Wednesday, 30 September 2015

रुबाइ



जेना किसान खेत खरिहान चाहै छै
अमीन सभ केबाला खतियान चाहै छै
पंडित मुल्ला सभ मंत्र अजान चाहै छै
तेना हमर देह ओकर परान चाहै छै

Monday, 28 September 2015

गजल



सुक्खल सुक्खल घाम भेटत
हड्डी हड्डी चाम भेटत

गौरी शंकर सीता संगे
सेवा केने राम भेटत

कैंचा कौड़ी सभकेँ चाही
बुड़िबक बनने दाम भेटत

हड़तालक महिमा बुझै छी
धरना देने धाम भेटत

सोहागक बाते अलग छै
महुआ भेने आम भेटत

सभ पाँतिमे 2222-2122 मात्राक्रम अछि

दोसर आ तेसर शेरमे एक-एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Saturday, 26 September 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-1


सौरभ पांडेय





जन्म-3    Dec.1963

जन्म स्थान- देवघर, झारखंड

पिता- श्री सुरेश चंद्र पांडेय
माता- श्रीमती कमला पांडेय

मूल निवास,द्वाबा, बलिया उत्तर प्रदेश

सौरभ जी मैथिली सहित भोजपुरी आ हिंदीक समान अधिकारी छथि। ई मूलतः भोजपुरी आ हिंदीमे गजल लिखै छथि। गजलक अलावे आन विधा (  मुख्यतः छंद)मे सेहो रचनारत छथि। ई पत्रिका ओपन बुक्स आन-लाइन डाट काम केर प्रबंधन समीति केर सदस्य छथि। विश्वगाथा नामक पत्रिकाक सलाहकार मंडल ओ परामर्शदात्री समूहक सदस्य सेहो छथि। हुनक एकटा कविता संग्रह - "इकड़ियाँ जेबी से" आ छंदक विवेचना शास्त्रक रूपमे "छंद मंजरी" पोथी प्रकाशित छनि।छंद मंजरीकेँ छंदक कार्यशाला कहल जाए तँ कोनो गलत नै।  ऐके अतिरिक्त "परो को खोलते हुए" ऐ पोथीक संपादक छथि।

बिहार राज्य विद्युत परिषद्सँ अपन पिताक अवकाश प्राप्त केलाक बाद सौरभजी करीब पचीस सालसँ इलाहाबादमे छथि आ वर्तमानमे भारत सरकारक विभिन्न योजनाक कार्यरूप देबए बला संस्थाक नेशनल हेड छथि।

ऐ श्रृंखलाक माध्यमसँ हुनक दू गोट गजल (एकटा भोजपुरी आ एकटा हिंदी) दऽ रहल छी---

भोजपुरी गजल

२१२२ १२१२ २२
साफ़ बोले में बा हिनाई का ?
काहें बूझीं पहाड़-राई का ?

चाँद-सूरज में दोस्ती कइसे ?
धंधा-पानी में ’भाई-भाई’ का ?

सब इहाँ जी रहल बा स्वारथ में
हमहुँ जीहीं त जग-हँसाई का ?

चाँद ह ऊ, भला सितारन के -
कवनो इहवाँ सभा बोलाई का ?

आजु साहित्य का मुनाफ़ा हऽ
गीत कइसन ? ग़ज़ल-रुबाई का ?

मुट्ठिये के पकड़ बतावे ले
फेर में ई बीया कलाई का ?

खुदकुशी के हुनर में माहिर हम
कामना का ? कहऽ बधाई का ?

खून मूँहे जे कवनो के लागल
एः के मालूम बा, दवाई का ?

हिन्दी गजल

दुआएँ अग़र अपनी फ़ितरत निभा दें
सुराही व पत्थर की सुहबत करा दें ॥

अभी तक दीवारों में जीता रहा है
उसे खिड़कियों की भी आदत लगा दें ॥

मिला जो उसी पे मुहब्बत लुटाए
चलो बावरे को तिज़ारत सिखा दें ॥

खुदाया गये दिन पलट के न आयें
न आएँ, न सोयी वो चाहत जगा दें ॥

नहीं ये कि बहती बग़ावत लहू में
मग़र जब भी चाहें हुक़ूमत गिरा दें ॥

नमो ब्रह्मऽविष्णु नमः हैं सदाशिव
सधी धड़कनों में अनाहत गुँजा दें ॥

रची थी कहानी कभी कृष्ण ने, वो -
निभाएँ, महज़ अब न भगवत करा दें ॥

हमारी कहानी व चर्चे हमारे
अभी तक हैं ज़िन्दा, बग़ावत करा दें ॥

बयाँ ना हुई अपनी चाहत तो क्या है |
चलो ज़िन्दग़ी को मुहब्बत बना दें ॥

रहा दिल सदा से ग़ुलाबोरुमानी |
हमें तितलियाँ क्यूँ न ज़हमत, अदा दें ॥


गुलिस्ताँ सजे यूँ कि ’सौरभ’ सहर हो |
कहो क्यारियों में वो उल्फ़त उगा दें ॥

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--सौरभ

विश्व गजलकार परिचय शृंखलाक अन्य भाग पढ़बाक लेल एहि ठाम आउ--  विश्व गजलकार परिचय 

Friday, 25 September 2015

रुबाइ



जगैत रहलहुँ हम राति भरि ओकरा बिना
तकैत रहलहुँ हम राति भरि ओकरा बिना
इम्हर ओम्हर एकै हाल से बुझाएल
कनैत रहलहुँ हम राति भरि ओकरा बिना

रुबाइ



हमर गाममे बहुत धुरंधर छै घरे घर
नाला पोखरि धार समुंदर छै घरे घर
गाछ पात डारि फूल बिया खेत खरिहान
दालि भात अचार चहटगर छै घरे घर

Thursday, 24 September 2015

अपने एना अपने मूँह-34

जनवरी 2015सँ अगस्त 2015 धरि
जनवरीमे कुल बारह टा पोस्ट भेल जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक तीनटा गजल, एकटा भक्ति गजल अछि। जगदानंद झा मनु जीक एकटा बाल गजल अछि। आशीष अनचिन्हारक एकटा अपने एना हपने मूँह, दूट बाल गजल, दूटा गजल, एकटा रुबाइ आ एकटा भक्ति गजल अछि।
फरवरीमे कुल ९टा पोस्ट अछि जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक एकटा गजल, एकटा इंटरव्यू आ एकटा सम्मानक विवरण अछि। जगदानंद झा मनु आ राम कुमार मिश्रजीक एक-एकटा गजल अछि।आशीष अनचिन्हारक तीन टा गजल आ एकटा बाल गजल अछि।
मार्चमे कुल तीन टा पोस्ट अछि जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक दूटा गजल आ आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
अप्रैलमे कुल एकटा पोस्टमे आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
मइमे कुल तीन टा पोस्ट भेल जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक दूटा गजल आ आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
जूनमे कुल आठ टा पोस्ट अछि जैमे बाल मुकुंद पाठकजीक पाँच टा गजल, कुंदन कुमार कर्णजीक एकटा वीडियो आ एकटा गजल अछि। आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि।
जुलाइमे कुल चारि टा पोस्ट अछि जैमे बालमुकुंद पाठक जीक दूटा गजल आ आशीष अनचिन्हारक एकटा गजल अछि। एकटा गजलकराक परिचय अछि

अगस्तमे कुल आठ टा पोस्ट भेल जैमे कुंदन कुमार कर्णजीक चारिटा ओ आशीष अनचिन्हारक चारि टा गजल अछि।

Sunday, 20 September 2015

गजल

भक्ति गजल

भक्ति पियास दियौ हे मैया
मुक्ति हुलास दियौ हे मैया

जय जगतारणि सभ दुख हारणि
सुख के आस दियौ हे मैया

दुखमे डूबल सगरो दुनियाँ
बस उगरास दियौ हे मैया

ज्ञानक जोती हीरा मोती
कंठक भास दियौ हे मैया

बचि जेतै दुनियाँ के लाज
ई बिसबास दियौ हे मैया

सभ पाँतिमे 22+22+22+22 मात्राक्रम अछि।
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।
अंतिम शेरक अंतिम लघुकेँ संस्कृत परंपरानुसार दीर्घ मानल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 16 September 2015

रुबाइ



अनचिन्हारक हाथमे अनचिन्हारक हाथ
छै सिनेह भरल छातीपर घमाएल माथ
केखनो हटबै केखनो सटबै अपन ठोर
ऐ तरहें अनचिन्हार केलक हमरा सनाथ

Tuesday, 15 September 2015

रुबाइ


सच झूठकेँ टकरेलासँ भरम टुटि जाइ छै
जेना पाथरसँ नमहर घैलो फुटि जाइ छै
टूटब आ जूटब बहुत कठिन छै दुनियाँमे
ई आँखिकेँ टकरेलापर शरम टुटि जाइ छै

Monday, 14 September 2015

रुबाइ



चुपचाप रहल बड़ी देर धरि हमरा देखि कऽ
जेना कि कोनो फूल चुप हो भमरा देखि कऽ
फेर केबाड़ बंद कऽ नाचल बहुत असगरे
लागल जे मजूर नाचल हो बदरा देखि कऽ

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Saturday, 12 September 2015

गजल


जकरे हाथमे किछु सत्ता छलै
तकरे हाथमे बड़ कत्ता छलै

कागजपर लिखल छै फागुन सही
गाछे गाछ पीयर पत्ता छलै

छै हड़ताल धरना अनशन बहुत
तैपर सैलरी बड़ भत्ता छलै

फाटल सनकेँ मोनक कागज मुदा
नीके नीक कपड़ा लत्ता छलै

असली चीज पिलुआ खदबद करै
तैपर मोट सुंदर गत्ता छलै


सभ पाँति 22221-22-2212 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक एकटा दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 9 September 2015

गजल-50

तोहर याद नै आबै तँइ पी लए छी हम
जिनगी आब दारुमे डुबि जी लए छी हम

मतलब कोन छै हमरा दुनियासँ तोरा बिनु
अपनेमे मगन रहि ककरो की लए छी हम

दर्दक अन्हरीयामे पिअबाक मानक नै
कहियो काल कम कहियो बेसी लए छी हम

छै अलगे मजा स्वर्गक चुमनाइमे बोतल
तोहर ठोर बुझि नित चुमि सजनी लए छी हम

मजबूरी कहू या आदति या नियत कुन्दन
बस दुनियाक आगू बनि नेही लए छी हम

मात्राक्रम : 2221-222-22-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण

http://kundanghazal.blogspot.com

Thursday, 3 September 2015

गजल

हमहीं साध्य हमहीं साधक हमहीं साधना छी
हमहीं भाव हमहीं भावक हमहीं भावना छी

छै परिणाम निश्चित रूपें ऐठाँ छै प्रमाणो
हमहीं कर्म हमहीं कारक हमहीं कामना छी

ऐ हाथें लियौ आ बँटियौ सौंसे एक रंगे
हमहीं भीख हमहीं याचक हमहीं याचना छी

बेकारक झमेला नै हुअए से मोन राखू
हमहीं धर्म हमहीं धारक हमहीं धारणा छी

चलि रहलै घमंडेमे जे सदिखन तकरा कहियौ
हमहीं सेव्य हमहीं सेवक हमहीं ताड़ना छी

ताड़ना=दंड

सभ पाँतिमे 2221-222-222-2122 मात्राक्रम अछि।
अंतिम शेरक पहिल पाँतिममे एकटा दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों