Sunday, 17 May 2015

गजल

घर छोडि डरमे जी रहल छी
Kundan Kumar Karna
एहन शहरमे जी रहल छी

दिन राति छी काटैत एना
जेना कहरमे जी रहल छी

संसार अपनेमे मगन छै 
भगवान भरमे जी रहल छी

प्रकृतिसँ हारल अछि परिस्थिति
कालक असरमे जी रहल छी

मजबूर छी जिनगीसँ कुन्दन
तँइ एसगरमे जी रहल छी

मात्राक्रम : 221-222-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

Thursday, 14 May 2015

गजल

सम्पूर्ण भूकम्प पीड़ित आ एहि कारणे अपना सभक बीचसँ गुजरलप्रति श्रद्धाञ्लीस्वरूप समर्पित ई गजल

जै ठाँ छल काइल नित जिनगीक मुस्कान
तै ठाँ बस नोरक रहि गेलै किए स्थान

हे ईश्वर ई केहन खेल प्रकृति केर
लोकक घर जेना अछि बनि गेल शमसान

गजलक अक्षर-अक्षर कानैत अछि आब
कहि धरती कोना यौ बनि गेल बइमान

कहियो सुन्नरता जै देशक रहल शान
छन भरिमे सभ ओ मेटा गेल पहचान

आशा मोनक कुन्दन अछि जीविते मोर
उगबे करतै जिनगीमे एक दिन चान

मात्राक्रम : 222-222-221-221

© कुन्दन कुमार कर्ण

Wednesday, 13 May 2015

गजल



भेटैत रहिहें कहियो काल
देखैत रहिहें कहियो काल

ई प्राण बनलौ तोरे लेल
झीकैत रहिहें कहियो काल

चर्चा हमर बस उड़िते रहतौ
सूनैत रहिहें कहियो काल

सुइटर सनक छै ई जीबन से
बूनैत रहिहें कहियो काल

हम फूल तों भमरा बनि बनि कऽ
सूँघैत रहिहें कहियो काल

सभ पाँतिमे 2212+2+2221 मात्राक्रम अछि।
तेसर आ चारिम शेरक दोसर पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ संस्कृत परम्परानुसार लघु मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों