शनिवार, 30 अगस्त 2014

गजल

गजल- 2.26
हम बाढ़िक मारल-झमारल छी
परजातंत्रक सुखसँ बारल छी

जुनि कोड़ब सखि भावना कहियो
स्मृतिमे पुरना लाश गाड़ल छी

ई जग हारय आबि हमरा लऽग
अपने मोनक तर्कसँ हारल छी

किछु नै हमरा लऽग किओ बाजय
सत्यवादक अवगुणसँ छारल छी

हम नै छी कवि ने गजल वक्ता
बस शब्दक धधरा पजारल छी

2222-2122-2

अमित मिश्र

Dard Monak Ahake Kahab Ham Kona

गुरुवार, 28 अगस्त 2014

गजल


नै अहाँ केर बिसरी नाम हे भगवन
होइ कखनो अहाँ नै बाम हे भगवन

सुख कि भेटे  दुखे जीवनक रस्तापर
संगमे रहथि सदिखन राम हे भगवन

हम बनेलौं सिया मंदिर अपन मनकेँ
आब कतए अहाँकेँ ठाम  हे भगवन

आन नै आश कोनो बचल जीवनकेँ
अपन दर्शनकटा दिअ दाम हे भगवन

‘मनु’ अहाँकेँ करैए जोड़ि कल विनती
तोड़ि फेरसँ तँ अबियौ खाम हे भगवन

(बहरे मुशाकिल, मात्रा कर्म – २१२२-१२२२-१२२२)

© जगदानन्द झा ‘मनु’

गजल



ओम्हर लव जेहाद छलै
एम्हर लव संवाद छलै

बिहुँसल ठोर हमर तोहर
आ पसरल उन्माद छलै

गड़िए गेलै अनचोक्कहि
काँटे सन तँ इयाद छलै

पसरल जे सौंसे दुनियाँ
छोट्टे सनक फसाद छलै

खुब्बे बढ़लै प्रेम हमर
हुनकर नेहक खाद छलै

सभ पाँतिमे 22+22+22+2 मात्राक्रम अछि।
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 25 अगस्त 2014

गजल



तुलसी चौरा के सीत हम
शंकर गौरा के गीत हम

भ्रष्टाचारक छै लागि भागि
अफसर दौरा के जीत हम

माखन मिसरी लेलहुँ अहाँ
कुक्कुर कौरा के हीत हम

चौपेतल नूआ बियहुती
सैंतल मौरा के प्रीत हम

ई बंसी छै हमरे मुदा
पोठी सौरा के मीत हम

सभ पाँतिमे 2222+2212 मात्राक्रम अछि।

दोसर शेरक पहिल पाँतिमे एकटा लघु अतिरिक्त अछि।

मौरा = मौर

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

रविवार, 24 अगस्त 2014

विदेह भाषा सम्मान (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)

विदेह भाषा सम्मान
(समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)
२०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह)
२०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास)
२०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह)
२०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो-  तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)

गुरुवार, 21 अगस्त 2014

गजल

वेदरदी नै बुझलक हमरो जखन
जीबू कोना जीवन झहरल तखन

घर घर अछि रावण रामक भेषमे
कतए रहती आजुक सीता अखन

दुश्मन बनि गेलै भाइक भाइ अछि
टाकामे भसिएलै कतए लखन

सुखि गेलै ममता मायक कोइखक
भदबरिया पोखरि सन भेलै भखन  

सगरो पसरल ‘मनु’ सहसह दू मुँहा
काइट नै लेए के कतए कखन     

(मात्रा क्रम – २२२-२२२-२२१२)
सुझाब आ मार्गदर्शन सादर आमंत्रित अछि        

©जगदानन्द झा ‘मनु’

सोमवार, 18 अगस्त 2014

गजल

भक्ति गजल

वसुदेवक भागसँ एलथि कन्हैया
जसुदाकेँ जागसँ एलथि कन्हैया

जै ठामक लोके छल राक्षस सनकेँ
तै ठाँ बचि नागसँ एलथि कन्हैया

गाए गोपी बँसुरी बिरदाबन आ
राधाकेँ तागसँ एलथि कन्हैया

टूटल आसक डोरी सभहँक तखने
कनियें उपरागसँ एलथि कन्हैया

वेदक नामे उपनिषदक बाटे आ
गीता बैरागसँ एलथि कन्हैया

सभ पाँतिमे 22-22-22-22-22 मात्राक्रम अछि।
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

ओना मैथिलीमे भक्ति गजल तँ बड़ दिनसँ अछि मुदा नामाकरण जगदानंद झा मनुक कएल छनि। ई भक्ति गजल हुनके लेल। 

सुझाव सादर आमंत्रित अछि।



रविवार, 10 अगस्त 2014

गजल



भोरक काग बनि कऽ कुचरल छी हम
हुनकर ठोरपर तँ बिहुँसल छी हम

ओ छथि ठाढ़ गाछ सन आँगनमे
लत्ती फत्ती सन तँ पसरल छी हम

ई जे देखलहुँ पिआसक रेघा
कनियें रुकि कऽ खूब बरसल छी हम

भिन्ने भिन्न मत मतांतर जय हो
टूटल हड्डी सन तँ छिटकल छी हम

असगर देखि आउ नै हमरा लग
अनचिन्हार लेल निहुँछल छी हम

सभ पाँतिमे 2221+2122+22मात्राक्रम अछि।
दोसर आ चारिम शेरक दोसर पाँतिमे दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।



शनिवार, 9 अगस्त 2014

गजल

अप्पन हियसँ आइ हटा देलक ओ
शोणित केर नोर कना देलक ओ

हमरा बिनु रहल कखनो नै कहियो
देखू आइ लगसँ भगा देलक ओ

सपना जे सजैत रहै जिनगीकेँ
सभटा पानिमे कऽ बहा देलक ओ

हम बुझलौं गुलाब जँका जकरा नित
से हमरे बताह बना देलक ओ

भेटल नै इलाज कतौ कुन्दनकेँ
एहन पैघ दर्द जगा देलक ओ

मात्राक्रम: 2221-21-12222

© कुन्दन कुमार कर्ण

सोमवार, 4 अगस्त 2014

अपने एना अपने मूँह-28



मास जुलाइ २०१४मे अनचिन्हार आखरपर कुल १३टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि---

राम कुमार मिश्रजीक १टा पोस्टमे १टा गजल अछि।
कुंदन कुमार कर्णजीक २टा पोस्टमे १टा गजल आ १टा हजल अछि।
आशीष अनचिन्हारक कुल ९टा पोस्टमे ५टा गजल, १टा बाल गजल, २ टा आलोचना, १टा अपने एना अपने मूँह।

गजल

गजल - 10

खेती अगता  आइ   बुझलियै
करमक झटहा आइ बुझलियै

असगर जिनगी मगन रही धरि
लोकक खगता आइ बुझलियै

अनकर तीमन नीक लगै छल​
बारिक पटुआ आइ बुझलियै

बापक टाका खूब उरेलहुँ
अप्पन बटुआ आइ बुझलियै

शहरी जिनगी मिट्ठ लगै छल​
गामक कुटिया आइ बुझलियै

सभ पाँतिमे मात्राक्रम –2222 21 122

© राम कुमार मिश्र

गजल

देह जखने पुरान बनल यौ
स्थान तखने दलान बनल यौ

आङ घटलै उमेर जँ बढलै
देश दुनियाँ विरान बनल यौ

सोह सुरता रहल कखनो नै
आब नाजुक परान बनल यौ

अस्त होइत सुरूज जकाँ बुझि
राज सेहो अकान बनल यौ

रीत छी याह जीवनकेँ सत
सोचि कुन्दन हरान बनल यौ

मात्राक्रम: 2122-121-122

© कुन्दन कुमार कर्ण
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों