Wednesday, 30 December 2015

गजल

ऐ सालक हमर अंतिम गजल

जेठ माघ देखी
भोर साँझ खेपी

राज काज कम छै
साज बाज बेसी

राजनीति छै तँइ
राजनीति खेली

हाथ गोड़ बाँचल
टूटि गेल खेती

भोर बड़ भयावह
दीप आब लेसी

सभ पाँतिमे 21-21-22 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 29 December 2015

गजल

रूप मारूक तोहर देखते कनियाँ
ख़ून देहक सगर भेलै हमर पनियाँ

नै कतौ केर विश्वामित्र छी हमहूँ
प्राण लेलक हइर ई तोर चौवनियाँ

जरि क' तोहर पजारल आगिमे दुनियाँ
माय बापक नजरिमे बनल छै बनियाँ

नीक बहुते गजल कहने छलहुँ हमहूँ
आइ सभ किछु बिसरि बेचैत छी धनियाँ

झाँपि राखू अपन रूपक महलकेँ 'मनु'
भेल पागल कतेको देखि यौवनियाँ
(बहरे मुशाकिल, मात्रा क्रम; 2122-1222-1222)
जगदानन्द झा 'मनु'

Saturday, 26 December 2015

गजल

बाल गजल

बड़ सुंदर गलफुल्लू बौआ
घोड़ा गदहा उल्लू बौआ

अंगो भीजल पेन्टो भीजल
बड़ मूतै छुलछुल्लू बौआ

इम्हर कानै उम्हर बाजै
बड़ खच्चर गँड़िखुल्लू बौआ

हरियर पीयर उज्जर कारी
लाल गुलाबी बुल्लू बौआ

आमुन जामुन इमली सिमली
गाछे गाछे झुल्लू बौआ

सभ पाँतिमे आठ टा दीर्घ अछि
चारिम शेरक दोसर पाँतिमे अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 24 December 2015

गजल

काल बड़का जोधिन छै
फनफनाइत नागिन छै

भूख नै सहि सकलहुँ तँइ
लोक कहलक पापिन छै

देह नवका जोगी सन
मोन नवकी जोगिन छै

शब्द जैठाँ जनमै खूब
अर्थ तैठाँ बाँझिन छै

आब तोहूँ अनचिन्हार
भाग हमरे सौतिन छै


सभ पाँतिमे 2122-222मात्राक्रम अछि
चारिम आ पाँचम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघुकेँ छूट मानल गेल अछि

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 22 December 2015

गजल

कोनो   फूल  फूलल  अहाँके   मुस्की
कोनो   तान   छेड़ल  अहाँके   मुस्की

कस्तूरी    जकाँ   छै    सुगंधित   सौँसे
चारु   कात   पसरल   अहाँके   मुस्की

मज्जर  आमके छै  कि  की  गमकै छै
एगो   गाछ   मजरल   अहाँके  मुस्की

सिंगरहार      चंपा      चमेली      गेना
एक्के   ताग   गूथल    अहाँके   मुस्की

तीरक   नोखके  अधमरल  छै   सबतर
एहन   बाण   साधल   अहाँके    मुस्की

धड़कैछै   करेजा   कते   सब   लोकक
निसदिन  देखि  निखरल अहाँके मुस्की

जिनगी भरि पियासल रहल बड नीरज
अमरित  बनिक' बरसल  अहाँके मुस्की

सब पंक्ति में मात्राक्रम 2221-2212-222
अछि

गजल

एके बेर ओ मारूक मुस्की मारि गेलै
हम नै बुझलियै आ ई करेजा हारि गेलै
चंचल मोन आसक दीप कहियो नै जरेलक
प्रेमक खड़रि माचिस ओकरा ओ बारि गेलै
बनलौं चित्र छी मदहोश बिनु पीने शराब
छातीमे हमर नैना अपन जे गाड़ि गेलै
दिन आ राति हुनके यादिमे जरि रहल छी हम
चर्चा सुनि हमर ओ देखियौ हँसि टारि गेलै
नै छै बचल कनिको प्रेम खिस्सामे हमर यौ
ओ 'ओम'क सिनेहसँ सजल पन्ना फाड़ि गेलै
2221-2221-2221-22 प्रत्येक पाँतिमे। तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम ह्रस्वकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि।

गजल

आँखिक मस्ती जे अपन ओ पिया देलक
बिनु पीने हमरा शराबी बना देलक
सम्हारल छल ई करेजा बहुत जतनसँ
नैनक संकेतसँ गगनमे उड़ा देलक
अनका नचबैमे छलौं मस्त एखन धरि
ता ता थैया नाच हमरा करा देलक
जे नै बुझतै बात तकरासँ आसे की
बेदर्दी दर्दे करेजक बढ़ा देलक
कोना भेंटत "ओम"केँ चैन एतय यौ
पर्दा प्रेमक आबि अपने हटा देलक
2222-2122-1222
प्रत्येक पाँतिमे एक बेर

Saturday, 19 December 2015

गजल

गेलै दरबार अनचिन्हार
भेलै उद्धार अनचिन्हार

सभ बनि गेलै सिनेमा नीक
खाली परचार अनचिन्हार

जे खा गेलै हमर सपना से
बड़का खुंखार अनचिन्हार

ठीके महमह करैए देह
छै सिंगरहार अनचिन्हार

अप्पन की आन की ऐठाम
पूरा संसार अनचिन्हार


सभ पाँतिमे मात्राक्रम 22221-2221 अछि
तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि।

Thursday, 10 December 2015

गजल

हम झुट्ठेमे अपसियाँत
तों सत्तेमे अपसियाँत

नहियें पी सकलै शराब
जे चिखनेमे अपसियाँत

सभ खा गेलै खेनहार
किछु पत्तेमे अपसियाँत

जकरा लग सालक हिसाब
से महिनेमे अपसियाँत

के छै अनचिन्हार लेल
सभ अपनेमे अपसियाँत

सभ पाँतिमे 222-22-121 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 9 December 2015

गजल

देखियौ टुक टुक ताकै छै काठक बनल लोक
मोनमे सब किछु राखै छै काठक बनल लोक
पाँजरक हड्डी झलकै छै चामक तरसँ आब
नै किछो तइयो बाजै छै काठक बनल लोक
अपन फाटल बेमायक दर्दसँ नै कराहैत
महल अनकर टा साजै छै काठक बनल लोक
आगि छातीमे ठंढ़ा पड़ि गेलै लहकि लहकि
फूसियों मुस्की मारै छै काठक बनल लोक
कर्ज नोरक नै ककरो लग बाकी रहत आब
"ओम" कखनो नै कानै छै काठक बनल लोक
2-1-2-2, 2-2-2-2, 2-2-1-2, 2-1 मात्रा क्रम प्रत्येक पाँतिमे।

Tuesday, 8 December 2015

गजल

अपने सुरमे हम तँ गाबैत रहब
जिनगी बाजा छै बजाबैत रहब
बिरड़ो कतबो ई हिलाबै हमरा
सुन्नर फोटो नित बनाबैत रहब
कहियो बूझब हमर संकेत अहाँ
भाषा संकेतक बुझाबैत रहब
नोनी लागल जइ घरक देबालमे
एहन घरकेँ हम खसाबैत रहब
"ओमक" फुलवारी गमकतै सदिखन
ऐ फुलवारीकेँ सजाबैत रहब
2222-2122-112 प्रत्येक पाँतिमे एक बेर। चारिम शेरक पहिल पाँतिमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि।

Saturday, 5 December 2015

गजल

बड़ झूकैए जागल लोक
बड़ सूतैए जागल लोक

छै खन अनुखन सदिखन दर्द
बड़ कूथैए जागल लोक

हम्मर तोहर ओक्कर नाम
बड़ बूझैए जागल लोक

अप्पन टेटर आनक घेघ
बड़ दूसैए जागल लोक

इम्हर खधिया उम्हर भूर
बड़ मूनैए जागल लोक

हीरा मोती  माणिक संग
जश लूटैए जागल लोक

सभ पाँतिमे 222-222-21 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Friday, 27 November 2015

गजल

अक्षर मिटा जाइ छै कनी कालमे
फेरो लिखा जाइ छै कनी कालमे

सस्ता हँसी छै मुदा कहू ने किए
नोरे बिका जाइ छै कनी कालमे

किछु लोक एहन जे ओकरे आसपर
जीबन बिता जाइ छै कनी कालमे

ओ केकरो देखि खुश रहै छै आ तँइ
अपने लजा जाइ छै कनी कालमे

कैमरा छै आँखि तँइ हमर नीक सन
फोटो घिचा जाइ छै कनी कालमे

सभ पाँतिमे 2212-212-122-12 मात्राक्रम अछि
तेसर आ चारिम शेरमे एक-एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 25 November 2015

गजल

एगो दुल्हिनियाँ देखू ने
सुंदर बढ़ियाँ देखू ने

सब किछ बिसरब हुनके खातिर
एहन कनियाँ देखू ने

हमहूँ रहबै डूबल हरदम
चकमक दुनियाँ देखू ने

राजो रहने हुनके खटबै
मीता रनियाँ देखू ने

की पैसा की सोना चानी
धन लछमिनियाँ देखू ने

हरदी तेल-मसल्ला सबके
हम्मर धनियाँ देखू ने 


                    -नीरज कर्ण
---------------------------------------------
पहिल पंक्ति में मात्राक्रम
22-22-22-22
दोसर पंक्ति में मात्राक्रम
22-22-22-2

Tuesday, 24 November 2015

गजल

प्रस्तुत अछि जियाउर रहमान जाफरीजीक ई गजल


रोटी हम पर भारी बाबा
खायब की तरकारी बाबा

बाहर बाहर हमहूँ हँसलहुँ
आँखिक आँसू जारी बाबा

अपने अपगुण नहि देखल हम
ई बड़का  बीमारी  बाबा

सुख के दिनमा एबे करतै
कहि देलक दुख भारी बाबा

दौड़ रहल छी मासे मास
अफसर अछि सरकारी बाबा

अनका पर विश्वास करत के
हमही छी संहारी बाबा

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि।

डा.ज़ियाउर रहमान जाफ़री
पीएच-डी हिंदी,एम-एड
उच्च विद्यालय माफी,जिला नालंदा,बिहार,803107mob-9934847941

Friday, 20 November 2015

गजल

भक्ति गजल

रामे राम सीताराम
गामे गाम सीताराम

कारी देह उज्जर मोन
श्यामे श्याम सीताराम

डेगे डेग दुर्गा कालि
ठामे ठाम सीताराम

लछमी सरसती आँगनमे
धामे धाम सीताराम

रटि रटि जीह पावन भेल
नामे नाम सीताराम

सभ पाँतिमे 2221-2221 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिमे अंतिम दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 19 November 2015

गजल

मीता सूतल छी किए
एना रूसल  छी किए

दुनियादारी राग सुनि
एहन टूटल छी किए

सौंसे भूरे भूर अछि
एते फूटल छी किए

पुरना पुरना बात बनि
हमरा बूझल छी किए

"ओम"क मोनक फूल बनि
माला गूथल छी किए

२-२-२-२, २-१-२ प्रत्येक पाँति मे      े

Monday, 16 November 2015

गजल

छठिक शुभकामना सहित ई गजल

कनी अहीँसँ माँगब हम
खुशी अहीँसँ माँगब हम

गलत लगैत हो तैयो
सही अहीँसँ माँगब हम

भने कना कऽ दिअ लेकिन
हँसी अहीँसँ मागब हम

अपन मरण धरिक खाता
बही अहीँसँ माँगब हम

दियौ बहुत मुदा बाँचल
कमी अहीँसँ माँगब हम

अहाँ मना किया करबै
जदी अहीँसँ माँगब हम

सभ पाँतिमे 12-12-1222 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

गजल

पेरिस होय वा मुम्बई, खूनक रंग लाल रहै
काटल थुरल लाशसँ लिखल धरतीपर सवाल रहै

धर्मक नामपर मचल तांडव, एना किए भ' रहल
मनुखक जन्म भेलै किए, बढ़ियाँ माल-जाल रहै

सुन्नर छै धरा ई, गगन सेहो बड्ड नीक रचल
चाही जन्म नै एत', मनुखे मनुखक जँ काल रहै

गीता वेद कुरआन पढ़लौं, बाईबिलो तँ पढ़ल
सबठाँ लिखल खिस्सा पवित्र प्रेमक विशाल रहै

अनका जीब' नै देब, की धर्मक यैह काज कहू
एहन धर्म "ओम"क कहाँ  छै, ई जकर हाल रहै

२ २ २ १, २ २ १ २, २ २ २ १, २ १ १ २    प्रत्येक पाँतिमे एक बेर

Saturday, 14 November 2015

गजल

बाल गजल


बकरी आबै अर्रर
कुक्कुर भागै हर्रर

बगड़ा मैना बगुला
कौआ बाजै कर्रर

इम्हर ढन उम्हर ढुन
बौआ पादै भर्रर

भीजै अंगा पैन्टो
बौआ मूतै छर्रर

घिरनी नाचै घन घन
गुड्डी उड़लै फर्रर

सभ पाँतिमे 22-22-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि।

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 12 November 2015

गजल

ओकर रूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा
रंग अनूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

पथिया डाला मौनी सुप्ती कनसुप्ती
छिट्टा सूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

ऐ पूजा पाठक बदला जिनगी मंत्रक
जापे जूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

ओ भेटै की नै भेटै तैयो ओकर
छापे छूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

कहियो एतै अनचिन्हार हमर आँगन
चुप्पे चूप बहुत दूर लऽ जेतै हमरा

सभ पाँतिमे 222+222+222+22 मात्राक्रम अछि
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 9 November 2015

गजल

बाल गजल

खच्चर मच्छर आबै छै
खाली हमरे काटै छै

गन गन घन घन सौंसे जे
बड़ सुंदर धुन गाबै छै

की करतै मच्छरदानी
खूनक दाने माँगै छै

कछुआ मोर्टिन सभ बेकार
डेंगू हमरो लागै छै

मच्छर लग ई बच्चा की
बुढ़बो थर थर काँपै छै

सभ पाँतिमे 22-22-22-2 मात्राक्रम छै
चारिम शेरक पहिल पाँतिल अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Sunday, 8 November 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-4

वीनस केसरी




942, मुट्ठीगंज, आर्य कन्या चौराहा, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश-211003
मोबाइल-9453.004398
venuskesri@gmail.com
अंजुमन प्रकाशनक महत्वपूर्ण संस्थानक कर्ता छथि आ कम दामपर ई पाठककेँ पोथी उपल्बध कराबै छथि।जश्ने-गजल आ अंतरराष्ट्रिय गजल सम्मेलनक सफल आयोजन कऽ कऽ वीनसजी गजलकेँ एक परिधिसँ बाहर आनि देने छथि।

प्रकाशित पोथी- गजल की बाबत। ऐ पोथीमे गजलक व्याकरणकेँ नीक तरीकासँ बुझाएल गेल छै आ ई हिंदीमे सरलतम तरीकासँ लिखल गेल पोथी छै। वीनसजी जेना व्याकरणकेँ प्रस्तुत करै छथि तैसँ भाव बेसी सरल भऽ जाइत छै। आ इएह चीज हुनक गजलकेँ महत्वपूर्ण बनबैत अछि।


पहिने हिनकर एकटा शेरक तेवर देखू--

बड़े हुए थे जो छोटा हमें बताने से
चुरा रहे हैं नज़र आज वो ज़माने से

आ आब हिनके दू टा गजल पढ़ू-


गजल
1
हर समंदर पार करने का हुनर रखता है वो
फिर भी सहरा पे सफ़ीने का सफ़र रखता है वो

बादलों पर खाहिशों का एक घर रखता है वो
और अपनी जेब में तितली के पर रखता है वो

हमसफ़र वो, रहगुज़र वो, कारवां, मंज़िल वही,
और खुद में जाने कितने राहबर रखता है वो

चिलचिलाती धूप हो तो लगता है वो छाँव सा,
धुँध हो तो धूप वाली दोपहर रखता है वो

उससे मिल कर मेरे मन की तीरगी मिट जाए है,
अपनी भोली बातों में ऐसी सहर रखता है वो

जानता हूँ कह नहीं पाया कभी मैं हाले दिल,
पर मुझे मालूम है सारी खबर रखता है वो

2

ये कैसी पहचान बनाए बैठे हैं
गूँगे को सुल्तान बनाए बैठे हैं

मैडम बोली थीं, घर का नक्शा खींचो
बच्चे हिन्दुस्तान बनाए बैठे हैं

आईनों पर क्या गुजरी है, क्यों ये सब,
पत्थर को भगवान बनाए बैठे हैं

धूप का चर्चा फिर संसद में गूँजा है
हम भी रौशनदान बनाए बैठे हैं

जंग न होगी तो होगा नुक्सान बहुत
हम कितना सामान बनाए बैठे हैं

वो चाहें तो खुद को और कठिन कर लें
हम खुद को आसान बनाए बैठे हैं

पल में तोला, पल में माशा हो कर वो
महफ़िल को हैरान बनाए बैठे हैं

आप को सोचें, दिल को फिर गुलज़ार करें
क्यों खुद को वीरान बनाए बैठे हैं

Thursday, 5 November 2015

गजल

अप्पन गाम बिसरल छी
गाछक आम बिसरल छी
नित नब खेलमे बाझल
माटिक दाम बिसरल छी
ठीकेदार हम धर्मक
रामक नाम बिसरल छी
गाँधी हम उचारै छी
हुनकर राम बिसरल छी
छाहरि "ओम" बाजल किछु
ककरो घाम बिसरल छी

रुबाइ

बहैत धार हमर जिनगी आ कछेर अहाँ
सुनबै छी जिनगीक तान बेर बेर अहाँ
आँखि मूनल रहै वा फूजले रहै हमर
हमर सपनामे कएने छी घरेर अहाँ

रुबाइ

कहियो तँ करेजासँ हमरा सटा क' देखियौ
हमर नैनासँ अपन नैना मिला क' देखियौ
बनि जेतै एकटा इतिहासे अमर प्रेमक
हमर प्रेमकेँ करेजामे ढुका क' देखियौ

रुबाइ

विरहक हमर उपचार नै, अहाँ बिनु जीबि लए छी कहुना
देखलक कियो नै फाटल करेज, जकरा सीबि लए छी कहुना
सुखाएल नयनक ई घाट देखि लोक बूझै निसोख हमरा
कियो नै बूझै नोरक धार नयनसँ हम पीबि लए छी कहुना

गजल

हमर करेजक जान तिरंगा
भारत-भूमिक शान तिरंगा
शोषित लोकक आस बनल छै
आमजनक अरमान तिरंगा
नजरि उठेतै दुश्मन जखने
बनत हमर ई बाण तिरंगा
मोल मनुक्खक होइत की छै
गाबि कहै छै गान तिरंगा
राम-रहीमक बातसँ आगू
"ओम"क अछि सम्मान तिरंगा
मात्राक्रम दीर्घ-ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ दू बेर प्रत्येक पाँतिमे।

रुबाइ

चानक चमक बढ़ि गेल अछि
मोनक धमक बढ़ि गेल अछि
जहिया सँ हुनकर रूप देखल
गामक गमक बढ़ि गेल अछि

रुबाइ

राति बीतल जाइए
मोन तीतल जाइए
हारि बैसल छी हिया
प्रेम जीतल जाइए

गजल

मोन वैह गलती बेर बेर करैए
चान केर चाहत आब फेर करैए
पूरलै कहाँ पहिलुक सबेरक सपना
आस नब किए एखनहुँ ढेर करैए
जीबि रहल मारल मोन भूमि धएने
सदिखने तँ ई जिनगी अन्हेर करैए
भाँग पीबि सनकल नाचि रहल मनुख ई
सनकि सनकि कोना ई घरेर करैए
मोन भरि छलै गप ओम केर हिया मे
ओहिना तँ नै गप सेर सेर करैए

गजल

हमर बात कियो बुझलक कहाँ
हमर मोन कियो तकलक कहाँ
चमकि गेल छलै बिजुरी कतौ
हमर अन्हार कियो हरलक कहाँ
बात सुनल सभक नमहर सदति
हमर छोट कियो सुनलक कहाँ
राखि हाथ मे बम आ पिस्तौल
हमर नाच कियो नचलक कहाँ
ओम जपि हरक नाम सदिखन
हमर नाम कियो जपलक कहाँँ

गजल

आब हम बहुत सुधरि गेल छी
कष्ट तँ अनकर बिसरि गेल छी
की समाज आ की सामाजिकता
ऐ सँ कहिये सँ ससरि गेल छी
कखन चमकतेै मेघ गगन मे
रातिये सँ हम उमरि गेल छी
जूनि चिकरबै सभक हाल पर
मारि खा क' सब कुहरि गेल छी
ओम निखरलै चुपे रहि बैसले
सब कियो अहूँ निखरि गेल छी

Tuesday, 3 November 2015

गजल

मोहक  नयन   तोहर  नयन
चंचल  नयन    सुन्दर  नयन

खटगर सनक मिठगर सनक
रस में  सनल  रसगर  नयन

मधुबन  नयन  चानन नयन
छौ   प्रेम  के  कानन  नयन

किछु जोग में  किछु टोन में
किछु मन्त्र में  बान्हल नयन

छौ  रूप   तोहर   चान  सन
आ  चान  सन  शीतल नयन

सब में अलग मुख में सजल
छौ  प्रेमरस  भीजल  नयन

भारी   नयन   आरी   नयन
छौ  मेघ  सन   कारी  नयन

काजर सजल जौं आँखि में
बस   भेल    दूधारी   नयन

किछु नै बुझल  मासूम बड
अनबुझ मुदा  सातिर नयन

सौ  जानमारुक  बाण  सन
बोझल रहल कातिल नयन

                  -नीरज कर्ण

सभ पाँति में 2212 2212
मात्रक्रम अछि।

गजल



कुक्कुर सनकेँ नेता छै
गदहा सनकेँ चमचा छै

हाथी हाथी अफसर सभ
चुट्टी सनकेँ जनता छै

शेरक बाघक संगी जे
से बकरी लग दैता छै

लुक्खी घोरन हमरे सन
हरियर गाछक भगता छै

बड़ कंफ्यूजन हमरा अइ
बगुला सनकेँ कौआ छै

सभ पाँति मे  222-222-2
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Saturday, 31 October 2015

गजल

जंगलराज दंगाबाज
जी महराज जै महराज

छै बेकूफ देशक लोक
नेता लग ने कनियों लाज

फरसा आनि गरजै खूब
मंतर कटि मरै नेमाज

नेता नीक बेटा नीक
जनता सभकेँ अतबे काज

अनचिन्हार गाबै खूब
कुर्सी गीत सत्ता साज

सभ पाँतिमे 2221+2221 मात्राक्रम अछि
दोसर चारिम शेरक दोसर पाँतिमे एक-एकटा दीर्घकेँ लघु मानल गेल अछि

सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 28 October 2015

गजल


बहुत बेर हमरा देखने हेतै
बहुत बेर हमरा चाहने हेतै

अलोपित सगर दुख केकरो अबिते
बहुत बाट ओकर जोहने हेतै

इयादक रमनगर फील्डमे धीरे
सँ गुड़कैत मुस्की रोकने हेतै

छलै रौद बड़ कड़गर सिनेहक आइ
अदौड़ी हँसीकेँ खोटने हेतै

बहुत कानि अनचिन्हार बनलै
करेजा कियो बड़ तोड़ने हेतै

चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि

सभ पाँतिमे 122-1222-1222 मात्रक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Sunday, 25 October 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-3

आजुक परिचयमे छथि संजय कुमार कुंदनजी। हिनक परिचय एना अछि--



जन्म-- 7 जनवरी 1955, फॉरबिसगंज (अररिया)
प्रकाशित  काव्य संग्रह-- 'बेचैनियाँ' (2002),'एक लड़का मिलने आता है'(2006), 'तुम्हें क्या बेक़रारी है' (2014), 'भले तुम और भी नाराज़ हो जाओ'(प्रकाश्य).
गजल आ नज्म संग कहानी लेखन सेहो।
संपर्क- द्वारा श्री आर.एन.ठाकुर, शर्मा लॉज के पहले,मोहनपुर ,पुनाईचक, पटना-23(बिहार)
मो. 09835660910

हिनक दू टा गजल पढ़ल जाए--
1

मेरी लुग़त का शायद इक लफ़्ज़ हो ज़िन्दा-सा
दुनिया  से  तेरी  गुज़रा  सो   एक  तमाशा-सा

सदियों का सफ़र कोई  जारी था  मेरे  अन्दर
और   देखनेवालों  ने  देखा   मुझे    बैठा-सा

देखो  न  हिक़ारत  से   हमलोग भी इन्सां  हैं
हाँ , तन पे नहीं रेशम , हाँ , रंग  है  उतरा-सा

वो  लोग  भी  कैसे  थे  देखा  हो मुहब्बत को
लगता है  कहानी-सी , लगता है  फ़साना-सा

वो  लौट के  आएगा  , क्या  लौट के  आएगा
लौटे हुए  क़दमों  की  आहट  के  भरोसा-सा

वैसे  तो  मुलाक़ातें  अब  भी  हैं  हुआ करती
लेकिन  है कहाँ अब  वो  अन्दाज़  पुराना-सा

'कुन्दन'  को  कहीं  देखा ?  पहचानना  आसाँ  है
कुछ-कुछ वो लगे सुलझा,कुछ-कुछ वो दीवाना-सा

2

देखकर चार सू  उठता है  यही एक  सवाल
कब तलक करनी है बर्दाश्त यही सूरते-हाल

एक ग़ुलामाना ज़हन  उसपे हुकूमत से मरूब
कैसे समझोगे तुम आज़ाद तबीयत का मलाल

रहबरे-मुल्क  के पाँओ  तले  सर  है  अपना
हम रियाया हैं के रखना है हमें  उसका ख़याल

बात फैलाई है  ताजिर  की  सियासत ने  यही
पेट की भूख से बढ़कर हैं मज़ाहिब के  सवाल

इक न  इक  सामरी होता  है  यहाँ  तख़्तनशीं
चश्मे-मज़लूम  पे बुनता है तिलिस्मों के जाल

बात से भर न सकेगा ये  रियाया  का शिकम
हाकिमे-शह्र, ज़रा एक भी रोटी  तो  निकाल

इक ज़रा आज ज़ुबाँ मेरी खुल गई  "कुन्दन"
ज़र्द होते हुए चेहरे की ये रंगत  तो  सँभाल

Saturday, 24 October 2015

गजल


दू देहक तों जान छिही
हम कत्था तों पान छिही

सोहर कोबर निरगुन रस
हम तबला तों तान छिही

सौंसे बाजै खुट्टो सभ
हम पगहा तों छान छिही

बरछी भाला बंदुक संग
हम धनुषा तों बान छिही

मसुरी राहड़ि तीसी आ
हम मड़ुआ तों धान छिही

सभ पाँतिमे सात टा दीर्घ अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Friday, 23 October 2015

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-2


डा. बलराम शुक्ल


(बलरामजी अपन परिवारक संग)

असिस्टेण्ट प्रोफेसर
संस्कृत विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली 110 007
मो. 09818147903
ईमेल संकेत– shuklabalram82@gmail.com
जन्म  – 25 सितम्बर 1981, गोरखपुर (भारत)
अध्ययन
स्नातक(2001) – संस्कृत, अंग्रेजी साहित्य, मध्यकालीन इतिहास
               गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर
परास्नातक(2003)– संस्कृत (व्याकरणशास्त्रमे विशेषज्ञता)
                दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली
                (विश्वविद्यालयमे सर्वप्रथमस्थान एखन धरिक रिकार्ड अंकक
                 उपलब्धि लेल सी डी देशमुख स्वर्णपदक प्राप्त)
शोध (2007)   –   व्याकरण तथा भाषाविज्ञान
                 दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली
   (शोधक विषयवाक्यार्थ : "भारतीय सिद्धान्तों का रेलेवेंस सिद्धान्त के सन्दर्भ में विश्लेषण "
(रेलेवेंस पाश्चात्त्य भाषाशास्त्रमे प्रतिपादित एकटा वाक्यार्थ सम्बन्धी एकटा नवीन सिद्धान्त छै जकर प्रतिपादन Dan Sperber तथा Dierdri Wilson नामक विद्वान केलखिन्ह एकर प्रमुख कथ्य छै कि प्रत्येक भाषिक संवाद रेलेवेंसक गारण्टीसँ युक्त होइत छै, मुदा   सभ रेलेवेंसकेँ निश्चित करऽ बला तत्व सभहँक परिगणन नै केन छथि प्रस्तुत शोधमे भारतीय सिद्धान्त सभहँक सहायतासँ सिद्धान्तकेँ दृढतर करबाक प्रयत्न कएल गेल छै। )
प्रमाणपत्र (2008) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान
डिप्लोमा (2009) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान
एडवांस डिप्लोमा (2010) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान
उच्चतर अध्ययन (2011) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य , फ़ारसी भाषा एवं साहित्य विकास
                            केन्द्र , तेहरानईरानप्रथम स्थान
परास्नातक(2012) – फ़ारसी भाषा एवं साहित्य  (प्राचीन साहित्यमे विशेषज्ञताक संग)
                             दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
                             विश्वविद्यालयमे प्रथम स्थान, फ़िरदौसी स्वर्ण पदक प्राप्त 

अध्यापनअनुभव
2014सँ असिस्टेण्ट प्रोफेसर संस्कृतसंस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय , दिल्ली
2005सँ 2014असिस्टेण्ट प्रोफेसर संस्कृत, हिन्दू कालेज , संस्कृत विभाग , दिल्ली
                           विश्वविद्यालय दिल्ली
                           व्याकरण , भाषाविज्ञान , साहित्य तथा दर्शन केर निरन्तर अध्यापन
                           पांचटा शोधार्थीक शोध निर्देशन
2004असिस्टेण्ट प्रोफेसर  संस्कृत, हंसराज कालेज , दिल्ली विश्वविद्यालय दिल्ली7
2004सँ अद्यावधिदिल्ली विश्वविद्यालय एवं पत्राचार महाविद्यालयमे संस्कृत व्याकरणक निरन्तर अध्यापन


उपलब्धियां
2013राष्ट्रपति द्वारा युवा संस्कृतविद्वानक रूपमेबादरायण व्यास पुरस्कारसम्मानित
2011द्वितीय ईरान विश्वकवि सम्मेलनमे भारतक प्रतिनिधित्व करबाक हेतु तेहरान तथा
           शीराजमे आमन्त्रित अन्य सांस्कृतिक गतिविधि लेल ईरानक विभिन्न शहर सभमे छः 
          बेर भाग ग्रहण। 
2011दर्शन विभागलखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पुनश्चर्या कार्यक्रममे निम्नोक्त  
           विषयपर अभिभाषण लेल आमन्त्रित
          . भारतीय भाषा दर्शन की प्रमुख समस्यायें
          . वैयाकरणों की भाषा दृष्टि
2009सांस्कृतिक संस्था आरोही  द्वारा उर्दू कवि फैज अहमद फैजख जन्म शताब्दीक
          अवसरपर व्याख्यान लेल आमन्त्रित
2004 सँ अद्यावधिसंस्कृत भारती संस्था द्वारा संस्कृत माध्यमसँ संस्कृत व्याकरणपर वक्तृत्
           लेल अनेक बेर आमन्त्रित
2005विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शोध लेल वरिष्ठ शोधवृत्ति प्रदत्त
2003विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा शोध लेल कनिष्ठ शोधवृत्ति प्रदत्त
2003विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण
संगोष्ठी सभमे प्रस्तुत शोधपत्र
2015लोहिया महाविद्यालय चूरूमे प्रस्तुतप्रातिशाख्यों पर आधुनिक जगत् में हुए शोध
            कार्य।
2014राष्ट्रिय संस्कृत संस्थानमे प्रस्तुतसंस्कृत में अनूदित फ़ारसी साहित्य।
2011 –  संस्कृत विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे प्रस्तुत–   
             मौलाना रूमी की मस्नवी में पञ्चतन्त्र की प्रस्तुति
2011शिब्ली कालेज आजमगढ द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठीमे  प्रस्तुत
             संस्कृत साहित्य में मुहम्मद
2011अन्तर्राष्ट्रिय संस्था वेव्स द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत
            वेदान्त का आधुनिक जीवन में उपयोग
2010इन्द्रप्रस्थ महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत
            वेदाध्ययन में व्याकरण का योग
2010लेडी इर्विन कालेज , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत
             प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली
2009लेडी इर्विन कालेज , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत
            जीवन पद्धति के रुप में भारतीय दर्शनएक विहंगम दृष्टि
2008मिराण्डा हाउस , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संगोष्ठीमे प्रस्तुत
            आधुनिक संस्कृत साहित्य में छन्दों की प्रवृत्ति
कार्यशालायें
2015संस्कृत विभाग , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित  विभिन्न दर्शनमे
            प्रतिबिम्बित मीमांसाक सिद्धान्त विषयपर कार्यशाला।
2011संस्कृत विभाग , दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वाक्यपदीयपर आयोजित 
            कार्यशाला
2011संस्कृत विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ब्रहमसूत्रपर आयोजित
            कार्यशाला
2011ईरान सांस्कृतिक भवन , दिल्ली द्वारा आयोजित फ़ारसी तथा सामान्य पाण्डुलिपि
            विज्ञानपर आयोजित कार्यशाला
2009दिल्ली विश्वविद्यालयक उच्चशिक्षा विकास विभाग द्वारा आयोजित ओरियेण्टेशन
            कोर्स
 2006सर्वदर्शनसंग्रह विभाग , लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ  द्वारा आयोजित
            माथुरी पञ्चलक्षणीपर कार्यशाला


प्रकाशन
2014मुहतशम काशानीक फ़ारसी मर्सिया केर हिन्दी पद्यानुवादरामपुर रज़ा लाइब्रेरी,
            रामपुर, उत्तरप्रदेश।
2013अमृतरसएक जायज़ा , उर्दू शोधपत्र, तस्फ़िया इण्टरनेशनल जर्नलमे प्रकाशित।
2013शाकुन्तल–  एक फ़ारसी रूपान्तरण, नाट्यम् मे प्रकाशित
2013भारतीय तथा पाश्चात्त्य वाक्यार्थ सिद्धान्तप्रतिभा प्रकाशन, दिल्ली
2013कल्पवल्ली  (आधुनिकसंस्कृतकाव्यसंकलन)मे सात टा कविता प्रकाशितसाहित्य
             अकादमी
2012पञ्चतन्त्र मौलाना, फ़ारसी शोधपत्र, मेह्रो नाहीद  शोधपत्रिकामे, तेहरान, ईरानसँ
            प्रकाशित।
2011 – ‘इश्क आतश’ ( फ़ारसी कविताक संग्रह ) –मिदहत प्रकाशन , तेहरान ,ईरान
20102011तीन कवितायें अर्वाचीन संस्कृतम् मे प्रकाशित
2009– ‘आधुनिक संस्कृत साहित्य संचयन’ ( आधुनिक संस्कृत रचना सभहँक संग्रह ) –
            विद्यानिधि प्रकाशन , दिल्ली
2009पण्डित अम्बिका दत्त व्यासजीक जन्म  सार्द्धैकशतीक अवसरपर स्मारिका केर
           सम्पादन तथा प्रकाशन
2008हिन्दी कवि राजेश जोशी पर आधारित पुस्तकमे एकटा लेख – ‘नीतिशतकएक
           पुनर्रचनाकेर प्रकाशन

शीघ्रप्रकाश्य
  1संस्कृत काव्यलघुसन्देशकाव्यम्’ – राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थान , दिल्लीसँ
  2फ़ारसी गजलक नवीन संकलनईरानकल्चर हाउस , दिल्लीसँ।
भाषाज्ञान
1हिन्दीअवगमन, संवाद, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन
2संस्कृतअवगमन, संवाद, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन
3अंग्रेजीअवगमन, संवाद, लेखन , पठन
4फ़ारसीअवगमन, संवाद, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन
5उर्दू  –    अवगमन, लेखन , पठन, रचनात्मक लेखन
    एकर अतिरिक्त प्राकृत तथा अपभ्रंशों मे हस्तक्षेप

  सभहँक अतिरिक्त दिल्लीक अनेक महाविद्यालय सभहँक सांस्कृतिक प्रतियोगिता सभमे अनेकशः निर्णायकक तौरपर आहूत एवं अनेक सांस्कृतिक समितिक पदाधिकारी

हिनक दू टा रचना--


तेरे रू--रौशन को शम्स[1] ही कहा जाये

रात की तरह गेसू गर गिर्द हों छाये


जब उलझ गयीं ज़ुल्फ़ें आपकी ख़यालों से

तब तब अपनी नज़्मों के ज़ुल्फ़ हमने सुलझाये


तोड़ दो मनादिर[2] को तोड़ दो मसाजिद[3] को

ताकि लामकाँ[4] अपने हर मकाँ में रह पाये


मेरे शेर ऐसे हैं जिस तरह कोई बच्चा

कहना और कुछ चाहे और कुछ ही कह जाये


मेरे शेर जिसके हैं वो भी जाने महफ़िल काश

साथ साथ मह्फ़िल के मेरे शेर सुन पाये


[1] सूरज

[2] मन्दिरों

[3] मस्जिदों

[4] गृहविहीन (परमेश्वर)

आशिक़ हुए, असीर[1] हुए, मुब्तिला[2] हुए

देखो तुम्हारे इश्क़ में, हम क्या थे क्या हुए


फ़रहादे कोहकन[3] हो कि मजनूँ फ़िगारतन[4]

हम आशिक़ी में सबसे बहुत पेशपा[5] हुए


खींचे है ताबे इश्क़ तो रोके है उसको शर्म

इक मुल्के हुस्ने नाज़ पे दो पेशवा[6] हुए


ईफ़ा अह्दे चर्ख़[7] तग़य्युर[8] है इसलिये

जितने भी बे वफ़ा हुए सब बा वफ़ा हुए


मारे थे जितने पहले रक़ीबाने तेग़ज़न[9]

सब इस जनम में ले निगहे सुर्मासा[10] हुए


[1] बन्दी

[2] दुर्गति ग्रस्त

[3] पहाड़ काटने वाला फ़रहाद

[4] क्षतविक्षतशरीर मजनूँ

[5] आगे

[6] हाकिम

[7] भाग्यचक्र की शर्तें मानना

[8] परिवर्तन

[9] तलवारबाज़ दुश्मन

[10] कजरारी


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