, ई आठ दीर्घ स्वर अछि।
ई स्वर वर्ण जखन व्यंजन वर्णक संग जुड़ि जाइत अछि तँ ओकरासँ गुणिताक्षरबनैत अछि।
क्+अ= क,
क्+आ=का ।
एक स्वर मात्रा आकि एक गुणिताक्षरकेँ एक अक्षरकहल जाइत अछि। कोनो व्यंजन मात्रकेँ अक्षर नहि मानल जाइत अछि- जेना अवाक्शब्दमे दू टा अक्षर अछि, , वा ।

१. सभटा ह्रस्व स्वर आ ह्रस्व युक्त गुणिताक्षर लघुमानल जाइत अछि। एकरा ऊपर U लिखि एकर संकेत देल जाइत अछि।
२. सभटा दीर्घ स्वर आर दीर्घ स्वर युक्त गुणिताक्षर गुरुमानल जाइत अछि, आ एकर संकेत अछि, ऊपरमे एकटा छोट -।
३. अनुस्वार किंवा विसर्गयुक्त सभ अक्षर गुरू मानल जाइत अछि।
४. कोनो अक्षरक बाद संयुक्ताक्षर किंवा व्यंजन मात्र रहलासँ ओहि अक्षरकेँ गुरु मानल जाइत अछि। जेना- अच्, सत्य। एहिमे अ आ स दुनू गुरु अछि।


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों