हमर घरक भीत लाईग छोट सन बाट
बाटक ध कगनी हुनक ताकि हम बाट
चान सुरुज देखि देखि घोर भेल नैना
जिनगीक चान आई उगती ई बाट
हसोथब कोना हुनक रूपक इजोत के
टहाटही अभरत आई इजोर ई बाट
हमरे सन हुनको भेल हेतैन धकमकी
देखि देखि इ सब मुसुकी देत ई बाट
हुनके गछेर हम कह्बैन निजगुत
जरे जरे काटब जिनगीक ई बाट
स स्नेह -विकाश "मैथिल"
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रविवार, 6 नवंबर 2011
गजल
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गजल,
विकाश झा "रंजन "
गुरुवार, 3 नवंबर 2011
गजल
बतहा बसात सन टौआइत हमर जिनगी
मेंहक बरद सन थौआईत हमर जिनगी
बिपदाक टाल हमर जिनगीक दालान पर
सूखक कबाउछ में हौआइत हमर जिनगी
झहरैत मेघ थिक सब हमर मोनक मनोरथ
डालिक अरहुल सन मौलाइत हमर जिनगी
नोरक डबरा हमर जिनगीक आँगन में
काठक असरा सन घुनाइत हमर जिनगी
नेहक आतुर हमर जिनगीक भोर सांझ
सिनेहक सपना में बौआइत हमर जिनगी
स स्नेह
विकाश झा
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गजल,
विकाश झा "रंजन "
बुधवार, 12 अक्टूबर 2011
गजल
हमर मोनक अहीं गूगल अहीं युआरेल छि
अहींक प्रेमक स्क्रैप सौं हमर भरल गीमेल छि !
ऑरकुट पर मुँह ठोर अइछ कने दोसर रंग
फेसबुक पर तेसरे रंग इ कोन खेल छि !
विडियो में चैट खातिर लेलौं हम थ्री गी
पोप केलक मेसेज अहाँ बीजी भ गेल छि !
आईटी सन सैद्खन अपडेटेड अहाँक स्टेटस
विन्डोजक प्रोसेसर में अहाँ एप एन्ड्रोआईड छि !
नेटवर्कक् अई माया सौं तरंगित अइ तन मन
अहीं जिनगीक प्रोग्रामक सॉफ्टवेर भ गेल छि !
स स्नेह
विकाश झा
अहींक प्रेमक स्क्रैप सौं हमर भरल गीमेल छि !
ऑरकुट पर मुँह ठोर अइछ कने दोसर रंग
फेसबुक पर तेसरे रंग इ कोन खेल छि !
विडियो में चैट खातिर लेलौं हम थ्री गी
पोप केलक मेसेज अहाँ बीजी भ गेल छि !
आईटी सन सैद्खन अपडेटेड अहाँक स्टेटस
विन्डोजक प्रोसेसर में अहाँ एप एन्ड्रोआईड छि !
नेटवर्कक् अई माया सौं तरंगित अइ तन मन
अहीं जिनगीक प्रोग्रामक सॉफ्टवेर भ गेल छि !
स स्नेह
विकाश झा
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विकाश झा "रंजन "
गुरुवार, 22 सितंबर 2011
रुबाइ
तोहर नेहक ताग में उरी हम गुड्डी जेना ,
तोरा देखी त फुदकी हम फुद्दी जेना !
हम तोरे लय जितिया हरिबासल केलौं,
तोहर रूपक इजोत अरबा खुद्दी जेना.!!
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रुबाइ,
विकाश झा "रंजन "
बुधवार, 18 मई 2011
गजल
कोहबर के घाम महैंक उठल मौह सन
रुचलौं आहाँ राईत गुदगर रौह सन !
चतुर्थी अबैत बेस भेलौं समर्थ
पाकल यौवन भातिक लौह सन !
पाटिया बनल पट्काक अखारा
टसक्लौं ने आहाँ नबका चौह सन !
भोरे बिधकरी जे केलैन खखाश
चुप्पे मठेरलौं बतही पुतौह सन !
अहिबातलक पातिल सेहो मिंझा गेल
सांसक बिर्रो छल नागक फौंह सन !
रुचलौं आहाँ राईत गुदगर रौह सन !
चतुर्थी अबैत बेस भेलौं समर्थ
पाकल यौवन भातिक लौह सन !
पाटिया बनल पट्काक अखारा
टसक्लौं ने आहाँ नबका चौह सन !
भोरे बिधकरी जे केलैन खखाश
चुप्पे मठेरलौं बतही पुतौह सन !
अहिबातलक पातिल सेहो मिंझा गेल
सांसक बिर्रो छल नागक फौंह सन !
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विकाश झा "रंजन "
शनिवार, 14 मई 2011
रुबाइ
यौवन मचान सन गात सोनलत्ती छऊ,
काया कनोजैर सन घाम धूपबत्ती छऊ,
रसगर ठोर तोहर तोरलक सबूर के ,
मातल आँखी बुझ जरदाक पत्ती छऊ!
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विकाश झा "रंजन "
रुबाइ
आहाँ रूपक भेरियाधसान लागल अई,
छोरा संग बुढबोक आन जान लागल अई
आबो समेटू अपन भाभट दसगरदा
आँगन में घट्कक दलान लागल अई
छोरा संग बुढबोक आन जान लागल अई
आबो समेटू अपन भाभट दसगरदा
आँगन में घट्कक दलान लागल अई
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विकाश झा "रंजन "
रुबाइ
कोना कहू कहितो ई लाज होईया ,
बिनु टाका कूटमैतीक ने काज होईया,
सेहनता अई बेटी महफा में बैसती,
किये मैथिल भेलौं ई संताप होईया
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विकाश झा "रंजन "
रुबाइ
सगर जिनगीक तोरा सौं मीत जोरलौं,
एक दोसरक बेगरता सौं प्रीत जोरलौं
गरबहिंयाँ द दुनु गोटे बन्हलौं सिनेहके
तोहर नेहक गिलेबा सौं भीत जोरलौं
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विकाश झा "रंजन "
सोमवार, 9 मई 2011
रुबाइ
जिनगी अमोल तोहर कोंख भेटल माँ,
तोरे आँचर में हमरा भरोस भेटल माँ,
सब आफद अनेरे उरल कपूर सन ,
तोहर ममता के जखने बसत भेटल माँ!
तोरे आँचर में हमरा भरोस भेटल माँ,
सब आफद अनेरे उरल कपूर सन ,
तोहर ममता के जखने बसत भेटल माँ!
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विकाश झा "रंजन "
गजल
गजल
काइल्ह आँईखक आहँक हम तरेगन छलौं,
आई तरेगन बना किये दूर केलौ !
सब आखर सिनेहक हम गुनैत छलौं
आई आखर किया आहाँ बिसरा गेलौं !
हम एसगर अहिं संग दोसर भेलौं
आई तेसर बना किया आन केलौं !
ठोर आहाँक ने कहियो हम चुम्मा केलौं
आई नोरक किये ठोर चुम्मा देलौं !
तीर तरकस जकाँ संग सैद्खन छलौं,
आई तीरे लगा किये पीर देलौं !!
काइल्ह आँईखक आहँक हम तरेगन छलौं,
आई तरेगन बना किये दूर केलौ !
सब आखर सिनेहक हम गुनैत छलौं
आई आखर किया आहाँ बिसरा गेलौं !
हम एसगर अहिं संग दोसर भेलौं
आई तेसर बना किया आन केलौं !
ठोर आहाँक ने कहियो हम चुम्मा केलौं
आई नोरक किये ठोर चुम्मा देलौं !
तीर तरकस जकाँ संग सैद्खन छलौं,
आई तीरे लगा किये पीर देलौं !!
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विकाश झा "रंजन "
गुरुवार, 5 मई 2011
रुबाई
हुनक सोह टीसईया काँट बबूर जेना ,
आँईख भिजैईया तारी खजूर जेना ,
हुनके रूपक चिप्पी लगेलौं करेज में,
वो अघाई छईथ कछहरिक हजूर जेना !
आँईख भिजैईया तारी खजूर जेना ,
हुनके रूपक चिप्पी लगेलौं करेज में,
वो अघाई छईथ कछहरिक हजूर जेना !
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विकाश झा "रंजन "
रुबाइ
ईशा आ पैगम्बरक झगरा सुनलौं,
अन्हरा जिहाद के फतबा सुनलौं,
सुनलौं निछा गेलई लादेन परसु ,
आई फेर केदन लादेन भेल इ की सुनलौं !
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रुबाइ,
विकाश झा "रंजन "
गुरुवार, 28 अप्रैल 2011
गजल
मोन मुंगबा फुटईया मीत हमर ,
सोझा अबैईथ जखन प्रीत हमर !
हुनक जूट्टी में गूहल भबित हमर ,
हुनक गजरा गछेरने अतीत हमर !
खाम्ह कोरो बनल मोन चीत हमर ,
हुनक लेपट सौं छारल अई भीत हमर !
हुनक नख शिख में नेह निहीत हमर ,
हुनक कोबरे करत मोन तिरपित हमर !
हम हुनके सिनेह ओ सरीत हमर ,
हुनक मुस्की सौं जागे कबीत हमर !
सा- स्नेह
विकाश झा
सोझा अबैईथ जखन प्रीत हमर !
हुनक जूट्टी में गूहल भबित हमर ,
हुनक गजरा गछेरने अतीत हमर !
खाम्ह कोरो बनल मोन चीत हमर ,
हुनक लेपट सौं छारल अई भीत हमर !
हुनक नख शिख में नेह निहीत हमर ,
हुनक कोबरे करत मोन तिरपित हमर !
हम हुनके सिनेह ओ सरीत हमर ,
हुनक मुस्की सौं जागे कबीत हमर !
सा- स्नेह
विकाश झा
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विकाश झा "रंजन "
गजल
मोन मुंगबा फुटईया मीत हमर ,
सोझा अबैईथ जखन प्रीत हमर !
हुनक जूट्टी में गूहल भबित हमर ,
हुनक गजरा गछेरने अतीत हमर !
खाम्ह कोरो बनल मोन चीत हमर ,
हुनक लेपट सौं छारल अई भीत हमर !
हुनक नख शिख में नेह निहीत हमर ,
हुनक कोबरे करत मोन तिरपित हमर !
हम हुनके सिनेह ओ सरीत हमर ,
हुनक मुस्की सौं जागे कबीत हमर !
सा- स्नेह
विकाश झा
सोझा अबैईथ जखन प्रीत हमर !
हुनक जूट्टी में गूहल भबित हमर ,
हुनक गजरा गछेरने अतीत हमर !
खाम्ह कोरो बनल मोन चीत हमर ,हुनक लेपट सौं छारल अई भीत हमर !
हुनक नख शिख में नेह निहीत हमर ,
हुनक कोबरे करत मोन तिरपित हमर !
हम हुनके सिनेह ओ सरीत हमर ,
हुनक मुस्की सौं जागे कबीत हमर !
सा- स्नेह
विकाश झा
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विकाश झा "रंजन "
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