शुक्रवार, 5 जुलाई 2024

रुबाइ

मुँह पर दरद आबि जेए मरद नै

हर बहैत जे  बसि जेए बरद नै 

जिम्मेदारी घरक गेल विदेशमे 

‘मनु’ केना बुझलक जेए दरद नै

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 28 अप्रैल 2024

गजल

वीर छी हमहीं से सुना गेलै
काज पड़िते मुदा सिता गेलै

छै चलनसारि देशमे बहुते
केलहो काज किछु गना गेलै

अंत धरि रोकलहुँ मुदा तैयो
आँखिमे नोर झिलमिला गेलै

ताकमे दुख रहै जे टुटि जेतै
धैर्यमे देखि ओ पिता गेलै

लोक उम्मेद रखने अछि फाजिल
एक हम छी जकर छिना गेलै

सभ पाँतिमे 212-212-1222 मात्राक्रम अछि। किछु पाँतिमे मान्य छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।  

मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

रुबाइ

पागल हम दुनियामे पियार तकै छी

भलमानुस सब सगर वेपार तकै छी

नै कोनो दाम मनुख  मनुखताकेँ

स्वार्थी लोकसँ ‘मनु’ सरोकार तकै छी

   ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु

रविवार, 31 मार्च 2024

गजल

हम बनब चाहै छलौं की  कि बनि गेलौं

प्रेममे प्रियतम अहीँ  केर    सनि गेलौं

 
आश जे परिवारकेँ  आब नहि रहलै

जेब खाली देख सब हीन जनि गेलै

 

सुधि रहल नै बोझ लदने अपन हमरा

प्रेम कनिको भेटते हम तँ कनि गेलौं

          

मोनकेँ भीतर घराड़ी  बसल सदिखन

छल लिखल परदेशके  देश मनि गेलौं                  

 

नेह अप्पन आब नै नेह टा रहलै

मोनमे बसि ‘मनु’ हमर साँस गनि गेलौं

 

(बहरे कलीबमात्राक्रम - 2122-2122-1222 सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु

 

मंगलवार, 26 मार्च 2024

रुबाइ

बिनु अहाँक फगुआ कतेक बेरंग अछि 

शेष बचल अहाँक यादेटा संग अछि

एही दुनियासँ  जहन अहाँ चलि गेलौं 

बुझलौं कतेक कठिन जीवनक जंग अछि                

                  ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’  

शुक्रवार, 8 मार्च 2024

गजल

 

सरल शुद्ध सुंदर महादेव शंकर
निरंकार शंकर महादेव शंकर


विरूपाक्ष कैलाश वासी गिरिश्वर
कपाली भयंकर महादेव शंकर


जटाजूट गंगा तिलक संग चंदा
बड़द संग अजगर महादेव शंकर


भरल भूत आँगन मरल बाघ आसन
सकल काज दुष्कर महादेव शंकर


कहींपर सजल छथि कहींपर रचल छथि
कहींपर दिगंबर महादेव शंकर


सुनाबथि कहानी सरस बनि भवानी
सहज छथि दयाकर महादेव शंकर

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि आ ई बहरे मुतकारिब मुस्समन सालिम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 17 फ़रवरी 2024

गजल

पोथीक तर दबि पढ़ुआ सगर मरि गेल

जे प्रेममे  डूबल जीविते तरि गेल 

 

सदिखन जतय मनमे छल डरक आतंक 

अबिते अहाँके नव फूल फल फरि गेल


धरती तपल छल जे पानि बिन तरसैत

हथियाक हँसिते बरखा निमन परि गेल

   

आनक सुखक चिंता बेस अप्पन दुखसँ

डाहसँ कतेको घर तेल बिन जरि गेल 

      

पाथरसँ मनु शाइर बनि रहल अछि आब

तोरासँ जे  मृगनयनी  नजरि लरि गेल 

(बहरे सलीममात्रा क्रम - 2212-2221-2221)

जगदानन्द झा ‘मनु

 

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

गजल

नीक केहन आइ सगरो रीत भेलै

प्रेम जकरा देलियै  तीत भेलै

 

जेब खाली साँझ हम बाजार गेलौं

जे कियो  बुझलकै भयभीत भेलै

 

बोल सोहेतै किए ककरो गरीबक

आब धनिकक गाइरो नव गीत भेलै

 

जन्म भरि गिरगिट जकाँ जे रंग बदलै

ओकरे सभके किए  जीत भेलै

 

भाइ भैयारीक मुँह चाटै कुकुर ‘मनु

लाख सोशल मीडिया पर मीत भेलै

 

(बहरे रमलमात्रा क्रम 2122-2122-2122)

जगदानन्द झा ‘मनु

मंगलवार, 30 जनवरी 2024

गजल

किछु नै कहलक ओ कहियो कऽ
हमहूँ नै बुझलहुँ बुझियो कऽ

दुश्मन यदि हो अपने लोक
रहि सकबै कोना हटियो कऽ

जे जे रहलै हुनका संग
ओकर गिनती नै रहियो कऽ

लिखलहुँ हम जेहन जे पाँति
अपनो नै बुझलहुँ लिखियो कऽ

सारापर करतै जयकार
लेखककेँ नै सुख मरियो कऽ

सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि। ई बहरे विदेह अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शुक्रवार, 5 जनवरी 2024

गजल

ओ छल सदति दुश्मन मुदा
पहुँचल हमर आँगन मुदा

कोबर भने हो काल्पनिक
छै सत्य ई परिछन मुदा

पसरत जहाँ हिंसा कपट
चौपट तहाँ जीवन मुदा

किछु फर्क हेतै मानि लेल
हम देखलहुँ अनमन मुदा

केने रही बस आस किछु
पाछू रहल परिजन मुदा

हो आइ या की काल्हि धरि
हेबे करत गंजन मुदा

सभ पाँतिमे 2212-2212 मात्राक्रम अछि। ई बहरे बहरे रजज मोरब्बा सालिम अछि। गजलक चरिम शेरक पहिल पाँतिमे मान्य छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

शनिवार, 16 दिसंबर 2023

गजल

हँसि क’ तोरब मोन नहि हम सीखने छी

नहि  करेजामे सभक घर छेकने छी

 

हम तँ लूटेलौ जतय तन मन जनम भरि

हाथ हुनकर बहुत माहुर चीखने छी 

 

आश छल अपनो समयमे  रंग हेतै

दूर रंगक  ओहि टोलसँ एखने छी

 

कीनबाकेँ लेल शहरक वास दू धुर

चास गामक तीन बीघा बेचने छी

 

करु शिकाइत एहि दुनियाकेँ कते ‘मनु

लैत मीतक  जान  सगरो  देखने छी

(बहरे रमलमात्राक्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु

रविवार, 26 नवंबर 2023

गजल

टोपीमे लगै  बुढ़ा  झक्कास छै
बुढ़िया बिन अछैते मरै  नै आस छै 

गामक आइ केहन असल रखबाड़ छै 
एको धुर बचल ओकरा नै चास छै

शिक्षा केर घरमें बिकाइ ज्ञान छै
आजुक राजनीतिक कतेक बिनास छै 
 
पूजै लेल  कन्या तकै सब लोक छै
बनबे लेल कनियाँ तकै अरदास छै

बाबू माय एने बजट बिगड़ैत छै
साढ़ू सारि ‘मनु’ बैंक खासम खास छै

मात्राक्रम : 2221-2212-2212 सभ पाँतिमे। तेसर शेरकेँ दोसर पाँतिमे दूटा अलग अलग लघुकेँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

गुरुवार, 23 नवंबर 2023

गजल

सबूतक कमी नै निशानक कमी नै
दरेगक कमी छै फरेबक कमी नै

रहल लाश सड़िते हमर संग अनको
चिता के कमी या जमीनक कमी नै

कहींपर बुझौअलि कहींपर पहेली
समय साल कोनो रहस्यक कमी नै

कतौ भूख नै छै कतौ रोग नै छै
कहत बात ईहो गवाहक कमी नै

सही लेल दुनियाँ अभावे गनेलक
गलत लेल देखू कुबेरक कमी नै

सभ पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मुतकारिब मुस्समन सालिम अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

बुधवार, 22 नवंबर 2023

रुबाइ


आपस क दे ओ हमरा  हमर बितल दिन

किरया तोरा  दे   ओ सगर बितल दिन 

आब ताकै  कतौ नहि  भेटतौ तोरा 

खुशीसँ ‘मनु’क संग जे तोहर बितल दिन 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

मंगलवार, 21 नवंबर 2023

रुबाइ


हे कृष्ण गोविंद मुरारी मिता हमर 

सगरो दुनिया केर मालिक पिता हमर

छोरि ‘मनु’क करेजा किएक तू गेलअ

घुरि आबअ नहि तँ सजत आब चिता हमर

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

गुरुवार, 16 नवंबर 2023

रुबाइ


तोरा नहि हम छोड़लौं नहि हम बेवफा

तोरा बिन नहि मरलौं नहि हम बेवफा 

प्राण गेल तोहर बुझि नहि जीवैत ‘मनु’ 

बिन काठीए जरलौं  नहि हम बेवफा 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

मंगलवार, 14 नवंबर 2023

रुबाइ


मीरा केर हरने अहाँ कते दुख छी 

साग खाय विदुरकेँ भेल बड्ड सुख छी 

हे माधव ‘मनु’ केर अपन भक्ति दय दिअ 

सबसँ सुन्नर दुनियामे अहाँक मुख छी 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों