आजुक जीवनमे नहि नेहक मोल
बिन वर्षा नहि कनिको मेहक मोल
काका मामा भैया सभ धन केर
पाइक आगू नहि छै देहक मोल
आन्हर की बुझतै फूलक सौंदर्य
लेहरु नजरिसँ जेना लेहक मोल
नश्वर ई काया हेतै माटीक
ककरो नहि जनतब छै खेहक मोल
जगमे रहते सभ दिन कपटी लोक
भेटत कखनो नहि ‘मनु’ छेहक मोल
(बहरे विदेह, मात्राक्रम : 22-22-22-22-21)
· मेह - माने मेघ/बादल या वर्षा, मेह केर दोसर अर्थ दाउन करै लेल गाड़ल गेल खूट्टा, जकर चारू कात बरद घुमै छै।
· लेहरु – लहैर, अत्यधिक गर्म प्रदेशमे रहै बला, दोसर अर्थ नेहरु, गाम घरमे कतेक ठाम नेहरुक उच्चारण लेहरु कयल जाइत अछि।
· लेह - लेह-लद्दाख/ अत्यधिक ठंढा प्रदेश
· खेह - माने धूल, गर्दा वा छाउर
· छेह - माने अंत, सीमा, वा दुखक पराकाष्ठा।
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’