जीवन मृत्युकेँ छोर तोहर हाथमे
कठपुतली इ जग डोर तोहर हाथमे
हम सरनागत एलौं तोहर सरनमे
सगरो कष्टक तोड़ तोहर हाथमे
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
जीवन मृत्युकेँ छोर तोहर हाथमे
कठपुतली इ जग डोर तोहर हाथमे
हम सरनागत एलौं तोहर सरनमे
सगरो कष्टक तोड़ तोहर हाथमे
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
हे कृष्ण फेर अवतार एकबेर लिअ
पापी कुकरमी सभकेँ आबि घेर लिअ
धरती इ अहाँक डूबि रहल अधर्ममे
जतरा आबि एक बेर अपन फेर लिअ
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
हे कृष्ण गोविंद मुरारी मिता हमर
सगरो दुनिया केर मालिक पिता हमर
गेलअ छोरि किएक तू ‘मनु’क करेजा
घुरि आबअ नहि तँ सजत आब चिता हमर
✍🏻जगदानन्द झा ‘मनु’
मीरा केर हरने अहाँ कते दुख छी
खा साग विदुर केर भेल बड्ड सुख छी
हे माधव ‘मनु’ केर अपन भक्ति दय दिअ
दुनियामे सबसँ सुन्नर अहाँक मुख छी
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
प्रभुजी पाथर करेज हमर कोमल करु
एतय रही अहाँ ततेक सिनेहल करु
संसारक जंजालसँ मुक्ति दय ‘मनु’केँ
अपने चाकरीमे सदिखन राखल करु
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’