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बुधवार, 10 अक्टूबर 2012

गजल


कत्ते सोहाओन राति छै आयल,
सुख , सपना सब संगे लायल ....

कोना ने कियो मस्त भ’ झहरत,
नैन आहाँके अछि कजरायल,...

नैन करय नेह केर सिंचन,
ठोरक भाफ में सब उस्नायल,....

आगुक रूप के कोना हम बाजू,
बस पर्वत छै जेना समाओल,.....

‘गुंजन’ के दिन छिनी-झपटिक’
भाग्यो छैथ अहींक संग लागल,....

बुधवार, 29 अगस्त 2012

गजल


सिह्कैत हवा पर सिसकैत अछि मोन,
हम छी पाथर,आ ओ पाथर,से भेल सोन,...

कनैत रही छी असगर एकात बैसल,
हँसब से ऐहन बाते अछि बचल कोन,.....

चली गेल ओ संग ल' मुइर-सुईद सब,
देलहुं हम जकरा अपन स्नेहक लोन,......

खोले चाहै छी रंग-रभसक बात सब,
मुदा कोना खोलियैक ,मोने भेल अछि मौन,....

'गुंजन' छै लोढ़ैत,गजल बहार बैसल,
आहां रहू अहिना ऐकात,कानि करू होम,...... गुंजन श्री
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों