शनिवार, 31 जनवरी 2026

गजल

प्रेम जिनकासँ छल मुँह मोरि लेलनि  

नेग दर्दक  द झट नाता तोरि लेलनि  


ओ हमर दर्दकेँ हँसि खिल्ली उड़ाकय

छोरि आनसँ किए नाता जोरि लेलनि  

 

प्रेम केनाइ की बुझता निर्दयी ओ

जे हृदय केकरो छनमे कोरि लेलनि

 

सीखता की चलब नेहक फूलपर ओ

संग चलनाइ शूलक जे छोरि लेलनि

 

‘मनु’ अनाड़ी कपट छलकेँ चिन्हलक नहि

मोन नहि ओ करेजोकेँ झोरि  लेलनि

 

(बहरे असम, मात्राक्रम 2122-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

गजल

अहाँ मुस्कैत रही  हमरा देखैत रही

अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही


रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही

सगर गुणगान अहाँकेँ हम गाबैत रही

 

मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही

अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही

 

अहाँ  ढारैत रही डुबि हम तीतैत रही

सुनरकी  संग मउध प्रेमक पीबैत रही

 

अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही

पिया अनुराग सँ ई जीवन जीबैत रही

 

(मात्राक्रम 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शनिवार, 17 जनवरी 2026

गजल

हमरा प्रेम करु सदिखन बसन्ती पिया
नहि बाबूक  हम यौ आब रहलहुँ धिया

 

साजन लेल रखने नेह छी कोंढ़ तर

रुकि नहि करु जुलम तरसै हमर जिया

 

बहुते जतन  सोलह वर्ष सम्हारलहुँ

सहलो जाइए नहि आब टूटे हिया

 

आँकुर फूटि गेलै आब मनमे हमर

रोपल  जे करेजामे सिनेहक बिया

 

साउन बित रहल दम टूटिमनु’केँ रहल

जल्दी आउ ने  जरि गेल  आसक दिया

 

(बहरे कबीर, मात्राक्रम 2221-2221-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

बुधवार, 31 दिसंबर 2025

गजल

करेजमे बसा हमरो तँ कनी  पिआर करु

अपन बना क हमरा प्रिय अहाँ दुलार करु 

 

नुका क छी अहीँकेँ हम रखने हिया त’रे

करब अहाँक पूजा नै सगरो पसार करु

 

मनक तरंग सबटा छोरि अहीँक छी बनल

विचारु नै इना जल्दीसँ अहाँ कहार करु

 

सिनेह होइ की छै आबु  तँ हम कहैत छी

जिवू खुशीसँ जीवन नै अकरा पहार करू

 

दुलार नै जतय धन केर बिना कियो करै

सिनेह ओइ ‘मनु’ दुनियासँ किना उधार करु

 

(मात्राक्रम 12-12-12-221-12-12-12 सभ पाँतिमे)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 24 दिसंबर 2025

गजल

झूठ रहि जाइ छै गरीबक कल्पना
सत्य बनि जाइ छै अमीरक कल्पना

मेहनति बाद किछु नै भेटै छै जखन
लोक तखने करै नसीबक कल्पना

चुप रहल सभ हरेक विपदामे हमर
देश छै बौक आ बहीरक कल्पना

कल्पनाशीलता भरल पेटक नियति
पेट खाली तखन अचानक कल्पना

नौकरीमे रहै परेशानी बहुत
नै कऽ सकलै कियो शरीरक कल्पना

सभ पाँतिमे 212-212-122-212 मात्राक्रम अछि। गजलक मान्य छूट लेल गल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

गजल

जिनका मानू जते सिनेही
तिनकर लच्छन तते झमेली

कोना बनलै महल अटारी
जनता लग ई परम पहेली

अइ दुनियाँ केर अतबे नियम
छूटै सभहक सखी सहेली

देखियौ बुझियौ हुनक नसीब
चंदन चौकी चिकन चमेली

देशक जनता पाँच दस देखि
अतबेपर ई वयस गमेली

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मीर अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

बुधवार, 19 नवंबर 2025

गजल

अन्याय केर महिमा खूब गाउ सर
फेर उपदेश केर तान सुनाउ सर

के कहैए अहाँ भ्रष्टाचारी छी
बस अहिना सस्ता दरपर बिकाउ सर

फल्लाँ नेता करबे करता विकास
एहन फालतू बात सभ हटाउ सर

मलाइ छेना रसगुल्ला रसमलाइ
घोंटलहुँ अहाँ कत्ते से गनाउ सर

हमर गजलमे अहाँक नामे नै अछि
सुनि कऽ हमर शेर अहाँ नहि लजाउ सर

सभ पाँतिमे 22-22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। ई बहरे मीर अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2025

गजल

सदिखन अपने सन लागत समूह
चुप्पे चुप मूडी काटत समूह

नै बाजब से सिखने छी अहींसँ
इम्हर उम्हर छै आहत समूह

बल धन संपति ओ विद्या विवेक
सभ किछु कम हो से चाहत समूह

ढौआ कम भेने कहता कुपात्र
आ ढौआ रहने चाटत समूह

जेना जेना करबै नीक काज
बस तेना तेना छाँटत समूह


सभ पाँतिमे 22-22-22-2-121 मात्राक्रम अछि। ई बहरे लोचन अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि। 

सोमवार, 1 सितंबर 2025

गजल

नुका कय मुँह अपन सगरो कनै छी हम 

विरहकेँ आगिमे  सदिखन जरै छी हम 


लगा नेहक किए ई आँच चलि गेलौं

करेजक दर्द सहियो नहि सकै छी हम

 

लगन एतेक सतबै छै बुझल नहि छल
विछोहे राति दिन घुटि-घुटि मरै छी हम 

 

नजरिमे छी सभक हारल बताहे टा

बुझत की आन आनंदे रहै छी हम

 

पिया ओता हमर ई सोचि जीबै छी

लगोने आश ‘मनु’ रस्ता तकै छी हम 

 
(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 


मंगलवार, 15 जुलाई 2025

गजल


आबि जायब हमर अंतिम बिदाई पर

फूल दय देब हाथसँ मुँह दिखाई पर 

 

नोर नहि देखलक आँखिक कियो जगमे

नजरि सबहक   हमर हाथक मिठाई पर 

 

पोसलौं पेट  जीवन भरि कमा हम मरि

घेंट लेलक कटा हँसि ओ  फिदाई पर

 

आइ दिन धरि तँ सब सहिते छलौंहेँ हम

आबि जिद गेल पापीकेँ मिटाई पर

 

केकरा ‘मनु’ कहत आ के सुनत एतअ

सब हँसै छैक आनक पिटाई पर

(बहरे मुशाकिल, मात्राक्रम - 2122-1222-1222)

✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’

 


शनिवार, 31 मई 2025

गजल

बड़ सुनल जस  माइ हे तोहर दुअरिया

जोड़ि कल अनलौं  सिनेहक हम गठरिया

 

सूप डाला कोनिया सभमे अरज छै

थाढ़ दुखलै गोरबा   फेरूँ नजरिया

 

दुख दुखीयाकेँ हरै   परमेश्वरी तूँ

माइ हमरे बेरिया मुनलअ किबरिया

 

दिन छये देने छलौं शोभा अपन जे

फेर दर्शन दिअ अहाँ हम छी भिखरिया

 

मोन टूटल जाइए  छल देह टूटल

‘मनु’ तकै छै माइकेँ सगरो नगरिया

 

(बहरे रमल, मात्राक्रम 2122-2122-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

 


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों