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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

कसीदा

कसीदा - ए - विदेह



जग घूमल सर्वत्र मुदा त्राण पाएल विदेह पर
सब गाम स्वाद चीखि चीखि लोक आएल विदेह पर

गज़ल कता रुबाई हाइकू छन्द कविता वा हौ रोला
मातृभाषा मे लिखल देखि प्राण बाजल विदेह पर

सब जाति धर्म के मैथिल जे एकत्र भेला एक ठाम
अप्पन मोनक भाव कहै धूम जमल विदेह पर

रगडा झगड़ा आदर मान छैक अप्पन लोक जेका
शुभारंभ साहित्य विधा के सौंसे देखल विदेह पर

दुर्लभ छथि जे गुरुजन अन्यथा, ज्ञान भेटैक नहि
पाबि मार्गदर्शन कविगण नित्य बनल विदेह पर

देश विदेश गून्जल गान माय मिथिला भेली प्रसन्न
गूगल नतमस्तक भेल मिथिला सजल विदेह पर

छद्म साहित्य ख़सल पिछडि लोक केलक बहिस्कार
समानांतर अकॅडमी छे शान बनल विदेह पर

कसीदा


कसीदा - ए - वैदेही





मूल्य बुझि माटिक अहां जन्म खेते लेलहु वैदेही
नारी मान बढाबय लेल स्त्री रूप धेलहु वैदेही

धनुष उठा नीपैत पोछैत अहां पूजल भोले के
ओही धनुष ल के अहां स्वयंवर केलहु वैदेही

देश विदेशक राजा आयल देखबै अपन जोर
देखि राम के दूरे से ईश्वर अहां पेलहु वैदेही

कमला कोशी बागमती तजि नेह भेल सरजू सों
आय अयोध्या भेल धन्य एत' अहां एलहु वैदेही

ससुर महात्मा ईश्वर राम सासुर बनल धाम
तीन सासु दियर संग पूर्ण अहां भेलहु वैदेही

पिता वचन के राखि मान देश तजि चलला राम
संस्कार के पाठ गुनैत संगे अहां गेलहु वैदेही

निश्छलता के लाभ उठाय रावण ठकबा आयल
देखि जटायु पंखहीन छुछे नोर देलहु वैदेही

भोर सांझ ल प्रणय निवेदन रावण आबे रोज
पर पुरुख़ बाजू कोना, त्रिन ठोढ धेलहु वैदेही

अग्निपरीक्षा देल तखनो धोबिया भरलक कान
मिथ्या आरोप बुझितो पतिक मान केलहु वैदेही

जीवन छोडि कर्तव्य लेल गेहलौ जंगल कुटिया
सूर्य समान दुहु पूत के कोना पोसलहु वैदेही

कतेक बर्छा भोंकल करेज और कतेक छै बाकी
पुनर्परीक्षा देखि सोझा धरती पैसलहु वैदेही
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों