Tuesday, 30 September 2014

गजल

भक्ति गजल

जय दुर्गा जय काली जय भगवति जय जय
अबियौ हाली हाली जय भगवति जय जय

अड़हूलक कोंढ़ी लेने जगता भगता
मालिन संगे माली जय भगवति जय जय

सोभै लहठी नथिया टीका सेनूर
तैपर बड़का बाली जय भगवति जय जय

रुनझुन बाजल पायल हुनकर साँझहिमे
पसरल भोरक लाली  जय भगवति जय जय

खनमे ब्रम्हाणी रुद्राणी  खनमे
संहारी कंकाली जय भगवति जय जय

सभ पाँतिमे 222+222+222+22 मात्राक्रम अछि

तेसर शेरक अंतिम अक्षरकेँ संस्कृत छंद शास्त्रानुसार दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
चारिम शेरमे लयक दृष्टिसँ आर मेहनति चाही
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 29 September 2014

गजल

दुख अपने लग राखै छी
सुख सभमे हम बाँटै छी

सभकेँ बुझि अप्पन सदिखन
हँसि-हँसि जिनगी काटै छी

पापसँ रहि अलगे बलगे
धर्मक गीतल गाबै छी

मैथिल छी सज्जन छी हम
मिठगर बोली बाजै छी

कुन्दन सन गुण अछि हमरा
मिथिलाकेँ चमकाबै छी

मात्राक्रम : 2222-222

© कुन्दन कुमार कर्ण

Sunday, 28 September 2014

गजल


एम्हर नोरक टघार आँगनमे
ओम्हर सुखके पथार आँगनमे

ई तोहर ई हमर रहत बुझि ले
भेलै एहन विचार आँगनमे

की लेबै आ कतेक लेबै दाइ
देखू पसरल बजार आँगनमे

नगदी भेलै जखन कने बेसी
दौगल एलै उधार आँगनमे

सगरो दुनियाँसँ बचि कऽ एलहुँ हम
लागल कसगर लथार आँगनमे

सभ पाँतिमे 22+2212+1222 मात्राक्रम अछि

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 23 September 2014

गजल

बीतल दिन जखन मोन पडै छै
आँखिसँ बस तखन नोर झरै छै

छोडब नै कहै संग अहाँकेँ
लग नै आउ से आब कहै छै

ओकर देलहा चोटसँ छाती
एखन धरि हमर दर्द करै छै

जिनगीमे लगा गेल पसाही
धधरामे हिया कानि जरै छै

के बूझत दुखक बात हियाकेँ
कुन्दन आब कोना कँ रहै छै

मात्राक्रम : 222-1221-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

Saturday, 20 September 2014

गजल

ने बेटा ने पोता ने बेटी बुढ़ौतीमे
देखै छी खाली उकटा पैंची बुढ़ौतीमे

लोटा लाठी टूटल दरबज्जा चुनौटी आ
करिया कुक्कुर संगे छै दोस्ती बुढ़ौतीमे

डबरा डुबरी पोखरि झाँखरि खेत गाछी संग
चलि गेलै हम्मर सोहक पौती बुढ़ौतीमे

घुरि घुरि एना हमरा देखैए समाजक लोक
जेना फेरो हेतै घटकैती बुढ़ौतीमे

की खेबाके इच्छा अछि से कहि दिऔ झटपट
झड़कल सन संतानक अपनैती बुढ़ौतीमे


सभ पाँतिमे 222+222+222+1222 मात्राक्रम अछि
तेसर आ चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 15 September 2014

अपने एना अपने मूँह-29

मास अगस्त-२०१४मे अनचिन्हार आखरपर कुल १३ टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि--

कुन्दन कुमार कर्णजीक ३टा पोस्टमे २टा गजल आ एकटा हुनक अपने स्वरमे गाएल गजलक विडीयो अछि।
जगदानंद झा मनुजीक २टा पोस्टमे १टा गजल आ १टा भक्ति गजल अछि
अमित मिश्र आ रामकुमार मिश्रजीक १-१टा पोस्टमे १-१टा गजल अछि
गजेन्द्र ठाकुरजीक १टा पोस्टमे विदेह भाषा सम्मान संबंधी विवरण अछि।
आशीष अनचिन्हारक कुल ५टा पोस्टमे ३टा गजल, १टा भक्ति गजल आ १टा अपने एना अपने मूँह अछि

Saturday, 13 September 2014

गजल

गजल - 11

सहसह लोकक भीड़ देखल हम
सुच्चा लोकक लेल बेकल हम​

कटुता क्रोधक उमर बढ़लै टा
नेहक देखल लाश जेकल हम​

माहुर मीझर गप्प गीजै छथि
माहुर गप्पक टीस सेकल हम

बलगर शोणित पीबि मोटेलै
अबला श्राद्धक पात फेकल हम

जीयब निकहा दिनक आशामें
आशक सिम्मर फ़ूल सेबल हम​

सभ पाँतिमे मात्राक्रम –2222-21-222

© राम कुमार मिश्र

गजल

"ग"सँ गंगा "ग"सँ गजल छै
आखर आखर विमल छै

"ग"सँ गीता "ग"सँ गजल छै
वेदक संगे रचल छै

"ग"सँ गाए "ग"सँ गजल छै
पाथर पाथर महल छै

"ग"सँ गायत्री रटल हम
अनका धरिकेँ बुझल छै

"ग"सँ गामा संग गाँधी
दुष्टक गर्वो टुटल छै

सभ पाँतिमे 2222+122 मात्राक्रम अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 11 September 2014

गजल

बाल गजल


पढबै लिखबै चलबै नीक बाटसँ
आगू बढबै अपने ठोस आंटसँ

संस्कृति अप्पन कहियो छोडब नै
अलगे रहबै कूसंगत कऽ लाटसँ

फुलिते रहबै सदिखन फूल बनि नित
डेरेबै नै कोनो चोख कांटसँ

हिम्मत जिनगीमे हेतैक नै कम
चलबै आगू बाधा केर टाटसँ

बच्चा बुझि मानू कमजोर नै यौ
चमकेबै मिथिलाकेँ नाम ठाटसँ

मात्राक्रम: 2222-2221-22

© कुन्दन कुमार कर्ण

गजल

गजल-2.28

अपनेक इतिहास लेल हम खतरनाक छी
अपनेक कथनसँ तँ हम अधसिझल सन पाक छी

कविता पढ़ू वा पढ़ू भजन गजल शायरी
आखरक मंथनसँ निकलि चुकल कटु वाक छी

निज चेतना जागले रहल चरम नीन धरि
जेतै कखन खेल पलटि बड खतरनाक छी

हमरा-अहाँमे प्रियतम फरक एतेक अछि
सुन्दर विदा छी अहाँ तँ हम हाक-डाक छी

ई जग दुखक सिन्धु अछि भरल अमित आगि धरि
चलि आउ सखि जीबि लिअ जँ नीक तैराक छी

2212-2121-212-212
अमित मिश्र

Monday, 1 September 2014

गजल

गहूमो नै भेलै धानक पछाति
उदासल खेतो खरिहानक पछाति

गबैए माए समदाउन उदासी
बहुत कानै सेनुरदानक पछाति

अकासक कोना कोना टेबि हम
पहुँचबै सूरज धरि चानक पछाति

बचा रखिहें कनियों अमरित गे बहिना
नै देतौ बेटा विषपानक पछाति

बिसरि जेबै जकरा तकरा तँ हम

इयादो करबै शमसानक पछाति

सभ पाँतिमे 1222+2222+12 मात्राक्रम अछि।
मतला सहित आन पाँति सभक अंतमे एकटा अतिरिक्त लघु लेबाक छूट लेल गेल अछि
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों