Wednesday, 15 November 2017

गजल

सपनाइत रहलहुँ हम
डेराइत रहलहुँ हम

मँजाइत रहल एड़ी
चिकनाइत रहलहुँ हम

जते सुनेलक से सभ
पतिआइत रहलहुँ हम

अइ हाथसँ ओइ हाथ
बदलाइत रहलहुँ हम

हुनकर मोनक बाकस
सैंताइत रहलहुँ हम

इम्हर उम्हर सभठाँ
उसनाइत रहलहुँ हम

चुप्पे अनचिन्हारसँ
बतिआइत रहलहुँ हम

सभ पाँतिमे 22 22 22 मात्राक्रम अछि
दूटा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि


सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 9 November 2017

गजल

कागजमे सुधार छलै
फाइलमे बहार छलै

केहन बेबहार छलै
कनियों नै विचार छलै

टूटल बस पगार छलै
सरकारो लचार छलै

किश्ती भरि कऽ आबि रहल
जीवनमे उधार छलै

बनि चिन्हार खूब फँसल
अनचिन्हार पार छलै

सभ पाँतिमे 22-212-112 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 31 October 2017

गजल

मोन मीलल बहुत बहुत
नेह भेटल बहुत बहुत

दूर गेलै जते जते
नीक लागल बहुत बहुत

साँच बजलहुँ कनी मनी
संग छूटल बहुत बहुत

बात करता जखन जखन
खाद फेंटल बहुत बहुत

साँझ खातिर कहीं कहीं
भोर टूटल बहुत बहुत

आइ हुनकर कथा व्यथा
भाँज लागल बहुत बहुत

आब भेलै महो महो
रूप साजल बहुत बहुत

गाछ देखै टुकुर टुकर
काँच पाकल बहुत बहुत

सभ पाँतिमे 2122 12 12 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Saturday, 28 October 2017

गजल

जिनका चाही पटना दिल्ली
तिनका धेने छनि छिलमिल्ली

नेता सुनिते सभ बुझि गेलै
फल्लाँ बनलै पिल्ला पिल्ली

जनताकेँ मानै छथि खाजा
संविधानकेँ पानक खिल्ली

जखने उठलै जुत्ता  तखने
हुनका ढ़ुकि गेलनि हलदिल्ली

सत्ता के रूप रंग एकै
चाहे जिलेबी हो कि झिल्ली

सभ पाँतिमे 22 22 22 22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Saturday, 21 October 2017

गजल

ठोरक गिलास ठोरक शराब
के राखत किछु ठोपक हिसाब

अनधन लछमी हुनका हिस्सा
हमरा हिस्सा गालक गुलाब

उनटाबैए ओ चुप्पे चुप
देहक पन्ना मोनक किताब

सुंदर शब्द भेलै बेकार
ओ अपने छथिन अपन जबाब

अनचिन्हारक इयाद अबिते
पूरा दुनियाँ लागै खराब

सभ पाँतिमे 22-22-22-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि



Saturday, 14 October 2017

गजल

बान्हल भाषा बान्हल बोल
अइ नाटकमे अतबे रोल

हुनका कहने दुनियाँ टेढ़
हुनके कहने दुनियाँ गोल

खाली पेटक छै फरमान
भरलाहाकेँ खोलै पोल

चुप्पे आबै चुप्पे जाइ
हिनकर आँगन हुनकर टोल

किछु ने जानै अनचिन्हार
के पहिरैए नवका खोल

सभ पाँतिमे 22-22-22-21 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 10 October 2017

गजल

संसार हमरो लेल छै
अपकार  हमरो लेल छै

राजा बहुत रानी बहुत
दरबार हमरो लेल छै

जइमे भुजेतै आन से
कंसार हमरो लेल छै

तोहीं ठकेलह से तँ नै
बटमार हमरो लेल छै

पायल भने नै हो मुदा
झंकार हमरो लेल छै

सभ पाँतिमे 2212-2212 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Friday, 6 October 2017

गजल

भीजल कपड़ा गुदगर देह
बिजली लागै सुंदर देह

गौतम धेलथि इंद्रक भेष
फेरो पाथर हुनकर देह

हुनका ताकी कोने कोन
हमरा लग छै जिनकर देह

बज्जर सपना बज्जर आँखि
बज्जर जीवन बज्जर देह

सरकारक फाइल बहुते पैघ
देखू घटलै किनकर देह

सभ पाँतिमे  22 22 2221 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Wednesday, 4 October 2017

गजल

जे लिखतै
से बचतै

जे बचतै
से कहतै

जे कहतै
से सुनतै

जे सुनतै
से बुझतै

जे बुझतै
से मरतै

सभ पाँतिमे 222 मात्राक्रम अछि
एहि गजलकेँ गंभीरतासँ लेबाक जरूरति नै ओहिना बोखारमे लीखि देने छियै तथापि जँ किनको अर्थ बुझाइन तँ ई एहि गजलक सौभाग्य
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 25 September 2017

गजल

विषवंदन युगधर्म छै
परिवर्तन युगधर्म छै

जइमे खेने रोग हो
से बरतन युगधर्म छै

खाली अपने टा रही
से कतरन युगधर्म छै

खाली चाहथि मीठ रस
मधुगुंजन युगधर्म छै

बिन करने कल्याण नै
गठबंधन युगधर्म छै

सभ पाँतिमे 222-2212 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Friday, 22 September 2017

गजल

भाव शुद्ध हो त मोनमे भय कथीके
छोड़ि मृत्यु जीव लेल निश्चय कथीके

जे सृजन करै सफल करै से बिसर्जन
छूछ हाथ सब चलल ककर छय कथीके

शक्तिमे सदति रहल कतौ आइ धरि के
किछु दिनक उमंग फेर जय-जय कथीके

तालमेल गीतमे अवाजक जरूरी
शब्दमे सुआद नै तखन लय कथीके

जाति धर्मके बढल अहंकार कुन्दन
रहि विभेद ई समाज सुखमय कथीके

212-1212-122-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

www.kundanghazal.com

Friday, 15 September 2017

गजल

कियो डबल छै
कियो ढ़हल छै

सपन नयन के
बचल खुचल छै

गरीब लेखे
पवन अनल छै

सुगंध हुनकर
रचल बसल छै

कनी मनीपर
बहुत झुकल छै

सभ पाँतिमे 12-122 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 14 September 2017

गजल

हटितो नै देरी
सटितो नै देरी

सत्ताके खातिर
कटितो नै देरी

छन भरिमे दुनिया
बटितो नै देरी

बढ़लाहा टिरबी
घटितो नै देरी

निष्ठा जे जागल
डटितो नै देरी

लड़की हो चंचल
पटितो नै देरी

संकटमे कोढिया
खटितो नै देरी

देहक की निश्चित
लटितो नै देरी

नवका छै कपड़ा
फटितो नै देरी

बिसरल नाओके
रटितो नै देरी

ओ हियमे कुन्दन
अटितो नै देरी

22-222

© कुन्दन कुमार कर्ण

www.kundanghazal.com

Wednesday, 13 September 2017

गजल

कियो कारी बुझलक कियो उज्जर कहलक
कियो शीशा बुझलक कियो पाथर कहलक

जाइ अबै छी बिन रोक टोक ओइ ठाम
कियो मालिक बुझलक कियो नौकर कहलक

गलत काज भेलापर अंतर नै रहलै
कियो साधू बुझलक कियो लोफर कहलक

जीवन ईहो छै आ जीवन ओहो छै
कियो अप्पन बुझलक कियो दोसर कहलक

उपेक्षित रहब अनचिन्हारक कपारमे
कियो चिंतक बुझलक कियो जोकर कहलक

सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Tuesday, 12 September 2017

गजल

हुनकर बात
पिपरक पात

देशक अगुआ
भेलै कात

तप्पत नोर
बसिया भात

जिवनक नाम
झंझावात

अनचिन्हार
केलक घात

सभ पाँतिमे 2221 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Sunday, 10 September 2017

गजल

गदहा सभ सरकार चलेतै
लुच्चा सभ दरबार चलेतै

जकरा लग ने पैसा कौड़ी
से कोना संसार चलेतै

जखने जागत सूतल जनता
आर चलेतै पार चलेतै

काँपै जकर मोन इजोतमे
ओ मार कि सम्हार चलेतै

बनतै गृहस्थ साधू बाबा
साधू सभ परिवार चलेतै



सभ पाँतिमे 22222222 मात्राक्रम अछि
दूटा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

गजल

चान दर्शनके लोलसा जागल घोघ उघारू प्रिय
राति पूनमके छै निहोरा नै आइ नकारू प्रिय

छल पिआसल ई मोन लिअ ने छातीसँ सटा हमरा
आश पूरा मिलनक करू दुन्नू हाथ पसारू प्रिय

फूल झाँपल पत्तासँ शोभा फुलबारिक नै दै छै
माथ परके चुनरी गुलाबी आस्तेसँ ससारू प्रिय

प्रेम जीवन प्रेमे जगतमे रहि जाइ अमर छै ये
सात जन्मक संगी बना परमात्माक पुकारू प्रिय

नै पुछू लागैए मजा केहन नैन मिला कुन्दन
तीर नैनक सोझे करेजा पर मारि निहारू प्रिय

2122-2212-2221-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण

http://www.kundanghazal.com

Friday, 1 September 2017

गजल

टूटल हृदय के तार पंडीजी
नोरो रहलै उधार पंडीजी

देवतो पितर हाथ उठा लेला
जखने भेलथि शिकार पंडीजी

उजड़ल पुजड़ल गाछीमे असगर
तकने घूरथि बहार पंडीजी

खाली तड़िखाने देखि सकैए
जे एकै छै चमार पंडीजी

कहबा लेल तैंतीस कोटि देव
छथि मुदा अनचिन्हार पंडीजी

सभ पाँतिमे मात्राक्रम 222 222 222 अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 31 August 2017

हजल

हम्मर तोहर हुनकर बाबा
सभहँक छै भकचोन्हर बाबा

कौआ कुक्कुर गदहा गदही
आनर बानर सूगर बाबा

ढ़नमन ढ़नमन पूरा दुनियाँ
अपने बनलथि सोंगर बाबा

इच्छाधारी लीलाधारी
अगबे ताकल लोफर बाबा

अनका ठकलथि बहुते बजलथि
भेलथि जेलक भीतर बाबा

सभ पाँतिमे 22222222 मात्राक्रम अछि

Tuesday, 29 August 2017

भक्ति गजल

हम्मर अँगना मैया एली
गमके चहुदिस अरहुल बेली

धन हम छी धन हम्मर अँगना 
मैया जतए दर्शन देली

आबू बहिना संगी हम्मर 
मैया संगे    सामाँ खेली 

जे किछू अछि एखन हमरा ल'ग 
ओ  सबटा  मैया   द'क  गेली

बड़ भागसँ 'मनु' भेटल अवसर 
मैया अप्पन   चरण लगेली

(सब पाँतिमे आठ-आठटा दीर्घ, मकताक दोसर पाँतिमे दूटा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानक छूट लेल गेल अछि)
जगदानन्द झा 'मनु'

Tuesday, 22 August 2017

गजल

बाहर जते फेम छै
भीतर तते ब्लेम छै

प्लेयर सहित फील्ड आ
अम्पायरो सेम छै

जैठाँ बहुत जौहरी
तैठाँ कनी जेम छै

अनकर हड़पि आनि लेब
अतबे हुनक एम छै

तोड़ब हृद्य मोनकेँ
ई ओकरे गेम छै

सभ पाँतिमे 2212-212 मात्राक्रम अछि
चारिम शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 21 August 2017

गजल

बढलै देश-देश बीच हथियारक प्रतिस्पर्धा
राष्ट्रियताक नाम पर अहंकारक प्रतिस्पर्धा

मानवताक गप्प लोक कतबो करै जमानामे
देखल बेवहारमे तिरस्कारक प्रतिस्पर्धा

पेन्टागनसँ कोरिया सहनशीलता कतौ नै अछि
मिसियो बात लेल भेल ललकारक प्रतिस्पर्धा

साहित्यिक समाजमे चलल राजनीति सम्मानक
लेखन पर धिआन नै पुरस्कारक प्रतिस्पर्धा

धरती एक टा अकास एके समान छै कुन्दन
भरि मुट्ठीक माटि लेल सरकारक प्रतिस्पर्धा

2221-2121-2212-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण

www.kundanghazal.com

Friday, 18 August 2017

गजल

हमहूँ पागल की नै ये फल्लाँ के माए
ओहो बाकल की नै ये फल्लाँ के माए

साड़ीनामा धोतीनामा देखिए देखि
जीवन फाटल की नै ये फल्लाँ के माए

ओ उड़ि उड़ि आबै बहुत मुदा उड़िते रहलै
नहिए भेटल की नै ये फल्लाँ के माए

छिड़िआइत रहलै लुत्ती जइँ तइँ जखन तखन
किछु नै बाँचल की नै ये फल्लाँ के माए

खाली बाजहे के छलै ने बाजि देलियै
डर नै लागल की नै ये फल्लाँ के माए

सभ पाँतिमे मात्राक्रम 222-222-222-222 अछि
दूटा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Thursday, 17 August 2017

गजल

एकै आदमी चोर फकीरक सरदार
बड़ हरीफ लागैए शरीफक सरदार

बाहर टूटल फूटल भीतर चकमक छै
बड़ अमीर लागैए गरीबक सरदार

एना पसरल हेतै गुप्त बात सौंसे
कनपातर लागैए बहीरक सरदार

मोती केर आसमे गहलहुँ धार मुदा
बड़ उत्थर लागैए गँहीरक सरदार

रहि जेतै ई आसन बासन सिंहासन
आ चुप्पे उड़ि जेतै शरीरक सरदार

सभ पाँतिमे 222-222-222-22 मात्राक्रम अछि
दू टा अलग अलग लघुकेँ दीर्घ मानल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 7 August 2017

गजल

मोन पड़लै
नोर खसलै

अर्थ दिव्यांग
शब्द टहलै

बात बजिते
जीह कटलै

देह छुबिते
देह गललै

लोक अप्पन
आन लगलै

सभ पाँतिमे 2122 मात्राक्रम अछि
दोसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर लेल गेल अछि
सुझाव सादर आमंत्रि अछि

Sunday, 30 July 2017

गजल

भरल बरिसातमे नै सताउ सजनी
किए छी दूर लग आबि जाउ सजनी

मिलनके आशमे अंग-अंग तरसै
बदन पर वुँद नेहक गिराउ सजनी

पिआसल मोन मधुमासमे उचित नै
जुआनी ओहिना नै गमाउ सजनी

जियब जा धरि करब नेह हम अहीँके
हियामे रूप हमरे सजाउ सजनी

खुशीमे आइ कुन्दन गजल सुनाबै
मजा एहन समयके उठाउ सजनी

122-212-212-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

www.kundanghazal.com

Tuesday, 25 July 2017

गजल

मोन सभहँक अचंभित छलै
चोर ऐठाम मंडित छलै

काज हुनकर बिलंबित मुदा
साज तँ द्रुतबिलंबित छलै

हाथ जोड़ल बहुत भेटि गेल
मोन सभहँक विखंडित छलै

ठोर केनाहुतो चुप रहल
तथ्य रखबासँ वंचित छलै

दुख बला पाँतिमे देखि लिअ
सुख बहुत रास टंकित छलै

दर्द बाँटब सहज नै बंधु
दर्द मोनक अखंडित छलै

सभ पाँतिमे 2122-122-12 मात्राक्रम अछि
तेसर शेरक पहिल पाँतिक अंतिम लघु छूटक तौरपर अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 24 July 2017

गजल

तीने वर्णक बनल मिठाइ
तीने वर्णक बनल मलाइ

तीने वर्णक बनल किताब
तीने वर्णक बनल पढ़ाइ

तीने वर्णक बनल सलाह
तीने वर्णक बनल लड़ाइ

तीने वर्णक बनल फचाँड़ि
तीने वर्णक बनल पिटाइ

तीने वर्णक बनल अकास
तीने वर्णक बनल लटाइ

तीने वर्णक बनल इजोत
तीने वर्णक बनल सलाइ

सभ पाँतिमे 22-2212-121 मात्राक्रम अछि
सुझाव सादर आमंत्रित अछि

Monday, 17 July 2017

गजल

अपनके अपना हिसाबे बुझू
रचलके रचना हिसाबे बुझू

असलमे सब किछु रहै छै कहूँ
सृजनके सृजना हिसाबे बुझू

हिया पर शब्दक असर जे पड़ै
गजलके गहना हिसाबे बुझू

कहाँ भेटत सोच उठले सभक
धसलके धसना हिसाबे बुझू

जरनिहारोके कतहुँ नै कमी
जरलके जरना हिसाबे बुझू

अतीतक नै याद कुन्दन करू
घटलके घटना हिसाबे बुझू

122-221-2212

© कुन्दन कुमार कर्ण

www.kundanghazal.com

Friday, 7 July 2017

भक्ति गजलक परिकल्पना

मैथिलीमे भक्ति गजल नामक परिभाषिक शब्दावली अमित मिश्रजी द्वारा 7 अगस्त 2012केँ “विदेहक फेसबुक “केर पटलपर प्रस्तुत कएल गेल। ओना ओहिसँ बहुत पहिनेहें 16/1/2012केँ जगदानंद झा मनु जी बिना कोनो घोषणाकेँ अनचिन्हार आखरपर भक्ति गजल प्रस्तुत केला। एक बेर फेर मैथिलीक आदिक भक्ति गजलकार कविवर सीताराम झा चिन्हित होइ छथि। विदेहक 15 मार्च 2013 बला 126म अंक भक्ति गजल विशेषांक अछि। भक्ति गजलक संबंधमे फेसबुकपर भेल बहस राखि रहल छी--

            Amit Mishra
एकटा प्रश्न बड दिन सँ मोन मे अछि आइ अहाँ सबहक समक्ष राखि रहल छी ।
जखन गजल समाजक सब क्षेत्र के अपना मे पहिने सँ समेटने छल आ आब ते बाल क्षेत्र के सेहो अपना लेलक त की गजलक माध्यम सँ भक्ति कएल जा सकै यै अर्थात की भक्ति रूप मे गजल लिखल जा सकै यै?
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Comments
पंकज चौधरी hamra hisaabe ta likhal jaa sakaichh..
Amit Mishra एखन धरि हमरा नजरि मे एहन रचना नै आएल तेँए इ बात मोन मे बेर बेर उठैत छल ।
Om Prakash Jha Kiya ne likhal jaa sakai ye.
Amit Mishra जन्माष्टमी पर एकटा एहने रचना बाल गजलक रूप मे आनि रहल छी ।
भक्ति मे लिखल जा सकैछ की नै . इ जानकारी नै छल तेँए ओकरा बाल गजलक रूप मे लिखलौँ मुदा अछि भक्तिए ।
Om Prakash Jha Abass likhu.
Amit Mishra नैन खोलिकऽ कने देखू ने भवानी

2122-1222-2122
Gunjan Shree बिलकुल
Ravi Shankar ek naya suruat hait... best of luck

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Jagdanand Jha उपरोक्त दिनु लिंक भक्तिक गजलक अछि
Amit Mishra मनु जी अपनेक लिँक सँ मोन परक बोझ हल्लुक भऽ गेल ।
बहुत बहुत धन्यवाद
https://www.facebook.com/groups/videha/permalink/353227171422084/

Wednesday, 5 July 2017

गजल

जे कल्पनामे डुबा दै ओ छथि कवि
जे भावनामे बहा दै ओ छथि कवि

शब्दक मधुरतासँ करि मति परिवर्तन
जे दू हियाके मिला दै ओ छथि कवि

साहित्य मानल समाजक अयना छै
जे सोचके नव दिशा दै ओ छथि कवि

खतरा प्रजातन्त्र पर जौँ-जौँ आबै
जे देश जनता जगा दै ओ छथि कवि

संसार भरि होइ छै झूठक खेती
जे लोकके सत बता दै ओ छथि कवि

रचनासँ कुन्दन करै जादू एहन
जे चान दिनमे उगा दै ओ छथि कवि

2212-2122-222

© कुन्दन कुमार कर्ण

http://www.kundanghazal.com

Sunday, 2 July 2017

अपने एना अपने मूँह-38

मास मइ 2017 मे कुल कुल 9टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि--
कुंदन कुमार कर्णजीक 3 टा पोस्टमे 2टा गजल, 1टा बाल गजल अछि।
आशीष अनचिन्हारक 6 टा पोस्टमे 4 टा गजल, 1 टा रुबाइ आ 1 टा विश्व गजलकार परिचय शृंखला अछि।



मास जून 2017 मे कुल कुल 8टा पोस्ट भेल जकर विवरण एना अछि--
कुंदन कुमार कर्णजीक 3 टा पोस्टमे 1 टा गजल, 1टा भक्ति गजल आ 1 टा आलोचना अछि।
आशीष अनचिन्हारक 5 टा पोस्टमे 3 टा गजल, 1 टा पोस्टमे मिथिला दर्शन पत्रिकाक कटिंग आ 1 टा विश्व गजलकार परिचय शृंखला अछि।

Friday, 30 June 2017

थोड़े माटि बेसी पानि

शताब्दीसँ बेसीक इतिहास रहल मैथिली गजलके खास क' पछिला एक दशकसँ गजल रचना आ संग्रहक प्रकाशनमे गुणात्मक आ परिमाणात्म दुन्नू हिसाबे वृद्धि भ' रहल छै । एहि क्रममे किछु संग्रह इतिहास रचि पाठक सभक हियामे छाप छोडि देलकै तँ किछु एखनो धरि नेङराइते छै । कारण सृजनकालमे कोनो नै कोनो अंगविहिन रहि गेलै सृजना । संग्रहक भीड़मे समाहित सियाराम झा 'सरस' जीक पोथी 'थोड़े आगि थोड़े पानि' पढबाक अवसर भेटल । जकरा सुरुसँ अन्त धरि पढलाकबाद एकर तीत/मीठ पक्ष अर्थात गुणात्मकताक सन्दर्भमे विहंगम दृष्टिसँ अपन दृष्टिकोण रखबाक मोन भ' गेल । पहिने प्रस्तुत अछि पोथीके छोटछिन जानकारी:
पोथी - थोड़े आगि थोड़े पानि
विधा - गजल
प्रकाशक - नवारम्भ, पटना (2008)
मुद्रक - सरस्वती प्रेस, पटना
गजल संख्या - 80टा
पोथीमे जे छै-

थोड़े आगि राखू थोड़े पानि राखू
बख्त आ जरुरी लै थोड़े आनि राखू (पूरा गजल पृष्ठ 85 मे)
सरस जी प्रारम्भिक पृष्ठमे गहिरगर भावसँ भरल र्इ शेर प्रस्तुत केने छथि जे कि पोथीके नामक सान्दर्भिकता साबित क' रहल छै ।
पोथीमे 'बहुत महत्व राखैछ प्रतिबद्धता' शीर्षकपर दश पृष्ठ खरचा केने छथि सरस जी । जैमे ओ समसामयिक विषय, मैथिली साहित्यक विविध प्रवृति आ गतिविधि, अपन देखल भोगल बात, अध्ययन, संघर्ष, मैथिली आन्दोलनमे कएल गेल योगदान, विदेशी साहित्यकार एवं साहित्यिक कृति सहित ढेर रास विषय वस्तु पर चरचा केने छथि । मैथिली साहित्यिक क्षेत्रमे देखल गेल विकृतिपर जोडगर कटाक्ष करैत ‌ओ कहै छथि "आजुक 75 प्रतिशत मैथिलीक लेखक प्रतिबद्धताक वास्तविक अर्थसँ बहुत-बहुत दूर पर छथि । से बात खाहे कविताक हो कि कथाक, निबन्धक हो वा गीत लेखनक-सब किछु उपरे-उपर जेना हललुक माटि बिलाड़ियो कोड़ए ।" संगे संग ओ लेखक सभकेँ सल्लाह सेहो दैत कहै छथि "लोक जे लेखन कार्यसँ जुड़ल अछि वा जुड़बाक इच्छा रखैछ, तकरा बहुत बेसी अध्ययनशील होयबाक चाही । पढबाक संग-संग गुनबाक अर्थात चिन्तन-मननक अभ्यासी सेहो हेबाक चाही । नीक पुस्तकक खोजमे हरदम रहबाक चाही । जाहि विधामे काज करबाक हो, ताहि विधाक विशिष्ट कृतिकारक कृतिकेँ ताकि-ताकि पढबाक चाही ।"
अपन भाव परसबाक क्रममे ओ किछु हृदयके छूअवला शेर सेहो परसने छथि । जेना-

पूर्णिमा केर दूध बोड़ल, ओलड़ि गेल इजोर हो
श्वेत बस‌ंतक घोघ तर, धरतीक पोरे-पोर हो

प्रेम, वियोग, राजनीतिक, सामाजिक लगायत विभिन्न विषयक गजल रहल एहि संग्रहमे रचनागत विविधताक सुआद भेटत ।

कत' चूकि गेलाह सरस जी ?
कुल 80टा गजल रहल पोथीमे एको टा गजल बहरमे नै कहल गेल अछि । देखी पहिल गजलक मतला आ एकर मात्राक्रम:

बिन पाइनक माछ नाहैत चटपटा रहल, र्इ मैथिल छी
घेंट कटल मुरगी सन छटपटा रहल, र्इ मैथिल छी

पहिल पाँतिक मात्राक्रम - 2 22 21 221 212 12 2 22 2
दोसर पाँतिक मात्राक्रम - 21 12 22 2 212 12 2 22 2

मतलाक दुन्नू मिसराक मात्राक्रम अलग-अलग अछि ।
ढेर रास गजलमे काफिया दोष भेटत । बहुतो गजलमे एके रंगकेँ काफियाक प्रयोग भेटत । कोनो-कोनो मे तँ काफियाक ठेकान नै । पृष्ठ संख्या 19, 25, 30, 31, 34, 52, 55, 57, 61, 64, 81, 82, 92, 93, 96 मे देख सकै छी ।
पृष्ठ-25 मे रहल र्इ गजलके देखू:

सात फेरीक बाद जे किछु हाथ आयल
तत्क्षणें तेहि-केँ हम चूमि लेलियै

दू दिसक गरमाइ सँ दूर मन घमायल
तेहि भफायल - केँ हम चूमि लेलियै

भोर मृग भेल, साँझ कस्तूरी नहायल
ओहि डम्हायल-का हम चूमि लेलियै

कैक शीत-वसंत गमकल गजगजायल
रंग-रंगक - केँ हम चूमि लेलियै

स्वप्न सबहक पैरमे घुघरु बन्हायल
अंग-अंगक - केँ हम चूमि लेलियै

सृजन पथ पर चेतना-रथ सनसनायल
वंश वृक्षक - केँ हम चूमि लेलियै

कोन पिपड़ीक दंश नहुँए बिसबिसायल
ताहि नेहक - केँ हम, चूमि लेलियै

एहिमे मतला सेहो नै छै । बिनु मतलाके गजल नै भ' सकैए । पृष्ठ संख्या 64 मे सेहो एहनाहिते छै:

परबाहि ने तकर जे, सब लोक की कहैए
बहसल कहैछ क्यो-क्यो, सनकल कियो कहैए

कंजूस जेता तोड़ा नौ ठाँ नुकाक' गाड़य
तहिना अपन सिनेहक चिन्ता-फिकिर रहैए

जकरा ने र्इ जीवन-धन जीनगी ने तकरर जीनगी
छिछिआय गली-कुचिये, रकटल जकाँ करैए

कोंढी बना गुलाबक जेबी मे खोंसि राखी
जौं-जौं फुलाइछ, तौं-तौं सौरभ-निशां लगैए

अहाँ लाटरी करोड़क पायब तँ स्वय बूझब
निन्ने निपात होइए, मेघे चढल उड़ैए

तुलता ने कए पबै छी कहुनाक' सोमरस सँ
उतरैए सरस कोमहर, कोन ठामसँ चढैए

पृष्ठ संख्या 37, 42, 44, 50, 55, 59, 72, 78, 81, 94 मे रहल गजल गजलक फर्मेटमे नै अछि आ पृष्ठ संख्या 94 के गजलमे मात्र 4टा शेर छै । कमसँ कम 5टा हेबाक चाही ।

कोनो शब्दके जबरदस्ती काफिया बनाओल गेल छै, जेना की पृष्ठ संख्या 45 मे रहल गजलक अन्तिम शेरमे 'घुसकावना' शब्दक प्रयोग भेल छै ।

मक्तामे शाइरक नामक प्रयोग भेलासँ गजलक सुन्नरता बढै छै जे कि एहि संग्रमे किछु गजल छोड़ि बांकीमे नै भेटत ।

अन्तमे--

गजलक सामान्य निअमकेँ सेहो लेखकद्वारा नीक जकाँ परिपालन नै कएल गेल अछि । गजलप्रति भावनात्मक रुपे बेसी आ बेवहारिक रुपे बहुत कम प्रतिबद्ध छथि लेखक । गजलप्रति न्यान नै केने छथि । गजलक गहिराइ धरि नै पहुंच सकलथि । एहन प्रवृति वर्तमान सन्दर्भमे नवतुरिया सभमे सेहो बढल जा रहल छै जे की मैथिली गजलक लेल सही सूचक नै छी ।
 - कुन्दन कुमार कर्ण

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Tuesday, 27 June 2017

गजल

ई प्रेम हमरा जोगी बना देलक
विरहक महलके शोगी बना देलक

उपचार नै भेटल यौ कतौ एकर
गम्भीर मोनक रोगी बना देलक

मारै करेजामे याद टिस ओकर
दिन राति दर्दक भोगी बना देलक

संयोग जेना कोनो समयके छल
तँइ जोडि दू हिय योगी बना देलक

प्रेमक पुजगरी जहियासँ बनलौ हम
संसार कुन्दन ढोगी बना देलक

221-2222-1222

© कुन्दन कुमार कर्ण

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विश्व गजलकार परिचय शृंखला-7

"बोतल खुली है रक्स में जाम-ए-शराब है"

आइ विश्व गजलकार परिचय शृखंलामे एकटा विशेष गजलकारसँ परिचय कराएब। ओहिसँ पहिने ई निवेदन कऽ दी जे किछु एहन रचनाकार एहन होइ छथि जे कि पाठ्य रूपमे प्रसिद्ध होइत छथि तँ किछु कोनो गायक द्वारा। आइ जिनकासँ हम परिचय कराएब ओ दोसर तरहँक रचनाकार छथि मने हिनक रचना गेलाक बादें प्रसिद्ध भेल। फना बुलंदशहरी (मूल नाम-- मुहम्मद हनीफ) पाकिस्तानक प्रसिद्ध शायर छलाह। प्राप्त जानकारीक अनुसारें ई गुजरावाला (Gujranwala) जिलाक अरूप स्थानक छलाह। बुलंदशहरी प्रसिद्ध शाइर क़मर जलालवीजीसँ शाइरीक शिक्षा लेने छलाह। एहिठाम ईहो जानब रोचक जे बुलंदशहरीजीक गुरू क़मर जलालवीजीक एकटा पोथीक नाम सेहो " मेरे रश्के क़मर" छनि। बुलंदशहरीजीक बेसी जीवनी नहि भेटैत अछि कारण कहियो हिनका पाठ्य रूपमे गंभीरतासँ नहि लेल गेलनि जाहि कारणे एक तरहें पाठ्य रूप बला पाठकक नजरिसँ ओझल छथि। जे गीत-कौआली सुनै छथि हुनका तँ शाइरक नाम बूझल रहैत छनि मुदा जीवनी नहि तँइ हमहूँ असमर्थ छी। जे रचनाकार गायक द्वारा प्रसिद्ध होइत छथि ओहो कोनो एकै-दू गायक द्वारा प्रसिद्ध होइत छथि। बुलंदशहरीजीक रचना "मेरे रश्के-क़मर, तूने पहली नजर, जब नजर से मिलायी मज़ा आ गया" जेनाहिते प्रसिद्ध कौआली गायक "नुसरत फतेह अली" गेला तेनाहिते बुलंदशहरीजीक नाम सभहँक सामने आबि गेल। ओना ओहिसँ पहिने सेहो हुनकर रचना सभ गाएल गेल छल मुदा "मेरे रश्के-क़मर" केर बाते किछु अलग छै। बुलंदशहरीजीक एकटा अन्य रचना " बोतल खुली है रक्स में जाम-ए-शराब है" सेहो प्रसिद्ध भेल। ई रचना नुसरतजीक अतिरिक्त मुन्नी बेगम द्वारा गाएल गेल छै आ व्यक्तिगत तौरपर हमरा मुन्नी बेगम बला भर्सन बेसी नीक लागल अछि।
भारतक साधारण जनता बुलंदशहरीजी नाम तखन चिन्हलक जखन कि  अरिजीत सिंह द्वारा "मेरे रश्के-क़मर" रचनाक नवका भर्सन आएल आ तकर बाद ई रचना फेरसँ भारतमे प्रसिद्ध भऽ गेल मुदा अफसोचजनक जे मूल रचनाकारक संबंधमे फेर सभ अपरिचित रहि गेल। एकठाम यूट्यूबपर एकरा अरिजीत सिंह द्वारा गाएल आ नुसरत फतेह अली द्वारा लिखल सेहो भेटत। चूँकि बुलंदशहरीजीक बारेमे बेसी तथ्य नहि अछि तँइ एहिठाम हम "मेरे रश्के क़मर" रचना सुनाबी जे कि नुसरत जी गेने छथि (परिशिष्टमे ई रचना सेहो देल गेल अछि) --



आब एही रचनाकेँ अरिजीत सिंह केर अवाजमे सुनू--


आब सुनू मुन्नी बेगमजीक अवाजमे ""बोतल खुली है रक्स में"--

एही रचनाकेँ फेरसँ मुन्निए जीक अवाजमे सुनू आ अंतर ताकू--



आब फना बुलंदशहरीजीक किछु प्रसिद्ध रचना देल जा रहल अछि जे कि विभिन्न गायक द्वारा गाएल अछि--

आँख उठी मोहब्बत ने अंगडाई ली ( गायक नुसरत फतेह अली खान)






उर्दू लिपिमे बुलंदशहरीक जीक रचना पढ़बाक लेल एहिठाम आउ-- https://issuu.com/rchakravarti/docs/deevaan-e-fanabulandshehri

परिशिष्ट--
मेरे रश्के-क़मर, तूने पहली नजर, जब नजर से मिलायी मज़ा आ गया 
बर्क़ सी गिर गयी, काम ही कर गयी, आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया


जाम में घोलकर हुस्न कि मस्तियाँ, चांदनी मुस्कुरायी मज़ा आ गया 
चाँद के साये में ऐ मेरे साक़िया, तूने ऐसी पिलायी मज़ा आ गया


नशा शीशे में अगड़ाई लेने लगा, बज्मे-रिंदा में सागर खनकने लगा
मैकदे पे बरसने लगी मस्तिया, जब घटा गिर के छायी मज़ा आ गया


बे-हिज़ाबाना वो सामने आ गए, और जवानी जवानी से टकरा गयी
आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से , देखकर ये लड़ाई मज़ा आ गया


आँख में थी हया हर मुलाकात पर , सुर्ख आरिज़ हुए वस्ल की बात पर
उसने शरमा के मेरे सवालात पे, ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया


शैख़ साहिब का ईमान बिक ही गया, देखकर हुस्न-ए-साक़ी पिघल ही गया
आज से पहले ये कितने मगरूर थे, लुट गयी पारसाई मज़ा आ गया


ऐ “फ़ना” शुक्र है आज वादे फ़ना, उस ने रख ली मेरे प्यार की आबरू
अपने हाथों से उसने मेरी कब्र पर, चादर-ऐ-गुल चढ़ाई मज़ा आ गया

क्रेडिट--


विश्व गजलकार परिचय शृंखलाक अन्य भाग पढ़बाक लेल एहि ठाम आउ--  विश्व गजलकार परिचय 


तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों