सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए
हरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैए
मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै
हियामे रस सिनेहक ई जगाबैए
जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँ
तखन ई संग राधाकेँ नचाबैए
सलोना श्याम हे चितचोर मोहन छी
करेजक चैन ई गोपिक चुराबैए
मनोहर रूप ‘मनु’ ई देख कान्हाकेँ
चरणमे शीश अप्पन आ झुकाबैए
(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’