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शनिवार, 29 सितंबर 2012

गजल

:::::::::::::::::गजल::::::::::::::::::

मूँह जावि देलक आब हरियरी देतै ,
इ तानाशाही हमरा स' नै सहल जेतै ,

बेसी तंग केलक आब करब विरोध,
हमर धक्का में पात्त जेना उड़िया जेतै ,

बदला लेव एहन जे राखत ओ मोन,
दोबारा निकट एवाक हिम्मत नै हेतै ,

बेर-बेर पश्चाताप करत नोर बहा-बहा ,
आब तहियो ओकरा पर दया नै हेतै ,

घुमत नव जोगाड़ मे इम्हर -उम्हर,
आब कोनो मूँह जावि लगाव नै देतै .....

वर्ण -१५
अविनाश झा अंशु ......

गजल


:::::::::::::::हमर श्रद्धांजलि::::::::::::::

जतेक मिझैब आगि आउर भड़कबे करतै ,
खूनसँ भिजलै धरती मिथिला बनबे करतै ,

लेत प्रेरणा बलिदान सँ  युवा जगबे करतै ,
बाँधि माथ पर कफन आबओ लड़बे करतै ,

सीताक धरती पर अग्नि परिक्षा हेबे करतै ,
धधैक आगिसँ स्वर्ण  मिथिला बहरेबे करतै ,

आँधी जे उठि चुकल अछि आब बढबे करतै ,
क्रान्ति ध्वज सबहक हाथ में फहरेवे करतै ,

देखब तूफानी वेग में विरोधी बहबे करतै ,
विश्वक मानचित्र पर मिथिला सजबे करतै ॥

वर्ण :- १८
अविनाश झा अंशु

शुक्रवार, 18 मई 2012

गजल

प्रस्तुत अछि अविनाश झा अंशु केर गजल। ई गजल फेसबुक पर अभिषेक सिंह दीपक देने छलाह।







प्रशंसा एतेक केलहु कि हमरा बुरिया देलहु
पढाई लिखाई पर सँ हमर ध्यान हटा देलहु

पढै लिखै मेँ एको रति नै लगैत अछि हमर मोन
गजल लिखै मे अहाँ हमरा एना ओझरा देलहु

सदिखन गजलक धुन सबार रहे मोन पर
पढल लिखल सबटा जे हमरा बिसरा देलहु

परिक्षा निकट देख हमरा उठल टिस एहन
जे मोने मोन अहाँ सभ केर गरिया देलहु

माफ करब अंशु के अहां सब मनक भरास ल'
अपन बुझि अहां केर मनक बात बता देलहु

अविनाश झा अंशु
आखर_19

बुधवार, 25 अप्रैल 2012

गजल


हम जे लिखि छड़िया जाइत अछि ,
जकरे बजावि पड़ा जाइत अछि ।

सब अपने मे रहे लीन एतेक,
चैन एना किया नुका जाइत अछि ।

दुनिया केर एहन भीर-भार मे ,
निक लोक कतै हरा जाइत अछि ।

संसार के रिवाज एहन विकट,
खसै पर सेहो हँसा जाइत अछि ।

कनि सोचु केना के होइत छै ''अंशु'' ,
इन्द्रधनुषो त' बिला जाइत अछि ।

वर्ण -१३
अविनाश झा अंशु

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों