Thursday, 31 May 2012

गजल


दिल में घाऊ भरल मुदा महफ़िल अछि सजल !!
दगावाज प्रीतम के राज खुजल हम गाएब गजल !! -शेर

एकटा राज के भेद आई खुईल जेतए
जीते जी जिनगी सं ओ आई मुईल जेतए

मानैत छलहूँ जेकरा प्राण ओ छल आन
पर्दा उठैत नून जिका ओ घुईल जेतए

फरेबक जाल बुनैय में ओ छै होसियार
कवछ जोगार में ओ आई तुईल जेतए

बैच नै सकैय ओ आई हमरा नजैर सं
सभटा होसियारी ओ आई भुईल जेतए

पतिवर्ता नारी कोना कैएलक मुह कारी
भेद राज खुलैत ओ आई झुईल जेतए
..........वर्ण-१६..............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

गजल


बूझलक नेता ई जनता पाकल अछि
आम जनता त ' सदिखन भागल अछि

बचल छै गाम में बूढ़ पुरान आ बच्चा
कबिलाहा सभ प्रदेश में पागल अछि

खेत बनल छै परती घर सुनसान
सूतैत पिच पर सभ अभागल अछि

पिया विरह में वौराएल नब कनियाँ
कनि कनि सगरो देह सुखायल अछि

जागू जनता जनार्दन आबो हक जानू
भगाबू ओकरा जे नेता बिकायल अछि

(वर्ण-१५ )
जगदानन्द झा 'मनु'

गजल

सुनैए छी यौ भाइ शराब आहाँ छी महान
किया अहाँ के पिला बाद भ जाय छी शैतान


मिला के पाइन अहाँके लोक पीबैत अछि
बिना पानिक पीला सँ भ जाइ छै परेशान


अहाँके पीबै वला बिसरि जाइ छोट पैघ
यौ करै यै इ बात हमरा बहुत हरान


अंग्रेजी मे अहाँ के आदमी कहै यै वाइन
पीले के बाद अहाँ बनबै छी लोक के हैवान


केहन अछि अहाँ मे स्वाद "मुकुंद" जानि नै
मुदा जग मे केउ नै अछि अहाँ समान
mukund ''mayank''

गजल


नै जीयत शराबक नशा लागल लोक
कोना हँसत कोनो दुखक खेहारल लोक

काठी फेकबै आगि उठतै बोतल सँ
नै रहतै जवानी अपन जाड़ल लोक

के कानक कतौ आन लेए क'ह एत'
नै छै समय ककरो अपन भागल लोक

दै छै साँस कखनो अपन धोखा आब
एहन नेह मे छै किए पागल लोक

जड़तै एक दोसर सँ जिनगी मे जखन
कटतै घेँट अपने सबर हारल लोक

क्षण भरि के नवल दोस्त नै चाही आब
हमरा "अमित" चाही अपन झाड़ल लोक

मफऊलातु-मुस्तफइलुन-मफऊलातु
2221-2212-2221
बहरे-हमीद

अमित मिश्र

गजल



शहर के सब शराबी चलू घ'र हमर
ओतै नशा के बसेबै नया शह'र हमर

भ' क' दुनियाँ सँ अलग कने काल झूमब
क्षणे मे हरिया जेतै सुखल च'र हमर

नदी नोर मे घोरब रंग बिरंगक पानि
कोनो इयादक चखना हेतै क'र हमर

पिबै सँ पहिले मीता मुनि ले आँखि अपन
कहै नै इयाद नै केलौँ दिलब'र हमर

खसै छी बीच्चे सड़क त' कहै शराबी सब
ओकरा हँसबै लेए खसै छै ध'र हमर

भ' क' बदनाम "अमित " जी सकै छी हम त'
कहत जँ वेवफा त' जड़त घ'र हमर

वर्ण--16

अमित मिश्र

गजल

जिनगीक नशा घटबै छी पी क' शराब
क्षणिक तड़प के भगबै छी पी क' शराब
बूझै छी छै अमृतक बोतल भरल इ
विरहक रचना बनबै छी पी क' शराब

गजल

चल लिखल जेए कोनो शराबी गजल
नब रचल जेए दर्दक कटारी गजल

भरि ले कलम मे स्याही शराबक आइ
अंगुरक ज'ल मे घोरब गुलाबी गजल

बहुते चलै छै ओकर सबालक नजर
चल आइ भेजब पहिलुक जबाबी गजल

दारू सँ जड़बै छी हम जुआनी अपन
सब के पिया दी एखन हजारी गजल

छै नाम ओकर दोसर नशा के नगर
तेँ जाइ छी मैखाना सलामी गजल

लागै गिलासो एखन नशा मे ग'जब
छै "अमित" कोनो प्रेमक कहानी गजल

मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
2212-2221-2221
बहरे-सलीम

अमित मिश्र

गजल


बिसरलौँ जग पिबै छी बोतल शराबक
मनक मारल चुमै छी बोतल शराबक

हमर छै जीत मैखाना मे पियाबू
अपन नामे लिखै छी बोतल शराबक

हमर छै जान ई अंगुरक पानि नै छै
बनै शोणित किनै छी बोतल शराबक

शहर के कोन मैखान जत' पिलौँ नै
जहर दर्दक कहै छी बोतल शराबक

गिलाससँ आब पल भरि दोस्ती क' देखू
घर स्वर्गक रहै छी बोतल शराबक

जनम भेलै इयादक तहिये सँ झूमैँ
"अमित" संगे रखै छी बोतल शराबक

मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन
1222-1222-2122
बहरे-करीब

अमित मिश्र

गजल



अहाँक यादि मे नै पिबै छी शराब
अहाँक यादि लेए किनै छी शराब

पड़ै जँ मोन मुस्की भरै छी गिलास
हजार बूँद मे फेनबै छी शराब

जा धरि छै बोतल मे अहाँक फोटो
पैग पर पैग चढ़बै छी शराब

आइ लिखब शराबक एगो ग्रंथ
प्रेम पत्र घोरि बनबै छी शराब

छी शराबी हम , कहू सब शराबी
प्रेमी छी तेँए त' उठबै छी शराब

घुरि क' आबू पियाबू हाथ सँ साकी
"अमित"क ठोर सटबै छी शराब

वर्ण-13
अमित मिश्र

गजल


ताड़ी के कने छानि क' दिअ
दारू कतौ सँ आनि क' दिअ

मर्दक छै पहचान दारू
आइ त' छाती तानि क' दिअ

डूबल छी जे मदहोशी मे
रम मे गम सानि क' दिअ

बंधन इ दुनियाँ के तोड़ू
सबटा बान्ह फानि क' दिअ

नैनक निशा बड चढ़ल
ठोर सटा क' जानि क' दिअ

गिलास छोरू बोतल लाबू
"अमित" आइ हानि क' दिअ

वर्ण-10

अमित मिश्र

गजल


बेटा अपन मुर्ख के सोटा सँ हम अकछ छी
बाबाक फूटलहबा लोटा सँ हम अकछ छी

पेट्रोल कखनो त' कखनो गैस सब्जी महग
काला बजारी करै कोटा सँ हम अकछ छी

बेटी कपारपर छै चिन्ता इ सदिखन बनल
कनियाक नेहक भरल मोटा सँ हम अकछ छी

छै आगि धरती बनल नै पानि आकाश मे
पीबैत कारी धुआँ मोटा सँ हम अकछ छी

दै यै भगा काज छोड़ा जीब कोना बचब
छै खसल टाकाक लंगोटा सँ हम अकछ छी

रचना करै छी त' खर्चा होइ यै नै मुदा
अतिथी "अमित" एत' दस गोटा सँ हम अकछ छी

मुस्तफइलुन-फाइलुन दू बेर
2212-212-2212-212
बहरे-बसीत

अमित मिश्र

रूबाइ

21

नव उमर मे भसिया जाइ छै भावना
ककरो बात पतिया जाइ छै भावना
नीक अधलाह सब त' इएह करबै छै
कनिको चोट सँ उधिया जाइ छै भावना

रूबाइ

20

माटि मे सब लोटाइत नेना देखू
रौद मे मुस्कीयाइत नेना देखू
छै गामक माटि सँ कते प्रेम एकरा
माटि सँ खेल खेलाइत नेना देखू

रूबाइ

19

कोनो चौराहा पर जा हँसि क' देखू
पागल कहत लोक कने रहसि क' देखू
समाजक मोकदमा अहाँक नाम हएत
कने चलि झूठ-मूठ के बहसि क' देखू

रूबाइ

18

समाजक खोखला रीत मे धसि क' देखू
दुख लेल अनकर खुशी मे हँसि क' देखू
सब डाह सँ कानै छथि एहि दुनियाँ मे
अपन धाव पर मे मलहम घसि क' देखू

रूबाइ

17

जड़ैत धरा पर जड़ि रहल छै लोक सब
जल बिनु प्यासल मरि रहल छै लोक सब
उमस देखि नोर बहबैए सब तैयो
गाछ काटै लेल लड़ि रहल लोक सब

रूबाइ


16
शपथ खेलौँ भ्रष्टाचार हटा क' रहब
ईमानदारी के टका कमा क' रहब
जे देखलौँ अन्हार मे नोटक इजोर
आइ नै त' काल्हि सँ वचन अपना क' रहब

रुबाइ

15

लाख टकाक अछि सजनी अहाँक मुस्की
सगर बाट मे रोपै छी अपन मस्ती
सब दिन त' सजै रूपक जनता दरबार
कोन फाँर्म भरि लेब संग चाहक चुस्की

रूबाइ



किछु गीत कहू जे समाज मे गाबि सकी
एगो मीत कहू जकरा ल'ग आबि सकी
एहन दर्द जे दुनियाँ के हँसा देत
किछु कुरीत कहू जे काँख मे दाबि सकी

रूबाइ

14

गरीब करत की अमीरो भेल नाङट
फैसनक नाम पर रेलमरेल नाङट
कलयुग मे बदलल इज्जतक परिभाषा
तेँए बीच बजार बनल गेल नाङट

रूबाइ

13
फैसनक आगि सँ जड़ै छै कोनो गीत
तड़पि तड़पि आब मरै छै कोनो गीत
समाजक ऐना छै साहित्यक सृजन
समाज के गंदा करै छै कोनो गीत

रूबाइ

12

प्रेम कोना करब केऊ अपन नै छै
दोस्त दुश्मन बनि सदिखन धोखा दै छै
नोरक मोल के जानै छै जग भरि मे
करेजक खून मोनक मीत पी लै छै

अमित मिश्र

रुबाइ

11
जिनगीक नशा घटबै छी पी क' शराब
क्षणिक तड़प के भगबै छी पी क' शराब
बूझै छी छै अमृतक बोतल भरल इ
विरहक रचना बनबै छी पी क' शराब

रूबाइ

10

जीवनक महफिल के जान छै शराब
प्रेमक जख्मके राम वाण छै शराब
हर्ष शोक दुनू मे एक छै शराब
मानू त' पानि नै त' प्राण छै शराब

गजल



अपन लोक मरखाह बनल छै यौ भैया
नाता रिश्ता आब चोटाह बनल छै यौ भैया

जहर पिब तेजै छै अपन प्राण अपने
जिनगी भवर अथाह बनल छै यौ भैया

नोर पोछत नै आब केऊ ककरो कहियो
दोसरक हँसी कटाह बनल छै यौ भैया

प्रेम बनल आब एत' इतिहासक शब्द
करेजक छंद घबाह बनल छै यौ भैया

लूट मचल अछि चारू दिश इजोरिये मे
जन जनक डलबाह बनल छै यौ भैया

उबडूब करै छी संसारक बैतरणी मे
जिनगी त' फूटल नाह बनल छै यौ भैया

अपन शप्पत द' बनबै अपन दुश्मन
"अमित " शोणित सियाह बनल छै यौ भैया

वर्ण-16

अमित मिश्र

रूबाइ

9

जखन धरि श्वास अछि अहाँ सँ नेह करब
बात बहुत रास अछि अहाँ सँ नेह करब
एक दिन एबै अहाँ घुरि हमर दिल मे
जखन धरि इ आश अछि अहाँ सँ नेह करब

गजल

दूर अकास मे तारा चमकल
कनिया हाथक चूडी खनकल

मधुरात्रि छै आब बीत रहल
फुलबाड़ी मे सिंघार गमकल

दीपक जोत सेहो भेल मलिन
चार पर चुनमुन चहकल

नंगरु भाइ चलला पसिखाना
चालि मुदा छै एखनो बहकल

गजलकार परिचय शृखंला भाग-21




धीरेन्द्र प्रेमर्षि

ई मैथिली गजलक पहिल वीर छथि जे अपन पत्रिकाक माध्यमे पहिल गजल विषेशांक निकालथि।

व्यक्तिगत विवरण

पूर्ण नामः धीरेन्द्र झा

प्रचलित नामः धीरेन्द्र प्रेमर्षि

जन्मस्थानः गोविन्दपुर, गा‌.वि.स. वार्ड नं.-१, बस्तीपुर, जिला- सिरहा, नेपाल

जन्मथितिः वि.सं. २०२४, भादब १८ गते (३ सितम्बर १९६७)

शिक्षाः स्नातक

पिताक नामः पं. कृष्णलाल झा

माताक नामः आनन्दीदेवी झा

मूल वृत्तिः नेपाल सरकारक नोकरिहारा (कृषि विभागअन्तर्गत Plant Protection Officer)

प्रकाशित साहित्यिक कृतिः

समयलाई सलाम (नेपाली गजल-सङ्ग्रह)
प्रकाशकः खेमलाल-हरिकला स्मृति समाज कल्याण प्रतिष्ठान, चितवनः २०६५
मलङ्गियाका मैथिली एकाङ्की (नेपालीमे अनूदित एकाङ्की-सङ्ग्रह), प्रकाशकः खेमलाल-हरिकला स्मृति समाज कल्याण प्रतिष्ठान, चितवनः २०६५
कर्मयोद्धा योगेन्द्र साह नेपाली (सम्पादन),प्रकाशकः मिथिला नाट्यकला परिषद, जनकपुरधामः २०६५
कोन सुर सजाबी ? (मैथिली गीत-सङ्ग्रह),प्रकाशकः नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानः २०६१ अगहन
भगता बेङक देश-भ्रमण (कनक दीक्षितक चर्चित पोथीक मैथिली रूपा झाक सङ्ग सहअनुवाद), प्रकाशकः रातो बङ्गला किताब, पाटनढोका, ललितपुरः २०५९ आसिन
मैथिली कविता-सङ्ग्रह, सं. (आठम शताब्दीसँ बीसम शताब्दीधरिक प्रतिनिधि मैथिली कविसभक कविताक सङ्कलन)
प्रकाशकः नेपाल राजकीय प्रज्ञा-प्रतिष्ठानः २०५१
स्वप्नकथा चलिरहल अछि (नेपालीसँ मैथिलीमे अनूदित गोविन्द गिरी प्रेरणाक कविता-सङ्ग्रह), प्रकाशकः मैथिली विकास मञ्च, काठमाण्डूः २०५०
फुच्चे सिस्नुपानी धीरेन्द्र प्रेमर्षि विशेष (नेपाली हास्यव्यङ्ग्य रचनासभक सङ्ग्रह),प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल, सम्पादकः माणिकरत्न शाक्यः २०६२
शैक्षिक कृतिःखिस्सा-पिहानी (मैथिली लोककथासभ सङ्गृहीत बालसन्दर्भ पुस्तक), प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०६३
हमर मिथिला (मैथिली संस्कृतिसम्बन्धी लेखसभ सङ्गृहीत बालसन्दर्भ पुस्तक),प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०६३
मैथिल विभूतिसभ (मैथिल विभूतिसभक जीवनी सङ्गृहीत बालसन्दर्भ पुस्तक),प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०६३
हमर मैथिली पोथी (कक्षा १, २, ३, ४ आ ५ क ऐच्छिक मैथिली विषयक पाठ्यपुस्तक),प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०५४ सँ २०५८ धरि
मैथिली (कक्षा ९ आ १० क ऐच्छिक मैथिली विषयक पाठ्यपुस्तक)
प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०५७ आ २०५८
हिन्दी (कक्षा १० क ऐच्छिक हिन्दी विषयक पाठ्यपुस्तक)
प्रकाशकः पाठ्यक्रम विकास केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुरः २०५८
साङ्गीतिक कृतिः
डेग (शान्तिक लेल युवा जागरण तथा सशक्तिकरणसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः संस्कार मिथिला, गोविन्दपुर, सिरहाः २०६६ बैशाख
भोर (सकारात्मक सोच तथा शान्ति–सद्भाव सम्बर्द्धनसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः सम्झौता नेपाल, काठमाण्डू, २०६५ जेठ
नेहक बएन (शान्ति तथा सद्भाव सम्बर्द्धनसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः सम्झौता नेपाल, काठमाण्डू, २०६४ कार्तिक
गाना-बजाना (विविध मनोरञ्जनात्मक मैथिली गीतक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः गंगा कैसेट, नयादिल्लीः २०६३ बैशाख
भजन दिव्यानन्द (चट्याङ मास्टर रचित नेपाली भजनसभक सङ्गीत-निर्देशन एवं गायन)
प्रकाशकः श्रीमती कान्ता गौतमः २०६१ आसिन
वन-गीत (संरक्षणसम्बन्धी चेतनामूलक मैथिली आ भोजपुरी गीतसभक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः बाइसेप एसटी, काठमाण्डू, नेपालः २०६१
चेतना (सामाजिक परिवर्तनक दिस उन्मुख मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः एक्सनएड नेपालक सहयोगमे संस्कार मिथिलाः २०६० अगहन
Song of Light : प्रियतम हमर कमौआ (सार्थक गीति क्यासेट तथा पहिल मैथिली सीडी)
प्रकाशकः म्यूजिक नेपालः २०५८, सीडीक प्रकाशकः म्यूजिक मिथिला
प्रेम भेल तरघुस्कीमे (विविध मनोरञ्जक मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह, क्यासेट तथा सीडी)
प्रकाशकः मास्टर क्यासेटः २०५८
सिस्नु 2000.COM (हास्यव्ङग्यात्मक क्यासेट)
प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल आ रीमा क्यासेटः २०५७
सिस्नुपानी (हास्यव्ङग्यात्मक क्यासेट)
प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल आ रीमा क्यासेटः २०५६
सिस्नुपानीले (उद्देश्यमूलक हास्यव्यङ्ग्यात्मक गीतसभक सङग्रह)
प्रकाशकः सिस्नुपानी नेपाल, हास्यव्यङ्ग्य सदनः २०५५
सुरक्षित मातृत्व गीतमाला (सन्देशमूलक नेपाली, मैथिली, भोजपुरी गीतसभक सङग्रह)
प्रकाशकः सुरक्षित मातृत्व नेटवर्क, नेपालः २०५५
सुखक सनेस (बालस्वास्थ्य तथा परिवार कल्याणसम्बन्धी मैथिली गीतसभक सङ्ग्रह)
प्रकाशकः सेभ द चिल्ड्रेन, यूएसएः २०५४
कलियुगी दुनिया (नेपालसँ बहराएल मैथिलीक पहिल गीति क्यासेट)
प्रकाशकः सिम्फनिक रेकर्डिङ प्रा.लि.: २०४७
प्रकाशोन्मुख कृतिः
सूत्रधार (मैथिली हाइकू-सङ्ग्रह)
शब्द-सारथी (मैथिली गजलसङ्ग्रह)
एमकीक जतरा (मैथिली गीत-सङ्ग्रह)
साँपक पएर (मैथिली निबन्ध-सङ्कलन)
ओ गीत कोन गाबए? (मैथिली कथा-सङ्ग्रह)
सिनुराएल सुरूजदिस (मैथिली कवितासङ्ग्रह)
नेताको मुसावतार (नेपाली हास्यव्यङ्ग्य-सङ्ग्रह)
The मुड्की (संयुक्त नेपाली हास्यव्यङ्ग्यक सङ्ग्रह)
श्यामप्रसादक निबन्ध (मैथिलीमे अनुवाद कएल गेल)
मैथिली कथा-संसार (प्रतिनिधिमूलक कथासभक सङ्ग्रह)
रचनात्मक कार्यानुभव तथा संलग्नताः
रेडियो नेपाल, समाचार-वाचक तथा सम्पादक (मैथिली, नेपाली आ हिन्दी समाचार)
अवधिः वि.सं. २०४९ पुससँ वि.सं. २०६१ चैत्र मसान्तधरि
कान्तिपुर एफ.एम., मैथिली कार्यक्रम ‘हेल्लो मिथिला’ आ ३ अन्य, परिकल्पना तथा प्रस्तुति
अवधिः वि.सं. २०५८ फागुनसँ वर्तमानधरि
नेपाल एफ.एम., समावेशी लोकतन्त्रसम्बन्धी कार्यक्रम ‘आवाज’, संयोजन आ निर्देशन
अवधिः वि.सं. २०६३ अखाढ़सँ वर्तमानधरि
नेपाल 1 टेलिभिजन, नेपाली साहित्यिक कार्यक्रम ‘राम्रो कस्तो राम्रो’क प्रस्तुति
अवधिः वि.सं. २०६४ साओनसँ एक सालधरि
गोरखापत्र दैनिक, ‘नयाँ नेपाल’ परिशिष्टअन्तर्गत मैथिली खण्डक संस्थापक संयोजक
अवधिः वि.सं. २०६४ आसिनसँ छओ मासधरि
पल्लव, मैथिली साहित्यिक मासिक पत्रिका, सम्पादक तथा प्रकाशक
अवधिः वि.सं. २०५० अखाढ़सँ वर्तमानधरि
पल्लवमिथिला, दोसर मैथिली इन्टरनेट पत्रिका (साहित्यिक), सम्पादक तथा प्रकाशक
अवधिः वि.सं. २०५९ माघ
मैथिल समाज, सामाजिक तथा सांस्कृतिक त्रैमासिक, सम्पादक
अवधिः वि.सं. २०५८ असोजदेखि वर्तमानधरि
फित्कौली, नेपाली हास्यव्यङ्ग्यसम्बन्धी मासिक पत्रिका, संयुक्त सम्पादक
अवधिः वि.सं. २०६२ अखाढ़सँ वर्तमानधरि
कामना, नेपाली सिनेमासिक पत्रिका, सम्पादक
अवधिः वि.सं. २०५३ चैत्रसँ २०५५ माघधरि
ज्ञान-गङ्गा, साहित्य तथा विविध समसामयिक विषयसभक पत्रिका, संयुक्त सम्पादक
अवधिः वि.सं. २०५९ बैशाखसँ वर्तमानधरि
यती, स्वास्थ्य, यौन तथा परिवार कल्याणसम्बन्धी त्रैमासिक पत्रिका, कार्यकारी सम्पादक
अवधिः वि.सं. २०५४ अगहनसँ २०५५ पुसधरि
अन्य उल्लेख्य गतिविधिः
नेपालक अधिकांश राष्ट्रीय अखबार तथा साहित्यिक पत्रपत्रिकामे नियमित रूपेँ कथा, कविता, गीत-गजल, हास्यव्यङ्ग्यसन साहित्यिक तथा अन्य समसामयिक लेखन।
नेपाल, भारत, अमेरिका आ यूएइसँ प्रकाशित भेनिहार विभिन्न पत्रपत्रिका एवं नेट म्याग्जिनमे मैथिली, नेपाली आ हिन्दी भाषाक एक हजारसँ बेसी लेख-रचना प्रकाशित।
बीबीसी नेपाली सेवा आ अल इण्डिया रेडियोसहित अनेको पत्रपत्रिका, रेडियो तथा टेलिभिजन कार्यक्रममे साहित्यकार तथा भाषा अभियानी / संस्कृतिकर्मीक रूपमे अन्तर्वार्ता प्रसारित।
कामना प्रकाशनक ‘नेपाल समाचारपत्र’ मे एक वर्षधरि सम्पादकीय पृष्ठक संयोजन।
कान्तिपुर एफ.एम. मे हास्यव्यङ्ग्यसम्बन्धी नेपाली भाषाक साप्ताहिक कार्यक्रम ‘कुर्सीमाथि फर्सी’, एच.बी.सी. एफ.एम. मे साप्ताहिक मैथिली कार्यक्रम ‘चौबटिया’, मेट्रो एफ.एम. मे दैनिक विश्लेषणात्मक नेपाली कार्यक्रम ‘मन्थन’ क निर्देशन तथा सञ्चालन।
स्वतन्त्र समाचार सेवाक insonline.net मे पहिल नेपाली अनलाइन श्रव्य समाचारक शुरुआत।
‘हिमालय टाइम्स’, साप्ताहिक ‘नेपाल’ ‘दृष्टि’, ‘बुधबार’, ‘हिमाल’ आदि पत्रिकामे स्तम्भ लेखन।
‘लेकाली सङ्गीत-यात्रा’ समेत अनेको महत्त्वपूर्ण पोथीक भाषा-सम्पादन एवं भूमिका लेखन।
कथा, पटकथा, संवाद लेखन- मैथिली टेलिशृङ्खलाः ‘अन्हरजाली’, ‘आशीर्वाद’ आ ‘दूमहला’।
नेपाली कथानक चलचित्र ‘दुलही’ क लेल कथाविचार तथा गीतलेखन।
जङ्गल साहित्यिक गोष्ठीसमेत कतिपय साहित्यिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमक संयोजन।
नेपाली टेलिशृङ्खला ‘आगन्तुक’, नेपाली टेलिशृङ्खला ‘गोनू झा’ मे गीत, सङ्गीत, गायन।
नेपाल, भारत तथा कतारमे अनेको साहित्यिक / साङ्गीतिक समारोहमे सहभागी।
पहिल मैथिली टेलिफिल्म ‘मिथिलाक व्यथा’, ऐतिहासिक मैथिली टेलिशृङ्खला ‘महाकवि विद्यापति’ तथा नेपाली टेलिशृङ्खला ‘मदनबहादुर-हरिबहादुर भाग २’ मे अभिनय।
विकट हिमाली जिला हुम्लाक इतिहासमे पहिलबेर नाटक मञ्चन एवं अन्य विभिन्न स्थानपर नेपाली, मैथिली तथा हिन्दी भाषाक नाटकसभक निर्देशन, लेखन तथा मञ्चन।
प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक नृत्य-सङ्गीत समिति तथा लोकसाहित्य समितिक सदस्य रहि क्रियाशील।
जगदम्बाश्री पुरस्कार (२०५८) तथा नेपाल प्रज्ञा-प्रतिष्ठानद्वारा आयोजित प्रथम मिथिला चित्रकला प्रतियोगितासहित कतोक कविता तथा गजल प्रतियोगितामे निर्णायकक भूमिका निर्वहन।
संस्थागत आबद्धताः
संस्थापक अध्यक्ष, कला-संस्कृति-सञ्चार संस्थाः संस्कार मिथिला
संस्थापक अध्यक्ष तथा संरक्षक, मैथिली विकास मञ्च
संस्थापक तथा उपाध्यक्ष, सिस्नुपानी नेपाल, हास्यव्यङ्ग्य सदन
सदस्य-सचिव, फूलकुमारी महतो मैथिली सम्मान समिति, काठमाण्डू
सदस्य-सचिव, वैद्यनाथ-सियादेवी मैथिली पुरस्कार प्रतिष्ठान, काठमाण्डू
कार्यसमिति सदस्य, नेपाल मैथिल समाज, काठमाण्डू
केन्द्रीय सदस्य, नेपाल साहित्यिक पत्रकार सङ्घ
केन्द्रीय सदस्य, भाषिक अधिकार संयुक्त सङ्घर्ष समिति
अन्य कतोक सङ्घ-संस्थामे आजीवन तथा मानार्थ सदस्य एवं सलाहकार
पदक तथा सम्मानः
राष्ट्रिय स्रष्टा सम्मान- २०६८ (प्रगतिशील तथा देशभक्त सांस्कृतिक मञ्च )
सशक्त सञ्चारकर्मी पत्रकारिता पुरस्कार- २०६८ (प्रेस काउन्सिल नेपाल )
जन-अभिनन्दन- २०६८ (सिरहा समाज सेवा, काठमाडौँ )
मिथिला दूत सम्मान- २०६७ (मैथिली सेवा समितिसहित दर्जनभरि संघ-संस्था, काठमाण्डू)
मधुरिमा फूलकुमारी महतो सांस्कृतिक सम्मान- २०६५ (मधुरिमा कला केन्द्र, काठमाण्डू)
लोकतान्त्रिक स्रष्टा सम्मान- २०६४ (अविरल साहित्य समाज, सिन्धुपाल्चोक)
विद्या-वाचस्पति (D.Lit.)- ई. २००७ (विक्रमशिला विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार)
मैथिली सङ्घर्षशील व्यक्तित्व सम्मान- २०६३ (मैथिली साहित्य परिषद्, लहान)
साहित्य भास्कर- ई. २००६ (अखिल भारतीय भाषा-साहित्य सम्मेलन, भोपाल, म.प्र.)
उत्कृष्ट सङ्गीतकार सम्मान- ई. २००६ (संस्कृति मिथिला, सहरसा, बिहार)
जनअभिनन्दन- २०६२ (मैथिली सेवा समितिसहितक सङ्घ-संस्था, विराटनगर)
मिथिलारत्न सम्मान- ई. २००५ (अन्तर्राष्ट्रिय मैथिली सम्मेलन, नयादिल्ली)
वागेश्वरी सम्मान- २०६२ (वागेश्वरी सेवा समिति, राजविराज, सप्तरी)
सलहेस महोत्सव सम्मान- २०६१ (सलहेस संरक्षण समिति, सिरहा)
‘माटी की गंध’ कथा पुरस्कार- ई. २००३ (अभिव्यक्ति प्रकाशन, शारजाह, यूएई)
नवरङ्ग सम्मान- २०५७ (नवरङ्ग साहित्य प्रतिष्ठान, धरमपुर, झापा)
भानु पदक- २०५४ (भानु कला केन्द्र, विराटनगर)
विदेश-भ्रमणः
भारत, चीन आ कतार।
सम्पर्क पताः
पोष्टहार्भेष्ट व्यवस्थापन निर्देशनालय,
श्रीमहल, पुल्चोक, ललितपुर, नेपाल।
फोन नं.: ९७७-१-५५३६९९४ / ९८४१२८०७३३
ईमेल- dhipre@yahoo.com आ dhipre@gmail.com

नोट: पल्लवमिथिला मैथिलीक दोसर इंटरनेट पत्रिका अछि जखन की वास्तविकता ई थिक जे भालसरिक गाछ जे सन २००० सँ याहूसिटीजपर छल आ अखनो ५ जुलाइ २००४ सँhttp://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html लिंकपर अछि, मैथिलीक पहिल इंटरनेट पत्रिका थिक जकर नाम बादमे १ जनवरी २००८ सँ" विदेह " पड़लै। ई टिप्पणी मात्र इतिहास शुद्धता लेल अछि। मैथिलीक पहिलसँ लए क' एखन धरिक हरेक इंटरनेट पत्रिकाक नाम, यूआरएल, ओकर पहिल पोस्टक तारीख ऐ ठाम देखल जा सकैए---http://www.videha.co.in/feedback.htm जँ किनको लग 5/7/2004 सँ पहिनुक लिंक छन्हि तँ प्रस्तुत कएल जाए।

( ऐ फोटोमे धीरेन्द्र प्रेमर्षि, हुनक पत्नी रूपा झा आ हुनक दू गोट बालक।)


विदेहक फेसबुक भर्सन http://www.facebook.com/groups/videha/ पर भेल टिप्पणी देल जा रहल अछि। ई इतिहास शुद्धता लेल नीक अछि।


    • Jan Anand Mishra Premarshiji ekta star bain chukal chhaith
      6 hours ago via Mobile ·  ·  1

    • Ashish Anchinhar आ हमर कोशिश रहल अछि जे स्टारक स्टार सभ सेहो ऐ फोटोमे आबथि से आबि गेल छथि।.
      6 hours ago ·  ·  4

    • Dhirendra Premarshi 
      आशिषजी, धन्यवाद परिचय शृङ्खलामे हमरा रखबाक लेल। पल्लवमिथिलाक सन्दर्भमे हम पहिनहु कहने रही जे वर्ष २००३ जनवरीसँ शुरू भेल छल मुदा ओकरा हम निरन्तरता नहि दऽ सकलहुँ। तेँ ओइपर हमर कोनो दाबा नहि अछि। हँ ओहिमे वर्तमानधरि सेहो लिखाएल अछि जे सर्वथा गलत अछि। अइ बायोडाटामे कने सम्पादन जरूरी छलै से नहि भऽ पाएल अछि। ओना पल्लवमिथिलाकेँ भाषाविद डा रामावतार यादव सार्वजिनक कएने छलाह से समाचारो छपल छल। मुदा हमरा ओ कटिंग तकबामे सेहो भाङठ हएत। कारण हम व्यवस्थापनक मामलामे बड्ड कमजोर छी।
      3 hours ago ·  ·  3

    • Dhirendra Premarshi २०५९ माघे संक्रान्तिदेखि नेपालको मैथिली भाषाको पहिलो इन्टरनेट पत्रिका
      पल्लव www.pallavmithila.mainpage.net सुरु गरिएको छ। यो पत्रिका
      काठमाडौँस्थित मैथिली विकास मंचको तर्फबाट धीरेन्द्र प्रेमर्षीद्वारा सम्पादन तथा
      प्रकाशन गरिन्छ। यसमा मैथिली भाषामा विविध साहित्यिक सामग्री राखिएका
      छन्। हरेक महिना यसका सामग्रीहरू अद्यावधिक गरिन्छ।
      (सम्प्रति नेपालक सूचना आयोगक अध्यक्ष विनय कसजूद्वारा लिखित पुस्तकमे सेहो पल्लवके बात राखल गेल अछि। एकर जे लिंक छै से अस्थायी प्रकृतिक भेलाक कारणे आब नइ भेटैत अछि। डा कसजूक किताबक लिंक अइठाम दऽ रहल छी- http://www.kasajoo.com/itbook_vinaya.pdf)

      2 hours ago ·  · 

    • Ashish Anchinhar 
      हम http://www.pallavmithila.mainpage.net/ आhttp://www.pallavmithila.net/ दुनू खोलबाक प्रयास केलौं मुदा नै खुजलhttp://pallav.blogsome.com/ खुजल आ ओ १७ मइ २००६ केर अछि आhttp://hellomithila.blogspot.com/ सेहो खुजल जे ३ मइ २००६ केर अछि। भऽ सकैए ओ डोमेन नेम डिलीट भऽ गेल हुअए, मुदा जँ डिलीट भेल डेटा देखी तँ तै हिसाबे सेहो भालसरिक गाछ २००० ई.सँ yahoogeocities पर निरन्तर छल, मुदा याहू द्वारा geocities सर्विस बन्द भऽ गेलाक बाद ओहो डोमेन नेम बन्द भऽ गेल, आ http://gajendrathakur.blogspot.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html आ http://www.videha.com/2004/07/bhalsarik-gachh.html ५ जुलाइ २००४ सँ निरन्तर मैथिलीक सभसँ पुरान स्वरूपमे उपलब्ध अछि, नचिकेताक नाटक विदेहक आठम अंकसँ धारावाहिक प्रकाशित भेलै आ ओ जखन २००८ मे पोथी रूपमे एलै तखन इन्टरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ २००० ई. मे गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा कएल जेबाक चर्च ओतए छै। (लिंकhttp://sites.google.com/a/shruti-publication.com/shruti-publication/Home/NO_ENTRY_MA_PRAVISH.pdf?attredirects=0) अहाँक दुनू लिंक जे खुजि रहल अछि ओकर चर्च सेहो अंतिकाक इन्टरनेट पत्रिका विशेषांकमे गजेन्द्र ठाकुरजी केने छथि। ओना अहाँक देल सूचना महत्वपूर्ण अछि आ भालसरिक गाछक बाद दोसर इन्टरनेट पत्रिका पल्लवकेँ मानल जा सकैए। तदनुसार अहाँक बायोडाटामे सम्पादन कऽ रहल छी।
      32 minutes ago ·  · 

    • Dhirendra Premarshi अहाँ सही कहै छी आशिषजी। ई बात हम उपरका कमेंटमे सेहो लिखने छी। (एकर जे लिंक छै से अस्थायी प्रकृतिक भेलाक कारणे आब नइ भेटैत अछि।) ओना एकटा बात हम कहि दी जे हमर ई दावा नइ अछि मात्र जानकारीभरि अछि। आब जेँ कि ओकर प्रमाणो खतम भेल जा रहल छै तेँ भऽ सकैए जे हम ओ विवरणो हटा दी।
      22 minutes ago ·  ·  1

    • Ashish Anchinhar हँ मेनपेज डॉट नेट डोमेन नेम प्रायः खतम भऽ गेल छै, तकरा बाद कियो दोसर गोटे ओकरा लेने छथि प्रायः। तै दुआरे मेनपेज डॉट नेटक सब डोमेन पल्लव सेहो खतम भऽ गेल हेतै। तै हिसाबे सेहो भालसरिक गाछ आ आर किछु साइट जे याहूसिटीज केर अन्तर्गत २०००मे गजेन्द्र ठाकुर जी द्वारा शुरू भेल सेहो याहू द्वारा जियोसिटीज बन्द कऽ देलाक बाद खतम भऽ गेलै मुदा अखनो एकर सभ सँ पुरान लिंक ५ जुलाइ २००४ अखनो अछिये। ओइ हिसाबे सेहो भालसरिक गाछ पहिल आ पल्लव दोसर इन्टरनेट पत्रिका सिद्ध होइए आ तदनुसारे परिवर्तन/ सम्पादन कऽ देने छी.. सादर।

Wednesday, 30 May 2012

गजल

माए बाप बेटी के जतन सं राखै छै सहेज
ह्रिदय टुक्रा दान करैय में फाटै छै करेज

ख़ुशी के नोर बह्बैत बाप करै छै कन्यादान
दुलहा के चाही टाका रुपैया मागै छै दहेज़

दुलहा बनल याचक बाप बनल पैकारी
की सब चाही दहेज़ ओ सूनाबै छै दस्तावेज

बाप बेचीं घर घरारी दैय छै मोटर गाड़ी
बर मागै सोफासेट बाप तनै छै गोदरेज

दहेजक आईग में जईर कs मरैय बेट्टी
की जाने लोक एकरा कोना करै छै परहेज
--------वर्ण-१७---------------
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

रुबाइ


रुबाइ-15

अहीँक प्रेमक छाह जीब' चाहै छी

अहीँक आँचरक हवा पीब' चाहै छी

अपन फाटल करेजा सीब' चाहै छी

अहीँक नैनक शराब पीब' चाहै छी ।

रुबाइ-16

सूर्यक प्रखर रश्मि सन चमकैत रहू

शरदक इजोरिया सन दमकैत रहू

कामिनी रातरानी सन गमकैत रहू

रुन-झून पायल पहिरि छमकैत रहू ।


रुबाइ-17

अहाँक केश सँ झहरैत पानिक बुन्नी

अहाँक गाल सँ ससरैत पानिक बुन्नी

अहाँक ठोर सँ टपकैत पानिक बुन्नी

हमरो देह सँ टघरैत पानिक बुन्नी ।

रुबाइ-18

घोरनक छत्ता झाड़ि पानि ढ़ारि देबौ

एकहि चाट मे धरती पर पारि देबौ

रै खचराहा खचरै सभ घोसारि देबौ

मैथिलीक अपमान करब विसारि देबौ ।

रुबाइ-19

जौँ डेनधऽ चलबे संग तऽ तारि देबौ

नैतऽ कलमक मारि, गत्र ससारिदेबौ

मिथिलाक विरोधी, मारि खेहारिदेबौ

रचलाहा प्रपंच पर पानि ढ़ारि देबौ ।

रुबाइ-19

महगीक आगि मे जरलै जनता के बटुआ

दिन-राति एक तीमन पिबैछी झोर पटुआ

सरकार के विरोध मे लगबैत छल जे नारा

खसल छै सड़क पर से लोक लटुआ-लटुआ ।

रुबाइ-20

छाक भरि के आइ पीबय दिअ' हमरा

पोख भरि के जिनगी जीबय दिअ' हमरा

खोँचाह बात से लागल खोँच, फाटल,

गुदरी भेल जिनगी सीबय दिअ' हमरा ।

रुबाइ-21

सीता चरण नूपुर झनक झमकैत रहय

बाड़ी अयाची फूल सदति गमकैत रहय

जनकक खेतक माटि माथ सजबैत रहय

मैथिल-मिथिला कीर्ति जगत पसरैत रहय ।

रुबाइ-22

धिया सिया सन घर-घर मे जनमैत रहय

शंकर बनिकऽ पूत अंगना मे खेलैत रहय

उगना सन केर चाकर बाँहि पुरैत रहय

हरियर खेत-पथार सदति बिहुँसैत रहय

रुबाइ-23

कल-कल कमला कोशी निर्मल बहैत रहय

छल-छल गंगाक निश्छल जल छलकैत रहय

बागमती गंडक धरती जी जुड़बैत रहय

माछ मखानक डाला नित सजबैत रहय

रुबाइ-24

उज्जर परती हरिया गेलै जेना

दियादी झगड़ा फरिया गेलै जेना

लागल भीड़ छिड़िया गेलै जेना

मोनक बात मरिया गेलै जेना ।

रुबाइ-25

अनका कनिते देख भभाकऽ लोक हँसैए

अपन विपति के बेला देखू कोना कनैए

अनकर कान्ह कोदारि हल्लुक लगैछै जकरा

अपना हाथ सँ धरिते बेंट सैह लोक कुथैए ।

रुबाइ-26

नाङट गरीब, माने हकन्नकनैए

फैशने चूर धनिको, नङटे नचैए

देखू नङटा, नङटे के देखिहँसैए

एकदोसर के देख संतोष धरैए ।

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों