Friday, 26 August 2016

गजल

पहिने भक्तक तगमा भेटल
तइ बादे किछु सुविधा भेटल

हँसि उठलै रस्ता कारक संग
गुमसुम बैसल रिक्सा भेटल

नवका ताला नवका चाभी
बिन कब्जा के बक्सा भेटल

हुनकर ता थैया थैया केर
डेगा डेगी चरचा भेटल

अटकल बंसी बड़ जीवन भरि
कनियें बोरक हिस्सा भेटल

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि
दोसर आ चारिम शेरक पहिल पाँतिमे अंतिम लघुकेँ छूटक तौरपर लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि 

Saturday, 13 August 2016

गजल

मोनक गाछी मजरल किछु
धीरे धीरे गमकल किछु

खुल्लम खुल्ला जीवनमे
परदा पाछू खनकल किछु

हमहूँ छी बुधिमान बहुत
हमरो लग तँइ अभरल किछु

बड़ देलहुँ धेआन मुदा
देहक एना चनकल किछु

भेलै मेघक बँटवारा 
इम्हर उम्हर बरसल किछु

सभ पाँतिमे 222-222-2 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 10 August 2016

गजल

उजड़ैए जे आँगन बाबा
नाचैए पतराखन बाबा

भानस भात बना धेलक ओ
चीखैए किछु चाखन बाबा

अजगर गहुँमन साँखर संगे
घूमैए बड़ धामन बाबा

टालक टाल लगा मरि गेलै
लूटैए सभ लूटन बाबा

किछु दुर्घटना हेबे करतै
झूमैए मनभावन बाबा

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
ऐ गजलमे दू टा काफियाक प्रयोग अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Friday, 5 August 2016

गजल

बनेलहुँ अपन हम जान अहाँकेँ
जँ कहि लाबि देबै चान अहाँकेँ

हँसीमे सभक माहुर झलकैए
सिनेहसँ भरल मुस्कान अहाँकेँ

कमल फूल सन गमकैत अहाँ छी
जहर भरल आँखिक बाण अहाँकेँ

पियासल अहाँ बिनु रहल सगर मन
सिनेहक तँ चाही दान अहाँकेँ

करेजक भितर 'मनु' अछि कि बसेने
रहल नै कनीको  भान अहाँकेँ 
(मात्रा क्रम ; १२२-१२२-२१ १२२)
(सुझाव सादर आमंत्रित अछि)
© जगदानंद झा 'मनु' 

गजल

सात तहमे दाबल बात
बड़ महकलै झाँपल बात

काँपि रहलै रसगर ठोर
काँपि रहलै कोमल बात

नै नुका सकलै भीतरमे
चमचमाइत माँजल बात

हमरा लग उजड़ल पुजड़ल तँ
हुनका लग छै साँठल बात

चुप रहू किछु नै बाजू
हमहूँ जानी जानल बात

सभ पाँतिमे 2122 + 2221 मात्राक्रम अछि
तेसर चारिम आ पाँचम शेरक किछु दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

गजल


साँप चलि गेल लाठी पीटे रहल छी
बाप मुइला पछाइत भोजक टहल छी

पानि नै अन्न कहियो जीवैत देबै
गाम नोतब सराधे सबहक कहल छी

आँखिकेँ पानि आइ तँ सगरो मरल अछि
राति दिन हम मुदा ताड़ीमे बहल छी 

कहब ककरा करेजा हम खोलि अप्पन 
नै कियो बूझलक हम धेने जहल छी

सुनि क' हम्मर गजल जग पागल बुझैए
दर्द मुस्कीसँ झपने 'मनु' सब सहल छी 
(बहरे असम, मात्रा क्रम- २१२२-१२२२-२१२२)
© जगदानन्दझा 'मनु' 
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों