अजय ठाकुर (मोहन जी) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अजय ठाकुर (मोहन जी) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 2 जनवरी 2012

गजल


मुश्किल स भरल या रस्ता देखु,
समय स दुश्मनी के अशर देखु
हुनका याद में राईत भैर जगलो हम,
सुतल छथि ओ घर में बेखबर देखु
दर्द पलक के निचा उभैर रहलैन,
नदी में उठल कने लहर त देखु
के जाने छथि कैल रही या नै रही,
आए छी त कने हम्हरो दिश देखु
होश के बात करेत छलो उम्र भरी,
"मोहन जी" बेहोश छथि एक नैजैर देखु

शनिवार, 31 दिसंबर 2011

गजल


ओष के अन्हरियॉ में भॅ गेल मुलाकॉत बुचियाँसँ
नॅजॅर मिलल तॅ लागल सबटा गॅप भॅ गेल हुनकासँ
हुनका आँखी में छल एहन सुरमा कि हम कि कहू
हमर पुरा देह के रोंई क लेलक दिल्लगी हुनकासँ
वस्त्र छल किछु एहन ऊपर लिपिस्टिक के एहसास
आखिर धौला कुआं में क लेलो छेर-छार हुनकासँ
गाबैऽ लगलैन् हुनकर चुप्पी किछु सुन्दर गज़ल
समाँरल नै जै छलैन "मोहन जी" ख्याल हुनकासँ

गुरुवार, 29 दिसंबर 2011

गजल


गिरैतऽ अछी जखन नोर आँखी स
झरऽ लागैत अछी दरद आँखी स
भाग्य में हुनका चाँद सुरज होय अछी
देखई में लागैत अछी जे फकीर आँखी स
खीच देता ओ आई अपन छाती पर
जिनगीक दरदकऽ अड्डा आँखी स
फेर नहीं जनि पायब, जायत कते जान
"मोहन जी" छोरी देता जौ तीर आँखी स

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

गजल


तरहथ्थी पर दिया जरौंने छी हम
सपना केऽरी ऐहन् सजौंने छी हम
आहा आबू या नै आबू मर्जी आहके
बहुत प्यार-स्नेह सँ बजेलो या हम
लिखलो ओस स आहाक नाम लक
ओहे गीत आहा के सुनलो हन हम
जीवन में खुशी अही स मिलल या
अहि केरी नाम गुनगुनाबे छी हम
"मोहन जी"क नोर के बजह पूछैं छी
दर्द के छल तै बहा रहलो हन हम

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2011

गजल


सब तरहक रंग में हम फिट भ गेलो
नेता सब दुनियां में गिरगिट भ गेले
 
अफसर सब स ओ मिलत सिवाय जे
गेटकी पर लटकल होय चिट् भ गेले
 
चोर-डाकू और लफंगा-उचक्का सेहो 
सब के सब संसद में परमिट भ गेले
 
"मोहन जी"हर युग में सदा सूली चढल
कातिल-झूठा के नारा मगर हिट भ गेले

बुधवार, 14 दिसंबर 2011

गजल


सब त दारू के बोतल मुँह सऽ उठा क पिबै या /
"मोहन जी"  गिलास में कने पिलैथ त की भेल //
सब पर्दा में दुनियाँ के ठगे या और चोरी करे या /
हम कोनो लड़की के दिल चोरा लेलो त की भेल //
चोर सब चोरी के लेल राईत अन्हरिया मंगैत या /
हम प्यार करे के लेल ईजोरिया मंगलो त की भेल //
भगवान स दुनियाँ पाई-रूपया घर-दुआर मगैंत या /
हम सुंदर सुशिल सभ्य लड़की मंगलो त की भेल //
सब त दारू के बोतल मुँह सऽ उठा क पिबै या /
"मोहन जी"  गिलास में कने पिलैथ त की भेल //

गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

गजल

समय देत अगर साथ त हम जरुर मिलब / 
होयत अगर दारू के भोज त हम फेर मिलब // 


"मोहन जी"  ईजोरिया के लेल ओध्लो अन्हरिया /
ढैल जायत अनहरिया राईत त हम फेर मिलब // 


हमरा जरुरत नहीं या पुछबाक उत्तर केरी / 
पुछल जायत सवाल त हम फेर मिलब // 


जितब अगर आहा त बाजी लगा लिय /
देब आहा के सज्जा त हम फेर मिलब //       


  

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

गजल

जीवन जिबाक अछी बहुत जरुरी
ठण्ड में बियर आधा, रम होय पुरी

चाहलो जेकरा पेलो नहीं ओकरा
शाधना "मोहन जी" क रहल अधूरी

मोनक बात सच नै भ पैल
किस्मत के छल नहीं मंजूरी

ह्रदय फटल देखलो हम नोर
कियो देखलैथ नै मज़बूरी

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

गजल

हम त बैन बैशलो शराबी की करू /
और कनियाँ स जुदा हम कि रहु //

जिन्दगी बाकी या आब त थोरे दिन /
दुनू तरप जरैत देह अछी की करू //

कनियाँ ल क आबी गेलैथ हन शीशा /
लेकिन हम खुदस हारल छी की करू //

छल कहाँ नाव दुबाबे के गप्प  /
हम त अंधी के हवा छी की करू //

टुकरा में बैट गेल हमर के पहचान /
हम त टुटल शीशा छी की करू //  

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

गजल

आँखी स पिबऽ दिय एक पैग के त बात या
कैह त पायब हुनका ओ राज के त बात या

नै कोनो सिकवा गीला नै कोनो फरियाद या
हम समझै छी आहाक हालात के त बात या

हम आहाक सामने जाहिर कऽरी या नै कऽरी
जान लेब हमर की इ जजबात के त बात या

तपलीफ में छी हम जख्म अहिक नाम स
मैन लेलो हम एकरा सौगात के त बात या

आई तक "मोहन जी" हारलथि नै कोनो खेल स
जे मिलल तकदीर स ओ म्हात के त बात या


गुरुवार, 24 नवंबर 2011

गजल

सोचलो नै हम निक-बेजैई, देखलो सुनलो किछो नै /
मंगलो भगवान स हर समय, आहा सिवा किछो नै //

देखलो,चाहलो अहिके, सोचलो अहिके पुजलो अहिके /
"मोहन जी" के वफ़ा खता, आहाक खता किछोबो नै //

हुनका पर हमर आँख त, मोती बिछेलक दिन-रैत भैर /
भेजलो ओहे कागज हुनका, हम त लिखलो किछोबो नै //

एक साँझ के देहलीज़ पर,बैसल छलैथ ओ देर राती तक /
आँईख स केलैथ बात बहुत, मुह स कहलैथ किछ्बो नै //

पांच-दस दिन के बात या,दिल ख़ाक में मिल जायत /
आईग पर जखन कागज राखब, बाकी बचत किछ्बो नै //

रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

गजल

प्यार करे के सजा बहुत नीक दैत अछी कनियाँ
मैर जाउ त जिबै के दुआ दैत अछी दुनियां

"मोहन जी" कोन सूरज छथि जे इलज़ाम नै सहतैथ
मिथिला में पत्थर के भगवान बना दैत अछी दुनिया

इ जख्म प्यार के देखब नै ककरो
आनि क पूरा बाजार सजा दैत अछी दुनिया

किस्मित पर नाज़ नै करू मिथिला वाशी
हाथ के लकीर मिटा दैत अछी दुनिया

शादी के बाद मारे के उपाय करे अछी कनियाँ
जिबे के उपाय सिखा दैत अछी दुनिया
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों