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शनिवार, 31 मार्च 2012

गजल


उ ग़ज़ल नीपरहल छथि हम तस्वीर लिखै छी
अपने हाथ सँ अपन तक़दीर लिखै छी
फाइट गेलसम्बंधक जुआन कोमल नस
फेर महकइत नज़रक तीर लिखै छी
चीखइतअछि आहट कानइत अछि सन्नाटा
जखन तरपैत तन्हाई के जंज़ीर लिखै छी
इ हम नयकहैय छी केओ और कहैय छथिन
कि जतबे लिखै छी बेनज़ीर लिखै छी
हम दुनूगोटा मिल क’ इ कि करै छी
अहाँ साँस लिखै छी हम शरीर लिखै छी

रविवार, 6 नवंबर 2011

गजल


कS रहल छी आइ विनती वेदना गवाह अछि
कतेक प्रेम हमरा अहाँ सँ गोदना गवाह अछि

आएलहाथ शंख सितुआ मोती के ललायल छी
आँखिक नीन में डूबल कल्पना गवाह अछि

साँपलोटै छै जेना तहिना धड़कि गेल छाती
विश्वास करू हमर अहाँ कंगना गवाह अछि

एकमिसिया मुस्किया के की क’ देलि हमरा
नाम जपै छी अहाँ के बिधना गवाह अछि

भ’ गेल इजोरिया आब अन्हरिया दुर्गम राति
चंद्रमा जागल राति भर सजना गवाह अछि


आँखि मिला के हमरा सँ राह पकड़ लेलि अहाँ

कोना कटै अछि दिन आब रचना गवाह अछि

मंगलवार, 25 जनवरी 2011

ग़ज़ल



कोरा में माथा रइख कS सुतइ के इच्छा अछि
अहाँ नजदीक आबि क’ मरइ के इच्छा अछि


टहटहाइत इजोरिया में फेर आउ एक बेर
टहटहाइत इजोरिया में देखइ के इच्छा अछि

कोनो बात नइ छै प्राण चइल गेलय त’ की
अहाँ के आइबते अर्थी से उठइ के इच्छा अछि


पड़ल जखन साँझ मोन भ’ गेल बड्ड निराश
अहाँ लेल भरि जिनगी बैठइ के इच्छा अछि


उड़ल जाइ छी एखन फेर नील गगन दिस
अहाँ संग नील गगन में उड़इ के इच्छा अछि

बुधवार, 22 दिसंबर 2010

ग़ज़ल


(मिथिलांचल में जनमल एकटा लड़कीक व्यथा,
जेकर विवाह कोनो आन शहर में भs गेल अछि)




माँ मिथिले के छोड़ि कS हम आन ठाम आइल छी
घर दुआर बाबूजी माय के कs प्रणाम आइल छी



चुल्हा-चौका भानस-वासन सब सखा-सहेली बिसरि कs
एगो दुल्हाक लेल हम अनचिन्हार गाम
आइल छी



ठोरक मुस्कीसँ मंद-मंद हम अपन कथा कहैय छी
आँखिक नोरसँ बूझि जाउ ल
s केकर नाम आइल छी



न दुरा अछि न बाड़ी अछि घर में दम घुटैय अछि
सच पुछू त हम अपन स्वयं द
s कS दाम आइल छी



इ दुख के क्षण सँ इ संकट सँ के उबारतैय दाता
अब कतअ जाउ अहाँ शरण में हे श्याम
आइल छी


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों