अनचिन्हार आखर
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शेर जे सभ दिन शेर रहतै
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गुरुवार, 31 जनवरी 2013
बाल रुबाइ
बाल रुबाइ-40
बुचियाक हँसी बुझू सिंगरहार फूल
आँखिक नटखटपन छै नेनपनक मूल
बाजब कने तोतराह मुदा बड मधुर
नै नजरि लागै ककरो नै गड़ै शूल
सोमवार, 14 जनवरी 2013
रुबाइ
बाल रुबाइ-39
जागल सुरुज लाल भऽ भेलै आब भोर
सोना हमर चान आब बिछौना छोड़
तोरा लेल राखल छौ हलुआ पूरी
नैना खोलि देख छै कुसियारक पोर
रुबाइ
बाल रुबाइ-38
डबरा भरल कुम्भी बेँग कुदै ताहिपर
गेना गाछ भरिगर कुकुर मुतै ताहिपर
आदति चलते सब बाझल एक्कै ठाम
राँगल छल कोठी बिलाइ सुतै ताहिपर
रुबाइ
बाल रुबाइ-36
नेना टहलै जुत्ता बाजै पोँ पोँ कऽ
सुनिते पाछू ताकै अटकी- मटकी लऽ
देखै पाछू दौड़ै आगू तेँ खसल
कानै फेरो खाटक पौआ जोरसँ धऽ
रुबाइ
बाल रुबाइ-35
छै जंगलापर ठाढ़ बौआ छऽड़ पकड़ि
बाहरक फूल तोड़ऽ चाहै हाथ नमरि
छै खेल रहल गाछ बौआ संग खेल
रगड़ा लऽ हवासँ दूर भऽ जाइ छै सम्हरि
रुबाइ
बाल रुबाइ-34
ऐ गाछसँ ओ गाछपर कूदै बानर
जामुन तोड़ि तोड़ि फेर फेकै बानर
टूटल ठाढ़ि तँ खसलै धम्म दऽ माटिपर
चोटो खा फेर गाछपर चढ़ै बानर
रुबाइ
बाल रुबाइ-33
हरियर पियर काँच पाकल मिठका आम
बिज्जू मालदह लाले सिनुरिया आम
झटहा मारै दाइ झटहा उपर लटकल
खसबो केलै तँ कौआक जुट्ठा आम आम
बुधवार, 12 दिसंबर 2012
रुबाइ
बाल रुबाइ-32
कदिमाक लत्ती भरि बाड़ीमे लतरल
हरियर हरियर सजिमनि चारपर लटकल
कतऽ जाकऽ खेलब मारै छी हम छक्का
सदिखन हमर गेन तँ लत्तीमे अटकल
रुबाइ
बाल रुबाइ-31
जोतल खेतमे दौड़ैत बड खेललौं
लागल चोट नै जँ ठोकरसँ खसि पड़लौं
लागल मोन एते चिड़ियाँ एतऽ जते
कसरत भेलै हमर अहाँ सूतल रहलौँ
रुबाइ
बाल रुबाइ-30
गामक भोज बैसल पाँतिमे बाबा लऽग
फाटल पात छल दालि बहलै लोटा लऽग
तरकारी पापड़ चटनी सब सना गेल
हम कानै छी बैसल दहीक तौला लऽग
रुबाइ
बाल रुबाइ-29
रोटी दूध गूड़ि कऽ खुआ दिअ ने आब
हमरो गरम कऽ तेल लगा दिअ ने आब
गोदीमे बैसा खिस्सा कहू बाबी
हमरो नीक नेना बना दिअ ने आब
रुबाइ
बाल रुबाइ-28
बेँगक हल्ला अभरैत पोखरि कातसँ
सुग्गा भजन गाबैत अढ़ भेल पातसँ
थारी उगल पूबमे पैघ टा एखन
नव उर्जा भरल पवन बहै छै प्रातसँ
रुबाइ
बाल रुबाइ-27
धानक बालि लाबें सामा खेलै छी
चुगला आइ जाड़ें सामा खेलै छी
भैया दिअ प्रेम बहिन मागि रहल छै
भैया बेढ़ बनबेँ सामा खेलै छी
रुबाइ
बाल रुबाइ-26
घरपर बैसल रहब नीक जाड़ एलै
सीरक तऽर तँ खेलब नीक जाड़ एलै
बढ़ियाँ भोजन आ शीतलहरी चलतै
सब मिलि घूर तापब नीक जाड़ एलै
बुधवार, 31 अक्टूबर 2012
रुबाइ
बाल रुबाइ-25
एलै ककाक कोजगरा बहुत मखान
चल खीर खेबै संगमे हरियर पान
नवका कपड़ा एलै सकल परिवारक
तैमे हमर ब्लू जीँस नीक छै समान
रुबाइ
बाल रुबाइ-24
भोरे गाछपर लाल फूल शोभै छै
फूलाएल फूलपर तितली उड़ै छै
दू टा अरहुल आ दू टा गुलाब लऽ चल
खेलब किछु संग किछु पोथीपर चढ़ै छै
शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012
रुबाइ
बाल रुबाइ-23
कोरामे खरहा लऽ कऽ हाथमे गाजर
बौआ निकललनि मटकैत घरसँ बाहर
लागल ठेस कतौ गाजर फेका गेल
जा धरि उठलनि खरहा खा गेल असगर
रुबाइ
बाल रुबाइ-22
(बिन मौसम गाछीक इयाद)
पाकै बिज्जू चल चल गाछी ओगरब
मालदहक तरमे ऊँच मचान बान्हब
जखने कौआ लोल मारत डंटीपर
खसतै सुपक तँ हम झट दऽ चोभा मारब
रुबाइ
बाल रुबाइ-21
हारल तेँ केओ गोस्सासँ झगड़ैए
केओ बस अपन बारी लेल लड़ैए
कखनो युद्ध स्थल बनि जाइ छै दलान
कखनो बाल मीत प्रेम रूप धरैए
रूबाइ
बाल रूबाइ-20
बहिनक संग खेलमे मोन लागैए
हम विद्यार्थी ओ मैडम बनि आबैए
हम देखै छी फोटो मात्र पोथीमे
ओ ओकर आखर हमरा चिन्हाबैए
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