Friday, 27 November 2015

गजल

अक्षर मिटा जाइ छै कनी कालमे
फेरो लिखा जाइ छै कनी कालमे

सस्ता हँसी छै मुदा कहू ने किए
नोरे बिका जाइ छै कनी कालमे

किछु लोक एहन जे ओकरे आसपर
जीबन बिता जाइ छै कनी कालमे

ओ केकरो देखि खुश रहै छै आ तँइ
अपने लजा जाइ छै कनी कालमे

कैमरा छै आँखि तँइ हमर नीक सन
फोटो घिचा जाइ छै कनी कालमे

सभ पाँतिमे 2212-212-122-12 मात्राक्रम अछि
तेसर आ चारिम शेरमे एक-एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 25 November 2015

गजल

एगो दुल्हिनियाँ देखू ने
सुंदर बढ़ियाँ देखू ने

सब किछ बिसरब हुनके खातिर
एहन कनियाँ देखू ने

हमहूँ रहबै डूबल हरदम
चकमक दुनियाँ देखू ने

राजो रहने हुनके खटबै
मीता रनियाँ देखू ने

की पैसा की सोना चानी
धन लछमिनियाँ देखू ने

हरदी तेल-मसल्ला सबके
हम्मर धनियाँ देखू ने 


                    -नीरज कर्ण
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पहिल पंक्ति में मात्राक्रम
22-22-22-22
दोसर पंक्ति में मात्राक्रम
22-22-22-2

Tuesday, 24 November 2015

गजल

प्रस्तुत अछि जियाउर रहमान जाफरीजीक ई गजल


रोटी हम पर भारी बाबा
खायब की तरकारी बाबा

बाहर बाहर हमहूँ हँसलहुँ
आँखिक आँसू जारी बाबा

अपने अपगुण नहि देखल हम
ई बड़का  बीमारी  बाबा

सुख के दिनमा एबे करतै
कहि देलक दुख भारी बाबा

दौड़ रहल छी मासे मास
अफसर अछि सरकारी बाबा

अनका पर विश्वास करत के
हमही छी संहारी बाबा

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि।

डा.ज़ियाउर रहमान जाफ़री
पीएच-डी हिंदी,एम-एड
उच्च विद्यालय माफी,जिला नालंदा,बिहार,803107mob-9934847941

Friday, 20 November 2015

गजल

भक्ति गजल

रामे राम सीताराम
गामे गाम सीताराम

कारी देह उज्जर मोन
श्यामे श्याम सीताराम

डेगे डेग दुर्गा कालि
ठामे ठाम सीताराम

लछमी सरसती आँगनमे
धामे धाम सीताराम

रटि रटि जीह पावन भेल
नामे नाम सीताराम

सभ पाँतिमे 2221-2221 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिमे अंतिम दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 19 November 2015

गजल

मीता सूतल छी किए
एना रूसल  छी किए

दुनियादारी राग सुनि
एहन टूटल छी किए

सौंसे भूरे भूर अछि
एते फूटल छी किए

पुरना पुरना बात बनि
हमरा बूझल छी किए

"ओम"क मोनक फूल बनि
माला गूथल छी किए

२-२-२-२, २-१-२ प्रत्येक पाँति मे      े

Monday, 16 November 2015

गजल

छठिक शुभकामना सहित ई गजल

कनी अहीँसँ माँगब हम
खुशी अहीँसँ माँगब हम

गलत लगैत हो तैयो
सही अहीँसँ माँगब हम

भने कना कऽ दिअ लेकिन
हँसी अहीँसँ मागब हम

अपन मरण धरिक खाता
बही अहीँसँ माँगब हम

दियौ बहुत मुदा बाँचल
कमी अहीँसँ माँगब हम

अहाँ मना किया करबै
जदी अहीँसँ माँगब हम

सभ पाँतिमे 12-12-1222 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

गजल

पेरिस होय वा मुम्बई, खूनक रंग लाल रहै
काटल थुरल लाशसँ लिखल धरतीपर सवाल रहै

धर्मक नामपर मचल तांडव, एना किए भ' रहल
मनुखक जन्म भेलै किए, बढ़ियाँ माल-जाल रहै

सुन्नर छै धरा ई, गगन सेहो बड्ड नीक रचल
चाही जन्म नै एत', मनुखे मनुखक जँ काल रहै

गीता वेद कुरआन पढ़लौं, बाईबिलो तँ पढ़ल
सबठाँ लिखल खिस्सा पवित्र प्रेमक विशाल रहै

अनका जीब' नै देब, की धर्मक यैह काज कहू
एहन धर्म "ओम"क कहाँ  छै, ई जकर हाल रहै

२ २ २ १, २ २ १ २, २ २ २ १, २ १ १ २    प्रत्येक पाँतिमे एक बेर

Saturday, 14 November 2015

गजल

बाल गजल


बकरी आबै अर्रर
कुक्कुर भागै हर्रर

बगड़ा मैना बगुला
कौआ बाजै कर्रर

इम्हर ढन उम्हर ढुन
बौआ पादै भर्रर

भीजै अंगा पैन्टो
बौआ मूतै छर्रर

घिरनी नाचै घन घन
गुड्डी उड़लै फर्रर

सभ पाँतिमे 22-22-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 12 November 2015

गजल

ओकर रूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा
रंग अनूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

पथिया डाला मौनी सुप्ती कनसुप्ती
छिट्टा सूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

ऐ पूजा पाठक बदला जिनगी मंत्रक
जापे जूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

ओ भेटै की नै भेटै तैयो ओकर
छापे छूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

कहियो एतै अनचिन्हार हमर आँगन
चुप्पे चूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

सभ पाँतिमे 222+222+222+22 मात्राक्रम अछि
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 9 November 2015

गजल

बाल गजल

खच्चर मच्छर आबै छै
खाली हमरे काटै छै

गन गन घन घन सौंसे जे
बड़ सुंदर धुन गाबै छै

की करतै मच्छरदानी
खूनक दाने माँगै छै

कछुआ मोर्टिन सभ बेकार
डेंगू हमरो लागै छै

मच्छर लग ई बच्चा की
बुढ़बो थर थर काँपै छै

सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम छै
चारिम शेरक पहिल पाँतिल अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Sunday, 8 November 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-4

वीनस केसरी




942, मुट्ठीगंज, आर्य कन्या चौराहा, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश-211003
मोबाइल-9453.004398
venuskesri@gmail.com
अंजुमन प्रकाशनक महत्वपूर्ण संस्थानक कर्ता छथि आ कम दामपर ई पाठककेँ पोथी उपल्बध कराबै छथि।जश्ने-गजल आ अंतरराष्ट्रिय गजल सम्मेलनक सफल आयोजन कऽ कऽ वीनसजी गजलकेँ एक परिधिसँ बाहर आनि देने छथि।

प्रकाशित पोथी- गजल की बाबत। ऐ पोथीमे गजलक व्याकरणकेँ नीक तरीकासँ बुझाएल गेल छै आ ई हिंदीमे सरलतम तरीकासँ लिखल गेल पोथी छै। वीनसजी जेना व्याकरणकेँ प्रस्तुत करै छथि तैसँ भाव बेसी सरल भऽ जाइत छै। आ इएह चीज हुनक गजलकेँ महत्वपूर्ण बनबैत अछि।


पहिने हिनकर एकटा शेरक तेवर देखू--

बड़े हुए थे जो छोटा हमें बताने से
चुरा रहे हैं नज़र आज वो ज़माने से

आ आब हिनके दू टा गजल पढ़ू-


गजल
1
हर समंदर पार करने का हुनर रखता है वो
फिर भी सहरा पे सफ़ीने का सफ़र रखता है वो

बादलों पर खाहिशों का एक घर रखता है वो
और अपनी जेब में तितली के पर रखता है वो

हमसफ़र वो, रहगुज़र वो, कारवां, मंज़िल वही,
और खुद में जाने कितने राहबर रखता है वो

चिलचिलाती धूप हो तो लगता है वो छाँव सा,
धुँध हो तो धूप वाली दोपहर रखता है वो

उससे मिल कर मेरे मन की तीरगी मिट जाए है,
अपनी भोली बातों में ऐसी सहर रखता है वो

जानता हूँ कह नहीं पाया कभी मैं हाले दिल,
पर मुझे मालूम है सारी खबर रखता है वो

2

ये कैसी पहचान बनाए बैठे हैं
गूँगे को सुल्तान बनाए बैठे हैं

मैडम बोली थीं, घर का नक्शा खींचो
बच्चे हिन्दुस्तान बनाए बैठे हैं

आईनों पर क्या गुजरी है, क्यों ये सब,
पत्थर को भगवान बनाए बैठे हैं

धूप का चर्चा फिर संसद में गूँजा है
हम भी रौशनदान बनाए बैठे हैं

जंग न होगी तो होगा नुक्सान बहुत
हम कितना सामान बनाए बैठे हैं

वो चाहें तो खुद को और कठिन कर लें
हम खुद को आसान बनाए बैठे हैं

पल में तोला, पल में माशा हो कर वो
महफ़िल को हैरान बनाए बैठे हैं

आप को सोचें, दिल को फिर गुलज़ार करें
क्यों खुद को वीरान बनाए बैठे हैं



विश्व गजलकार परिचय शृंखलाक अन्य भाग पढ़बाक लेल एहि ठाम आउ--  विश्व गजलकार परिचय 

Thursday, 5 November 2015

गजल

अप्पन गाम बिसरल छी
गाछक आम बिसरल छी
नित नब खेलमे बाझल
माटिक दाम बिसरल छी
ठीकेदार हम धर्मक
रामक नाम बिसरल छी
गाँधी हम उचारै छी
हुनकर राम बिसरल छी
छाहरि "ओम" बाजल किछु
ककरो घाम बिसरल छी

रुबाइ

बहैत धार हमर जिनगी आ कछेर अहाँ
सुनबै छी जिनगीक तान बेर बेर अहाँ
आँखि मूनल रहै वा फूजले रहै हमर
हमर सपनामे कएने छी घरेर अहाँ

रुबाइ

कहियो तँ करेजासँ हमरा सटा क' देखियौ
हमर नैनासँ अपन नैना मिला क' देखियौ
बनि जेतै एकटा इतिहासे अमर प्रेमक
हमर प्रेमकेँ करेजामे ढुका क' देखियौ

रुबाइ

विरहक हमर उपचार नै, अहाँ बिनु जीबि लए छी कहुना
देखलक कियो नै फाटल करेज, जकरा सीबि लए छी कहुना
सुखाएल नयनक ई घाट देखि लोक बूझै निसोख हमरा
कियो नै बूझै नोरक धार नयनसँ हम पीबि लए छी कहुना

गजल

हमर करेजक जान तिरंगा
भारत-भूमिक शान तिरंगा
शोषित लोकक आस बनल छै
आमजनक अरमान तिरंगा
नजरि उठेतै दुश्मन जखने
बनत हमर ई बाण तिरंगा
मोल मनुक्खक होइत की छै
गाबि कहै छै गान तिरंगा
राम-रहीमक बातसँ आगू
"ओम"क अछि सम्मान तिरंगा
मात्राक्रम दीर्घ-ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ दू बेर प्रत्येक पाँतिमे।

रुबाइ

चानक चमक बढ़ि गेल अछि
मोनक धमक बढ़ि गेल अछि
जहिया सँ हुनकर रूप देखल
गामक गमक बढ़ि गेल अछि

रुबाइ

राति बीतल जाइए
मोन तीतल जाइए
हारि बैसल छी हिया
प्रेम जीतल जाइए

गजल

मोन वैह गलती बेर बेर करैए
चान केर चाहत आब फेर करैए
पूरलै कहाँ पहिलुक सबेरक सपना
आस नब किए एखनहुँ ढेर करैए
जीबि रहल मारल मोन भूमि धएने
सदिखने तँ ई जिनगी अन्हेर करैए
भाँग पीबि सनकल नाचि रहल मनुख ई
सनकि सनकि कोना ई घरेर करैए
मोन भरि छलै गप ओम केर हिया मे
ओहिना तँ नै गप सेर सेर करैए

गजल

हमर बात कियो बुझलक कहाँ
हमर मोन कियो तकलक कहाँ
चमकि गेल छलै बिजुरी कतौ
हमर अन्हार कियो हरलक कहाँ
बात सुनल सभक नमहर सदति
हमर छोट कियो सुनलक कहाँ
राखि हाथ मे बम आ पिस्तौल
हमर नाच कियो नचलक कहाँ
ओम जपि हरक नाम सदिखन
हमर नाम कियो जपलक कहाँँ

गजल

आब हम बहुत सुधरि गेल छी
कष्ट तँ अनकर बिसरि गेल छी
की समाज आ की सामाजिकता
ऐ सँ कहिये सँ ससरि गेल छी
कखन चमकतेै मेघ गगन मे
रातिये सँ हम उमरि गेल छी
जूनि चिकरबै सभक हाल पर
मारि खा क' सब कुहरि गेल छी
ओम निखरलै चुपे रहि बैसले
सब कियो अहूँ निखरि गेल छी

Tuesday, 3 November 2015

गजल

मोहक  नयन   तोहर  नयन
चंचल  नयन    सुन्दर  नयन

खटगर सनक मिठगर सनक
रस में  सनल  रसगर  नयन

मधुबन  नयन  चानन नयन
छौ   प्रेम  के  कानन  नयन

किछु जोग में  किछु टोन में
किछु मन्त्र में  बान्हल नयन

छौ  रूप   तोहर   चान  सन
आ  चान  सन  शीतल नयन

सब में अलग मुख में सजल
छौ  प्रेमरस  भीजल  नयन

भारी   नयन   आरी   नयन
छौ  मेघ  सन   कारी  नयन

काजर सजल जौं आँखि में
बस   भेल    दूधारी   नयन

किछु नै बुझल  मासूम बड
अनबुझ मुदा  सातिर नयन

सौ  जानमारुक  बाण  सन
बोझल रहल कातिल नयन

                  -नीरज कर्ण

सभ पाँति में 2212 2212
मात्रक्रम अछि।

गजल



कुक्कुर सनकेँ नेता छै
गदहा सनकेँ चमचा छै

हाथी हाथी अफसर सभ
चुट्टी सनकेँ जनता छै

शेरक बाघक संगी जे
से बकरी लग दैता छै

लुक्खी घोरन हमरे सन
हरियर गाछक भगता छै

बड़ कंफ्यूजन हमरा अइ
बगुला सनकेँ कौआ छै

सभ पाँति मे  222-222-2
सुझाव सादर आमंत्रित अछि
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों