सभसँ बड़का गजलगोहि वर भेटलै
राति दिन ओ चलाबैत हर भेटलै
सोचि गेलहुँ भरोसा जकर कय क हम
गाममे नहि कतौ ओ तँ घर भेटलै
सत्य बजबाक साहस किए नहि कतौ
हाकिमक आँखिमे आइ डर भेटलै
जीत लेलक सभक मोन ओ गाममे
देख ओकर हृदय भक्त बड़ भेटलै
‘मनु’ निभेनाइ नेहक कठिन अछि बुझल
काँट रोपल अपन पैर तर भेटलै
(बहरे मुतदारिक, मात्राक्रम : 212-212-212-212)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’