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गुरुवार, 21 मई 2026

गजल

ई संसार अछि खाली बसेरा बुझि क आयब भाइ

लेलहुँ जन्म जगमे एक दिन सभ छोरि जायब भाइ

 

साँसक डोर टूटत दूर तखने सभ भ जायत भाइ

माटिक मूरती ई देह सुख कोना क  पायब भाइ


हरिकेँ नाम जगमे जे भजत फल ओ तँ पायत भाइ

धन-बल मोहमे जीवन कते आरो गमायब भाइ

 

जायत संग कृत टा तुच्छ बाँकी सभ कहायत भाइ

काल्हिक अछि ककर जगमे भरोसा की बसायब भाइ

 

सत अछि ‘मनु’ कहै जगमे कतय हरि छोरि जायब भाइ

माया सभसँ रहि बड़ दूर  हरि-हरि मनसँ गायब भाइ

(बहरे रूप, मात्राक्रम 2221-2221-2221-2221)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’



मंगलवार, 19 मई 2026

गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए

हरिक रूप दुनियाकेँ रिझाबैए

 

मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै

हियामे रस सिनेहक जगाबैए

 

जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँ

तखन संग राधाकेँ नचाबैए

 

सलोना श्याम हे चितचोर मोहन छी

करेजक चैन गोपिक चुराबैए

 

मनोहर रूपमनु’ देख कान्हाकेँ
चरणमे शीश अप्पन झुकाबैए

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


शनिवार, 31 मई 2025

गजल

बड़ सुनल जस  माइ हे तोहर दुअरिया

जोड़ि कल अनलौं  सिनेहक हम गठरिया

 

सूप डाला कोनिया सभमे अरज छै

थाढ़ दुखलै गोरबा   फेरूँ नजरिया

 

दुख दुखीयाकेँ हरै   परमेश्वरी तूँ

माइ हमरे बेरिया मुनलअ किबरिया

 

दिन छये देने छलौं शोभा अपन जे

फेर दर्शन दिअ अहाँ हम छी भिखरिया

 

मोन टूटल जाइए  छल देह टूटल

‘मनु’ तकै छै माइकेँ सगरो नगरिया

 

(बहरे रमल, मात्राक्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

 


शुक्रवार, 8 मार्च 2024

गजल

 

सरल शुद्ध सुंदर महादेव शंकर
निरंकार शंकर महादेव शंकर


विरूपाक्ष कैलाश वासी गिरिश्वर
कपाली भयंकर महादेव शंकर


जटाजूट गंगा तिलक संग चंदा
बड़द संग अजगर महादेव शंकर


भरल भूत आँगन मरल बाघ आसन
सकल काज दुष्कर महादेव शंकर


कहींपर सजल छथि कहींपर रचल छथि
कहींपर दिगंबर महादेव शंकर


सुनाबथि कहानी सरस बनि भवानी
सहज छथि दयाकर महादेव शंकर

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि आ ई बहरे मुतकारिब मुस्समन सालिम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023

गजल

श्यामल सुंदर हियधर राजा
राघव राजा प्रियवर राजा

कौशल्या प्रिय दशरथ नंदन
चंदन लेपित मधुकर राजा

श्री सीतापति हनुमत सेवित
भ्राता पूजित जयकर राजा

शाश्वत वेदात्मा परमात्मा
सभ गुण आगर हरिहर राजा

देव उचारै राम रमाकर
लोक उचारै रघुवर राजा


-अनचिन्हार

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ एक दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे-मीर अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

शनिवार, 18 फ़रवरी 2023

भक्ति गजल

आई महाशिवरात्रि केर शुभ अवसर पर श्री शिवकेँ कृपासँ प्रस्तुत अछि एकटा शिव गजल, भक्ति गजल 

गजल 

चलू देखब हे बहीना शिवकेँ 

अपन गौरीकेँ सजनमा शिवकेँ 

 

सभक ई खाली भरै छथि झोली 

सरण आइब जे सुमरला शिवकेँ 

 

गरीबोकेँ छथि इहे सुननाहर 

दियौ जल भरि एक लोटा शिवकेँ 

 

मनुख दानव देव आ प्रेतात्मा 

सगर दुनिया मिल मनेला शिवकेँ 

 

सिया रामोकृष्ण हुनके पुजलनि 

बनेलनि सगरो अराध्या शिवकेँ 

 

कृपानिधि कैलाशवासी जय भव

चरण वंदन जग रचैता शिवकेँ 

 

मनोरथ सब पूर्ण करता शम्भू 

कहल ‘मनु’ जे मनसँ भजता शिवकेँ 

(मात्राक्रम- 1222-2/ 1222-2)

सुझाव, मार्गदर्शन व आलोचना सादर आमंत्रित अछि। की एही मात्राक्रमकेँ बहरे गोविंद मानल ज सकै छै ?

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

गजल

मात्र अर्पित करू भावना भक्तिमे
आर कोनो नै हो भूमिका भक्तिमे

डूबि गेलै सकल ओहदा भक्तिमे
भूतपति लोककर साधना भक्तिमे

पार्वती या उमा अम्बिका या सती
छै बनल किछु कथा उपकथा भक्तिमे

देहमे मोनमे प्राणमे छै बसल
सर्वगोचर सुधी चेतना भक्तिमे

दूर दूरे रहल ई निगेटिभ जगत
भेल हमरा बहुत फायदा भक्तिमे

शम्भु शंकर सदाशिव उमापति अभव
सर्वदा टारलनि आपदा भक्तिमे


सभ पाँतिमे 212-212-212-212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम अछि। गजलमे मान्य छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

गुरुवार, 5 जनवरी 2023

गजल

भगवती जकर माए टुगर रहल कोना

हाथ छै दुनू भेटल रंक कहल कोना

 

माथ पर हमर सदिखन हाथ माय छथि रखने

एहिठाम रहलै कोनो  कठिन टहल कोना 

 

लेब छोरि जीवन देबाक गप्प जे सोचत

संग-संग ओकर सुख शांति नहि बहल कोना

 

शेरकेँ घरे बैसल  नहि शिकार भेटै छै

घरसँ जे निकलबै नहि घर बनत महल कोना

 

काज नहि अपन हिस्सा केर ‘मनु’ करी हम सब

सहज सगर दुनिया नहि  बनत जहल कोना


(मात्राक्रम 212-1222 /212-1222, सभ पाँतिमे)

 ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


 

रविवार, 1 जनवरी 2023

गजल

अते नहि करू मान मोहन मुरारी
अधम दिस दियौ ध्यान मोहन मुरारी

सहज ओ सरस बनि सरल ओ तरल बनि
सुनाबथि अपन तान मोहन मुरारी

रचा रास योगी सुना सत्य भोगी
रसिक रस कला ज्ञान मोहन मुरारी

शरणमे जे पहुँचल से सभ मोक्ष पेलक
नै जानथि अपन आन मोहन मुरारी

हमर भाव जे छै अहीं लेल रहलै
लियौ तुच्छ दुभि धान मोहन मुरारी

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि। गजलमे मान्य छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मुतकारिब मुसम्मन सालिम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

सोमवार, 9 मई 2022

गजल

छथि सिया जन धिया मैथिली जानकी
मोनमे बस रहथि मृणमयी जानकी

भूमिमे भूमिका छल बनल ताहि दिन
कोखिमे सोन सन पार्थवी जानकी

बुद्धि ओ रूपमे तीक्ष्ण आ सौम्य धरि
शिव धनुषकेँ उठा कामिनी जानकी

राम तोड़ल धनुष जे जनक मोनमे
एक भेलथि अपन रामजी जानकी
भाग के दोष या राम माया रचल
वन गमन सिय हरण मानिनी जानकी

राम लक्ष्मण सकल सैन्य हनुमानपर
भार छल ताकि आनब सही जानकी

क्रूर रावण मरण दामिनी अग्निमे
आबि सासुर सुनथि बतकही जानकी

राम जानथि मुदा फेर सिय वन गमन
गर्भमे रत्न रखने रही जानकी

ॠषि वाल्मीकि रखलनि अपन धर्म आ
पोसलनि पुत्र अभिमानिनी जानकी

अश्व लव कुश पकड़ि युद्ध केलथि बहुत
हारि गेलथि अपन रामजी जानकी

भूमिजा भूमि गेलीह बड़ दुख सहैत
दर्द दुख केर छथि जीवनी जानकी

आधुनिक कालमे राम रावण जहाँ
आइयो दुख सहथि भगवती जानकी

सभ पाँतिमे 212-212-212-212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मुतदारिक मुसम्मन सालिम अछि। 11म शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

सोमवार, 31 जनवरी 2022

गजल

चाकर  एक  बेर  राखि  क'  देखू  सभटा  अहाँकेँ टहल करब
पीसब भाँग नित्य आबि क' जे जे कहबै प्रभू हम कहल करब

डरबै  भूत नै  पिसाच  सँ  कहियो  सेवा  सदति  होइते   रहत
रहबै  घर  त'  घर म' सदिखन आ बाहरमे मशानो रहल करब

नंदी   केर   ध्यान  हम  रखबै  भगतै  दौड़िकेँ  जा  क'  रोमबै
दोसर  ठाम  नै  कतौ  हम  जेबै  भरि जीवने हम बहल करब

पूजा  केर  ओरियान  क'  नित्तहुँ देखब तखन और काज हम
नव नव फूल ताकि हेरि क' छोड़ब नै हम चरणमे गहल करब 

मालिक  एतबी  दया  करियौ  ने हे नोकरी पर म' राखि लिअ
कतबो काज माँथ पर रहतै नामे जापि सभ दुख सहल करब 


                                  
मात्राक्रम अछि २२२१-२१२१-१२२२-२१२२-१२१२

अभिलाष ठाकुर

बुधवार, 21 जुलाई 2021

गजल

क्षेत्रपालक घोर रूपक भूत नायक काल भैरव
हे बटुक हे नागकेशी पाप दाहक काल भैरव

क्रोध भैरव रुद्र भैरव उग्र लोचन धूम्रलोचन
भैरवी पति पाप मोचक पुण्य दायक काल भैरव

चण्ड भैरव चंद्र भैरव श्वान वाहन मद्य पावन
शांति योगी शांतिदायी शांति वाहक काल भैरव

योगिनी प्रिय डाकिनी प्रिय शाकिनी प्रिय राकिनी प्रिय
सौम्य सार्थक लोक पोषक दुष्ट मारक काल भैरव

बुद्धि भेटल सिद्धि भेटल शब्द संगे अर्थ भेटल
कृष्ण पक्षक अष्टमी तिथि कर्म कारक काल भैरव

सभ पाँतिमे 2122-2122-2122-2122 मात्राक्रम अछि। ई बहरे रमल मोसम्मन सालिम वा बहरे रमल सालिम अठरुक्नी अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।  
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों