बुधवार, 3 जून 2026

गजल

जीवनक मेटैत अन्हार बाबूजी

छथि हमर भाग्यक सगर द्वार बाबूजी

 

छोड़ि सुख काटैत राति-दिन दुख छथि

प्रेम परिवारक तँ आधार बाबूजी

 

आबए संकट लड़ै ठाढ़ सोझाँ छथि

छथि घरक अनमोल रखवार बाबूजी

 

आँखिमे आशीष लेने हियामे डर

छी अहीं बच्चाक संसार बाबूजी

 

हारि कखनो जीवनक खेलमनु’ गेलै

सामने मुस्कैत पतवार बाबूजी

 

(बहरे कलीब, मात्राक्रम : 2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


मंगलवार, 2 जून 2026

गजल

साधु छै चोर मिल कहै चोर सभ

झूठकेँ सत्य एतय रटै चोर सभ

 

देखि उन्नति लगातार सगरो सभक

भीतरहि डाहमे जड़ि मरै  चोर सभ

 

लूटि कय गाम आ देश जे गेल खा

मंच पर आबि नेता बनै चोर सभ

 

राति दिन खैट शोणित गरीबक बहै

आइ चैनसँ महलमे रहै चोर सभ

 

पाप कयने अपन एहि संसारमे

आब ‘मनु’ न्याय डंडसँ डरै चोर सभ

 

(बहरे मुतदारिक, मात्राक्रम : 212-212-212-212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु

 


रविवार, 31 मई 2026

गजल

आजुक जीवनमे नहि नेहक मोल

बिन वर्षा नहि कनिको मेहक मोल

 

काका मामा भैया सभ धन केर

पाइक आगू नहि छै देहक मोल

 

आन्हर की बुझतै फूलक सौंदर्य

लेहरु नजरिसँ जेना लेहक मोल

 

नश्वर ई काया हेतै माटीक 

ककरो नहि जनतब छै खेहक मोल

 

जगमे रहते सभ दिन कपटी लोक
भेटत कखनो नहि ‘मनु’ छेहक मोल

 

(बहरे विदेह, मात्राक्रम : 22-22-22-22-21)

·  मेह  - माने मेघ/बादल या वर्षा, मेह केर दोसर अर्थ दाउन करै लेल गाड़ल गेल खूट्टा, जकर चारू कात बरद घुमै छै।

·  लेहरुलहैर, अत्यधिक गर्म प्रदेशमे रहै बला, दोसर अर्थ नेहरु, गाम घरमे कतेक ठाम नेहरुक उच्चारण लेहरु कयल जाइत अछि।

·  लेह  - लेह-लद्दाख/ अत्यधिक ठंढा प्रदेश

·  खेह  - माने धूल, गर्दा वा छाउर

·  छेह  - माने अंत, सीमा, वा दुखक पराकाष्ठा।

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 27 मई 2026

गजल

रूसल पियाकेँ मनेबै कोना हम
अपनो हियाकेँ दखेबै कोना हम


नैनासँ धारा कते नोरक बहिरहल

मोनक विरहकेँ नुकेबै कोना हम

 

छी आँखिमे आस बहुते रखने सजल

नेहक डगरकेँ बिछेबै कोना हम

 

प्रेमक सबक बिसरिए गेलाह सभ

विधि प्रेम हुनका सिखेबै कोना हम

 

भोरक किरण बनि अएलहुँ यौमनुहमर

सुख आब नेहक नुकेबै कोना हम

 

(बहरे सगीर मात्राक्रम : 2212-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झामनु



मंगलवार, 26 मई 2026

गजल

हँसू यौ पिया मोनकेँ नहि दुखाबू

अपन एहि दासीसँ नैना लगाबू

 

अहाँ बिनु विकल भेल छी राति-दिन हम

पिया यौ हमर जियाकेँ जुड़ाबू

 

सजौने कते छी अहाँ प्रीत मोनक

कनी आबि नेहक तँ दरशन कराबू

 

अहाँ बिनु अपन देह बैरी बनल अछि

उठू यौ पिया आब हमरो उठाबू

 

विरहमे मरण सन जीबैतमनुअछि

पियाजी मिलनके गजल नव सुनाबू

 

(बहरे मुतकारिब, मात्राक्रम : 122-122-122-122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


सोमवार, 25 मई 2026

गजल

हँसै छथि हिया छनमे तोरि हम्मर

सिनेहक डोर गेली छोरि हम्मर

 

गेने दूर आँखिसँ की नेह बिसरब

किए गेलखिन मुखड़ा मोरि हम्मर

 

लगा कय आस बैसल छी मोन मारल

कनी नहि सोचलनि जियरा कोरि हम्मर

 

उमड़ि आँखिसँ बसोधारा नोर बहलै

भिजल अछि भाग कोना बोरि हम्मर


सिनेहसँ आब बहुते अछि डरि रहल ‘मनु’

सगर अपने हिया कयलक  चोरि हम्मर


(बहरे करीब, मात्राक्रम: 1222-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों