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मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

गजल

गीत जं गाबी तं कोनो दर्द जागय
अतल मोनक दोग मे क्यो टीस बागय

ई शहर, ई सडक, ई वीरान मन
अहँक बीतल नेह सन किछु अपन लागय

प्रीत जे बिलहय अहँक मुस्की तरुण
सैह हमरा सं हमर बलिदान मांगय

हुलकि रहले लगे कोनो क्रान्ति छाया
आर मोनक शान्ति कत्तहु दूर भागय

रविवार, 4 अप्रैल 2010

गजल

दुन्नू जे नैन मे नैन मिला रहलैए

अइ धरती कें बसबा-जोग बना रहलैए

पिघलल पिघलल मोम बनल अछि सुग्गा-सुग्गी

देखियौ नेह करामत केहन करा रहलैए

जुडि रहलैए स्वर्ग-लोक धरतिक रिश्ता

जाति-धरम के झगडा-दन्न मिटा रहलैए

बन्न करू पंडित-मुल्ला, पोथी-पतरा

आशीषक घन अल्ला खुद बरसा रहलैए

ई जिनगी छी अकटा-मिसिया आ कि धान छी

भरल बखारी उकटा-भांड मचा रहलैए


बुधवार, 24 मार्च 2010

गजल

(मैथिलीक प्रख्यात गायक हेमकान्तक पछिला सप्ताह निधन भ' गेलनि। फरबरी '१० मे दरभंगा रेडियोक महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम 'मैथिली सुगम संगीत'क शुभारंभ हमर रचित आ हेमकान्तक गाओल एही गजल सं भेल छल।एहि गजल कें दोसरो-दोसरो गायक गेने छथि मुदा हेमकान्तक गायन मे जे रवानगी,जे फीलिंग छलनि से दुर्लभ अछि।ई गायन हुनक जीवनक अन्तिम गायन छलनि।से,ई पोस्ट करैत काल ओ बहुत मोन पडि रहल छथि।हुनका प्रति विनम्र श्रद्धांजलि।)

सूतल जागल सोह अहीं के आबैए
ए रुनझुन, ई देह कते भरमाबैए

ठहरल जल छी ठंडा-ठंडा, इतमिनान छी
गरम हवा ई हलचल कोना मचाबैए

लचक अहां के पत्ता-पत्ता कसक फूल के
अइ बगिया के माली मोहि बताबैए

जे कहबै से कहबै लेकिन एखन ने मानब
एखन प्रीत मनुहार हार बरसाबैए

जै मुस्की सं अहां करै छी अल्लो-मल्लो
सै मुस्की ई देखियौ रौद उगाबैए

ठाढ रहै छी एक पएर सं एक चलै छी
केहन अजूबा काज प्रेम करबाबैए

गुरुवार, 18 मार्च 2010

गजल

ओ मनुक्ख जे टुकडी-टुकडी भेल पडल अछि
अहां चैन सं रही ओ तकरे लेल मरल अछि

जे दीपक हो जडइत चहुंदिस तम कें चिरइत
तकरे दम पर आन दीप मे ज्योति बरल अछि

नेता कें नहि देखियौ नेता कें की देखबै
जत्तहि टेबबै तहीठाम ई जन्तु सडल अछि

लोकतंत्र अछि संविधान अछि न्यायालय अछि
बाहर बाहर ठोस आ भीतर कते तरल अछि

भूमंडल के दौड मे शामिल अहां भोग ले'
मुदा ने जानी विभव-गाछ फल कोन फडल अछि

हिन्दुत्वक मादे सोचलहुं तं ख्याल उठल
ऐंठी बचले अछि एखनहु बस डोर जडल अछि

शुक्रवार, 12 मार्च 2010

गजल

प्रेम जगत के पाया छीबांकी सब किछु माया छी
किए अहां विश्वास करै छीजे छी से ई काया छी
टाका छी जं खर्च करी - तंरुकल तं प्रेतक साया छी
जीवन छी- दोसर ले जीयबजं से नहि तं छाया छी
प्रेम जगत के पाया छी बांकी सब किछु माया छी
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों