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सोमवार, 30 अप्रैल 2012

गजल

गजल
बड़को बड़का के नहि छै आब सट्ठा
के आब ककरा दैए घी आ मट्ठा

ईंटाक घर ककरो ककरो होइ छल पहिने
गाम गाम मे खुजि गेल आब त भट्ठा

सिल्क पॉलिस्टर कीमती वस्त्र पौशाक भेलै
के पहिरैये मोट झोट आ लट्ठा

गामो मे स्क्वायर फूट मे बिकाइए जमीन
बिसरि जायब किछु दिन मे धूर आ कट्ठा

इलेक्ट्रॉनिक मीडियाक जमाना ई आबि गेल
नवयुग मे नहि भेटत स्लेट आ भट्ठा

जनता महगाइ सँ त्राहि त्राहि करै
भ्रष्टाचारी खाईए घी आ मट्ठा

चोर चोर मौसियौत भाई जखने भ गेल
के खोलत आब ककर कच्चा चिट्ठा

सदरे आलम गौहर
मो-9006326629

शनिवार, 19 नवंबर 2011

गजल

ई दुनिया मे प्यार करत के
ई जिनगी बेकार करत के

ई दुनीया धनवान सभक छै
निर्धन के सत्कार करत के

मीत हमर मुख सँ नहि बाजै
नीक जकाँ व्यवहार करत के

ओ त'निन्नो मे नहि आबै
सपना हमर साकार करत के

नेता अप्पन घर भरै ए
भारत के उद्धार करत के

पाँच बरिस नहि घुमि के ताकै
उन्नति पर विचार करत के

मैथिली मिश्री जकाँ मधुर छै
बाजि क' देखू मारि करत के

उगना बनिक' शंकर अयला
एहि गप सँ इंकार करत के

एहि ठाम कमला बलान बहैए
कोशी जीक तट पार करत के

बुधवार, 12 अक्टूबर 2011

गजल

आइ काल्हि सब दिस भ्रष्टाचार छै
चोर लूटेरा सबहक ई संसार छै

लाख करोड़ो अरबो खाकै बैस गेला
सुनै छियै ओकरे सबहक सरकार छै

उज्जर उज्जर कपड़ा सुन्दर सुन्दर बात
जनता के ठगबाक ई हथयार छै

लाख लगा क' जीती करोड़ो पाबी फेर
राजनीति नहि छै आब ई व्यापार छै

घाव नहि अछि आब सड़ैत सड़ैत कैँसर भ' गेल
काटू ई सभ आंग के ई बेकार छै

गांधी नेहरु लाल बहादुर कत' गेला
ई युग के ओहने नेता दरकार छै

ककरा पर आब आस राखू के अछि अप्पन
साधु लगैए जे चोरक सरदार छै

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

गजल

गजल
बड़को बड़का केँ नहि छै आब सठ्ठा
के आब केकरा दैए घी आ मठ्ठा

इलेक्ट्रोनिक मीडियाक जमाना इ आबि गेल
नवयुग मे नहि भेटत स्लेट आ भठ्ठा

गामो मे स्क्वायर फूट मे आब बिकाइए जमीन
बिसरि जायब किछु दिन मे धूर आ कठ्ठा

मिथिला बासी छी तैँ मैथिली बाजै छी
यार दोस्त सँ करै छी हँसी ठठ्ठा

इटांक घर ककरो होइ छल पहिने
गाम गाम मे खुजि गेल आब त' भठ्ठा

सिल्क पॉलिस्टर कीमती वस्त्र,पोशाक भेलै
के पहिरैयै मोट झोट आ लठ्ठा

दुखना,फेकना,रौदिया सभ परदेसी भेल
के जाइयै आब कान्ह पर ह'र ल' हठ्ठा

चोर चोर मौसयौत भाई जखने भ' गेल
के खोलत आब ककर कच्चा चिठ्ठा

जनता महंगाइ सँ त्राहि त्राहि करै
भ्रष्टाचारी खाइए घी आ मठ्ठा

गांधी बाबा आबि क' देशक हाल देखू
कतेक अहाँ के लिखू चिठ्ठी चिठ्ठा

रविवार, 4 सितंबर 2011

गजल

चलि गेली ओ आब सपना देखु
चित्र बनाउ कल्पना देखु

मुद्रा सँ तौलल जाए मनुक्ख आब
आई काल्हि के नपना देखु

भीतर कारी तेँ ने महकारी
उपर सँ ललका झपना देखु

जीति एलक्शन ठाठ करै ओ
जनता अपना अपना देखु

महंगाइ आकाश चढ़ल आब
सस्ता होयत इ सपना देखु

गजल

दाम एतय सभ चीजक देब पड़ै छै
अधिकारक लेल झगड़ा कर' पड़ै छै

गज भरि जमीन जौ कौरव नहि देब' चाहय
पांडव के फेर लोहा लेब' पड़ै छै

कर्बला केर खिस्सा त' दुनियाँ जानै छै
धर्मक खातिर शीश कटाब' पड़ै छै

झगड़ा झंझट मानलहुँ नीक नहि होइ छै मुदा
जीब' खातिर ईहो कर' पड़ै छै

"गौहर" साधु ब'न' चाहैत अछि मुदा
दुर्जन के जे पाठ पढ़ाब' पड़ै छै

रुबाइ




हरल भरल रहे देश अपन ई
हरित बनाबी भेस अपन ई
हरियाली लाबै खुशियाली
गौहरक अछि उपदेश अपन ई

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

गजल

अँही साकी अँही छी पैमाना,
हम कतय जाइछी आब मैखाना।

जहिया सँ देखलहुँ अँहाके हम,
भ'गेलहुँ हम अहीँक दीवाना।

अहाँ ताकी त हमरा लगइऐ,
हमरा खातिर खुजल अछि मैखाना।

हमरा बुद्धियार सभ चेताबैत छथि,
जरि जेबैँ कियै बनल छै परवाना।


जान पहिचान अहाँ सँ की भेल,
भेल जग अनचिन्हार अनजाना।

सदरे आलम "गौहर"
व्याख्याता-एस॰ एम॰ जे॰ कॉलेज खाजेडीह
ग्राम+पो॰-पुरसौलिया,मधुबनी (847226)बिहार
मो॰-09006326629

शनिवार, 5 मार्च 2011

गजल


जैह देखू सैह बाजू हम त यैह पढने छी॰।
राति के दिन कहैले हमरा केना कहै छी॥

चम्चागिरी चाटुकारिता नहिँ केलहुँ हम।
ताहि द्वारे फूसक घर मे हम रहि छीः।।

मिथिला देशक वासी छी हम मैथिली बाजब।
अपन इ पहचान नहि कहियो बिशरै छीः॥

सभ दिन एके रंग नहि होयत छै कान धरु ई।
कहियो नाह पर,कहियो गाङी पर नाह देखै छीः॥

सतयुग कलयुग मे नहि हम मोन के ओझराबी।
दुनिया त ठीके छै जौ हम ठीक रहै छीः॥

हँसऽ मे सभ हँसत कानऽ मे नहि कानत।
कानि के देखु तखन कहब जे ठीक कहै छीः॥

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

गजल


१.
गजल- आशीष अनचिन्हार
एहि लाइलाज बिमारीक की हाल हेतैक
स्वेच्छाचारी-चारणीक की दलाल हेतैक


हर दिन हर खन सानल दुखः आ दर्द मे
गरीब लेल नव-पुरान की साल हेतैक


रोजगार उड़िआ गेल बालु जकाँ
किएक केओ काज मे बहाल हेतैक


अहुरिआ कटैत लोक शोकाकुल
नोरे पीबि मँगनी मे हलाल हेतैक


धैरज धरु प्रतीक्षा करु अनचिन्हार
मृत्यु सुखद जिनगी जिबक जंजाल हेतैक

२
गजल- सदरे आलम गौहर

जहिआ-जहिआ कौआ बाजे टाटपर
देखै छी हम ओ तँ अबैए बाटपर

ताकै छल पोखरि-झाखरि गेलै कहाँ
आँखि झुका बैसल छथि भाइ तँ घाटपर

निन्नो हेतै केना माए-बापकेँ
बेटी बैसल सदिखन जकरा माथपर

सौंसे घरमे पाबनि मनबैए इ सभ
सदिखन बैसल बूढ़ा खोंखथि खाटपर

झिल्ली-मुरही-कचरी आबो भेटत
आबि तँ देखू अप्पन गामक हाटपर
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों