शनिवार, 11 जुलाई 2026

गजल

जीवन भरि सबहक सुनिते रहलहुँ

मोनक  सभ  पीड़ा पिबिते रहलहुँ

 

गामक घर आँगन खाली कय हम

शहरक धूवाँमे  जिबिते रहलहुँ

 

पोखरि भरि बाड़ीसँ मिला लयने

बिन माछक थारी तकिते रहलहुँ

 

सभकेँ सभ किछु नहि भेटल जगमे

भागक लिखलाहा  गणिते रहलहुँ

 

मुँह बोने कौआ सगरो बैसल

चुप भय ‘मनु’ सभटा सहिते रहलहुँ

 

(बहरे मीर, मात्राकर्म : 22-2-22-22-22, तेसर शेरकेँ पहिल पाँतिमे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दिर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 9 जुलाई 2026

गजल

पैघ नहि  जीवनसँ  दोसर सजा कोनो

नहि कतौ अछि एहि दर्दक दवा कोनो

 

बंद केने  मोनमे छी  दुखक सागर

केकरो लागल भनक नहि हवा कोनो

 

सत्य अंतिम मृत्यु अछि जीवनक सबहक

बेसि एहिसँ आन अछि नहि मजा कोनो

 

बेइमानी आ कपटकेँ जतय घर नहि

अछि अहाँ लग एहि जगमे पता कोनो

 

‘मनु’ हियक भीतर अहंकार जे मारय

नहि कतो एहेन भेटल गदा कोनो

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 5 जुलाई 2026

गजल

हुनक मुस्कीक  जादू जान मारैए

नजरि खसिते हियामे बाण मारैए

 

चमक घोघेसँ रूपक पूर्णिमा लेने

सगर अँगना  कते मुस्कान मारैए

 

उदासी मोनमे  कखनो जँ पसरैए

अहीं लग आबि ई फुलपान मारैए

 

सँभाइर पैर  धरतीपर  कनी राखू

झनक पायलसँ ई सुर तान मारैए

 

‘मनु’क सगरो गजलमे बनि अहीं आखर

कते यौवन  दमकि सोहान मारैए

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


सोमवार, 29 जून 2026

गजल

प्रेममे सदिखन किए हमहीं हारलौं

भागमे सभटा लिखल तोरा बारलौं

 

चैन मोनक आब भेटत कोना कतय

मोनमे खा चोट चित अप्पन मारलौं

 

राति-दिन आँखिसँ बहै नेहक जल सतत

आगिमे तोहर विरहकेँ घी ढारलौं

 

आब दुनियामे रहब नहि तोरा बिना

देख ली हम एक छन तेँ यम टारलौं

 

मनुजियाबै लेल तोहर हिय प्रेमकेँ

खून देहक हम अपन सभटा गारलौं

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम : 2122-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा मनु


मंगलवार, 23 जून 2026

गजल

ई जँ अंतिम  राति भेलै तँ की करबै

काल्हि नै नव भोर एलै तँ की करबै

 

आइ छी हमरासँ  रूसल अहाँ बहुते

काल्हि हम्मर प्राण गेलै तँ की करबै

 

ताकि रहलहुँ बाट भरि युग अहाँकेँ हम

नेह आँखिसँ बहि क  हेलै तँ की करबै

 

हँसि क सहि लेलहुँ जमानाक सभ पीड़ा

छलसँ अपने पाछु ठेलै तँ की करबै

 

छोड़ि दुनिया  जा रहल छी भरोसेपर

भाग्य एना ‘मनु’ जँ खेलै तँ की करबै

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 19 जून 2026

गजल

हृदय कोरि कय ओ हँसै छथि

हमर मोनमे  जे बसै छथि


करेजाक बनि दर्द सदिखन

नयन नीर बनिकय खसै छथि

 

बहुत छल मनेबाक कोसिस

मुदा ओ  कपारे  रुसै छथि

 

बना कय अपन ओ बिसरने

अखन आब अम्बर धसै छथि

 

बनेबाक छल चाह जिनका

अपन बनि क ‘मनु’ ओ डसै छथि

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


रविवार, 14 जून 2026

गजल

चलू प्रेमक नगर सजनी बसाबै छी

दुनू प्रीतक डगर मिलि कय सजाबै छी

 

रहे दुनियाक डर ई आब कनिको नहि

हियामे दीप नेहक ओ जगाबै छी

 

जखन कखनो गबै छै कोइली वनमे

मधुर बंसी अहीं संगे  बजाबै छी

 

अलग कखनो कियो नहि कय सकत हमरा

करेजा खोलि सप्पत खा बताबै छी

 

मधुर गाइब गजल सुरमे हिया बोड़ल

सिनेहक छांवमे ‘मनु’केँ सुनाबै छी

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम : 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 10 जून 2026

गजल

सभसँ  बड़का गजलगोहि वर भेटलै

राति दिन ओ चलाबैत हर भेटलै

 

सोचि गेलहुँ भरोसा जकर कय क हम
गाममे नहि कतौ ओ तँ घर भेटलै  


सत्य बजबाक साहस किए नहि कतौ

हाकिमक आँखिमे आइ डर भेटलै

 

जीत लेलक सभक मोन ओ गाममे

देख ओकर हृदय भक्त बड़ भेटलै

 

‘मनु’ निभेनाइ नेहक कठिन अछि बुझल

काँट रोपल अपन पैर तर भेटलै

 

(बहरे मुतदारिक, मात्राक्रम : 212-212-212-212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों