Saturday, 27 February 2016

गजल


देह जरि गेलै करेज मरि गेलै
आब ऐ दुनियाँसँ मोन भरि गेलै

जे चढ़ल छल आँखिमे हमर सेहो
ठीक एकै बेरमे उतरि गेलै

छोड़ि देलक बीच बाट जे हमरा
आइ अनचिन्हार से अभरि गेलै

आँखि चुप रहलै मुदा कनी कम्मे
नोर छाती फाड़ि बड़ टघरि गेलै

सभ पाँतिमे 2122+212+1222 मात्राक्रम अछि

Friday, 12 February 2016

गजल

एकटा गजलक प्रारंभिक स्वरूप

बड़ सरल छै फिजिकल मरनाइ
बड़ कठिन छै डिजिटल मरनाइ

जे सिनेहक बेगर मरि गेलै
तकरे कहबै क्रिटिकल मरनाइ

बाँहिमे जकरा तागति छै से
चाहि रहलै कोस्टल मरनाइ

देह छै संगीतक तैयो तँ
बड़ कठिन छै लिरिकल मरनाइ

मरि कऽ हमहूँ जिबिते देखाइ
एहने हो मिथिकल मरनाइ

सभ पाँतिमे 2122+22221 मात्राक्रम अछि
दोसर शेरमे दूटा दीर्घ आ तेसर शेरक एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

Saturday, 6 February 2016

गजल

देह अजगर भऽ गेलै
मोन साँखर भऽ गेलै

हाथ पीयर नै भेलै
मूँह पीयर भऽ गेलै

ठोर छै संगमरमर
बोल पाथर भऽ गेलै

भोर छै घोघ सनकेँ
साँझ आँचर भऽ गेलै

ई प्रचारो कमालक
दाग उज्जर भऽ गेलै

सभ पाँतिमे 2122+122 मात्राक्रम अछि
दोसर शेरकक पहिल पाँतिमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि संगे संग ऐ शेरमे तकाबुले-रदीफ नामक दोष अछि मुदा ऐ शेरसँ हमरा मोह भऽ गेल। गुणीजनसँ आग्रह जे सुधार बताबथि।
सुझाव सादर आमंत्रित अछि।
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों