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शनिवार, 22 दिसंबर 2012

गजल


प्रस्तुत अछि श्रीमती इरा मल्लिक जीक ई बाल गजल-----


ई पोथी तँ हम नै पढ़बै ई तँ बहुत मोटगर छै
मुदा लगैए पढ़हे पड़तै करची बड्ड पातर छै

मिठका पुआ पकबै बाबी छन-मन भनसा घरमे
जत्ते सुन्दरि हम्मर बाबी ततबे पूआ मिठगर छै

बनलै पूआ लगलै भूख गे बुढ़िया हमरा तँ बेसी दे
ई धानी पातक चटनी तँ लागै बहुत झँसगर छै

ओकरा तँ बाबी देलकै छोटकी पूआ वाह भाइ वाह
रे नंगटा देखही हम्मर थारी तँ खुब्बे भरिगर छै

नेना भुटका मगन भेल छै बाबी हँसै छै तरे-तर
हमरा लेल तँ देवी छै जकरासँ घर डटगर छै

कौआ रे नै कर लुप-लुप पूआ धेने छौ बाबी तोरो ले
गाछसँ तों निच्चा उतर आमक गाछ झमटगर छै

सरल वार्णिक २०

सोमवार, 30 जुलाई 2012

गजल

प्रस्तुत अछि श्रीमती इरा मल्लिक जीक ई बाल गजल--------




सौँसे गाम तूँ मारने फिरैछेँ भरिके खूब टहल्ला रौ
जँ पढ़ै लिखै लेल कहबौ तँ बहुत करै छेँ हल्ला रौ

छौँरा सब सँग खेलै छे भरि दिन कबड्डी गुल्ली डँडा
नहि परलौ एखन धरि तोरा बपहियासँ पल्ला रौ

आबय दहिन गाम हुनका देखथुन तोहर लिल्ला
दैवो नहिँ बचेथुन जखन तोरथुन तोर कल्ला रौ

हम्मर बातक मोजर नै कैन्को ख़ूब कर्हि बदमस्ती
एकै बेरक सटकानि सँ खुलि जेतौ ग्यानके तल्ला रौ

आखर 20

शनिवार, 28 जुलाई 2012

गजल

प्रस्तुत अछि श्रीमती इरा मल्लिक जीक ई बाल गजल





डेग हमर छोट एखन लछ्य बहुत दूर अछि
नापि लेबै सफलताक बाट मेहनतिसँ बुझै छी

केतबो बाधा एतय बाटमे ढकेलि आगू बढ़बै
मनमे जँ ठानि लेलौँ फेर पाछु मुड़ि नहि सकै छी

मिथिलाक गौरवगाथासँ कहाँ कियौ अनजान छै
छलै कहियो दिव्य मिथिला एखन तँ माटि फकै छी

खूब पढ़ि आगू बढ़बै देशक हित काज करबै
स्वर्णिम मिथिलाके सपना अपन आँखिमे तकै छी

मिथिला अछि सुँदर ठोप भारतक ललाट केर
विश्वमे सम्मानित हो से भगीरथ प्रयास करै छी

(वर्ण -19)

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

गजल

प्रस्तुत अछि इरा मल्लिक जीक इ गजल


गजब तोहर रूप गजब तोहर सिँगार गे छौँरी,
तैपर तिरछी नजरिया मारै सौ सौ कटार गे छौँरी।


एहन बालि छौ उमिरिया कोना लचकै छौ कमरिया,
एना चलभि बीच बजरिया मरतै सँसार गै छौँरी।


छौ ठोर गुलाबी बसँती तोहर गाल गुलाबी बसँती,
सुँदर बदन तोहर छौ गुलाब के भँडार गै छौँरी।


गोरिया रँग तोहर बेजोड़ केहन मारै छौ इजोर,
चकाचक चढ़ल जुआनी पर मिटौ सँसार गै छौँरी।

मंगलवार, 27 दिसंबर 2011

गजल


प्रस्तुत अछि इरा मल्लिक जीक गजल



बाट जाम होय कि मगज विकास रुकबे करत
बेइमान हो नेता ते, देश के नैया डूबबे करत

पूँजीपति हो लालची, चोर धनबटोर सूदखोर
विकराल मँहगाइ ते आसमान छुबबे करत

भूख सँ बिलबिलाइत अछि बाल बच्चा वृध्दजन,
अइ सरकार के थूका फजीहत करबे करत

बढ़ैत जनसँख्या सँ त्रस्त अछि, सौँसे सँसार आइ,
बेरोजगारीक मारि सँ,लाचार तँ होबहे पड़त

जहि देश मेँ होय एकता,अखँडताक दिव्यमँत्र,
ओते सुख शाँति समृध्दि के.त्रिवेणी बहबे करत..
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों