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गुरुवार, 24 मई 2012

बन्द

एकटा बन्द प्रस्तुत कए रहल रहल छी....कने देखबै....

गजलसँ सजल अछि विदेह
शेरसँ भरल अछि विदेह
प्रेमसँ जड़ल अछि विदेह
मोनसँ जुड़ल अछि विदेह
सभठाँ घुसल अछि विदेह
आब तँ अचल अछि विदेह

गुरुवार, 19 जनवरी 2012

बन्द

चंचल यौवन लैत उफान छैक
कुंदन वसन भरै गुमान छैक
अंजन रंजित नयन वाण
हरि लेलक ई सभक प्राण
शस्त्र एहेन केलहु निर्माण
त्राहिमाम हे देव करू त्राण
चाह नहि ई त विधि विधान छैक

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

बन्द

एक मास एक दिनकेँ बाद वेलेन्टाइन डे आएत। हमर शेरो-शाइरी लिखबाक इहो उद्येश्य अछि जे प्रेमी-प्रेमिका मैथिली शेरकेँ माध्यमें प्रेमकेँ स्वीकार करथि। तँ प्रस्तुत अछि मैथिलीएकटा बन्द जे शायद मैथिलीक पहिल बन्द हएत। ओना इ पाँति सभ अरबी बन्दकेँ लक्षण पर प नै आएत मुदा हमरा उम्मेद अछि जे आरो लोक सभ नीक बन्द लिखता। तँ कल्पना करू वेलेन्टाइन डे केर--------


पहिने जोड़ू सए कमलकेँ
तैमे जोड़ू हजार गुलाब
तकरा बाद जे बनि जाएत
से निशानी हएत प्यारकेँ
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों