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शुक्रवार, 17 जुलाई 2020

नचारी (शिव‌ भजन/ भक्ति गीत)

हाथ डमरू कान कुण्डल शीर्ष शोभै चान हे
बैसि पर्वत पर धरै एकान्तमे शिव ध्यान हे

रुद्र माला बांहि पहिरल बाघ छाला जांघमे
साँप धारण कण्ठ केने देह मातल भांगमे
पाप नाशक धर्म रक्षक जग करै कल्याण हे
हाथ डमरू कान कुण्डल...................

नैन खुजिते फूल बरसै ठोर बजिते प्रेम यौ
इन्द्र नारद भक्त बनि पूरा करै सब नेम यौ
शुद्ध रहिते भाव सहजे देत सब वरदान हे
हाथ डमरू कान कुण्डल...................

हाथ डमरू कान कुण्डल शीर्ष शोभै चान हे
बैसि पर्वत पर धरै एकान्तमे शिव ध्यान हे

2122-2122-2122-212
(बहरे रमल मुसम्मन महजूफ)

© कुन्दन कुमार कर्ण

शनिवार, 30 मई 2020

© कुन्दन कुमार कर्ण


गुरुवार, 21 मई 2020

हलिउड/इङ्गलिश फिल्मक गीतमे मिटर (छन्द/बहर)

मात्र हिन्दी फिल्ममे नै इङ्गलिश फिल्मी गीत सबमे सेहो मिटरक भरपूर प्रयोग भेल छै । निच्चा देखू हलिउडक सुपर डुपर हिट फिल्मक अतिलोकप्रिय गीत जे कि गीतक दुनियामे बहुतो रेकर्ड कायम करैत रेकर्डिङ्ग इन्डस्ट्री एशोसियन अफ अमेरिकाद्वारा शताब्दीक गीत(song of the century) मे समावेश भेल छै । एहि गीतक मुखडा आ मुखडाक पैटर्न जतए दोहराएल छै ततए एक किसिमक(6-6-8-6-6-8) आओर अन्तरा आ अन्तराक पैटर्न जतए दोहराएल छै ततए एक किसिमक(7-9-7-6-8) शब्दांश संख्या(syllable count), अर्थात मुखडा आ अन्तरामे दू अलत-अलग मिटरक प्रयोग भेल छै ।

Movie: Titanic (1997)
Lyrics: Will Jennings
Vocal: Celine Dion
Music: James Horner

Every night in my dreams
I see you, I feel you,
That is how I know you go on
Far across the distance
And spaces between us
You have come to show you go on

Near, far, wherever you are
I believe that the heart does go on
Once more you open the door
And you're here in my heart
And my heart will go on and on

Love can touch us one time
And last for a lifetime
And never let go till we're one
Love was when I loved you
One true time I hold to
In my life we'll always go on

Near, far, wherever you are
I believe that the heart does go on
Once more you open the door
And you're here in my heart
And my heart will go on and on

You're here, there's nothing I fear,
And I know that my heart will go on
We'll stay forever this way
You are safe in my heart
And my heart will go on and on


Scansion:

6-6-8-6-6-8
Eve/ ry/ night/ in/ my/ dre/ams…………………..…….6 syllables
I/ see/ you/ I/ feel/ you………………....………………….6 syllables
That/ is/ how/ I/ know/ you/ go/ on………………...8 syllables
Far/ ac/ ross/ the/ dis/ tance…………………………....6 syllables
And/ spa/ ces/ bet/ ween/ us……………………...…...6 syllables
You/ have/ come/ to/ show/ you/ go/ .…..……….8 syllables


7-9-7-6-8
Near/ far / wher/ ev/ er/ you/ are…………………..….7 syllables
I / be / lieve / that / the / heart/ does/ go/ on…..9 syllables
Once/ more/ you/ o/ pen/ the/ door…………………7 syllables
And/ you're/ here/ in/ my/ heart……………………….6 syllables
And /my/ heart/ will/ go/ on/ and/ on…………..….8 syllables
6-6-8-6-6-8
Love/ can/ touch/ us/ one/ time…………………..……6 syllables
And/ last/ for/ a/ life/ time…………..…………………….6 syllables
And/ ne/ ver/ let/ go/ till/ we're/ one….…………….8 syllables
Love/ was/ when/ I/ loved/ you…………………………6 syllables
One/ true/ time/ I/ hold/ to……………………………….6 syllables
In/ my/ life/ we'll/ al/ ways/ go/ on……………………8 syllables


7-9-7-6-8
Near/ far / wher/ ev/ er/ you/ are……………………...7 syllables
I / be / lieve / that / the / heart/ does/ go/ on…..9 syllables
Once/ more/ you/ o/ pen/ the/ door…………………7 syllables
And/ you're/ here/ in/ my/ heart……………………….6 syllables
And /my/ heart/ will/ go/ on/ and/ on……………...8 syllables


7-9-7-6-8
You're/ here/ there's/ no/ thing/ I/ fear……………..7 syllables
And/ I/ know/ that/ my/ heart/ will/ go/ on……...9 syllables
We'll/ stay/ for/ ev/ er/ this/ way…………………….…7 syllables
You/ are/ safe/ in/ my/ heart………………………….....6 syllables
And/ my/ heart/ will/ go/ on/ and/ on…………...…8 syllables

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-32

फिल्म: शिकारी (2000)
शाइर: समीर
गायक: कुमार सानु
संगीतकार: आदेश श्रीवास्तव
मुख्य कलाकारः गोविन्दा, करिशमा कपुर

बहर-ए-मुतकारिब मुसम्मन सालिम (122 x 4)

बहुत ख़ूबसूरत गज़ल लिख रहा हूँ
तुम्हे देखकर आजकल लिख रहा हूँ

मिले कब कहाँ, कितने लम्हे गुजारे
मैं गिन गिन के वो सारे पल लिख रहा हूँ

तुम्हारे जवां ख़ूबसूरत बदन को
तराशा हुआ इक महल लिख रहा हूँ

न पूछों मेरी बेकरारी का आलम
मैं रातों को करवट बदल लिख रहा हूँ

तक्तीअः

बहुत ख़ू / बसूरत / गज़ल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122
तुम्हे दे / खकर आ / जकल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

मिले कब / कहाँ कित / ने लम्हे / गुजारे
122 / 122 / 122 / 122
मैं गिन गिन / के वो सा / रे पल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

तुम्हारे / जवां ख़ू / बसूरत / बदन को
122 / 122 / 122 / 122
तराशा / हुआ इक / महल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

न पूछों / मेरी बे / करारी / का आलम
122 / 122 / 122 / 122
मैं रातों / को करवट / बदल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-31


फिल्म: आवारगी (1990)
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक: गुलाम अली
संगीतकार: अनु मलिक

मात्राक्रमः 1222-1222-1222-1222 (बहर-ए-हजज)

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

बड़ा दिलकश बड़ा रंगीन हैं ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर दिन रात रोता हूँ
खुदाया तूं ने कैसे ये जहां सारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

मेरे मालिक मेरा दिल क्यूँ तड़पता है सुलगता है
तेरी मर्ज़ी तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल किसी को तूने अंगारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

यही आग़ाज़ था मेरा यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था मुझे नाकाम होना था
मुझे तक़दीर ने तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

तक्तीअः

चमकते चाँ/द को टूटा/ हुआ तारा/ बना डाला
122 2/1 2 22/ 12 22/12 22
मेरी आवा/रगी ने मुझ/को आवारा/ बना डाला
12 22/12 2 2/ 1 222/12 22

बड़ा दिलकश/ बड़ा रंगी/न हैं ये शह/र कहते हैं
12 22/12 22/ 1 2 2 2/1 22 2
यहाँ पर हैं/ हज़ारों घर/ घरों में लो/ग रहते हैं
12 2 2/122 2/ 12 2 2/1 22 2
मुझे इस शह/र ने गलियों/ का बंजारा/ बना डाला
12 2 2/1 2 22/ 1 222/12 22

मैं इस दुनिया/ को अक्सर दे/खकर हैरा/न होता हूँ
1 2 22/1 22 2/ 12 22/12 22
न मुझसे बन/ सका छोटा/ सा घर दिन रा/त रोता हूँ
1 22 2/12 22/ 1 2 2 2/1 22 2
खुदाया तूँ/ने कैसे ये/ जहां सारा/ बना डाला
122 2/1 22 2/ 12 22/12 22

मेरे मालिक/ मेरा दिल क्यूँ/ तड़पता है/ सुलगता है
12 22/12 2 2/ 122 2/122 2
तेरी मर्ज़ी/ तेरी मर्ज़ी/ पे किसका ज़ो/र चलता है
12 22/12 22/ 1 22 2/1 22 2
किसी को गुल/ किसी को तू/ने अंगारा/ बना डाला
12 2 2/12 2 2/ 1 222/12 22

यही आग़ा/ज़ था मेरा/ यही अंजा/म होना था
12 22/1 2 22/ 12 22/1 22 2
मुझे बर्बाद होना था मुझे नाकाम होना था
12 22/1 22 2/ 12 22/1 22 2
मुझे तक़दी/र ने तक़दी/र का मारा/ बना डाला
12 22/1 2 22/ 1 2 22/12 22

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

गजल

मालूम नै छल तोहर नैना चितचोर गे
जहियासँ मिललै धरकन मारै हिलकोर गे

अदहन सिनेहक जे चाहक चूल्हापर चढ़ल
खदकल हियामे अगबे मिलनक इनहोर गे

रूमीक कविता सन मार्मिक तुकबन्दी जकाँ
दुनियाँक कोनो कवि लग नै तोहर तोड़ गे

शीशा जकाँ आखर आ पानी सन भाव छै
कहलहुँ गजल तोरे नाँओ भोरे भोर गे

बस एक तोरे आगू कोमल बनि जाइ छी
चलतै हमर जिनगीपर की ककरो जोर गे

लुत्ती सुनगि गेलै प्रेमक अगहन मासमे
बैशाख धरि हेबे टा करतै मटिकोर गे

दोसर नजरिके कुन्दन सोहाइत आब नै
चाहे रहै कारी या अछि केओ गोर गे

221-222-222-2212

© कुन्दन कुमार कर्ण

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सोमवार, 22 अक्टूबर 2018

गजल

हे जया जगदम्बा जगतारिणी कि जय हो
भगवती कल्याणी भयनाशिनी कि जय हो

कष्ट मोचक कामाक्षी जग सुखस्वरुपा
दुर्गपारा देवी दुखहारिनी कि जय हो

सिंहपर अासित मैया मातृका भवानी
कामिनी व्रह्मा वरदायिनी कि जय हो

इन्द्र दुखमे पुजलक परमेश्वरी अहींके
देव रक्षक अजिता कात्यायिनी कि जय हो

नाम जपलापर भक्तक मृत्यु जाइ छै टरि
शैलपुत्री कालक संहारिनी कि जय हो

रहि हृदयमे कुन्दनपर नित करब करुणा
प्रार्थना अछि र्इ पशुपति भामिनी कि जय हो

212-222-2212-122

© कुन्दन कुमार कर्ण

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मंगलवार, 24 जुलाई 2018

गजल

देश भरि कहादन रेल चलतै आब
फेर किछु विकासक खेल चलतै आब

थालमे धमाधम पीच करतै बाट
टोल-टोल हेलम हेल चलतै आब

कामकाज हेतै सारहे बाईस
योजनाक खातिर झेल चलतै आब

बुद्धिमान सब बेहोश जेना भेल
राजकाजमे बकलेल चलतै आब

नागरिकसँ उप्पर छै बनल सरकार
लोकतन्त्र ककरा लेल चलतै आब

राजनीतिमे कुन्दन बढल अपराध
जन जनारदनके जेल चलतै आब

212-122-212-221

© कुन्दन कुमार कर्ण

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गुरुवार, 28 जून 2018

गजल

दर्दके सेहो ई दर्द दर्दनाक बुझाइ छै
लोक छै किछु जकरा लेल सब मजाक बुझाइ छै

एक छनमे बन्हन तोड़ि गेल बात बनाक ओ
आब नाता हमरो सूतरीक टाक बुझाइ छै

सोझके दुनियामे के पुछै समाज जहर बनल
नैन्ह टा बच्चा आ बूढ़ सब चलाक बुझाइ छै

धुंइया जोरक उठलै पड़ोसियाक दलानमे
रचयिता एहन षड्यंत्र केर पाक बुझाइ छै

मोंछ पर तेजी ओकीलबा घुमाक दएत छै
कचहरीके मुद्दामे बढल तलाक बुझाइ छै

2122-2221-2121-1212

© कुन्दन कुमार कर्ण

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मंगलवार, 19 जून 2018

गजल

जुआनीके पहिल उत्सव मनेलौं हम
हियामे ओकरा जहिया बसेलौं हम

सुरुआते गजब छल सोलहम बरिसक
अचानक डेग यौवन दिस बढेलौं हम

उचंगाके कमी नै टोलमे कोनो
नजरि मिलिते इशारामे बजेलौं हम

गवाही चान तारा छै पहिल मिलनक
कलीके संग भमरा बनि फुलेलौं हम

असानी छै कहाँ टिकनाइ नेही बनि
समाजक रीतमे शोणित बहेलौं हम

कलम कापी किताबक कोन बेगरता
जखन इतिहासमे प्रेमी लिखेलौं हम

चिरै सन मोन ई उड़िते रहल कुन्दन
असम्भवपर किए असरा लगेलौं हम

बहरे-हजज (1222×3)

© कुन्दन कुमार कर्ण

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बुधवार, 30 मई 2018

गजल-

की कहू मोनमे किछु फूराइत नै अछि आइ काइल
ओकरा छोड़ि केओ सोहाइत नै अछि आइ काइल

मोहिनी रूप ओकर केलक नैना पर कोन जादू
चेहरा आब दोसर देखाइत नै अछि आइ काइल

नेह जहियासँ भेलै हेरा रहलै सुधि बुधि दिनोदिन
बात दुनियाक कोनो सोचाइत नै अछि आइ काइल

शब्द जे छल हमर लग पातीमे लिखि सब खर्च केलौं
भाव मोनक गजलमे बहराइत नै अछि आइ काइल

संग जिनगीक कुन्दन चाही ओकर सातो जनम धरि
निन्नमे आँखि आरो सपनाइत नै अछि आइ काइल

2122-1222-2222-2122

© कुन्दन कुमार कर्ण

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शुक्रवार, 18 मई 2018

गजल

ओकर संग ई जिनगीक असान बना देलक
सुख दुखमे हृदयके एक समान बना देलक

बुढ़हा गेल छल यौ बुद्धि विचार निराशामे
ज्ञानक रस पिआ ओ फेर जुआन बना देलक

अध्यात्मिक जगतके बोध कराक सरलतासँ
हमरा सन अभागल केर महान बना देलक

चाहक ओझरीमे मोन हजार दिशा भटकल
अध्ययनेसँ तृष्णा मुक्त परान बना देलक

अष्टावक्र गीता लेल विशेष गजल कुन्दन
कहितेमे हमर मजगूत इमान बना देलक

2221-2221-121-1222

(तेसर शेरक पहिल मिसराक अन्तिम
लघुके दीर्घ मानबाक छूट लेल गेल अछि)

© कुन्दन कुमार कर्ण

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सोमवार, 23 अप्रैल 2018

गजल

तोरा बिना चान ताराक की मोल
रंगीन संसार साराक की मोल

अन्हारमे जे हमर संग नै भेल
दिन दूपहरिया सहाराक की मोल

चुप्पीक गम्भीरता बुझि चलल खेल
लग ओकरा छै इशाराक की मोल

संवेदना सोचमे छै जकर शुन्य
नोरक बहल कोन धाराक की मोल

अपने बना गेल हमरा जखन आन
कुन्दन कहू ई विचाराक की मोल

221-221-221-221

© कुन्दन कुमार कर्ण

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रविवार, 8 अप्रैल 2018

गजल

केओ सम्मानक भूखल
केओ पकवानक भूखल

अपने आकांक्षा खातिर
पण्डा भगवानक भूखल

करनी धरनी छाउर सन
नेता गुनगानक भूखल

धरतीपर चल' नै जानै
कवि छथि से चानक भूखल

अपना चाहे जे किछु हो
अनकर नुकसानक भूखल

संतुष्टी सपना लोकक
सब अनठेकानक भूखल

22-222-22

© कुन्दन कुमार कर्ण

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सोमवार, 5 मार्च 2018

गजल

अस्तित्वमे अस्तित्व समा जेतै एक दिन
अपनाक अपने संग मिला जेतै एक दिन

बिनु शब्द आ संगीत मिलनके बेर प्रकृति
शुन्ना समयमे गीत सुना जेतै एक दिन

नै हम रहब नै देह रहत रहतै बोध टा
दुख दर्द सब जिनगीक परा जेतै एक दिन

मस्तिष्कके सुख दुखसँ उपर लेबै जे उठा
आनन्दमे र्इ मोन डुबा जेतै एक दिन

बहिते हृदयमे जोरसँ कुन्दन नेहक हवा
चैतन्य केर ज्ञात करा जेतै एक दिन

2212-221-1222-212

© कुन्दन कुमार कर्ण

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शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

बाल गजल

पापा यौ चकलेट खेबै
कनिये नै भरिपेट खेबै

छुछ्छे कोना नीक लगतै
नमकिन बिस्कुट फेंट खेबै

हमहीं टा नै एसगर यौ
संगी सभके भेंट खेबै

मानब एके टासँ नै हम
पूरा दू प्याकेट खेबै

कुन्दन भैया आबि जेथिन
बांकी ओही डेट खेबै

222-221-22

© कुन्दन कुमार कर्ण

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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

बाल गजल

बौआ हमर छै बुधिआर
लोकक करै छै सत्कार

ज्ञानी जकाँ कनिये टासँ
माएसँ सिखलक संस्कार

संगी बना ओ पोथीक
मानै कलमके संसार

खाना समयपर खेलासँ
देखू बनल छै बौकार

हँसिते रहल सदिखन खूब
मुस्कान देलक उपहार

कुन्दनसँ खेलाइत काल
जितबाक केलक जोगार

बहरे - मुन्सरह

© कुन्दन कुमार कर्ण

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शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

गजल

कोनो दर्दमे आइ धरि मिठास नै छल
भरिसक मोनमे प्रेमिकाक बास नै छल

मिलिते नैन तोरासँ ठोर बाजि उठलै
अनचिन्हारके टोकितों सहास नै छल

सुन्नरताक संसारमे कमी कहाँ छै
आरो लेल केने हिया उपास नै छल

नेहक लेल भेलौं बताह नै तँ कहियो
जिनगी एहि ढंगक रहल उदास नै छल

प्रियतम बिनु जुआनी कटति रहै अनेरो
लागल जोरगर चाहके पिआस नै छल

यौवन देखलौं सृष्टिमे अनेक कुन्दन
एहन पैघ भेटल कतौं सुवास नै छल

2221-2212-121-22

© कुन्दन कुमार कर्ण

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मंगलवार, 9 जनवरी 2018

गजल

नै उलहन कोनो नै उपराग तोरासँ
भरिसक बनतै दोसरके भाग तोरासँ

जियबै जिनगी हम माली बनिक' भमरासँ
सजतै ककरो मोनक जे बाग तोरासँ

पूरा हेतै से की सपनाक ठेकान
अभिलाषा छल जे सजितै पाग तोरासँ

तोंही छलही सरगम शुर ताल संगीत
छुछ्छे आखर रहने की राग तोरासँ

मेटा लेबै कुन्दन दुनियासँ अपनाक
रहतै जिनगीमे नै किछु दाग तोरासँ

222-222-221-221

© कुन्दन कुमार कर्ण

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों