सोमवार, 25 मई 2026

गजल

हँसै छथि हिया छनमे तोरि हम्मर

सिनेहक डोर गेली छोरि हम्मर

 

गेने दूर आँखिसँ की नेह बिसरब

किए गेलखिन मुखड़ा मोरि हम्मर

 

लगा कय आस बैसल छी मोन मारल

कनी नहि सोचलनि जियरा कोरि हम्मर

 

उमड़ि आँखिसँ बसोधारा नोर बहलै

भिजल अछि भाग कोना बोरि हम्मर


सिनेहसँ आब बहुते अछि डरि रहल ‘मनु’

सगर अपने हिया कयलक  चोरि हम्मर


(बहरे करीब, मात्राक्रम: 1222-1222-2122)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


गुरुवार, 21 मई 2026

गजल

ई संसार अछि खाली बसेरा बुझि क आयब भाइ

लेलहुँ जन्म जगमे एक दिन सभ छोरि जायब भाइ

 

साँसक डोर टूटत दूर तखने सभ भ जायत भाइ

माटिक मूरती ई देह सुख कोना क  पायब भाइ


हरिकेँ नाम जगमे जे भजत फल ओ तँ पायत भाइ

धन-बल मोहमे जीवन कते आरो गमायब भाइ

 

जायत संग कृत टा तुच्छ बाँकी सब कहायत भाइ

काल्हिक अछि ककर जगमे भरोसा की बसायब भाइ

 

सत अछि ‘मनु’ कहै जगमे कतय हरि छोरि जायब भाइ

माया सभसँ रहि बड़ दूर  हरि-हरि मनसँ गायब भाइ

(बहरे रूप, मात्राक्रम 2221-2221-2221-2221)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’



मंगलवार, 19 मई 2026

गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैए

हरिक रूप दुनियाकेँ रिझाबैए

 

मुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहै

हियामे रस सिनेहक जगाबैए

 

जखन बाजै मधुर मुरली मुरारीकेँ

तखन संग राधाकेँ नचाबैए

 

सलोना श्याम हे चितचोर मोहन छी

करेजक चैन गोपिक चुराबैए

 

मनोहर रूपमनु’ देख कान्हाकेँ
चरणमे शीश अप्पन झुकाबैए

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झामनु


सोमवार, 18 मई 2026

गजल

झुकल तोहर नजरि बिजली खसाबैए

सजल ई तोहर रूप चानोकेँ लजाबैए

 

मधुर मुस्कान तोहर देखि कय सजनी

अपन संसारकेँ साउन बसाबैए

 

जखन आँचर उड़ल तोहर हवामे ई

हिया बेकल कतेकोकेँ कराबैए

 

कनी मुँह देख लै छी जाहि छन तोहर

उमर भरिकेँ दरद सभटा हटाबैए


बिकल ‘मनु’ प्रेममे तोहर बनल पागल

गजलमे प्राण बुझि तोरे सजाबैए

 

(बहरे हजज, मात्राक्रम 1222-1222-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 13 मई 2026

गजल

ठठड़ी बना कयलनि ओ तँ सराध हमर

जिनकासँ छल मोनक नेह अगाध हमर

 

मुनि आँखि कयलहुँ विश्वास हियासँ जकर

ओ आबि कयलनि संसार विषाध हमर

 

ओ भोंकलनि मौका देखि पिजेल छुरी

कहियो छली जे तन-मनसँ अराध हमर

 

किछु छोड़लनि नहि जीबाक भरोस कनी

संगे घड़ारी लिख लेलनि बाध हमर

 

अपने जकाँ बुझलहुँ नीक करेज सभक

‘मनु’ बस इहे जीबनमे अपराध हमर

 

(मात्राक्रम 2212-2221-121 12 सभ पाँतिमे) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


शनिवार, 9 मई 2026

रुबाइ

पपनी मोरै नहि आँखि यादे अहाँक

जीवन बहुते अन्हार बादे अहाँक

दिन राति चलैत अछि हमर करेजामे

छवि एककेँ बाद एक मादे अहाँक 

              ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


बुधवार, 6 मई 2026

रुबाइ

तोहर प्रेममे पड़ि पीबैत छी हम तँ 

 जुनि कनिको बुझै जीबैत छी हम तँ 

ताड़ीमे डूबि भोरेसँ साँझ धरि ‘मनु’

फाटल करेज अपन सीबैत छी हम तँ 

             ✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

गजल

हुनकर प्रेमक धाहसँ हम गुलाबी गेलौं

बुझलनि नहि हमरा हम शराबी गेलौं 

 

हँसि कय हम लूटेलौं मोन सगरो अपन बुझि

भेटल नहि कनिको मोजर हिसाबी गेलौं 

 

सुनलौं बहुते एखन धरि सभक चुप सबटा 

सुनिते देरी मोनक हम जवाबी गेलौं 

 

जीवन भरि नेना पोसब रहल आस  अनके 

चाकर बनिते सरकारी नवाबी गेलौं

 

जगमे बहुते धोखा पाबि  सिखलौं रहब हम

असगर ‘मनु’ आखर संगे किताबी गेलौं

 

(मात्राक्रम 2222-222-122-122 सभ पाँतिमे) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’



तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों