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सोमवार, 28 नवंबर 2011

गजल


लोक कहइये नाम हमर अहाँ लैत रहे छी

हम तं अपने दर्द में ओझरायल रहैत छी

... हम नै नुकायल नै घबरायल रहैत छी
कियेक सोचक दोग मे अहाँ भासियेल रहैत छी

अहाँ मोन पाडलों ते हमरा यादि भ गेल
कियक हम सदिखन ओनायल रहै छी

छीन लेलों हमर ठोरक हंसी सभटा
केकरो कहाँ सँ अहाँ किएक बतियैत रहैत छी

के हमरा लेल बेकल, के बाट जोहै छैथ
तैयो अहाँ से मिलय ले बौआयल रहैत छी

अहाँ मानु नै मानु मुदा साँच तं इ 'भावना'
हम जिनगी से बढ़ी अहाँ सँ पियार केने छी !!

गुरुवार, 24 नवंबर 2011

गजल

बैसल छैथ हृदय में हुनका कोना बिसराबी हम
अंकित छैथ एहि दिल में,चित्र कोना मेटाबी हम !

मुरझा क दिलक कली चैल गेलैथ बहार जकां
फेरो एहि बगिया में हुनका कोना बजाबी हम !

जिनगी क प्रार्थना में हुनका रखलों सदिखन
की की जुलूम ओ केलैथ से कोना बताबी हम !

साँस, खियाल आ सपना सभ टा ते हुनके अछ
प्रेमक रस्म अहिं कहू असगर कोना निभाबी हम !

उठल हूक करेज में आंखि नोर से हमर भरि गेल
"भावना" टूटल हृदयक ककरो कोना देखाबी हम !!

बुधवार, 23 नवंबर 2011

गजल


अहाँ लग आबैक मोन करैत अछि
नव चोट खेवाक फेर मोन करैत अछि !

सभ दिसि पसरल अछि ख़ुशी क लहरि
... ग़ज़ल गुनगुनेवाक मोन करैत अछि !

दुनिया के हम बड़ अजमेने छी आब
अहाँक अजमाबैक मोन करैत अछि !

ओ गप्प रहि रहि अवैत अछि यादि
जकरा बिसरेबाक मोन करैत अछि !

ठोर पर 'भावना' क खेलैत अछि हंसी
जखन नोर बहेबाक मोन करैत अछि !

कतेको बेर ह्रदय पर बिजुरी खसल
तैयो मुस्कुरेबाक मोन करैत अछि !

बदलि देलों आब अहाँ जिनगी हमर
दर्द अप्पन देखेवाक मोन करैत अछि !!

सोमवार, 21 नवंबर 2011

गजल

गजल

अहाँ सँ मिलवा लेल आयल छलों
आबि बहुत पछ्तेलहूँ हम

सोचि दूरी एहि असगरपन कें
ओहि राति बड देर धरि जागलों हम

पुरबैया केर झोंक जकां लोग कतेक
आयल, कतेको सँ ओकतायलहूँ हम

जाहि सोच में ओ डूबल छलाह
ओहि 'भावना' सँ घबरेलहूँ हम .
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों