गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

गजल

हुनकर प्रेमक धाहसँ हम गुलाबी गेलौं

बुझलनि नहि हमरा हम शराबी गेलौं 

 

हँसि कय हम लूटेलौं मोन सगरो अपन बुझि

भेटल नहि कनिको मोजर हिसाबी गेलौं 

 

सुनलौं बहुते एखन धरि सभक चुप सबटा 

सुनिते देरी मोनक हम जवाबी गेलौं 

 

जीवन भरि नेना पोसब रहल आस  अनके 

चाकर बनिते सरकारी नवाबी गेलौं

 

जगमे बहुते धोखा पाबि  सिखलौं रहब हम

असगर ‘मनु’ आखर संगे किताबी गेलौं

 

(मात्राक्रम 2222-222-122-122 सभ पाँतिमे) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’



बुधवार, 29 अप्रैल 2026

गजल

नहि सिनेहक मोल मिसियो बुझलक हमर

लोक हँसि हँसि कय करेजा तजलक हमर

 

डोर साँसक जेकरा देलौं हाथमे

नहि हिया ओहो तँ संपति तकलक हमर

 

करु भरोसा आब कोना ककरोसँ हम

प्रिय छल जे मोनकेँ बड़ खुनलक हमर

 

मीत छल मोनक सगर जे सुखमे बनल

बुझि घड़ी दुख केर ओ नहि सुनलक हमर

 

देत अनकर दोष नहि ‘मनु’ कनिको हिया

एहने बिधना कपारे लिखलक हमर

 

(बहरे जदीद, मात्राक्रम 2122-2122-2212) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


रविवार, 26 अप्रैल 2026

अपने एना अपने मूँह-50

जनवरी २०२५ मे कुल दू टा पोस्ट भेल जाहिमे आशीष अनचिन्हारक एक पोस्टमे अपने एना अपने मूँह अछि आ जगदानंद झा 'मनु' केर एक टा गजल अछि।

फरवरी एवं मार्च २०२५ मे कोनो पोस्ट नहि अछि।

अप्रैल २०२५ मे कुल एक टा पोस्ट भेल जाहिमे जगदानंद झा मनुक एक गजल अछि।

मइ २००५ मे कुल ५ पोस्ट अछि जाहिमे जगदानंद झा 'मनु' केर १ भक्ति गजल, १ रुबाइ, १ भक्ति रुबाइ एवं २ टा गजलक भीडियो अछि। 

जून २०२५ मे कोनो पोस्ट नहि अछि।

जुलाइ २०२५ मे कुल १ टा पोस्ट भेल जाहिमे जगदानंद झा मनुक १ गजल अछि।

अगस्त २०२५ मे कोनो पोस्ट नहि अछि।

सेप्टेम्बर २०२५ मे १ पोस्टमे जगदानंद झा 'मनु' केर १ टा गजल अछि।

अक्टूबर २०२५ मे १ टा पोस्ट भेल जाहिमे आशीष अनचिन्हारक १ टा गजल अछि।

नवंबर २०२५ मे १ टा पोस्ट भेल जाहिमे आशीष अनचिन्हारक १ टा गजल अछि।

दिसंबर २०२५ मे ३ पोस्ट भेल जाहिमे आशीष अनचिन्हारक २ टा गजल एवं जगदानंद झा 'मनु' केर १ टा गजल अछि।

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026

रुबाइ

छुपि-छुपि  राति दिन हम बाट निहारै छी 

जल्दीसँ आबू बड़ आस  कराबै छी 

पूरा होयत कखन ‘मनु’ मनोकामना

हमरा किए नहि करेजसँ लगाबै छी

                    ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

गजल

अपन एकटा पुरान वार्णिक गजलकेँ, कनीक पॉलिश कय क बहरे हजजमे प्रस्तुत क रहल छी।मतलाक मिसरा-ए-ऊला सभार, ओम प्रकाश जी, लाइव मोशायरा विदेह फेशबूक ग्रूपसँ (03/03/2012)

 

गजल

अहाँ कखनो तँ बाट हमर  घरक धरबै

अहाँ बिन हाथ नहि दोसर वरक धरबै

 

निहारै राति दिन हम बाट खाली छी

अहाँ कखनो कनी कोनो सड़क धरबै

 

सगर सिंगार टुकली नाककेँ नथिया

अहीँ सेनुर पियाजी सिथ परक धरबै

 

मिलनकेँ आसमे साजनसँ हम चललौं

गड़ी घोड़ा ज भेटल नहि टरक धरबै

 

हमर जीवन सगर अछि ई अहीँ वास्ते

अहाँ बिन छोरि जीवन ‘मनु’ नरक धरबै


(बहरे हजज, मात्राक्रम- 1222-1222-1222, मतलाक मिसरा-ए-ऊलामे दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानक छूट लेल गेल अछि।)

सुझाव, समीक्षा, आदेश सादर आमंत्रित अछि।

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शनिवार, 31 जनवरी 2026

गजल

प्रेम जिनकासँ छल मुँह मोरि लेलनि  

नेग दर्दक  द झट नाता तोरि लेलनि  


ओ हमर दर्दकेँ हँसि खिल्ली उड़ाकय

छोरि आनसँ किए नाता जोरि लेलनि  

 

प्रेम केनाइ की बुझता निर्दयी ओ

जे हृदय केकरो छनमे कोरि लेलनि

 

सीखता की चलब नेहक फूलपर ओ

संग चलनाइ शूलक जे छोरि लेलनि

 

‘मनु’ अनाड़ी कपट छलकेँ चिन्हलक नहि

मोन नहि ओ करेजोकेँ झोरि  लेलनि

 

(बहरे असम, मात्राक्रम 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

गजल

अहाँ मुस्कैत रही  हमरा देखैत रही

अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही

 

रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही

सगर गुणगान अहाँकेँ हम गाबैत रही

 

मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही

अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही

 

अहाँ  ढारैत रही डुबि हम पीबैत रही

सुनरकी  संग हिया रसमे तीतैत रही

 

अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही

पिया मनुहार सँ ई जीवन जीबैत रही

 

(मात्राक्रम 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शनिवार, 17 जनवरी 2026

गजल

हमरा प्रेम करु सदिखन बसन्ती पिया
नहि बाबूक  हम यौ आब रहलहुँ धिया

 

बहुते जतन  सोलह वर्ष सम्हारलहुँ

सहलो जाइए नहि आब टूटे हिया

 

साजन लेल रखने नेह छी कोंढ़ तर

रुकि नहि करु जुलम तरसै हमर जिया

 

आँकुर मोनमे  प्रेमक जखन फूटलै

दुनियामे रहल नहि आब कोनो ठिया

 

साउन बीत गेलै टूटि दम अछि रहल   

जल्दी आउ ‘मनु’ जरि गेल आशक दिया

 

(बहरे कबीर, मात्राक्रम 2221-2221-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों