ई दुनिया के रीत के लग से देखू। रूप हिनकर बड़ा अजीब छल॥ ओ छल से आय धनिक बनि गेल। जे काल्हि तक बड़का गरीब छल॥ बेटा के लेल करलों कोबला-पाती। बेटी भेला पर बदनसीब छल॥ विधना के रीत की हम फरछाबी। ई शुरूए से हमर नसीब छल॥
हमर अरमान जरि गेल आय कोहबर घर में हमर मुसकान मरि गेल आय कोहबर घर में
जे फुलवारी हम सजेने रही आय बीस बरख सों तकर सब फुल झरि गेल आय कोहबर घर में
कहलक रहे बरसाइतक भार हमहीं आनब बाटे तकैत थकि गेल आँखि आय कोहबर घर में
मधुश्रावणीक सब अरहुल निरमाल ये बनल टेमी के सब फोंका सुखि गेल आय कोहबर घर में समदिया के आनल पढ्लों जे विदागरी के समाद बहुत दिनक बाद कानलों आय कोहबर घर में