Sunday, 29 March 2015

गजल

अहाँ बिनु नै जी सकब हम
अलग रहि करि की सकब हम

बिछोड़क ई नोर नैनक
बहल कोना पी सकब हम

जरल मोनक वेदना ये
कते सहि सजनी सकब हम

मिलत जे प्रेमक सुईया
हिया फाटल सी सकब हम

विरहमे नित आब कुन्दन
बिता नै जिनगी सकब हम

बहरे-मजरिअ (1222-2122)

© कुन्दन कुमार कर्ण

Friday, 6 March 2015

Thursday, 5 March 2015

गजल

होलीक शुभकामना


नेह सिनेह बरसै अनचिन्हारक आँगनमे
देह हमर से भिजलै अनचिन्हारक आँगनमे

सैंत कऽ गेल रहियै आँचर तैयो गे बहिना
बेर कुबेर खसलै अनचिन्हारक आँगनमे

आब कनी मनी चिन्हारे सन हुनका लेल
सीथ सिनूर पड़लै अनचिन्हारक आँगनमे

ठोरसँ ठोर धरि नहुँ नहुँ धीरे आस्ते आस्ते
मौध मिठाइ परसै अनचिन्हारक आँगनमे

छूबि कऽ देह केहन केलक ई अनचिन्हरबा
मोन करेज भरछै अनचिन्हारक आँगनमे


सभ पाँतिमे  21121+222+222+222 मात्राक्रम अछि
मतलाक दोसर पाँतिमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।
तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ संस्कृतक अनुसार दीर्घ मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों