Wednesday, 18 March 2009

गजल


गजल

इहो अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम
खाली मूहँक छेम छल पछाति जानल हम


आगि लागल घर मे चिन्ताक गप्प नहि
कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम


सड़ैत देखलिऐक किच्छो के कादो मे
अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम


पिबैत रहलहुँ सदिखन विदेशी शीतल पानि
तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम


किछु तत्व कए दैत छैक अनचिन्हार सभ के
कथन मे दम्म छल पछाति जानल हम

अहाँ निरोध करु
अहाँ विरोध करु


लोक बढ़त आगाँ
अहाँ अवरोध करु


सुखी हएत गरीब
अहाँ क्रोध करु


धनी बनए धनी
एहने शोध करु


जनतंत्र अपने जन्मल
खूब ओध-बाध करु


सत्ता-सुरक्षा अपने
खूब अपराध करु


खाएब अहाँ फास्ट-फूड
बरबाद बाध करु
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों