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सोमवार, 26 मार्च 2012

गजल

प्रस्तुत अछि कमलमोहन चुन्नू जीक गजल ( इ गजल बिना बहरक अछि) ---

पाछू जँ नहि अमक तँ एकसर सुन्ना की
कानक बेतरे सोना की झुनझुन्ना की

जीरा लए जोलहाल जानकीक नैहर केर
पोखरिए महुराह तँ रोहु की मुन्ना की

सिरिफ अमौट लए रटकल लुधकल भगिनमान
तकर जजातक उपजा की मरहन्ना की

भङघोटनासँ अकछि लोक बन्हलक मुट्ठी
तँ दरबारक कोट-कानूनक जुन्ना की

पथरौटी डिहवार छातियो पाथरकेँ
तकर गोहरिया गुम्हरल की अँखिमुन्ना की

धातुक बासन टुटलोपर बोमियाइत अछि
मैथिल बान साबुत की सकचुन्ना की

डंटी मारए जे बैसल सप्पत खा क'
तकरा लए छै गाँधी की आ अन्ना की

बुधवार, 21 मार्च 2012

गजल

प्रस्तुत अछि कमल मोहन चुन्नू जीक बिना बहरक गजल..


कगनीए पर नाह लगैए बाजू नहि
आङ-समाङक धाह लगैए बाजू नहि

मोसि-कलम-कागत धेने परोपट्टामे
एक्कहु नहि पुरखाह लगैए बाजू नहि

भरल-पुरल दरबज्जा आँगन सजनियाँ
दोगे-दोग अबाह लगैए बाजू नहि

कोन बसात सिहकलै जनमारा पछबा
गामक-गाम रोगाह लगैए बाजू नहि

जाहि आँखिमे भरि जिनगी नहैतहुँ हम
पेनी तकर अथाह लगैए बाजू नहि

होइत रहत एहिना मरलहबा गुरमिन्टी
लोके नहि इरखाह लगैए बाजू नहि

ठीका-मनखपमे उलझल धर्मध्वजी
नेत ओकर मरखाह लगैए बाजू नहि

हड्डी-गुद्दा केर हबक्का सौजनमे
कुकुरो आइ घबाह लगैए बाजू नहि
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों