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गुरुवार, 31 मई 2012

गजल

सुनैए छी यौ भाइ शराब आहाँ छी महान
किया अहाँ के पिला बाद भ जाय छी शैतान


मिला के पाइन अहाँके लोक पीबैत अछि
बिना पानिक पीला सँ भ जाइ छै परेशान


अहाँके पीबै वला बिसरि जाइ छोट पैघ
यौ करै यै इ बात हमरा बहुत हरान


अंग्रेजी मे अहाँ के आदमी कहै यै वाइन
पीले के बाद अहाँ बनबै छी लोक के हैवान


केहन अछि अहाँ मे स्वाद "मुकुंद" जानि नै
मुदा जग मे केउ नै अछि अहाँ समान
mukund ''mayank''

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

गजल

एक बेर नजैर मिला झूका लेलियै किए
मिला नैन सँ नैन अहाँ हाँसी देलियै किए
अहाँक किछु कहवाक मोन होइत छल
फेर किछु सोचि चुप भs अहाँ गेलियै किए
नाम तs नहि अछि बुझल अहाँक हमरा
मुदा नैन देख किछु सोइच लेलियै किए
सब दिन तs देखी अहाँक जाइत आबैत
आइ नै देख हम व्याकुल भs गेलियै किए
अहाँ सब दिन चुपे चाप चलि जाइत छी
आइ ''मुकुंद'' कने मुस्किया क गेलियै किए
वर्ण-१६
मुकुंद ''मयंक''

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

गजल

अहाँ आबि क चलि गेलौं किए इ बात हम बुझि नै
बिसरल मोंन पाडि दलों किए इ बात हम बुझि नै
हमरा अहाँ संग कोन सम्बन्ध अछि से हम जानि नै
जिनगी बाट जोहि बितेलौं किए इ बात हम बुझि नै
बहुतो भीड़ छल तैयो अहीं पर नजर गेलै किए
अहाँ देख मुंह फेर लेलौं किए इ बात हम बुझि नै
अहाँ हमरा लेल सोचितो छि की नै के बताएत आब
अहीं टा लेल सोचैत एलौं किए इ बात हम बुझि नै
अहाँ हमरा अपनाएब की नै से नै जानै छि प्रितम
"मुकुंद " अहाँ के अपनेलौं किए इ बात हम बुझि नै
वर्ण -२०
मुकुंद मयंक

शुक्रवार, 30 मार्च 2012

गजल




देखियौ यौ बदैल गेलै जमाना
सब जन क रहल मनमाना

छोट -पैघ सब आइ काल्हि भैया
रुपैया कए सब भेल दिवाना

छोटका बच्चा कहै यै दूर छि जो
नहि खेबै साग रोटी वला खाना

की करतै मनुखो एहि जग में
महगाई छै मनुखक दिवाना

भूखल रहब मुदा गामे ध क
"मुकुंद " खाएत मिथिले के खाना

बर्ण-१२
मुकुंद "मयंक "
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों