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शुक्रवार, 21 मार्च 2014

की थिक छन्द-

छन्द शब्दक जन्म संस्कृतक शब्द "छन्दस्" वा "छन्दक"सँ सम्भव अछि। "छन्दक" केर अर्थ छै- हाथमे धारण करए बला गहना। आ "छन्दस्" केर १६ टा अर्थ छै---
१) वेद
२) वेदक वाक्य सभ जे की अक्षरक संख्या हिसाबसँ निर्धारित हो।
३) ओ वाक्य जे की अक्षर, मात्राक्रम वा मात्राक हिसाबसँ एवं यति-गतिक नियममे बान्हल हो।
४) ओ विद्या जैसँ छन्द सीखल जा सकए
५) मनमरजी
६) बन्हन
७) जाल, समूह
८) कपट, छल
९) कला,युक्ति
१०) रंग-ढ़ंग, अकार,चेष्टा
११) अर्थ, मतलब
१२) एकांत
१३) विष
१४) आवरण
१५) कनियाँ
ऐठाम क्रम संख्या १,५,८सँ १३ धरि ओ १५ विवेच्य नै अछि।

श्रीमद्भगवद्गीतामे वेद लेल "छन्दस्" शब्दक प्रयोग अछि---
" ऊ ध् र्व मूलमधःशखामश्ववत्थं प्राहुरव्ययम्
छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्
(१५-१)

पाणिनि अपन अष्टाध्यायीमे सेहो "छन्दस्" वेदक अर्थमे अछि।

अमरकोश केर तेसर काण्ड (संकीर्ण वर्ग)क २० श्लोक एना अछि-
अभिप्रायश्छन्द आशयः

मने "मोनक गप्प" वा "अभिप्राय" छन्द भेल।  

बुधवार, 27 जुलाई 2011

छंदक जरुरति

अहाँ सभ पूछि सकैत छी जे गजल आ शेर--शाइरीक ब्लाग पर छंदक वर्णन किएक ? मुदा इ प्रश्न खाली मैथिलीए सन भाषा मे उठि सकैत अछि। जाहि भाषाक खुसरो आ गालिब सभ बिना छंदक गजल लिखैत होथि ओहि भाषा मे इ प्रश्न उठब स्वाभाविक अछि। मुदा जेना की हमरा लोकनि आब बुझि रहल छी जे गजल आ ओकर अन्य विधा बिना बहर ( छंद) के नहि लिखल जा सकैए । आ मैथिली गजलक प्रारंभिक बहरक विस्तृत अध्य्यन आ विशलेषण गजेन्द्र ठाकुर द्वारा " मैथिली गजल शास्त्र" आ हमरे द्वारा "गजलक संक्षिप्त परिचय"मे देल गेल अछि /देल जा रहल अछि। आ ओहि बहर सभ पर अमल नवपीढ़ीक गजलगो ( सुनील कु. झा, रोशन झा-नेपाल) आदि द्वारा भए रहल अछि। मुदा हमरा विचारें अरबी काव्यशास्त्र आ संस्कृतकाव्य शास्त्र मे बहुत समानता छैक। आ एही समता विषमताक अध्ययन एहि पृष्ठक माध्यमें कएल जाएत संगहि-संग हमरा लोकनि वेस्टर्न पोयटिक सेहो देबाक प्रयास मे छी। अर्थात पूर्व-मध्य आ पश्चिम तीनू एहि ब्लाग पर एकाकार हएत। ज्ञानक एहि पवित्र त्रिवेणीमे चुभकबाक लेल अहाँ सभ सादर आमंत्रित छी।



तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों