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शनिवार, 29 सितंबर 2012
गजल
गजल
जमीन मे समयलौं हम अपने की जीवीतेमे हमरा गाडल गेल
अहील्या सुखी छलौं पाथर बनी कs ने बेदना ने कोनो संबेदना छल
हे श्याम सुन्दर हे मुरलीधर कहू प्रीत मे हमर कोन खोट छलै
बिरह अग्नी मे जरैत रहलौं हम किए प्रीत चिता मे जारल गेल
हे कृष्ण कहैत छलौं सखी हमरा बहीनक हमरा सम्मान भेटल
नोर बनी बहल दर्द हमर जखन पाँच पती सँ बिआहल गेल
हे बालकृष्ण अहि यशोदा के मातृत्वक बदला अहाँ किए अश्रु देलौं
गोकुल छोडि मथुरा गेलौं कहियो हाल पुछब से कहाँ आयल भेल
नारी पर अत्याचारक क्रम सुरुआत तहिए सँ भेल स्वीकार करु
नाक जे काटल सु्र्पणखा के कहू कोन न्याय सीद्धान्तक पालन भेल
इतिहास के अपन ईक्षा सँ सभ अपने तरह सँ लिखैत रहल
निधोक घुमैत अछि अन्यायी कहाँ समाज मे एहन के बारल गेल
सोमवार, 21 मई 2012
गजल
आँखि
सॉ नींद आब चलू भगा देल जाए
जोश भरल ई यात्रा के मजा लेल जाए
शहीद'क लहू सॉ भिजल माटि जे अछि
माथ ई माटि के चानन लगा लेल जाए
हाथ'क रेखा आगाँ बढबा सॉ रोकै यदि
एहन रेखा चलू आब मेटा लेल जाए
केओ बढतै आगाँ हम रहि जेबै पाछाँ
ई भरम आब मोन सॉ हटा देल जाए
अपना चाहि कथी सभ के भेटतै कथी
स्पष्ट भ'क' आब सभ के बता देल जाए
धागा प्रेम'क छलै गाँठ परलै जरुर
समय चिन्हू ओकरा सोझरा लेल जाए
फेरो तोडत मोडत बाँटत हमरा जे
उ सपने पर डोजर चला देल जाए
धर्म के नाम पर कर्म के जौं छोट कहै
एहन पाँती के पोथी स’ हटा देल जाए
इत्र सॉ तेल सॉ देह गमकल बहुत
मातृ भक्ति सॉ मोन के गमका लेल जाए
प्रेम बिरह'क गीत युवा गयलौं बहुत
वीर रस मे गेबै आब बता देल जाए
की आब चुप नै रहै अधिकार'क माँग
डर के कमला कोशी मे बहा देल जाए
सुततै किया अनेरो बहिर सरकार
शंख फूँकि आब ओकरा जगा देल जाए
सोमवार, 7 मई 2012
गजल
दूर अहाँ छी चलल आब कोना क’ रहब
मेह झहरैत छलै नेह बरसैत छलै
यादि ओ शूल बनल आब कोना क’ सहब
दिन महिना छोडू बरख बितल कतेक
चोट देलिएै एहन आब कोना क’ सहब
बुझि सकलौ ने हम प्रीत जे तोडलौं अहाँ
आगि बिरह'क कहू आब कोना क’ सहब
सूगा मैना जकाँ छल खीसा प्रीत'क अपन
खाली पिजरा देखैत आब कोना क’ रहब
रँग कतेक छलै उमँग ओ कतेक छलै
मोन जे बेरँग भेलै आब कोना क’ भरव
धधकैत जरितौं जे हम त नीके होइतै
घूर'क आगि जेहन आब कोना क’ जरब
बाढि नोर'क नै रुकल छवि बचाउ कोना
हमर आँखि मे अहाँ आब कोना क’ रहब
--- सरल बर्ण १६ ---
गुरुवार, 5 अप्रैल 2012
गजल
अहाँ सॉ भेटव कोना आब हम अछि हमर भाग घटल
सँगे चलबै जीवन भरि बचन इ जे अहाँ तोडि देलिएै
समेटब कहू कोना आब हम स्वप्न हमर भाफ बनल
अहाँ लेल खेल छल किछु दिन के की कोनो मजबूरी छल
सूनलौं ने किया किछु हमर मोने मे हमर बात रहल
बन्द अछि मुट्ठी मे खुसी हमर इ केहन भरम मे छलौं
सुखल बालु जकाँ जे ससरल खाली हमर हाथ रहल
फटैत छाती ल देखैत रहलौं घुरि कs अहाँ तकलौं कहाँ
देह के राखू कतेक दिन हम देखू हमर जान चलल
राति जे छत पर छलौं देर तक कारी असमान तकैत
जेना बादल हम छलौं ठहरल ओ हमर चान चलल
जागल छी बहुत दिन सॉ आब सुतितौं हम चिर निद्रा मे
निन्द आबै कहाँ कहियो जेना आँखि मे हमर काँट गडल
शनिवार, 10 मार्च 2012
गजल
उठा’क नजरि अहाँ जखन झुका लेलिएै
लजा’क पाएर अहाँ जखन नुका लेलिएै
रुप देखि एहन सुधि हरयलहुँ हम
घर जायब कोना रस्ता हम भुला गेलिएै
चान सन मुखडा केश कारी मेह'क सन
घण्टी मंदिर के जेहन श्वर सुना देलिएै
लगन जोर छल तैं संगम भेल अपन
गीत प्रीत'क संग संग गुनगुना लेलिएै
रचना सॉ अहाँ’क मोह एतेक हे ई्श्वर
पुष्प प्रेम'क की जरि जखन सुखा देलिएै
पिआस बढिते छल की दैव'क दोख देखू
लहास अपने कन्हा अपन उठा लेलिएै
अछि बेटि मे सजल जे प्रतिरुप अखन
पूँजी नेह'क ओकरे उपर लुटा देलिएै
फेरो असगर छी आबि अहाँ यादि बहुत
बिदा बेटि के केलौं आत्मा हम जुरा लेलिएै
धुल जमल फोटो देखैत जे नोर झरल
हवा तेज छल ओकरा हम उडा देलिएै
गुरुवार, 1 मार्च 2012
गजल
बाट चौबटिया ऊ साथी सङ्गतिआ, फेरो छोडि अयलहूँ हम
बिन चप्पल चली आरि धूरी, हरवाहा सॉ होरी'क गीत सुनी
बाँझ पडल छल सिनेह'क खेत, फेरो जोति अयलहूँ हम
आस मे फेरो कटत बरख, गाम पोखरि बड्ड यादि पडत
रहत मिठास तैं चासनी मे, मोन फेरो बोरि अयलहूँ हम
ठूठ गाछ भ'रहल जिनगी, मोन'क पात भेल पिअर छल
सजल रहब तैं इआद'क फूल, फेरो लोढि अयलहूँ हम
जीवन सङ्गीत छल बेसुर, ताल मात्रा सभ बहकल छल
मोन बीणा'क छल तार जे टूटल, फेरो जोडि अयलहूँ हम
तन के सोचु की मोन के सुनु, मोस्कील मे केहन जान फसल
नोर'क पानि मे होरी'क रङ्ग, बुझू फेरो घोरि अयलहूँ हम
सोमवार, 2 जनवरी 2012
गजल
ने भूत लिखू, ने भबिष्य लिखू, चलु आब अहाँ वर्तमान लिखू
असगर नै, सभ संग चलू, करब अहाँ नव निर्माण लिखू
कि भेल, औ भेल किए, कयलक के जर्जर, आब बिसारि दियौ
जाहि पर सन्तती गर्व करय, लौटेबै अतीत क मान लिखू
ने बाट जाम, ने मगज जाम, आब नै, ना, नुकुर बिसारि दियौ
उमंग भरु, तरंग भरु ,आब चलतै नव अभियान लिखू
बिश्वास राखू इच्छा शक्तिपर, चलु दंभ अहं केँ बिसारि दियौ
अगडा पिछडा कि होइछै यौ, लेब सभ मैथिल क साथ लिखू
बिचार रखियौ स्पष्ट, जखैन राज भेटत, तँ प्रारुप केहन?
दुर करु शंका केँ अहाँ, राखब सम-भाव, देब सम्मान लिखू
गान्धीगिरी चलु पुरान भेल, अन्ना क जोर तs मनबै ने अहाँ
ने रक्त बहै, ने नोर झरै, ने हेतै किन्हको अपमान लिखू
एफडिआई सँ खतरा कि? सहकारीता पर चलु ध्यान दियौ
सबल हेतै अर्थतंत्र, अही सत्य केँ करब आत्मसात लिखू
प्रतिभा पलायन किए? नव अवसर क चलू सृजन करु
नव सोच लाउ, कि लौटैथ सभ ,लगबैथ माटि क माथ लिखू
पाथर पथ पर प्रचंड अछि, डगर मानलौं उटंङ अछि
सागर बान्हि सकै छी अहाँ, नव इतिहासक शुरुआत लिखू
तन सँ, मन सँ, अहाँ प्रसन्न रहू, स्वस्थ स्पर्धा मे भेद नै होय
बढु आगाँ, शुभ-कामना अछि, नव बर्ष सँ नव प्रभात लिखू”
बुधवार, 28 दिसंबर 2011
गजल
जे रुप अछि जे रंग अछि
देखिकs दुनियाँ दंग अछि
आँखिक आगा छबी अंहिके
भेटब कोना उमंग अछि
दुर देश हम प्राणप्रिये
हृदय अहिंक संग अछि
आँहा बिन दिबाली, होली की
भेल जिनगी बेरंग अछि
निठुर समय बितै कोना
मोन उडैत पतंग अछि
नव उर्जा सँs प्रेम भरब
मोन मे नव तरंग अछि
अमर प्रेम के गीत गेबै
बाजय मोन मृदङ्ग अछी
छी प्राण अंहि हे जन्म भूमि
भ्रम हमर तs भंग अछि
जे रुप अछि जे रंग अछि
देखिकs दुनियाँ दंग अछि
शनिवार, 24 दिसंबर 2011
गजल
बाट जाम होइ की मगज, बिकास रुकबे करतै
धिरे गाम, कि होइ सहर, निकास भेटबे करतै
हम बेचब, बडद के बारहे टका मे ,ककरो की
कहुना, नाम यश औ मान, पियास मेटबे करतै
शब्द उधारे होइ, बात दुनियाँ के समझेबै हम
गीत नाद होइ कि गजल, जहान सुनबे करतै
कहबाक अछि त कहु, किछ प्रशंशा मे हमरो यौ
नै सिखब ई बर्ण बिन्याश, दिमाग उडबे करतै
लक्ष भाषा राजsक मात्र अछि तs मिलकय लडियौ
बात बात होइ की झगड सन्त्राश बढबे करतै
बिभिषण जयद्रथ तs देखु भेटत सभ ठमन
अर्जुन दृष्टि नै तs निश्फल प्रयाश होएबे करतै
साँप एक आ बीन दशटा बजायब तs बुझिते छी
ने नाचत साँप निश्चित उपहास होयबे करतै
लहैर उठत मैथिली के एहन, देखैत छि हम
लियौ हाथ मे हाथ सफल प्रयाश होयबे करतै
--------- बर्ण-१९-------------