पपनी मोरै नहि आँखि यादे अहाँक
जीवन बहुते अन्हार बादे अहाँक
दिन राति चलैत अछि हमर करेजामे
छवि एककेँ बाद एक मादे अहाँक
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
पपनी मोरै नहि आँखि यादे अहाँक
जीवन बहुते अन्हार बादे अहाँक
दिन राति चलैत अछि हमर करेजामे
छवि एककेँ बाद एक मादे अहाँक
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
तोहर प्रेममे पड़ि पीबैत छी हम तँ
ई जुनि कनिको बुझै जीबैत छी हम तँ
ताड़ीमे डूबि भोरेसँ साँझ धरि ‘मनु’
फाटल करेज अपन सीबैत छी हम तँ
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
छुपि-छुपि राति दिन हम बाट निहारै छी
जल्दीसँ आबू बड़ आस कराबै छी
पूरा होयत कखन ‘मनु’ मनोकामना
हमरा किए नहि करेजसँ लगाबै छी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
जीवन मृत्युकेँ छोर तोहर हाथमे
कठपुतली इ जग डोर तोहर हाथमे
हम सरनागत एलौं तोहर सरनमे
सगरो कष्टक तोड़ तोहर हाथमे
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
जिनका देलौं करेजा ओ वेपारी
मोनसँ खलेलनि जनि क हमर लाचारी
हम रहि सिधा साधा सज्जन बेचारी
ओ पहुँचल फेरल बड़ पैघ खेलाड़ी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
हे कृष्ण फेर अवतार एकबेर लिअ
पापी कुकरमी सभकेँ आबि घेर लिअ
धरती इ अहाँक डूबि रहल अधर्ममे
जतरा आबि एक बेर अपन फेर लिअ
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
हमहूँ खेत आइ बोटीकेँ रोपलौं
पोसै लेल पेट झूठक हर जोतलौं
कारी कोटसँ कोटमे निसाफ ककरा
टाका पाबि आँखि बान्हि दफा जोखलौं
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
तोरा नहि हम छोड़लौं नहि हम बेवफा
तोरा बिन नहि मरलौं नहि हम बेवफा
तोहर प्राण गेल बुझि नहि जीवैत ‘मनु’
बिन काठीए जरलौं नहि हम बेवफा
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
पागल हम दुनियामे पियार तकै छी
भलमानुस सब सगर वेपार तकै छी
नै कोनो दाम मनुख आ मनुखताकेँ
स्वार्थी लोकसँ ‘मनु’ सरोकार तकै छी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
एतेक नेहमे लीबैत किएक छी
दुनिया पुछलनि हम जीवैत किएक छी
सभ बुझला उत्तर ‘मनु’ अहूँ इ जुनि पूछू
दिन राति एतेक पीबैत किएक छी
✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’
घुमि कनखीसँ कनीक अहाँ ताकि देलहुँ
तन मन अपन एहिपर हम हारि देलहुँ
नहि आब बैकुंठकेँ रहि गेल इच्छा
सगरो अहाँकेँ लेल ‘मनु’ बारि देलहुँ
✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’
जे घाव अहाँ हमर करेजकेँ देलहुँ
सबटा ओ दर्द दुनियाँसँ नुका लेलहुँ
मुस्कीसँ हमर नै बुझू जे हम खुश छी
खूनक घुट अहाँक खुशीमे पी गेलहुँ
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
हे कृष्ण गोविंद मुरारी मिता हमर
सगरो दुनिया केर मालिक पिता हमर
गेलअ छोरि किएक तू ‘मनु’क करेजा
घुरि आबअ नहि तँ सजत आब चिता हमर
✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’
सिस्टम आइकेँ किए बबाल बनल अछि
नेता सभ तँ एकटा जपाल बनल अछि
बड़ बड़ बागर बिल्ला राज चलबैए
जनताक प्राणेपर सबाल बनल अछि
✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’
मीरा केर हरने अहाँ कते दुख छी
खा साग विदुर केर भेल बड्ड सुख छी
हे माधव ‘मनु’ केर अपन भक्ति दय दिअ
दुनियामे सबसँ सुन्नर अहाँक मुख छी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’