सुनील कुमार झा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सुनील कुमार झा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 6 मार्च 2012

गजल

आयल होली
सजल टोली

बनल पुआ
छनल पूरी

भाँगक गोली
होलिबा टोली

फगुआ फाग
विरहा बोली

भीजल साडी
भीजल आँगी

रंगल धोती
भीजल चोली

हरका साड़ी
रंगल नारी

गाँजा आ भाँग
दारू आ ताड़ी

भैया आ भौजी
सखी सहेली

सब छै मस्त
जीजा आ साली

आयल होली
सजल टोली

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

गजल

गामक इयाद पिया मोन पडाय ये।
बड़ रहलो शहर चलू घुरि चलू॥

शहरक इजोत नीक नै बुझाय ये।
लालटेन दिस आब चलू घुरि चलू॥

पिज्जा, कोला, बर्गर सों मोन अघाय ये।
मकई के रोटी लेल चलू घुरि चलू॥

हिप-होप, रैप, नै चित्त क सोहाय ये।
गामक ढोलीबा लग चलू घुरि चलू॥

दिल्ली सों आब सुनील मोन डराय ये।
गामक दिस लौट चलू, चलू घुरि चलू॥

गुरुवार, 15 सितंबर 2011

गजल

एही दुनिया म अहाँक नै नोर पोछ्त कियो
काज जो निकैल जाएत नै घुरि देखत कियो

कुकर्मक इ राह पर लोग बढ़ि गेल एते
अहाँ कतबो घुरा लीअ नै घुरि सकत कियो

अपनहि आन स जे मान एता पाबय छैक
दोसरक मान अछि की नै बुझि सकत कियो

कलमक धार स त बहुतो लिखायत छैक
ज्ञनगर एही बात कए जुनी पढ़त कियो

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

गजल

जन्म लेलोंउ जों मिथिला मे त मैथिल छी          
कर्म केलोंउ जों मिथिला मे त मैथिल छी           

मीठ बोल जों सदिखन सबहक ठोर रहे        
पान मखान स स्वागत होए त मैथिल छी         

कपटी माय नै होए ये सदिखन याद राखु        
सीता सन जों माय भेटल त  मैथिल छी       

कवी कोकिलक गान स जों मधुर छलके      
उगना बनि भगवान् भेटल त मैथिल छी     

अपने मुंह नै करब बड़ाई जानी लिया 
मिथिला हमर गाम भेल त मैथिल छी  

शनिवार, 18 जून 2011

गजल

जे काल्हि तक हमर नसीब छल।
ओ आब नाञ हमर करीब छल॥

ई दुनिया के रीत के लग से देखू।

रूप हिनकर बड़ा अजीब छल॥

ओ छल से आय धनिक बनि गेल।

जे काल्हि तक बड़का गरीब छल॥

बेटा के लेल करलों कोबला-पाती।
बेटी भेला पर बदनसीब छल॥


विधना के रीत की हम फरछाबी।

ई शुरूए से हमर नसीब छल॥



गजल

जों सभगोटे माटिक सपत्थ खाs लेब।
मनुखक बीचक देबार खसाs देब ॥

तब बनत अपन मिथिला महान
।
जों क्रान्तीक एकटा मशाल जलाs लेब॥

करेजाक आ
ँगि जों पानि से नै मिझत।
सपत्थ, जे लहू से एकरा मिझाs देब॥

जों मिथिला माँगत ई प्राणक आहुती
।
हम हँसि के अपन मुंडी चढ़ाs देब॥

हमरो ई ग़ज़ल अमर भs जाएत
।
जों सभ गोटे सुर से सुर मिला लेब॥

शुक्रवार, 17 जून 2011

रुबाइ

एहने किछु हल्ला ये देश अs विदेश में
भेड़िया सब घुमि रहल नेताक वेश में
सच आ की झुठ ये, फैसला करू अहें
केहन नौटंकी ई भए रहल देश में

मंगलवार, 14 जून 2011

रुबाइ

नेता आ चोर के की करी समीक्षा
चुप्पो रहय के नै करय ये
ईक्षा
नेता से कहियो अखनो सुधैर जाऊ
जनता के आब ते नै लिया परीक्षा


सोमवार, 13 जून 2011

रुबाइ

ई देशक नेता बेकार भए गेल
जनताक लुटय ले तैयार भए गेल
देशक नोट, विदेश में ये राखैत
एहने ई देशक सरकार भए गेल

शुक्रवार, 3 जून 2011

गजल

हमर अरमान जरि गेल आय कोहबर घर में
हमर मुसकान मरि गेल आय कोहबर घर में

जे फुलवारी हम सजेने रही आय बीस बरख सों

तकर सब फुल झरि गेल आय कोहबर घर में

कहलक रहे बरसाइतक भार हमहीं आनब

बाटे तकैत थकि गेल आँखि आय कोहबर घर में

मधुश्रावणीक सब अरहुल निरमाल ये बनल
टेमी के सब फोंका सुखि गेल आय कोहबर घर में

समदिया के आनल पढ्लों जे विदागरी के समाद
बहुत दिनक बाद कानलों आय कोहबर घर में

गुरुवार, 26 मई 2011

गजल

दिल तोड़ि के जे ओ हँसल हम घबरा गेलों
फेर हँसि के जे
ओ कानल हम घबरा गेलों

एकतरफा प्यार में पड़ल रही दुनु गोटे
जखन जानलों एही बात हम घबरा गेलों

प्यार में बिकल घर-बार ते कोनो चिन्ता नाञ
मुदा प्यारे जखन बिकल हम घबरा गेलों

मुखचन्द्र देखि के फुसलाबैत रही दिल के
ओ पराs गेल हमरा से ते हम घबरा गेलों

ग़ज़ल हम लिखय रही ओकरा बिसारि के
ओ याद जखन आएल ते हम घबरा गेलों

बुधवार, 25 मई 2011

गजल


(१)
हुनका सों हँसि के बाजलों ते हल्ला मचि गेल
हुनक मुँह दिस ताकलों तs हल्ला मचि गेल

रूपक चन्द्रमा के कारी अमावस केने रही
चमकैत पूर्णिमा के देलों तs हल्ला मचि गेल

ओ नैनक कटार से सबके ये घायल केने
हम नजैर से जे ताकलों तs हल्ला मचि गेल

हुनक रूपक लाइट भक्क-भक्क जरैत ये
सबहक डिबिया मिझेलों तs हल्ला मचि गेल

ओ आँखिक इशारा जे मारलक मुंडेर पर
हम फाँदि गेलों जे देबार तs हल्ला मचि गेल

अहों लिखूं ग़ज़ल ओ कहैत रहे सदिखन
करिया
कलम जेs उठेलों तs हल्ला मचि गेल

(२)

चमरपट्टी में गाय मरल ते कोनो बात नै
बभनपट्टी में बेंग मरल हल्ला मचि गेल

हमर झोपड़ी खसाs के ओ महल बना लेलाs
फेर से दुछत्ती जे बनेलों ते हल्ला मचि गेल

ओ नोटक जोड़ पर बड़का नेता बनि गेल
हमर ईमान नै बिकल ते हल्ला मचि गेल

विदेशो में रहि, नै बिसरल अपन माँटि के
एता गामों में बाजलों मैथिली हल्ला मचि गेल

नै बिसरब अपन माँटि के करियों ई प्रण
जे सुनलक हमर ई गोप हल्ला मचि गेल


मंगलवार, 24 मई 2011

रुबाइ

छौड़ा के फैशन कमाल केने छै
कान में बाली ठोर लाल केने छै
नटुआ ओ बनि गेल शहर में आबि के
छौड़ी के जेना ओ चाल केने छै

सोमवार, 23 मई 2011

रुबाइ

शहर में छौड़ी के फुटी गेल करम
लाज के गठरी बनि गेल बेशरम
अमेरिका के हवा में रंग गेल ऐना
नै किछु ईमान बचल नै बचल धरम

रुबाइ

शहरक छौड़ी के आँगी छोट भए गेल
नागिन जोंका केश बाँबकट भए गेल
शहर के हवा कहु आ अमेरिका के रंग
छौड़ी के डिरेस पेंट शर्ट भए गेल

मंगलवार, 17 मई 2011

गजल

हुनकर बेवफाई से धधकल आगिक लुत्ती बनि गेलों
पहिने रही ठीक-ठाक आब बहसल अगत्ती बनि गेलों

कहलक रहे ओ मरतो दम तक देब अहाँक साथ

दुखक आँचि जे एलाह कनिकटा, मोमबत्ती बनि
गेलों

कहलो जे हुनका अहाँक संग नै ये बहुत दिनक

लीपैट गेल ऐना देह में, की अमरलत्ती बनि
गेलों

पूजा के नाम से जिनका सिसकारी छुट
ैत रहे
ओ पियार में परि के गोसाँय भगवत्ती बनि
गेलों

शनिवार, 14 मई 2011

रुबाइ

आँखिक नोर के पहिचान नै सकलो
ठोरक मुस्कान के जानि नै सकलो
बुझलो तखन हम चेहरा केर भाषा
दिलक नजैर से जों मुखड़ा कs ताकलो

रुबाइ

हुनकर आगु में ठमकै के दम नै भेल
छोडि देलक तइयो प्यार कम नै भेल
एकरा अहाँ प्रेम कहु आs थेथरपनी
करेजो टूटल तइयो हमरा गम नै भेल

मंगलवार, 10 मई 2011

रुबाइ

नै कुनू बात आs गोप नीक लागय ये
नै कुनू ग़ज़ल नै गीत हमरा भावय ये
जहिया से भेल हमरा हुनका सों पियार
नै हुनकर सिवा दोसर नजर आबय ये

रुबाइ

देखते जों मोन में टीस उठि जाय
दूनू टा आँखी में नोर भरि जाय
ते बुझियो ई छौड़ा के
टूटल ये दिल
गबरू जबान जों बताह बनी जाय
तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों