Monday, 27 June 2011

रुबाइ




की कहू ओ बाट तँ हम बिसरि गेलहुँ
जाहि पर साइत अहाँ अबै-जाइ छलहुँ
की हेतै जँ छोड़िए देब हमरा
हम तँ मिलन विरह सँ उपर गेलहुँ





Sunday, 26 June 2011

गजल

क्लस्टर बम,प्रक्षेपास्त्र टामहाक हमरे छल
जीवित लहास बनल जे इराक हमरे छल


भारत,सोनार बंग आकि पाक हमरे छल
“एकोहंबहुस्याम”-ई मजाक हमरे छल


एखन भने परमाणु कचरा केर याचक छी
‘विश्वगुरु हम छी’-से वेदवाक् हमरे छल


गांधी छलहुँ जखन हमरे सुराज छल
दागी पर खादी केर झक पोशाक हमरे छल


हमरे ओ मुण्ड छल कटि गेल जे रैजकी सँ
बाजारक बीच पड़ल कान-नाक हमरे छल


हमरे छल डिडिर जे बाँटलक सहोदर केँ
अधरतिया आजादीक ढोल-ढाक हमरे छल


‘अबिरन’रहबैया छी रोगहा समाजक हम
लसनि जेकर लागल अछि से सुजाक हमरे छल

Friday, 24 June 2011

गजल


मिरदङियाक तरंग भँसियाइए अङेजब कोना  
सुनि मोन घुरमाइए अकुलाइए अङेजब कोना 

आँखिक नोर झरलै बनलै अजस्र धार झझाइए
पियासल छी ठाढ़, जी हदबदाइए अङेजब कोना 

सगुन बान्हसँ बान्हल मोनक उछाही बिच
ठाढ़ सगुनियाँ बनल उसरगाइए अङेजब कोना 

हरसट्ठे अपने अपन चेन्हासी मेटा लेलक आइ
मुरुत हरपटाहि बनेने जाइए अङेजब कोना 

छरछर बहल छै धार मोनक, देखू चल अछि
धेने बनल बाट उधोरनि बनैए अङेजब कोना 

उड़ैचिड़ै आ बहैए अनेरे नील अकाश बिच
ऐरावत-मन जखन धियाइए अङेजब कोना 

गजल


ओङठल आँखि ताकैए कहू की करी
नै बुझलौं तमसाइए कहू की करी


ज्ञानी बनै लेल जाइदेश छोड़ने
ई मोन जे पथराइए कहू की करी


धानी रंगक आगि पियासल किए छै
धाना निश्छल हिलोरैए कहू की करी


धान छै खखरी बनल अहिठाम आ
धानी आगि जे लहकैए कहू की करी


आगिसंगी पानि अजगुत देखल
धौरबी बनल सोचैए कहू की करी


ऐरावत धोधराह धुधुनमुहाँ नै
रि फाहा बनि जैए कहू की करी

गजल


की कहबै, कोना कहबै, जे बुझतै ओ लुझतै
आँखिक नोर खसतै,    खन रूसतै-बिहुसतै

दाबी देखेतै आ हम देखबै नुका कऽ अँचरासँ
बहरा जाइ छी घबरा कऽ, नै ताकै ओ ने बाजै ओ

देखितिऐ अँचरासँ, आ बहरा जैतौं दुअरासँ
मोनसँ बेसी उड़ै चिड़ै, चिड़ैक मोन बनतै

बनि माँछ अकुलाइ छी बाझब जालमे कक्ख
जँ फँसि त्राण पाएब आँखि बओने से देखतै

चम्मन फूल भमरा, गुम्म, जब्बर, छै सोझाँ ठाढ़
जलबाह सोझाँ  माँछ, ऐरावत बनल, देखै ओ

Thursday, 23 June 2011

कता



अँहाक कुशल तँ अपने कुशल बुझाइए

तँए एक दोसराक कुशल मनाबी

अँहाक कष्ट तँ हमरो अपने बुझाइए

तँए एक दोसराक भार उठाबी

Wednesday, 22 June 2011

रुबाइ



रुसल आइ जान हमर देखू अजगुत

छूटल आइ जान हमर देखू अजगुत

जी ने सकी हम हुनका बिनु केखनो

बूझल आइ जान हमर देखू अजगुत




Tuesday, 21 June 2011

कता



जहरक मारल जी जाएत आँखिक नहि

इ बड़का अजगुत प्रेमक संसार मे

अनकासँ जीतब मुदा अपना सँ नहि

इ बड़का अजगुत प्रेमक संसार मे

कता



मोन करैए अँहाक कोरा मे सूती

निशा भरल आँखि मे बेर-बेर डूबी

जहिआ सँ देखलहुँ अँहाक सुन्नरि रुप

की कहू सजनी सुतली राति मे उठी

रुबाइ

ओ जखन देखैए हमरा बेर-बेर

हिलकोर उठैए बूझू बेर-बेर

अँहा हमरे छी आ हमरे टा छी

इ बात करेज कहैए हमरा बेर-बेर


Saturday, 18 June 2011

गजल

जे काल्हि तक हमर नसीब छल।
ओ आब नाञ हमर करीब छल॥

ई दुनिया के रीत के लग से देखू।

रूप हिनकर बड़ा अजीब छल॥

ओ छल से आय धनिक बनि गेल।

जे काल्हि तक बड़का गरीब छल॥

बेटा के लेल करलों कोबला-पाती।
बेटी भेला पर बदनसीब छल॥


विधना के रीत की हम फरछाबी।

ई शुरूए से हमर नसीब छल॥



गजल

जों सभगोटे माटिक सपत्थ खाs लेब।
मनुखक बीचक देबार खसाs देब ॥

तब बनत अपन मिथिला महान

जों क्रान्तीक एकटा मशाल जलाs लेब॥

करेजाक आ
ँगि जों पानि से नै मिझत।
सपत्थ, जे लहू से एकरा मिझाs देब॥

जों मिथिला माँगत ई प्राणक आहुती

हम हँसि के अपन मुंडी चढ़ाs देब॥

हमरो ई ग़ज़ल अमर भs जाएत

जों सभ गोटे सुर से सुर मिला लेब॥

Friday, 17 June 2011

रुबाइ

एहने किछु हल्ला ये देश अs विदेश में
भेड़िया सब घुमि रहल नेताक वेश में
सच आ की झुठ ये, फैसला करू अहें
केहन नौटंकी ई भए रहल देश में

Thursday, 16 June 2011

रुबाइ




आइ तँ बात अँहाक नहि मानब हम
बस खाली अँही टा के जानब हम
अँहा बरु आ लिअ सप्पत नहि अएबाक
जिनगी भरि तँ अँहिक बाट जोहब हम





Wednesday, 15 June 2011

कता




नेता के गरा मे बान्हल घैल बूझू
डूबल देशक नाम कहबै तँ भारत हएत
दलाल आ गुंडाक हाथ फैल बूझू
लूटल देशक नाम कहबै तँ भारत हएत

Tuesday, 14 June 2011

रुबाइ

नेता आ चोर के की करी समीक्षा
चुप्पो रहय के नै करय ये
ईक्षा
नेता से कहियो अखनो सुधैर जाऊ
जनता के आब ते नै लिया परीक्षा


कता

दूनू मे कोनो फर्क नहि हमरा बुझने
उड़ीस आ दलाल के एकै बूझू
दूनू मे कोनो फर्क नहि हमरा बुझने
नेता आ मच्छर के एकै बूझू

Monday, 13 June 2011

गजल

घुस जाल-फरेब तिलक-दहेज़ उत्पिरण अत्याचार नहि बदलल
समूचा संसार बद्लिगेल आखिन धरि बिहार नहि बदलल



जाती-पांतिक भेद नहि बदलल समाजक आधार नहि बदलल
कोषिक धार बदलिगेल मित! जिवन धार नहि बदलल


महाभारत भेल"यातोधर्मस्तातो जय:"कहल जैत छै मुदा
छल-प्रपंच आ भाई-भाई मे वैमनास्यक बिचार नहि बदलल


हजारो द्रोपदी"दुःख हरहूँ द्वारिकानाथ"के रट लगौने छथि
आखी फारीक'देखियौंन करोड़ो पांडवक सुख-संसार नहि बदलल


सूरज नहि हम अन्हारक बिरोधी छी तें मन मे कचोट शेष अछि
पुर्निमाक रति पर"दीपक"आमावासयाक अन्हार नहि बदलल

रुबाइ

ई देशक नेता बेकार भए गेल
जनताक लुटय ले तैयार भए गेल
देशक नोट, विदेश में ये राखैत
एहने ई देशक सरकार भए गेल

रुबाइ





नेता आ बाबा सँ देश परेशान अछि
मुदा एहने धंधा मे तँ उठान अछि
लोक तँ समीकरणे ने तेना बनबै छै
खून चुसनाहर बड़का लोक महान अछि





Sunday, 12 June 2011

गजल

घरक' मोह ममता छोरिक' बिहान चलि गेल
गरीबी सं तंग आबिक' आसाम चलि गेल

हथियाक ' हाल बत्तर चित्राक' सेहो नहि बरसल,
एहि रौदिक मुह मे कित्तक'-कित्तक'धान चलि गेल

Saturday, 11 June 2011

रुबाइ

इतिहास बदलि जेतै जँ उठतै आँखि
बिसबास बदलि जेतै जँ उठतै आँखि
केकर हिम्मत जे देखत अहाँ दिस
बदमास बदलि जेतै जँ उठतै आँखि

Friday, 10 June 2011

मास मइ 2011क लेल गजल पुरस्कार योजनाक पहिल चरण

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित पुरस्कार " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" पुरस्कारक पहिल चरण ( मास मइक लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास मइक लेल सुनील कुमार झाक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बाधाइ।

दू टा ग़ज़ल


(१)
हुनका सों हँसि के बाजलों ते हल्ला मचि गेल
हुनक मुँह दिस ताकलों तs हल्ला मचि गेल

रूपक चन्द्रमा के कारी अमावस केने रही
चमकैत पूर्णिमा के देलों तs हल्ला मचि गेल

ओ नैनक कटार से सबके ये घायल केने
हम नजैर से जे ताकलों तs हल्ला मचि गेल

हुनक रूपक लाइट भक्क-भक्क जरैत ये
सबहक डिबिया मिझेलों तs हल्ला मचि गेल

ओ आँखिक इशारा जे मारलक मुंडेर पर
हम फाँदि गेलों जे देबार तs हल्ला मचि गेल

अहों लिखूं ग़ज़ल ओ कहैत रहे सदिखन
करिया कलम जेs उठेलों तs हल्ला मचि गेल

(२)

चमरपट्टी में गाय मरल ते कोनो बात नै
बभनपट्टी में बेंग मरल हल्ला मचि गेल

हमर झोपड़ी खसाs के ओ महल बना लेलाs
फेर से दुछत्ती जे बनेलों ते हल्ला मचि गेल

ओ नोटक जोड़ पर बड़का नेता बनि गेल
हमर ईमान नै बिकल ते हल्ला मचि गेल

विदेशो में रहि, नै बिसरल अपन माँटि के
एता गामों में बाजलों मैथिली हल्ला मचि गेल

नै बिसरब अपन माँटि के करियों ई प्रण
जे सुनलक हमर ई गोप हल्ला मचि गेल






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कता

जँ आँखि हमर नहि थकैए देखबा सँ
तँ अँही कहू सजनी हम की करू
जँ मोन नहि भरैए संग रहबा सँ
तँ अँही कहू सजनी हम की करू

Thursday, 9 June 2011

रुबाइ

सोना बनब तँ अहाँ के जरहे पड़त
सदिखन नीक काज अहाँ के करहे पड़त
काज केनिहारक कमी नहि संसार मे
ओ जखन एतै तँ अहाँ के हटहे पड़त

Tuesday, 7 June 2011

रुबाइ




जँ आखर के हुनक ठोर भेटतै
बौआएल बटोही के बाट भेटतै
कोनो कारण सँ जँ केओ खसि पड़त
ओकरा लेल हजारो हाथ भेटतै

Monday, 6 June 2011

 गजल

होइत छैक बरखा आ रे बौआ
कागतक नाह बना रे बौआ

देखिहें घुसौ ने चोरबा घर मे
हाथ मे ठेंगा उठा रे बौआ

तोरे पर सभटा मान-गुमान
माएक मान बढ़ा रे बौआ

छैक गड़ल काँट घृणाक करेज मे
प्रेम सँ ओकरा हटा रे बौआ

नहि झुकौ माथ तोहर दुशमन लग
देशक लेल माथ कटा रे बौआ

Sunday, 5 June 2011

 गजल

कानए लागल पात नुका कए राति मे
खीजए लागल पात नुका कए राति मे

बेशर्मीक हद टपि गेल केओ ने कहलक
हूथए लागल पात नुका कए राति मे

नहि छैक पाइ जे कराओत इलाज दर्दक
कूथए लागल पात नुका कए राति मे

अपने सँ नजरिबंद हम रंग-महल मे
देखए लागल पात नुका कए राति मे

सुआद लगलैक खाली शोणित केर
चुसए लागल पात नुका कए राति मे

अनचिन्हार देह-दरसक रहस्य बूझल
छूबए लागल पात नुका कए राति मे

Saturday, 4 June 2011

कता

रामे जानथि आब करेज के की हएत
अहाँक नजरि सँ ओ तबाह भए गेल
रामे जानथि आब मोन के की हएत
अहाँक नजरि सँ ओ घबाह भए गेल

Friday, 3 June 2011

रुबाइ

ओ नजरि मे उतरि गेलथि बाते-बात मे
कारेज धरि गुजरि गेलथि बाते-बात मे
पहिल नजरि के पिआर एहने होइत छैक
ओ हमरा बिसरि गेल बाते-बात मे

गजल

हमर अरमान जरि गेल आय कोहबर घर में
हमर मुसकान मरि गेल आय कोहबर घर में

जे फुलवारी हम सजेने रही आय बीस बरख सों

तकर सब फुल झरि गेल आय कोहबर घर में

कहलक रहे बरसाइतक भार हमहीं आनब

बाटे तकैत थकि गेल आँखि आय कोहबर घर में

मधुश्रावणीक सब अरहुल निरमाल ये बनल
टेमी के सब फोंका सुखि गेल आय कोहबर घर में

समदिया के आनल पढ्लों जे विदागरी के समाद
बहुत दिनक बाद कानलों आय कोहबर घर में

Wednesday, 1 June 2011

 गजल

इजोत लेल अन्हेर नगरी जाइत लोक
सपना मे सपनाक भात खाइत लोक

खेत आब पटाओल जाइछ शोणित सँ
पानि महँक तेल जकाँ छताइत लोक

जकरा जतेक भेटैक सएह बड़ अगत्ती
खएलाक पछातिओ गुंगुआइत लोक

छोड़लकै डनियाँ तेहन ने अगिनबान
मोने मे पजरि मोने मे पझाइत लोक

बसातक कमी भए गेलैक गामो मे
आँक्सीजनक बोतल मे औनाइत लोक
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों