- मुखपृष्ठ
- अनचिन्हार आखरक परिचय
- गजल शास्त्र आलेख
- हिंदी फिल्मी गीतमे बहर
- भजनपर गजलक प्रभाव
- अन्य भारतीय भाषाक गजलमे बहर
- समीक्षा/आलोचना/समालोचना
- गजल सम्मान
- गजलकार परिचय शृखंला
- गजलसँ संबंधित आडियो/वीडियो
- विश्व गजलकार परिचय शृखंला
- छंद शास्त्र
- कापीराइट सूचना
- अपने एना अपने मूँह
- गजलक इस्कूल
- गजलकार
- अर्चा-चर्चा-परिचर्चा
- आन-लाइन मोशायरा
- आशीष अनचिन्हारक रचना संसार
- मैथिली गजलसँ संबंधित आन लिंक, पन्ना ओ सामग्री
- Maithili Ghazal Books Download
- शेर जे सभ दिन शेर रहतै
Dr Bhawna Navin लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Dr Bhawna Navin लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सोमवार, 28 नवंबर 2011
गजल
खोजबीनक कूट-शब्द:
गजल,
Dr Bhawna Navin
गुरुवार, 24 नवंबर 2011
गजल
बैसल छैथ हृदय में हुनका कोना बिसराबी हम
अंकित छैथ एहि दिल में,चित्र कोना मेटाबी हम !
मुरझा क दिलक कली चैल गेलैथ बहार जकां
फेरो एहि बगिया में हुनका कोना बजाबी हम !
प्रेमक रस्म अहिं कहू असगर कोना निभाबी हम !
उठल हूक करेज में आंखि नोर से हमर भरि गेल
"भावना" टूटल हृदयक ककरो कोना देखाबी हम !!
अंकित छैथ एहि दिल में,चित्र कोना मेटाबी हम !
मुरझा क दिलक कली चैल गेलैथ बहार जकां
फेरो एहि बगिया में हुनका कोना बजाबी हम !
जिनगी क प्रार्थना में हुनका रखलों सदिखन
की की जुलूम ओ केलैथ से कोना बताबी हम !
साँस, खियाल आ सपना सभ टा ते हुनके अछप्रेमक रस्म अहिं कहू असगर कोना निभाबी हम !
उठल हूक करेज में आंखि नोर से हमर भरि गेल
"भावना" टूटल हृदयक ककरो कोना देखाबी हम !!
खोजबीनक कूट-शब्द:
गजल,
Dr Bhawna Navin
बुधवार, 23 नवंबर 2011
गजल
अहाँ लग आबैक मोन करैत अछि
नव चोट खेवाक फेर मोन करैत अछि !
सभ दिसि पसरल अछि ख़ुशी क लहरि
... ग़ज़ल गुनगुनेवाक मोन करैत अछि !
दुनिया के हम बड़ अजमेने छी आब
अहाँक अजमाबैक मोन करैत अछि !
ओ गप्प रहि रहि अवैत अछि यादि
जकरा बिसरेबाक मोन करैत अछि !
ठोर पर 'भावना' क खेलैत अछि हंसी
जखन नोर बहेबाक मोन करैत अछि !
कतेको बेर ह्रदय पर बिजुरी खसल
तैयो मुस्कुरेबाक मोन करैत अछि !
बदलि देलों आब अहाँ जिनगी हमर
दर्द अप्पन देखेवाक मोन करैत अछि !!
खोजबीनक कूट-शब्द:
गजल,
Dr Bhawna Navin
सोमवार, 21 नवंबर 2011
गजल
गजल
अहाँ सँ मिलवा लेल आयल छलों
आबि बहुत पछ्तेलहूँ हम
सोचि दूरी एहि असगरपन कें
ओहि राति बड देर धरि जागलों हम
पुरबैया केर झोंक जकां लोग कतेक
आयल, कतेको सँ ओकतायलहूँ हम
जाहि सोच में ओ डूबल छलाह
ओहि 'भावना' सँ घबरेलहूँ हम .
अहाँ सँ मिलवा लेल आयल छलों
आबि बहुत पछ्तेलहूँ हम
सोचि दूरी एहि असगरपन कें
ओहि राति बड देर धरि जागलों हम
पुरबैया केर झोंक जकां लोग कतेक
आयल, कतेको सँ ओकतायलहूँ हम
जाहि सोच में ओ डूबल छलाह
ओहि 'भावना' सँ घबरेलहूँ हम .
खोजबीनक कूट-शब्द:
गजल,
Dr Bhawna Navin
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों