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बुधवार, 1 फ़रवरी 2012

गजल

बड मनभावन नयनक शोभा, काया श्याम वर्ण उत्किर्ण
सहसमुखी सौन्दर्यक अक्ष छनि, वक्ष समक्ष प्रेम उतीर्ण ।

पैघ केशक कलि फ़ूटित बनिकए खिलि प्रेमक किसलय
नख सिख दहक महक विराजत , हॄदय होयत विदिर्ण ।

मुसिक मुसिक मन उपवन विचरय सुन्दर सब नर- नारी
प्रेमालय केर छात्र गिरि कए भय जायत बहुधा अनुतीर्ण ।

प्रेम पथिक पथ जीवन बिसराए , पटकैत सदिखन माथ
बनि कवि आब सर्वत्र बौराए, दूषित देह लागै जीर्ण शीर्ण ।

- भास्कर झा 31/01/2012

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

गजल


प्रेम-गाछ पर बैसल वो चिड़ै , कुन दिशा में उड़ि गेलई
मोनक बात मोने में रहिके अंकुरित भकअ गड़ि गेलई ।

दूर उड़ान हरि लेलक प्राण, हर्खक बरखी लागै भय गेल
बनिके ठूठ ठाड़े मोन रहिगेल, हरियर फ़ुनगी झड़ि गेलई ।

मन उपवन छल स्वच्छ सुवासित चाहक छाया बड गंभीर
हॄदयक वेदना सं तप्त त्रस्त, सुखायलओ जड़ि जड़ि गेलई ।

कानै आंखि दुनु झड़ि झड़ि, ककरा सं कहब ई प्रेमक पीड़
प्रेयसी प्रेम पीड़ित प्रियतम के अनंत पीड़ा में छोड़ि गेलई ।-
भास्कर झा 31/01/2012

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

गजल

गरदनी रसपान देहप्रेमक सोपान भ गेलई
प्रेम रस आब नागक विष पान भ गेलई !

नवयौवनक रुप छलै प्रेम कविक स्वप्रेरणा
देहक सौन्दर्य पर बाला के गुमान भ गेलई !

खेल कूदि पढैत बढैत छोट छीन बालपन
आई नवजात सब अहिना सयान भ गेलई !

मरि रहल अछि संस्कृति, जरैत संस्कार
प्रेमक अनुभूति आब त श्मशान भ गेलई !

गरदनी रसपान देहप्रेमक सोपान भ गेलई
पवित्र प्रेमक भाव के आब उठान भ गेलई !
- भास्कर झा
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों