Wednesday, 15 April 2015

गजल




उज्जर कारी सामर भेलियै
आसे आसी झामर भेलियै

नहिये खसलै एकौ ठोप नोर
पाथर लग रहि पाथर भेलियै

हुनकर ठोरक लाली देवघर
चढ़िते चढ़िते कामर भेलियै

सोभै डोका सन के आँखि तँइ
जरिते जरिते काजर भेलियै

हुनकर हाथक आशीर्वाद छै
फटिते फटिते आँचर भेलियै

सभ पाँतिमे 222+222+212 मात्राक्रम अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।
दोसर शेरक दोसर पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों