सम्मान लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सम्मान लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान

मात्र मैथिली गजलपर केंद्रित सम्मान "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" अछि जे किछु कारणवश स्थगित छल। 2011-2014 धरि ई चलल तकर बाद ठमकि गेल। मुदा ई फेरसँ शुरू हएत एवं एहिमे आब राशिक प्रावधान सेहो रहत जे कि 15000 रहत। योग्य रचना चुनबाक नियम पुरने सन अछि किछु संसोधनक संग। ई सम्मान दू चरणमे पूरा कएल जाएत जकर विवरण एना अछि--------

पहिल चरण-----------हरेक मासमे प्रकाशित गजल, बाल गजल, भक्ति गजल, रुबाइ, बाल रुबाइ, भक्ति रुबाइ, कता, फर्द, समीक्षा, आलोचना, समालोचना, इतिहासमेसँ एकटा रचना चूनल जाएत जे सालक बारहो मास चलत (साल मने 1 जनवरी सँ 31 दिसम्बर) । एहि तरहें चयन कर्ता लग अंतिम रूपसँ बारह रचना प्राप्त हेतन्हि। गजल बहरयुक्त हेबाक चाही। बिना बहर बला गजल मान्य नै हएत। सरल वार्णिक बहर बला गजल गजलक नवसिखुआ सभ लेल छै तँइ एहू बहर बला गजलकेँ हम बारब।

दोसर चरण------ चयनकर्ता अंतिम रूपमेसँ प्राप्त रचनाकेँ ओकर भाव, व्याकरण आदिक आधारपर एकटा रचना चुनताह, जे अंतिम रुपसँ मान्य हएत आ ओकरे ई पुरस्कार देल जाएत। रचना चुनबाक नियम-------------
1) रचना अनिवार्य रुपें "अनचिन्हार आखर" पर प्रकाशित होएबाक चाही। जँ कोनो रचनाकारक रचना अन्य द्वारा प्रस्तुत कएल गेल छैक सेहो मान्य हएत। कोनो अन्य पत्रिकामे प्रकाशित गजल सेहो मान्य हेतै मुदा ताहि लेल ओकर कटिंग आ अनापत्ति प्रमाण पत्र सेहो देल जाए पोस्टमे। चयन भेल रचनाकारक प्रतिबद्धता गजल ओ शेरो-शाइरीक विधा संग छनि वा नै सेहो देखल जाएत। संगहि संग चयन भेल रचनाकारक लेखन आ जीवनक आचरणमे कतेक साम्यता छनि सेहो देखल जाएत।

2) रचना मौलिक होएबाक चाही। जँ कोनो रचनाक अमौलिकता पुरस्कार प्राप्त भेलाक बाद प्रमाणित हएत तँ रचनाकार सँ अबिलंब पुरस्कार आपस लए लेल जाएत आ भविष्य मे एहन घटना के रोकबाक लेल " अनचिन्हार आखर" कानूनी कारवाइ सेहो कए सकैत अछि।

3) रचना चयन प्रकियाकेँ चुनौती नहि देल जा सकैए।

4) एहन रचनाकार जे मैथिलीक रचना के अन्य भाषाक संग घोर-मठ्ठा कए लिखैत छथि से एहि पुरस्कारक लेल सवर्था अयोग्य छथि, हँ ओहन रचनाकार जे मैथिली आ अन्य भाषा मे फराक-फराक लिखैत छथि तिनकर रचनाकेँ पुरस्कार देल जा सकैए, बशर्ते कि ओ अन्य पात्रता रखैत होथि।

5) पहिल चरणक प्रकिया हरेक मासक 5 सँ 10 तारीखके बीच आ दोसर चरण हरेक तिला-संक्रान्ति के पूरा कएल जाएत।

6) एहि पुरस्कारक चयन पूर्णतः आन-लाइन होएत । राशिक बेबस्था सेहो आने-लाइन रहत।

7) रचनाकार कोनो देशक नागरिक भए सकैत छथि।

8) " अनचिन्हार आखर"क संस्थापक एहि पुरस्कार मे भाग नहि लए सकैत छथि।

सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

सम्मान

मैथिली सिने संसार पत्रिकाक तेसर वार्षिकोत्सव आ अन्तराष्ट्रिय मातृ भाषा दिवसक अवसर पर मधेस मिडिया हाउस, काठमाण्डूमे आयोजित समारोहमे मैथिली गजलमे हमर योगदानक कदरस्वरूप नेपाली फिल्मक बरिष्ट कलाकार नीर शाह द्वारा मैथिली सिने संसार दिससँ प्रदान कयल गेल सम्मान ग्रहण करैत






रविवार, 23 मार्च 2014

पं. जीवन झा Lifetime Achievement गजल सम्मान


पं. जीवन झा जीक मृत्यु दिवस जे की मइमे होइ छै तैमे हरेक बर्ख एकटा सम्मान देल जाएत जकर नाम हेतै "पं. जीवन झा Lifetime Achievement गजल सम्मान"। संक्षिप्तमे "पं. जीवन झा गजल सम्मान" 

ई सम्मान कोनो व्यक्ति वा संस्थाकेँ देल जा सकैए जे अपन जीवनमे गजल लेल काज केने होथि।

ऐ सम्मान लेल व्यवस्था एना रहत---

पाठक, आलोचक, विश्वविद्यालय, मैथिली संस्था आदि एकटा नोमिशेन फार्म अनचिन्हार आखरकेँ पठेता (मात्र इंटरनेटसँ स्वीकार्य)। अनचिन्हार आखरक सेलेक्शन कमीटि ओइ नाम सभपर विचार क' अंतिम निर्णय देता। ई सम्मान मात्र काज अधारित छै तँए विवाद बर्दास्त नै कएल जाएत। ई फार्म ऐ लिखपर उपल्बध अछि--  पाठक, आलोचक, विश्वविद्यालय, मैथिली संस्था आदि  फार्म भरबा कालमे ई सभ मोन राखथि--

१) एक बेरमे एकै व्यक्ति वा संस्थाकेँ भेटत। २) जै बर्खमे किनको ई सम्मान भेटि रहल हो तैसँ ३० बर्ख पाछू धरिक हुनक गजलक उपर काजकेँ मूल्याकंन कएल जाएत संगे संग कमसँ कम हुनक ५सँ बेसी गजल संग्रह वा गजल आलोचना, इतिहासपर पोथी प्रकाशित भेल हो ४) जँ संपादक छथि तँ हुनकर पत्रिकामे प्रति बर्ख ३०टा गजल प्रकाशित भेल हो। जँ संपादक बदलि गेल छथि तँ ई सम्मान पत्रिकाकेँ देल जाएत। ५) ओ संस्था जे की गजलक १५टा पोथी प्रकाशित केने हो। ६) ओ संपादक जे की प्राचीन गजलकारक मूल वर्तनीकेँ सुरक्षित राखैत १०टा गजलक संपादन केने होथि। ७) ओ दान-दाता जे की गजलक पोथी प्रकाशित करबाक लेल दान देने होथि ( कमसँ कम २०टा)। ८) ई प्रयास रहत जे ई सम्मान हरेक बर्ख देल जाए मुदा उचित प्रतियोगीकेँ अभावमे एकरा ओइ बर्ख लेल स्थगित सेहो कएल जा सकैए। ९) ऐ सम्मानक सभ प्रकिया अनचिन्हार आखर सुरक्षित रखने अछि संगे-संग उतरदायित्व सेहो लैत अछि। १०) जे केओ सम्मान ओ पाइकेँ संग जोड़ि देखै छथि तिनका लेल ई सम्मान अयोग्य अछि। हँ साधनक हिसाबें राशिक व्यवस्था सेहो हेतै मुदा भविष्यमे। ११) जे केओ ३० बर्खमे ३०टा वा ओसँ बेसी नव गजलकारकेँ गजल विधासँ जोड़लाह। १२) अनचिन्हार आखरक संस्थापक ऐ सम्मानक हकदार नै हेताह। १३) अनचिन्हार आखरक सेलेक्शन कमीटिक जे केओ मेम्बर हेताह तिनका २ बर्खक बादें ई सम्मान भेटि सकैए।







मंगलवार, 14 जनवरी 2014

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2013 ( गजल )

हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2013 लेल ओस्ताद ओमप्रकाशजीक मास सितम्बरमे प्रकाशित हुनक गजलकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलाह ओस्ताद जगदीश प्रसाद मंडल । हुनका धन्यवाद।


प्रस्तुत अछि ओस्ताद जगदीश प्रसाद मंडल जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।

गजलक निर्णए-

बिनु गजलकारक परिचय देने आशीषजी नअटा गजल निर्णए करैले पठा देलनि। परिचयक खाहिंस ऐ दुआरे जे के केते दि‍नसँ लिखि रहल अछि। नव-पुरानक विचार तँ करबे अछि। जँ से नै कएल जाएत तँ के केतएसँ शुरू केलनि आ केतए अखनि छथि। संगे, जे नव लिखिनि‍हार छथि हुनकामे कथी नवता छन्‍हि। नवतो तँ नवता छी। पुरान वस्‍त्र रहि‍तो जँ कि‍यो मेघडम्बर ओढ़ि बर्खामे चलै छथि वा मिरजइ पहीरै छथि तँ इतिहासक नजरिये पुरान भलहिं बूझि पड़ए मुदा नव पीढ़ीक लेल तँ नवे हएत। गजल पढ़िते मनपर भार पड़ल। भार भरैक कारण भेल जे ने गजल लि‍खै छी आ ने गजलक शास्‍त्र पढ़ि समीक्षक छी। ओना समीक्षाक जे प्रक्रि‍या अछि ओ एहेन ओझरा गेल अछि जे निर्णए करब समस्‍या बनि गेल अछि। समस्‍या ई जे केतौसँ सि‍मटी, केतौसँ बालु, केतौसँ गि‍ट्टी लऽ सानि-बाटि पीलर ठाढ़ होइए। अपन लूरि एतबे देखै छी जे जे कि‍छु मनमे फूड़ल ओकरा कागतपर उतारि लेलौं। आशीष जीक बिसवासी आदेशकेँ नकारि‍यो तँ नहियेँ सकै छी। मुदा अपन बात दोसर किए बुझता। ओइ नओ (नबो) गजलक पाँति ऐ तरहेँ अछि-

“(१) दर्दसँ भरल छी हम,
(२) कोना अहाँकेँ घुरि कहब आबै लेल,
(३) तरेगण लाख छै तैयो नगर अन्‍हार रहिते छै,
(४) एक ठोप प्रेम चलते तड़पैत छी,
(५) हम जँ पीलहुँ शराबी कहलक जमाना,
(६) मि‍ललौं अपन चानसँ भेल पुलकित मन,
(७) घोड़ा जखन कोनो भऽ नांगर जाइ छै,
(८) पढ़ल पंडित मुदा रोटीक मारल छी,
(९) कहियो तँ हमर घरमे चान एतै।”

नओकेँ देखला पछाति मनमे उठल, गजल की?
वएह ने गीतक संगबे कहबैए। ओहो ने साहि‍त्यक महतपूर्ण अंग छी। मुदा ओहनो अंग तँ नहियेँ छी जेकरा नजरअंदाज कएल जाए। जे शाश्वत कल्‍याणकारक अछि वएह ने सुन्दर भेल।
नओ गजल ऊपरा-ऊपरी अछि। सबहक अपन-अपन उदेस आ रस्‍ता-बाट छै। भाव रूपमे नओ मजगूत अछि, जे खुशीक बात भेल। नओक कि‍छु पाँति- “जिनगी कऽ बाटपर सदिखन, सहि चोट नित चलल छी हम” संकल्प संग जुड़ल अछि। तहिना दोसर गजलक- “बुझलहुँ अहाँ बैसल मोनमे छी हमर, ई दूर गेलौं हमरा कनाबै लेल” जिनगीक बहुत पैघ वि‍चार अछि। तेसर- “गजब छै रीत दुनियाँ केर मरने राख धरि फेकै, मुदा सदिखन सभक मनमे अमिट सन यादि बसिते छै” बहुत पैघ रहस्यक उद्घाटन केलनि। चारिम- “सोन सन जीवन निशामे मातल रहय, तेँ उधारी माँगि दुख पिबैत छी” जीवनक बेवहारिक पक्षक उद्घाटन केलनि। पाँचम- “भटकलहुँ बड्ड भेटेए नेह मोनक, देख मुँह नै करेजक सुनलक जमाना” जेना शिवजीक हि‍मालयमे बैस कि‍छु बाजि रहला अछि। छठम- “ओकर बढ़ल डेगसँ दर्द हरिया उठल, पायलक सुनते स्वर भेल जीबित मोन” पैघ वि‍चार रखलनि। सातम- “खाए कए मौसी हजारो मूषरी, बनि बैसलै कोना कऽ बड़की दाइ छै” छाल्ही खौका बि‍लाइक चर्च सुन्दर ढंगसँ केलनि। आठम- “पढल पंडित मुदा रोटीक मारल छी, बजै छी सत्य हम थोंथीक हारल छी” एक कालखंडक जीवंत चर्च केलनि। नअम- “मानक गुमान धरले रहत एतय, नोरक लपटिसँ झरकिकऽ मान जेतै” संगे दोसर पाँतिमे कहै छथि- “हक अपन "ओम" छीनत ताल ठोकिकऽ, छोड़ब किया, कियो की दान देतै” ‘सूइ अग्रे’ महाभारतसँ लऽ कऽ सीता राम जीक- ‘अछि सलाइमे आगि’ धरिक वि‍चार जेना उगलि देलनि। युगानुकूल गजलक केहेन ध्‍वनि आ झंकार हेबा चाही ई तँ गजलकारे बुझता। नओ गजलमे ‘कहियो तँ हमर घर चान एतै’ सवोपरि गजल अछि। अंतमे, एकटा बात आरो, भाषा आ साहित्य पवित्र धारक धारा छी। जइमे आनो-आन शब्द औत आ भावो एबे करत। तँए भाषा आकि साहित्य मरि जाएत एहेन बात नै। गंगा सदृश्य कारखाना शुद्ध करैवाली छथि, तहि‍ना भवलोकमे भवजाल ने पकड़ि लिअए, ई तँ सबहक जिम्‍मा छियन्हि‍हेँ। आशीषजी, जे जनलौं से केलौं। नै पान तँ पानक डंटीओसँ यज्ञ पूर्ति होइते छै।
जगदीश प्रसाद मण्डल
१३-०१-२०१४ 
प्रतियोगितामे देल गेल ई 9टा गजल एना अछि---

गजल

1
दर्दसँ भरल गजल छी हम
शोकसँ सजल महल छी हम

सुख केर आशमे बैसल
दुखमे खिलल कमल छी हम

भितरी उदास रहितो बस
बाहरसँ बनि हजल छी हम

जिनगी कऽ बाटपर सदिखन
सहि चोट नित चलल छी हम

कुन्दन सुना रहल अछि ई
संघर्षमे अटल छी हम

मात्रा क्रम :२२१२+१२२२

2

कोना अहाँकेँ घुरि कहब आबै लेल
बड़ दूर गेलहुँ टाका कमाबै लेल

नै रीत कनिको प्रीतक बुझल पहिनेसँ
टूटल करेजा अछि किछु सुनाबै लेल

लागल कपारक ठोकर जखन देखलहुँ
नै आँखिमे नोरक बुन नुकाबै लेल

बुझलहुँ अहाँ बैसल मोनमे छी हमर
ई दूर गेलहुँ हमरा कनाबै लेल

कोना कऽ ‘मनु’ कहतै आब अप्पन दोख
घुरि आउ फेरसँ संसार बसाबै लेल

(बहरे- सलीम, मात्रा क्रम-२२१२-२२२१-२२२१)

3

तरेगण लाख छै तैयौ नगर अन्हार रहिते छै
बरू छै भीड़ दुनियाँमे मनुख एसगर चलिते छै

सजल छै आँखिमे सपना नदी नाला हरित धरती
जकर बेटा सुखी ओ माइक श्रृंगार सजिते छै

गजब छै रीत दुनियाँ केर मरने राख धरि फेकै
मुदा सदिखन सभक मनमे अमिट सन यादि बसिते छै

अहा वा आह धरि बाजब अहाँ आ बाट निज पकड़ब
अहींकेँ हास्य अभिनयमे हमर संसार जरिते छै

सगर छै खेल आखरकेँ हँसाबै आ कनाबै छै
कतौ टुटिते हिया छै आ कतौ नव नेह रचिते छै

4
एक ठोप प्रेम चलते तड़पैत छी
मान तोहर चित्र नोरसँ पोछैत छी

प्रीतकेँ पकड़ब सहज नै आँखिसँ बुझू
सत हियाकेँ हाथ लेने हँकमैत छी

आइ बदलल सन लगै छै दुषित हवा
एक जोड़ा मोर तन-मन मिलबैत छी

सोन सन जीवन निशामे मातल रहय
तेँ उधारी माँगि दुख पिबैत छी

धातुकेँ सोना तँ बनबै छै आगिये
तेँ सिनेहक आगिमे तन जड़बैत छी
बहरे जदीद
2122-2122-2212
5
हम जँ पीलहुँ शराबी कहलक जमाना
टीस नै दुख करेजक बुझलक जमाना

भटकलहुँ बड्ड   भेटेए नेह  मोनक
देख मुँह नै करेजक सुनलक जमाना

लिखल कोना कहब की की अछि कपारक
छल तँ बहुतो मुदा सभ छिनलक जमाना

दोख नै हमर नै ककरो आर कहियौ
देख हारैत   हमरा हँसलक जमाना

दर्द जे भेटलै    नै ‘मनु’ कनी बूझब
आन अनकर कखन दुख जनलक जमाना
6
मिललौँ अपन चानसँ भेल पुलकित मोन
बीतल पहर विरहक भेल हर्षित मोन

छल आँखि सागर ताहिसँ सुनामी उठल
बहलौँ तकर वेगसँ भेल विचलित मोन

बाजल तँ जेना बुझु फूल झहरल मुखसँ
ठोरक मधुर गानसँ भेल शोभित मोन

ओकर बढ़ल डेगसँ दर्द हरिया उठल
पायलक सुनते स्वर भेल जीबित मोन

प्रीतक तराजू पर तौललौँ धन अपन
विरहक दिया जड़ते भेल पीड़ित मोन
बहरे सलीम ,मात्राक्रम २२१२ २२२१ २२२१
7
घोड़ा जखन कोनो भऽ नाँगड़ जाइ छै
कहि ओकरा मालिक झटसँ दै बाइ छै

माए बनल फसरी तँ बाबू बोझ छथि
नव लोक सभकेँ लेल सभटा पाइ छै

घर सेबने बैसल मरदबा छै किए
चिन्हैत सभ कनियाँक नामसँ आइ छै

कानूनकेँ रखने बुझू ताकपर जे
बाजार भरिमे ओ कहाइत भाइ छै

खाए कए मौसी हजारो मूषरी
बनि बैसलै कोना कऽ बड़की दाइ छै

पोसाकमे नेताक जिनगी भरि रहल
जीतैत मातर देशकेँ ‘मनु’ खाइ छै
(बहरे रजज, मात्रा क्रम २२१२ तीन तीन बेर)
8
पढल पंडित मुदा रोटीक मारल छी
बजै छी सत्य हम थोंथीक हारल छी

बुझू कोना सबसँ काते रहै छी हम
उचितवक्ता बनै छी तें त टारल छी

दियादेकें घरक घटना मुदा धनि सन
कटेबै केश कियै हम जँ बारल छी

मधुर बनबाक छल भेलौं जँ अधखिज्जू
सत्ते नोनगर लाड़ैनेंसँ लाड़ल छी

लगै छल नीक नाथूरामकेँ पोथी
मुदा गाँधीक साड़ा संग गाड़ल छी

किओ ने पूजि रहलै कोन गलती यौ
बिना सेनूर अरिपन 'पुष्प' पाड़ल छी
1222 1222 1222 सब पाँतिमे
9

कहियो तँ हमर घरमे चान एतै
नेनाक ठोर बिसरल गान गेतै

निर्जीव भेल बस्ती सगर सूतल
सुतनाइ यैह सबहक जान लेतै

मानक गुमान धरले रहत एतय
नोरक लपटिसँ झरकिकऽ मान जेतै

सुर ताल मिलत जखने सभक ऐठाँ
क्रान्तिक बिगुलसँ गुंजित तान हेतै

हक अपन "ओम" छीनत ताल ठोकिकऽ
छोडब किया, कियो की दान देतै
(दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ)-(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ)

(मुस्तफइलुन-मफाईलुन-फऊलुन)- प्रत्येक पाँतिमे एक बेर

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2013 ( बाल गजल )

हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल )बर्ख 2013 लेल ओस्ताद अमित मिश्र जीक मास जनवरीमे प्रकाशित हुनक बाल गजलकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलाह ओस्ताद परमेश्वर कापड़ि । हुनका धन्यवाद।
प्रस्तुत अछि ओस्ताद परमेश्वर कापड़ि जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।
बालगजल विमर्श

मैथिली गजलक कहबैका बडैता आशीषजी खूब बेसी चिन्हल–जानल काव्य–पुरुष छथि, एहन रचनाधर्मी मुखपुरुख “अनचिन्हार” कोना भ’ सकैछ? गजलके अपन खास प्राविधिक शब्द–भाव होइते अछि । उर्दू-फारसीसँ हिन्दी होइत, गजल मैथिलीक रचनाधर्मी अंगनइ धएने अछि आ शुरुमे ई प्रेम–विछोह, राग–विरोग, हास्य–रोदन, कुन्ठा–संत्रास आदिके गढने–मढने चतरल, पसरल विश्व परिभ्रमण करैत रहल । मैथिलीमे एकर भाव–भंगिमा आ विषय परिदृष्य बेछप रहल अछि । युगीन–सत्य, लोकयथार्थ आ समकालीन सन्दर्भक गुण–वानि आ लेप–रंग लागल अछि । एहनमे कहल जा सकैछ जे मैथिली गजल–संसारक ऐतिहासिकता आ रचनाधर्मीताक अपन खास व्याकरण, परिधि आ परिधान रहल अछि ।
मैथिली बाल संसारक अपन खास पहचान  आ पहुँच रहल अछि । ई बहुत मनभावन, सरस आ मधुर बोल–भासक रहने, बालसंसारमे बहुत प्रचलित रहल अछि । एते होइतो आधुनिक बालगीतक सभटा जड़ि–मूल बाल लोक–भाषा, बाल–मनोविज्ञान आ बालबोध, खेल संचेतना एकरा सङ लागल रहल अछि । इएह कारणे बाते बालगीतक अलग सिद्धान्त ओ व्याकरण खास नहि रहल अछि । बालगजलक रचना परम्परा बहुत एम्हर अस्तित्वमे आएल अछि । ईहो बहुत महत्वपूर्ण सत्य–तथ्य अछि जे बाल गजलक शास्त्रीयता आ सौन्दर्य–विज्ञानक संद्धान्तिक चर्चा–परिचर्चा एतए नहि भेल करैछ । बालगजल लेखनक जे परम्परा प्रचलनमे रहल अछि ओ गजलके अन्भुआर देखा दिखीस’ । एहनमे, काव्य विषयक हमरा सन लोथ–भोंथ भकोलके लेल बालगजल विषयपर मुह खोलब, गाल बजाएब होएत । आ अपने चिन्हार होइतो हमरा, अनचिन्हार कहि परिचय देनिहार आशीष अनचिन्हारजी ५टा गजल पठा एहिपर मन्तव्यात्मक विचार देवाक लेल कहिक’ दुबिधा, दूमाङिमे ध’ देल अछि ।
प्रेषित गजलपर चर्चा करबासँ पहिने एक दूटा बात आओर अपनेके मन पाड़ि दी । बालपन, नेनपनसँ मातल रहैत अछि । अपूर्व कल्पना शक्ति आ अपन खास भाव–जगत होइत छै । बच्चा गाछ–वृक्षसँ बतिया सकैछ । ओएह बालुएके दालि–भातक भोज खा’-खिया सकैछ । ठेङे लाठीके घोड़ा आ पिढ़ीएके मोटर, पिटने मुसराके बौआ आ लते–कपड़ाके कनिया–वर स’ खेलि सकैत अछि । चन्दामामाके खीर–पुरीके भार आ परी–निनियाके झुला मचकीस’ रमा’ अघा सकैत अछि । एकर प्रत्येक खेल लीलामय होइछ आ रसके हिसाबस’ बालगीतमे छौटा रस मात्रे होइछ । सौन्दर्य, विरह, विभत्सादि रसके ओकरा कोनो लेन–देन, माने मतलब नहि रहैछ । ओकर प्रत्येक खेल लीलामय होइछ आ सब खेलके खेल गीत होइत अछि ततबे नहि प्रत्येक वय आ विद्याक गीतके अलग–अलग शब्द भास होइछ । एहि सव कारणे शिशुगीत, बालगीत, बाल खेलगीत आ युवागीत–साहित्य होइत । हमरा जनिते ई सब गजल युवा साहित्यक अन्तरगत अबैत अछि ।
समकालीन रचनाधर्मीताक विषय–परिदृश्य आ भावमूमिक सौन्दर्य–व्याकरणमे युग–सत्य, लोकयथार्थ, सामाजिक सौन्दर्य तथा आन्दोलन परिवर्तनक आकांक्षा तथा अनुरागक ताव–तबर देएमे अबैछ । एहि क्रममे एहि पाँचो गजलके अंटकारने, परेखने बिचला तीन गजल सीझल, सपरल नहि लगैछ । पहिलुका गजल “दू टा बस सोहारी चाही माँ कम्मे त तरकारी चाही” सुन्नर आ महत्वपपूर्ण लगैत अछि । नजरि आ मूल्यांकनक दृष्टि आ दृष्टिकोण व्यक्ति, विद्या आ संस्कार–संस्कृति सापेक्ष होइछ । तएँ कोनो टिप्पणी एवं समीक्षा अन्तिम, परम नहि होइछ । तैयो एतेक त’ कहल जा सकैछ जे सांस्कृतिक उत्कर्ष, जातिए राग रंगमे मातल बोरल, पावनि अति महत्वपूर्ण आ पावन होइछ । एकरे सुन्नर सुभक रंग–भासमे साजि सीटिक’ गढल अमितक गजल बहुत उत्कृष्ट आ बाल मनभावन अछि –
उपहार लेने तँ आबै पावनि कते
हँसनाइ सदिखल सिखाबै पावनि कते

टिकरी बनै आ बनै पेड़ा परिकिया
तें लेर सबहक चुआबै पावनि कते

फूटै कतौ फट्टका आ अरिपन बनै
घरमे बगैंचा सजाबै पावनि कते

सब लोक आबैछ पावनिमे घर अपन
बिछुरल अपनकें मिलाबै पावनि कते

प्रतियोगितामे देल गेल ई ५टा गजल एना अछि---

१

दू टा बस सोहारी चाही
माँ कम्मे तरकारी चाही

पुरना छिपलीमे नै खेबौ
हमरो नवका थारी चाही

हमहूँ जेबै इसकुल बाबू
पूरा सभ तैयारी चाही

हाटसँ आनू पोथी-बस्ता
मौजा-जूता कारी चाही

इसकूलक जलखैमे हलुआ
पूरी आ तरकारी चाही

छीटब बीया गाछो रोपब
आँगन लग फुलवारी चाही

"नवल"सँ नै हम लट्टू माँगब
हमरो कठही गाड़ी चाही
 मात्रा क्रम : आठ टा दीर्घ सभ पांतिमे
२
        
फेर एलै दिवाली लेबै फटक्का
फोरबै मिल कए सभ मारत ठहक्का

बड़ रमनगर बुस’ट नव अनलन्हि मामा
देखते सभ भऽ गेलै कोना कऽ बक्का

घीक लड्डू दुनू हाथे दैत भरि भरि
अपन बेटाक कोजगरामे तँ कक्का

दौड़ चलबैत सासुरकेँ फटफटिया
हरसँ भरि थालमे सौंसे फसल चक्का

आइ कुसियारक ट्रककेँ परल पाँछा
संगमे ‘मनु’क गामक छौंड़ा उचक्का

(बहरे असम, मात्रा क्रम- २१२२-१२२२-२१२२)
३

तिला संक्रातिकेँ खिच्चैर खाले रौ हमर बौआ
ल’जेतौ नै तँ कनिए कालमे ओ आबिते कौआ

चलै बुच्ची सखी सभ लाइ मुरही किन क’ आनी
अपन माएसँ झटपट माँगि नेने आबि जो ढौआ

बलानक घाट मेलामे कते घुमि घुमि मजा केलक
किए घर अबिते मातर बुढ़ीया गेल भय थौआ

कियो खुश भेल गुर तिल पाबि मुरही खुब कियो फाँकेँ
ललन बाबा किए झूमैत एना पी कए पौआ

सगर कमलाक धारक बाटमे बड़ रमणगर मेला
सभ कियो ओतए गेलै कि भेलै ‘मनु’ कुनो हौआ

(बहरे रमल, मात्रा क्रम १२२२-१२२२-१२२२-१२२२)
जगदानन्द झा 'मनु'
४

इमली उपर चढ़ि भूत बैसल रहै छै
की राति भरि तेँ गाछ जोरसँ बजै छै

पाथर किए उठि जाइ छै पानिमे कह
हल्लुक उतप्लावन बलसँ बड लगै छै

लागैछ खेलक बाद बड भूख सबकेँ
ई खेल सबमे बहुत ऊर्जा जड़ै छै

एना किए दिन राति सब होइ छैकह
धरती सदति सूरजक चक्कर घुमै छै

ई जाड़ गर्मी सब कखन होइ छै कह
सूरज जखन लऽग दूर जा जा बसै छै

मुस्तफइलुन-मुस्­तफइलुन-फाइलातुन
2212-2212-2122
बहरे-सरीअ
५

उपहार लेने तँ आबै पावनि कते
हँसनाइ सदिखन सिखाबै पावनि कते

टिकरी बनै आ बनै पेड़ा परिकिया
तेँ लेर सबहक चुआबै पावनि कते

फूटै कतौ फट्टका आ अरिपन बनै
घरमे बगैचा सजाबै पावनि कते

सब लोक आबैछ पावनिमे घर अपन
बिछुरल अपनकेँ मिलाबै पावनि कते

नव रंगमे सजल आँगन लागै "अमित"
नेनाक छुट्टी बनाबै पावनि कते

मुस्तफइलुन-फाइलातुन-मुस्तफइलुन
2212-2122-2212

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2013 ( आलोचना-समीक्षा )

बर्ख २०१३मे समीक्षा, आलोचना,समालोचना आदि नैकेँ बराबर भेल तँइ " गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" ( समीक्षा, आलोचना,समालोचना प्रभाग)केँ ऐ बर्ख लेल स्थगित कएल गेल अछि।

बुधवार, 13 मार्च 2013

गुरुवार, 7 मार्च 2013

मास फरवरी 2013क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2013 ( मास फरवरी  लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास  फरवरी लेल प्रदीप पुष्प जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।



गजल 

पढल पंडित मुदा रोटीक मारल छी
बजै छी सत्य हम थोंथीक हारल छी

बुझू कोना सबसँ काते रहै छी हम
उचितवक्ता बनै छी तें त टारल छी

दियादेकें घरक घटना मुदा धनि सन
कटेबै केश कियै हम जँ बारल छी

मधुर बनबाक छल भेलौं जँ अधखिज्जू
सत्ते नोनगर लाड़ैनेंसँ लाड़ल छी

लगै छल नीक नाथूरामकेँ पोथी
मुदा गाँधीक साड़ा संग गाड़ल छी

किओ ने पूजि रहलै कोन गलती यौ
बिना सेनूर अरिपन 'पुष्प' पाड़ल छी

1222 1222 1222 सब पाँतिमे
बहरे हजज
-प्रदीप पुष्प

सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2013 ( मास जनवरी लेल )



हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2013 ( मास जनवरी लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास जनवरी लेल जगदानंद झा मनुजीक एहि गजलके चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ। 

तिला संक्रातिकेँ खिच्चैर खाले रौ हमर बौआ
ल’जेतौ नै तँ कनिए कालमे ओ आबिते कौआ

चलै बुच्ची सखी सभ लाइ मुरही किन क’ आनी
अपन माएसँ झटपट माँगि नेने आबि जो ढौआ

बलानक घाट मेलामे कते घुमि घुमि मजा केलक
किए घर अबिते मातर बुढ़ीया गेल भय थौआ

कियो खुश भेल गुर तिल पाबि मुरही खुब कियो फाँकेँ
ललन बाबा किए झूमैत एना पी कए पौआ

सगर कमलाक धारक बाटमे बड़ रमणगर मेला
सभ कियो ओतए गेलै कि भेलै ‘मनु’ कुनो हौआ

(बहरे रमल, मात्रा क्रम १२२२-१२२२-१२२२-१२२२)
जगदानन्द झा 'मनु'

मास जनवरी 2013क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2013 ( मास जनवरी  लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास  जनवरी  लेल सुमित मिश्र जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।



बीतल समय नै घुरि कऽ आबै छै
सबटा लोक बैस एतबे गाबै छै

समय सँ बड़का नै कोनो खजाना
जिनगी मे जीतल जीत हराबै छै

मोल एकर जे बूझि नै सकलनि
तँ किए नहुँ-नहुँ नोर बहाबै छै

कपट द्वेष सँ मोन आन्हर अछि
आँखि मुनि भाग्य ठोकर पाबै छै

झुलसि दुपहरिया बाट चलै छै
थम्हि कऽ मीठगर राग सुनाबै छै

समय संगहि सब दौड़ लगाबै
"सुमित"कर्मक 
बल फरियाबै छै

वर्ण-13
सुमित मिश्र



नीक शुरुआत छन्हि हिनक आ हमरा सभकेँ हिनकासँ अरबी बहरक आशा अछि।

बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

2013 केर "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान"क लेल मुख्यचयनकर्ता ( बाल गजल लेल)

आधिकारिक रूपसँ बर्ख 2013 केर "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान"क ( बाल-गजल )  लेल मुख्यचयनकर्ताक रूपमे श्री परमेश्वर कापड़ि जीक  सहमति भेटि गेल अछि। एहि सम्मानक घोषणा हरेक सालक तिला-संक्रांति दिन कएल जाइत अछि।  श्री परमेश्वर कापड़ि संपूर्ण नेपाल आ भारतमे बाल साहित्यक मर्मज्ञ बूझल जाइत छथि। आ बाले साहित्यक केर उपर हुनक रिसर्च सेहो छन्हि।

सोमवार, 28 जनवरी 2013

2013 केर "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान"क लेल मुख्यचयनकर्ता ( गजल लेल)

आधिकारिक रूपसँ बर्ख 2013 केर "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान"क लेल मुख्यचयनकर्ताक रूपमे ओस्ताद जगदीश प्रसाद मंडल जीक सहमति भेटि गेल अछि। एहि सम्मानक घोषणा हरेक सालक तिला-संक्रांति दिन कएल जाइत अछि। ओस्ताद मंडल जी मैथिली गद्य एवं गीत लेल ख्याति प्राप्त छथि आ संगे-संग नाटक, बाल साहित्य, गजल, निबंध, एकांकी आ अन्य विधामे रचनारत छथि। ई जतेबे गजल लिखने छथि ठोस लिखने छथि जकर किछु नमूना ऐ पोथीमे प्रकाशित हुनक पोथी " तीन जेठ एगारहम माघ" केर किछु गजलसँ भेटत--- https://dbb13891-a-96a2f0ab-s-sites.googlegroups.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/TeenJeth_J_P_Mandal.pdf?attachauth=ANoY7cq_uP2EBJAw0DkQhbv8x0Ap-TwzIr4tLbJ1Rye4oOMQYlra8lG9OU7MTxQFVQomDIj5_y-oGXoF2RY30vruVr46PyqHdrHnyy3onNVNi6hW-3JzdTYtjK79ECtOVgzck3pmcEuEA5-nDHTisfR15i2hEjw4byAeASEVfjRULR5YSbGr2wqXaTkGm4d1cYiTztZCS9JXm-vHI0BNZC9HcY5M8QNuG5WlFQ7nyQ5LvrN0B6q3Jzk%3D&attredirects=0

शनिवार, 19 जनवरी 2013

"गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" क समीक्षा, आलोचना, समालोचना लेल मुख्य चयनकर्ता ( साल २०१३ ) लेल




हमरा ई सूचित करैत अपार हर्ख भए रहल अछि जे " गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" ( समीक्षा, आलोचना,समालोचना प्रभाग) लेल मुख्य चयनकर्ताक रूपमे श्री शरदिन्दु चौधरी जी अपन सहमति दए देलथि अछि। श्री शरदिन्दु जी समय-साल नामक पत्रिकाक संपादक छथि आ अपन बेबाक टिप्पणी लेल ख्याति प्राप्त छथि।


मुख्य रुपसँ पत्रकार रूपमे स्थापित श्री शरदिन्दु जी व्यंगकार आ आलोचक सेहो छथि।

सोमवार, 14 जनवरी 2013

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 ( गजल )


हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 लेल ओस्ताद  पंकज चौधरी ( नवल श्री ) जीक मास  दिसम्बरमे प्रकाशित हुनक गजलकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलाह ओस्ताद जगदीशचंद्र ठाकुर "अनिल"। हुनका धन्यवाद।


प्रस्तुत अछि ओस्ताद जगदीशचंद्र ठाकुर "अनिल" जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।


पटना,
02.01.13                                                                                        
मैथिलीमे गजल लेखन तँ बहुत पहिनेसँ भ' रहल अछि मुदा गजल हेतु एकटा विशिष्ट मंचक अभाव छल। गजल-लेखनकें सशक्त, स्वस्थ, आकर्षक आ लोकप्रिय बनयबाक लेल वर्ष 2008 सँ "अनचिन्हार आखर"  द्वारा एकटा विशिष्ट मंच प्रदान करैत एहि दिशामे महत्वपूर्ण काज कएल गेल अछि। एहि लेल श्री आशीष अनचिन्हारजी धन्यवादक पात्र छथि । ओ एखनधरि प्रकाशित गजलक पोथी आ गजलकार सभसँ लोककें परिचय करौलनि आ गजल लेखन हेतु नव-नव लोककें सेहो प्रोत्साहित केलनि आ एहि लेल नव-नव आयोजन सेहो करैत आबि रहल छथि जेना परिचर्चा ,आन-लाइन मोशायरा, बाल गजल, गजल दिवस, कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान आदि। हुनक प्रयाससँ गजलकारक संख्यामे दिनानुदिन वृद्धि भ रहल अछि आ बहुत संख्यामे गजल लीखल जा रहल अछि । गजेन्द्र जी द्वारा मैथिलीमे गजलक व्याकरण प्रस्तुत कए गजल-लेखनक लेल उपयुक्त दिशा-निर्देश उपलब्ध करा क' उल्लेखनीय योगदान कैल गेल अछि ।गजलक ऐ अभियान एकटा यज्ञ थिक, उत्सव थिक । एहिमे जतेक गोटे भाग लेलनि सभ जीतल छथि, सभ प्रशंसाक पात्र छथि । मैथिलीमे गजलक भंडार भरबामे सबहक योगदान महत्वपूर्ण अछि ।गजल- लेखन मँगैत अछि अभ्यास । आनो-आनो गजलकारक रचना पढबाक -सुनबाक अभ्यास,  चिन्तन-मननक अभ्यास । अभ्यास अनैत अछि रचनामे धार, रचनामे माधुर्य आ आकर्षण, रचनामे व्याकरण आ भावक संतुलन।गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान वर्ष 2012 के अन्तर्गत अनचिन्हार आखर  पर 1273  रचना  प्रकाशित भेल । प्रत्येक मास  एकटा रचना चुनल गेल। 12 मासक 12 टा चूनल-बीछल रचना कें बेर- बेर पढलहुँ ।व्याकरणक दृष्टिटसँ अधिकांश गजल ठीक लागल ।व्याकरण आ भावक दृष्टिटसँ अमित मिश्रजी, जगदानन्द झा ‘मनु’जी, ओम प्रकाशजी, मुन्नाजी आ पंकज चौधरी "नवलश्री"  जीक  गजल नीक लागल । श्री प्रभात राय भट्ट,चन्दन झा,अनिलजी, राजीव रंजन मिश्र, कुन्दन कुमार कर्ण आ बाल मुकुन्द पाठकजी सँ और अधिक सुन्दर रचनाक अपेक्षा करैत छी । व्याकरण आ भावक अधिकतम संतुलनकें ध्यानमे रखैत दिसंबर 2012 मे प्रकाशित पंकज चौधरी "नवलश्री" जीक गजलकें पहिल स्थान पर राखल जा रहल अछि । एहि हेतु चौधरीजीकें बधाइ दैत छियनि आ एहि उत्सवमे भाग लेबवला सभ गोटेकें धन्यवाद दैत अनुरोध करैत छियनि जे परिणामक बिना चिन्ता कएने मैथिली साहित्यमे गजलक भण्डारकें भरबाले अपन-अपन योगदान  निरन्तर  दैत रहथि ।

उत्साह केर, उल्लास केर, उत्कर्ष केर
बिलहैत छी षुभकामना नव वर्ष केर ।


----------------जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल

गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 ( बाल गजल )


हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल )बर्ख 2012 लेल विदुषी इरा मल्लिक जीक मास दिसम्बरमे प्रकाशित हुनक बाल गजलकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलीह विदुषी प्रीति ठाकुर । हुनका धन्यवाद।


प्रस्तुत अछि विदुषी प्रीति ठाकुर जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।

"ऐ गजलमे बाबी आ बच्चा सभक प्यार-दुलारक विवरण प्रभावित करैत अछि, बाल साहित्यमे शिक्षा देलाक आग्रह नै रहबाक चाही बाल सुलभ आनन्दक/ आश्यर्चक भाव रहबाक चाही, ओकर मोनकेँ पढ़बाक भाव/ सामर्थ्य रहबाक चाही, दुनियाँक चिन्ता-फिकिर नै उल्लास रहबाक चाही। आ ई सभ गुण इराजीक ऐ बाल गजलमे छन्हि। आ तेँ ई हमरा दृष्टिमे ऐ बर्खक सर्वश्रेष्ठ बाल गजल अछि। ऐकेँ आलावे द्वितीय स्थानमे रुबी झा आ तृतीयमे पंकज नवलश्रीक गजल नीक लागल।"


- प्रीति ठाकुर 



गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" बर्ख 2012 ( आलोचना-समीक्षा )



हमरा सूचित करैत इ परम हर्खक अनुभव भए रहल अछि जे अनचिन्हार आखर द्वारा प्रस्तुत " गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा सम्मान" ( समीक्षा, आलोचना,समालोचना प्रभाग) बर्ख 2012 लेल ओस्ताद ओमप्रकाश जीक  प्रकाशित हुनक आलोचनाकेँ देल जा रहल अछि। हुनका बधाइ। एहि सालक मुख्यचयनकर्ता छलाह ओस्ताद राजदेव मण्डल। हुनका धन्यवाद।

प्रस्तुत अछि ओस्ताद राजदेव मण्डल जीक टिप्पणी जे की हमरा मेलपर पठाएल गेल अछि।

नमस्‍कार,
निर्णय करबाक अवसर भेटल। जइमे तीनटा श्री ओम प्रकाश झाक आ एकटा अमित मि‍श्र जीक लि‍खल आलोचना छल। सम्‍यक दृष्‍टि‍सँ देखला पछाति‍ ओम प्रकाश जीक ‘घोघ उठबैत गजल’ सभसँ नीक लगल।

राजदेव मण्‍डल
1-1-2013


मंगलवार, 1 जनवरी 2013

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर लेल )


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास दिसम्बर लेल श्रीमती इरा मल्लिक जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ। 

ई पोथी तँ हम नै पढ़बै ई तँ बहुत मोटगर छै
मुदा लगैए पढ़हे पड़तै करची बड्ड पातर छै

मिठका पुआ पकबै बाबी छन-मन भनसा घरमे
जत्ते सुन्दरि हम्मर बाबी ततबे पूआ मिठगर छै

बनलै पूआ लगलै भूख गे बुढ़िया हमरा तँ बेसी दे
ई धानी पातक चटनी तँ लागै बहुत झँसगर छै

ओकरा तँ बाबी देलकै छोटकी पूआ वाह भाइ वाह
रे नंगटा देखही हम्मर थारी तँ खुब्बे भरिगर छै

नेना भुटका मगन भेल छै बाबी हँसै छै तरे-तर
हमरा लेल तँ देवी छै जकरासँ घर डटगर छै

कौआ रे नै कर लुप-लुप पूआ धेने छौ बाबी तोरो ले
गाछसँ तों निच्चा उतर आमक गाछ झमटगर छै

सरल वार्णिक २०




मास दिसम्बर 2012क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण


हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास दिसम्बर  लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास  दिसम्बर  लेल पंकज चौधरी (नवलश्री)    जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।



गजल-३८

गढू आखर गजल कहियौ
अपन धुनमे रमल कहियौ

अजब छै रीत दुनियाकें
सुधाके सभ गरल कहियौ

करेजक काँट बनलै ओ
मुदा तैयो कमल कहियौ

पसरलै प्रीत नकली बड़
निमहले पर असल कहियौ

जँ गप हुनकर उठल कोनो
किए नैना भरल कहियौ

गमेलौं की तकर गप नै
कथी संगे रहल कहियौ

कियो दूसै करै निंदा
अपन मोनक जँचल कहियौ

रहल परिणाम प्रेमक की
किए चुप छी "नवल" कहियौ

*बहरे हजज/मात्रा क्रम:१२२२ 

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास नवम्बर लेल )

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास नवम्बर लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास नवम्बर लेल  बाल मुकुन्द पाठक जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ। 






बाल गजल

मेला चलब हमहुँ कक्का यौ
पहिरब आइ सूट पक्का यौ

खेबै जिलेबी आ झूलब झूला
संगे संग किनब फटक्का यौ

बैट किनब क्रिकेट खेलै ले
आबि कऽ खूब मारब छक्का यौ

साझेसँ अखारामे कुश्ती हेतै
पहलवानोँ तँ छै लडक्का यौ

अन्तिम बेर छी एतौ हम तँ
जाएब बाबू लऽग फरक्का यौ

कोरा मे कने लिअ ने हमरा
ई भीड़ मेँ मारि देत धक्का यौ

चलू ने जल्दी किनै ले जिलेबी
नै तँ उड़ि जाएत छोहक्का यौ

बाबूओसँ बेसी अहीँ मानै छी
छी बड्ड नीक हमर कक्का यौ

सरल वर्णिक बहर ,वर्ण 11
~ ~बाल मुकुन्द पाठक ।।


ओना ई शुरूआती रचना थिक आ आब पाठक जी अरबी बहरमे खूब लीखि रहल छथि।

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

मास नवम्बर 2012क लेल गजल सम्मान योजनाक पहिल चरण

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास नवम्बर लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास  नवम्बर  लेल बाल मुकुन्द पाठक    जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।


गजल

अहाँ हमरा बिसरि रहलौँ
वियोगे हम तँ मरि रहलौँ
घुसिकँ कोनाकँ देहेमेँ
अहाँ हमरा पसरि रहलौँ

बिसरऽ ई लाख चाही हम
बनिकऽ लस्सा लसरि रहलौँ

कियै केलौँ अहाँ ऐना
करेजसँ नै ससरि रहलौँ

छुटल घर आ अहूँ छुटलौँ
दुखेँ हम आब मरि रहलौँ

बहरे -हजज 
'मफाईलुन' (मने 1222) दू बेर 

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों