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शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2012

गजल


नेनामे जखन कानैत रही तों चुप हमरा कराबैत रही
हम नहि मानैत रही तँ तों प्रेमसँ हमरा खुआबैत रही

तोहर आँचर छल ई दुनिया नहि हम किछु जानैत रही
मन दब रहलापर हमरा लोरी गाबि क' सुताबैत रही

पहर धरि काज केलाके बाद तों दम साधिके सुतैत रही
हमर टुहैक कानब सँ भरि-भरि राति माय जागैत रही

लोकक उपराग सुनिके बादो नै कखनो तमसाबैत रही
अपना नहि पीबि के ओ दूध हमरा जरूर पियाबैत रही

जन्मैत संगे देखै छी मायके पहिने, ठाढ़ कियो ओतय रही
आंखिमे भरल नोरक संग उत्पलके देखि मुस्काबैत रही

 सरल वार्णिक बहर वर्ण -23 

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

गजल

गजल
बाट जोगैत सँ आंखि पथरायल नै कहियो
प्रेम बिनाक जिनगी सरयायल नै कहियो

अहाँक सुनि के नाम किछु फुरैत नै हमरा
लिखै-पढौक लेल किछु फुरायल नै कहियो

अहाँक आवाज सुनि थरथराबैत छी हम
एहन मीठ बोल कियो सुनायल नै कहियो

देखि के अहाँक ओ मुखड़ा आ ओ सुनर नूर
चोन्हराबैत छै आंखि, बिसुरायल नै कहियो

कहैत अछि उत्पल भाव लs कs ओ प्रेम संग
प्रेम करू वा नै करू, इ नुकायल नै कहियो
(सरल वार्णिक बहर वर्ण -१७)

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

गजल

हमर आभाषक इच्छा हुए ते आंखि मुनि लेब
रहत मन साफ ते कखनो आहटो सुनि लेब.

बुधवार, 9 नवंबर 2011

गजल

तात-तात औ तात, सभ दिश अछि भ्रष्टाचार देखै छी
के राजा के रंक, सभक यैह अछि शिष्टाचार देखै छी

घूस दियो, घूस लियो, घूस पिबू,घूस  खाइ जाउ यौ
घूस अछि हमर ब्रहम, ई अछि सदाचार देखै छी

घूसं ब्रह्मा, घूसं विष्णु, घूसं देव महेश्वरः सुनै छी
घूसं जीवन आ मरणं, इत्तेक छी हम लाचार  देखै छी

हाय पैसा, हाय पैसा, सभ किछु अछि पैसे-पैसा किए ई
धर्म करू, कर्म करू, छोडू ई सभटा दुराचार देखै छी

आजुक कालमे व्याकुल उत्पल कहि रहल  अछि
नीक काज नै करब, नाम पर होयत मूत्राचार देखै छी.
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों