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शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

गजल




कतेक अरमान स छुबने छलों गुलाब के
ओह हथेली में काँट जेना उगी आयल


कतेक मोसकिल अछ अप्पन आन बुझनाय
दिलक घाह स शोणित निकलि आयल


बदलि गेलों क्षणही में अहाँ जेना
छाती में कोनो कैक्टस उगी आयल


करेज में गडेत अछ यादी अहाँ के
केक्टस में जेना कोनो फूल खिली आयल

शनिवार, 12 दिसंबर 2009

गजल







सागर में आगि बिजली आसमान में

बेचैनी कते ओ जे ऐछ हमर प्राण में



दिन एहनो आयल हमर जिनगी में

बुझ्लों जे अपन मिलल छल आन में



जिनगीक रंग ढंग की देखि हुनकर

रूप बदलैत छन छन आसमान में

गजल



1

रिश्ता दर्द्क ऐछ कागज पर नहीं लिखू

शब्द मर्मक ऐछ चौराहा पर नहीं बाजु

हवाक प्रत्येक झोंक अपन नहीं होइत ऐछ

राती ते अन्हार ऐछ दिन अपन नहीं होइत ऐछ

सव् व्यथा के साज नहीं भेटैत छैक

सवता गीत पर आह नहीं सजैत छैक

सागरक तीर पर बैसली शेफाली पिआस

नेनेजीवन में रमल छी जीवनक आस नेने


खंड खंड जीवन जिनाई जिअल नहीं जैत ऐछ

बुन्न जहर पिनाई पिअल नहीं जैत ऐछ

चिरी चिरी अपन अंतर सीवी, सीअल नहीं जैत ऐछ

भोरे भोर अख़बार में खून डकैती आतंक

शेफाली पढ़हल नहीं जैत ऐछ

बेर बेर देशप्रेम पर भाषण सुनल नहीं जैत ऐछ

दहेजक नाम पर बेटा बेचब सहल नहीं जैत ऐछ

मानवक भीढ़ में हेरायल मानवताक

खोजल नहीं जैत ऐछ

गिध्ह जकां देश कें नोचैत मानव के

देखल नहीं जैत ऐछ

3

कतेक मोसकिल ऐछ जिनाई ,

जिनगीक कैद में साँस लेनाई

कतेक कामना से छुब्ने छलों गुलाब के

आह तरहथ धरी में कान्ट उगी आयल

हृदयक घाह से नोर छलकी आयल

शोनितक खंड में व्यथा भरी आयल

चली देलों एही शहर से अहाँ

मोनक आँगन में जेना कैकटस निकली आयल

ऐना गरैत ऐछ करेज में यादी अहांक

जेना कैक्टस में कोनो फूल खिली आयल


डॉ. शेफालिका वर्मा

२६७, त्रितय ताल , भाई परमानन्द कालोनी

दिल्ली.....९, फ़ोन..०११ २७६०४७९० मो, ०९३११६६१८४७ , ०९९९०१६२०२१







तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों