बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

किछु लीखि देलासँ, किछुओ लीखि देलासँ गजल नहि होइत छै।

मैथिली साहित्य केर मुख्यधारामे लेखन करबाक अपन एक निश्चित फर्मा छै आ ई फर्मा लेखनक नियमसँ अलग छै। उक्त मुख्यधारामे जे पाइ बला छथि, जिनकर सारक साढ़ूक सरबेटी कलक्टर छथिन, जे प्रभावशाली लोक लग उठक-बैठक करै छथि, जे साहित्यिक नियमसँ अलग भऽ हँमे हँ मिलाबै छथि से सभ लेखक छथि। मुख्यधाराक एहने एक लेखक छथि कमलेश प्रेमेन्द्र  कमलेश प्रेमेन्द्र। हिनक बहुत रास विधाक बहुत रास पोथी प्रकाशित भेल छनि जाहिमेसँ दू पोथीपर स्पष्टतः गजल विधाक संबंध छै। ई दू पोथीक नाम छै-

1. समय बदललै से ठीके की (गजल-संग्रह)

2. नहि छोड़ी अपन अधिकार (बाल गजल- संग्रह)

जँ एहि दू पोथीक बात करी तऽ हम जतेक धरि बूझि सकलहुँ अछि ई दूनू पोथीक रचना गजल विधाक नहि अछि। एहि दूनू पोथीक रचना कविता ओ गीत जे कहि सकी से अछि, गजल तऽ किन्नहुँ नहि अछि। कोनो रचनाकेँ गजल हेबाक लेल जे बहर-काफियाक जे अनिवार्यता छै से एहि पोथीक रचनामे नहिए टा अछि। बहरक बात छोड़ू, काफियो केर अकाल छै। मुदा बात तऽ वएह छै जे मुख्यधाराक साहित्य लेल साहित्य केर नियम नहि, भौतिक जगत केर नियम चलैत छै ताहिमे जँ हिनकर उपरोक्त दूनू पोथीकेँ जँ पुरस्कार भेटियो सकैए, कोनो भारी बात नहि। सरकारी अकामदीसँ लऽ कऽ प्राइभेट संस्थाक मुखिया सभ साहित्यिक तौरपर नहि भौतिके नियमपर चलैत छथि।

मैथिलीमे एकै लेखक अनेक विधामे रचना करै छथि तकर उद्येश्य एकै रहै छै जे नै एहिमे तँ ओहिमे पुरस्कार भेटि जाए। मैथिलीमे बाल साहित्य आ अनुवाद एहि पुरस्कारी विधाक लिस्टमेसँ सभसँ ऊपर अछि। कमलेशजीक जे कथित बाल गजल संग्रह आएल अछि जे वस्तुतः गीत वा कविता अछि से अही पुरस्कारक लोभसँ आएल अछि।

हम पहिनेहो कहने छी, बेर-बेर कहैत छी जे व्यक्तिगत तौरपर हमरा कोनो आजाद कि बरबाद रचनासँ दिक्कत नै अछि। एकटा पाठक तौरपर हम ओकरो सभकेँ पढ़ैत छी। हमरा दिक्कत तखन होइए जखन कि कोनो विधाक नामपर भ्रम पसारल जाइत छै। अपन कमजोरीकेँ नुकेबाक लेल विधाक नियम संगे मजाक कएल जाइत छै। उपरमे दूनू पोथी केर नाम हम गनेलहुँ से ताहिमे अपन कमजोरी नुकेबाक लेल भ्रम पसारल गेल छै्। आब पचास-सए रचना छै तँ कोने ने कोनो रचना कथ्य हिसाबें नीक हेबे करतै, किछु पाँति नीक लगबे करतै मुदा तकर नाम गजले टा किएक? कविता राखि लिअ नाम जखन नियम केर पालन करिते नै छी तखन ओ गजल कोना? नमहर-नमहर भूमिका लिखल जाइए मुदा जँ एकौ पाँति ओहिमे अपन कमजोरीक बारेमे लीखि देल जाए तँ एहन थोड़े छै जे कोनो पाठक कि कोनो आलोचक लेखककेँ फाँसी लगा देतै। मुदा जँ ई सभ अहिना भ्रम पसारैत रहता तँ कोनो ने कोनो आलोचक हिनका सभकेँ नपैत रहत, आ अहिना बेकार कहैत रहत। लेखक अपन कमजोरीकेँ सार्वजनिक करैत रचना लीखथि ई बेसी इमानदार ओ साहसी काज हेतै।

एहि लेखक केर अनेक पोथी छनि आ उम्मेद करैत छी जे आन विधाक विद्वान सभ एकर समीक्षा करताह, हम मात्र गजल विधासँ संबंध छी तँइ हम ई दू पाँति लिखबाक लेल बाध्य भेलहुँ। अंतमे एकटा आर बात एखने कमलेशजीक 18 पोथी एकै संगे लोकार्पण भेलनि आ ताहि लेल किछु लोक व्यंग्य करैत पोस्ट सभ लिखलाह हम एहि व्यंग्यक विरोध करैत छी। 18 कि 180पोथीक लोकार्पण हेबाक चाही। आ जँ ओहि पोथी सभमे कमजोरी छै तकरा अलगसँ रेखांकित करबाक चाही। वर्तमानमे हिनक जे पोथीक संख्या छनि से बढ़नि मुदा ओहि सभमेसँ ई दू पोथी गजलक नहि छनि से हम दर्ज कऽ रहल छी।


ई आलेख विदेहक अंक 437, 01 मार्च 2026 केँ प्रकाशित भेल छल। 


मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

गजल

साफ पवितर गंगा जकाँ आँखि तोहर

छापि लेलक भीतर करेजाक ओहर

 

भेल हर्षित तन-मन हमर नेह पबिते

बिहुसि जेना लोभी कतौ देखि मोहर

 

आइ गदगद अछि भेल सभ रंग मोनक

ई हृदय अछि भीतरसँ गाबैत सोहर

 

छथि पिया मनमोहक हमर चित्त छलिया

बास छनि हुनकर ई हिया मोर खोहर

 

छोड़ि दुनिया नहि ‘मनु’ कतौ आब जेतै

देखि तोहर  सुन्दर छविक दिव्य जोहर

 

(बहरे खफीक, मात्राक्रम : 2122-2212-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 7 अक्टूबर 2026

गजल

मजधारमे छोड़ि असगर गेलहुँ किए

एतेक भारी परीक्षा लेलहुँ किए

 

आएब कहि घुरि अहाँ नै अयलहुँ पिया

मोनक विरहकेँ पजाइर देलहुँ किए

 

कनि-कनि बितैए अहाँ बिन सगरो उमरि

नयनासँ ओझल पिया यौ भेलहुँ किए

 

जीवन कटत आब असगर नै ई हमर

हमरासँ एना अहाँ तमसेलहुँ किए

 

ई प्राण बिनु देह लदने थकलहुँ बहुत

माहुर तँ हम ‘मनु’ बिना नै खेलहुँ किए


(बहरे सगीर, मात्राक्रम : 2212-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

गजल

जकर नै दालि गललै कड़ुआय छै ओ

समय संगे कतेको बौराय छै ओ

 

अखाड़ामे जखन जीतब कठिन रहलै

प्रपंचक  बाट धेने हरषाय छै ओ

 

सभक सोझाँ कते हिम्मत देखबै छै

मुदा जनता हियामे घबराय छै ओ

 

पहीने छै लगै केहन नीक सभटा

जखन थापर पड़ै छै पछताय छै ओ

 

कपट कय जे बुझै छै बुझलक कियो नहि

‘मनु’क ई देख मुस्की अकुलाय छै ओ

 

(बहरे करीब, मात्राक्रम : 1222-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 16 सितंबर 2026

गजल

चलि अहाँ संगे हमर जीवन ताड़ि दिअ

छी पियासल हम कनी अमरित ढारि दिअ

 

चारु दिस अन्हार पसरल अछि मोनमे

आबि दीया  एकटा प्रीतक बारि दिअ

 

डेग डोलैए  हमर नेहक आसमे

प्राण बनि देहक अहाँ जीवन धारि दिअ

 

मेघ धेने अछि सुखक आँगनमे किए
आ अपन मुसकीसँ ओ सभटा मारि दिअ

 

आर नहि हमरा तँ चाही किछु प्रेममे

बस अहाँ जीवन अपन ‘मनु’पर हारि दिअ

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम : 2122-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


 


बुधवार, 19 अगस्त 2026

गजल

चान सन शीतल रूप केहन अहाँकेँ

अप्सरा स्वर्गक होइ तेहन अहाँकेँ

 

अछि हृदयमे मूरत अहाँ केर सोभित

मोहि लेलक ई रूप एहन अहाँकेँ

 

देखिते आनंदसँ हिया भेल हर्षित

मंद शीतल मुस्कान जेहन अहाँकेँ

 

अपन आँखिक काजर बना राखि लिअ ने

प्राण हम्मर  अछि आब रेहन अहाँकेँ

 

मोटरी दिअ माथक अपन आब सगरो

‘मनु’ तँ सबटा लय लेत गेहन अहाँकेँ

 

(बहरे खफीक, मात्राक्रम : 2122-2212-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


रविवार, 9 अगस्त 2026

गजल

हाथमे हाथ लेने सगरो चलब हम

आब तोहर बिना पल भरि नहि जियब हम

 

हो सुखद की कतेको अन्हार जीबन

बनि क छाहैर तोहर संगहि रहब हम

 

दीप नेहक मिझेए नहि आब कखनो

बनि क बाती सिनेहे हरदम जरब हम

 

अछि हँसी ई सरस निश्छल बड्ड मोहक

नेह भरि-भरि करेजा तोहर गहब हम

 

छोड़ि दुनिया कतौ नहि ‘मनु’ आब जायब

आँखिकेँ तोर सोझाँ  एतहि मरब हम

 

(बहरे असम, मात्राक्रम : 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 6 अगस्त 2026

गजल

अहाँ सादा कागद परक पहिल कोनो आखर छी

हिया जकरा चिन्है हमर पहिल नेहक सागर छी

 

नयनमे छी सदिखन अहाँ विष्णु ब्रह्मा शिव बनि कय

सहारा जीवनकेँ हमर अहीं मोनक आदर छी

 

दुखक भारसँ जीवन हमर जखन टूटय लागैए

सिनेहक जे छाहरि दिए दुलारक ओ आँचर छी

 

सगर दुनिया हँसि देखलक हमर खाली जेबी टा

हिया बुझलक जे देखि कय अहीं मोनक गागर छी

 

चरण छू कय भेटय जकर सगर तीर्थक फल 'मनु'केँ
अहाँ मैया ममतामयी हमर भागक आगर छी

 

(मात्राक्रम : 1222-2212-1222-222 सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों