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बुधवार, 26 मार्च 2014

गजल

ताकू ने एना अहां तरुआरिक धार टूटि जेतै      
घूमू ने पाछू अहां सब जर जंजाल छूटि जेतै

बैरी बनि गेलहुँ अहां तीतल नैना कहै कथा किछु
बूझब नहि जे मरम नेहक हमरे भाग फूटि जेतै

नेसल दीया रातिये प्रीतक गेलै मिझाय भोरहि
लाजो बाचत कोन विधिये बीचे बाट लुटि जेतै

अपनहि बीतल बिसरि के ताली बजबै हँसी हँसी मे
ऎ जग के .ई  रीत छै बारै ले तखन जूटि जेतै

२२२ २२१२ २२२ २१२ १२२

गुरुवार, 20 मार्च 2014

गजल

अपना से किया भागि रहल छी    
भरि भरि राति जे जागि रहल छी  

बदलू सोच आचार विचारो
पुरना मत किया तागि रहल छी

बदलल लोक आ युग बदलल .छै
बीतल बात के पागि रहल छी

छुटि जायब अहां एकसर कतौ    
अपने प्राण जे दागि रहल छी

२२२१२ २११२ २

शनिवार, 15 मार्च 2014

गजल

रंगक फागुन नचलै आई  
फागक सरगम बजलै आई  

भांगक संगे मिटलै दूरी    
गलबहियाँ जे पडलै आई  

टोका चाली छल जे बारल
सा रा रा रा उडलै आई  

पुरना आमक गाछी देखू  
नवका टुकला फडलै आई

जखने भिजलै एके रंगे  
जातिक रंगो जरलै आई  

२२२२ २२२२


मंगलवार, 11 मार्च 2014

गजल

ई होली किछु खास हेतै  
हुनका ले मधुमास हेतै      

नवका कोंपल फूटि चहकै
परिवर्तन के भास हेतै

निकलत करिया रंग जखने
वैरक तखने नास हेतै

मिलि जुलि फागक गीत संगे
पुरना झगड़ा ह्रास हेतै

नवका ऊर्जा संग लय के
नव मिथिला मे रास हेतै

२२२२ २१२२

सोमवार, 3 मार्च 2014

गजल

नोर हमर बनि जाउ हम कानब छोडि देबै
मोन हमर बसि जाउ हम ध्यानब छोडि देबै

आपस ने चल जाय सजना नीनो तजल हम
टूटत जे उम्मीद दिन गानब छोडि देबै

अछि हमरा विश्वास सदिखन अपनो स बेशी
चनकल यदि आशा खुदा मानब छोडि देबै

आन्खि हमर फूजल तकै चारू कात आकुल
देख अहां के रूप बन छानब छोडि देबै

२११२ २२१२ २२२१ २२

शनिवार, 1 मार्च 2014

गजल


मोन कोना अजबारब ई अजबारल अछि
दीप बारब कोना ई पहिने बारल अछि

शेष नहि किछु आब लुटायब जिनगी कोना
जे बचल अछि से सब पहिने से धारल अछि

ओ हँसै वा कानै गाछी मे सारा पर
भावना सब अख़नो सीना मे गाडल अछि

दान कय ओ चल गेला तजि लोकक माया
पूत धी के रेखा बीचे मे पारल अछि

चूल्हि रागक मिझबै जाऊ मिलि जुलि कें सब
कैक पीढ़ी से ई मिथिला मे लारल अछि

२१२२ २२२२ २२२२

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

रुबाइ

खोडब यदि हमर करेज अहां
राखि सकब नै परहेज अहां
बिख अमृत के अवलोकन मे
नोरे लेबैक सहेज अहां
२२२ २११२ ११२

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

गजल

चन्ना चमकै चान सन
मूहो तोहर पान सन  

सूपक पहिया गोल छै  
लागै हाथी कान सन  

अधबोली सन बात जे
खनकै सोनक खान सन

उप्पर नीचा दौड़ धूप  
ठेस लगेलक छान सन

फूटल फुक्का जोर से
पुक्की पाडल तान सन

२२२२ २१२

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

गजल

माय तरेगन तोडि दे    
भानस बासन छोडि दे 
  
खिस्सा राजा भोज के
कहिके घूरो कोडि दे

खेबौ दाना फोँक नै
मूँगफली तूँ फोडि दे

छूछे चूडा पात पर
दहियो कनिये पोडि दे

टूटल घोडा टाँग गै
माटि लगा के जोडि दे

२२२२ २१२

गजल

सोइत बाभन कैथ कहार 
मिथिला पर केलक प्रहार 


बिसरू पांती समयक मांग 
माँ मिथिला के छी आधार 


मैथिल जन सन ज्ञाता कतय
जाति बनेलक निपट लचार 


पाँचो आन्गुर लिय मिलाय 
मिथिला के तखने उद्धार 


फूजल मन से कोशिश एक 
खोलत मिथिलाक विजय द्वार


२२२२ २२२१

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

गजल

चाहक भाप मे देखल अहां के  
चानक छाप मे देखल अहां के  
  
बाटे घाट बौवाएत सदिखन        
जर के ताप मे देखल अहां के  

गीता बायबिल क़ुरआन बांचल
ढोलक थाप मे देखल अहां के

चूडी रंग रंगक हाथ खनकै
हाथक नाप मे देखल अहां के

२२२१ २२२१ २२

सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

गजल

पूड़ी बनलै गोल गै
बाजू मिठगर बोल गै

पूड़ी गेलै पेट मे    
नाचब सौंसे टोल गै

होली एलै दोग से
बजतै तासा ढोल गै

ममता तोहर चान सन
कोना लगतै मोल गै


२२२२ २१२

बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

रुबाई


मायाजाल पसारल जगमे  
भैयारीक लडायल  जगमे 
बिन खंजरक बहल छै शोणित  
बैसल राज चलायल जगमे 

२२२१ १२२ २२

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

गजल

भाव करेजा क छलकि उठल अछि     
गीत बनल त किछु  गजल बनल अछि    

रागिनि राग मिलल छै नोरमे
नेह बिरह संगहिमे सजल अछि 

बाहर बैसल सगर समाज  छै       
प्रेम पियास अधर तर दबल अछि  

रंग छुटल हाथक अनचोक मे               
काढल रूमाल कतौ खसल अछि

२११२ २११२ २१२

बुधवार, 29 जनवरी 2014

रुबाई


चरा लेलक जरा देलक खेतके  
पटा लेलक लिखा लेलक खेतके
दहेजक माँग आ बैसल सेठबा  
कना देलक मिटा देलक खेतके  

१२२२ १२२२ २१२

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

गजल



उजरा भात गढका दूध बड़का थारी चाही
नै खेलेबौ कनिया पुतरा नबका गाड़ी चाही

भैया पहिरै नबका अंगा दशमी आ फगुआ
बेटा हमहु छियौ तोहर आब नै छारी चाही

भैया गेन खेलाई छौ टुकटुक हम छी ताकै
दूध भात भ कात नै हेबौ हमरो पारी चाही

काकाजी कान मचोरथि तोडी जखन टुकला
अपन लीची अपने झाँटी हमरा बाड़ी चाही

श्यामा लाई खूब खुवाबे टाटक भुरकी बाटे
ओहि टाटके काटि खसाबी हमरा आरी चाही

बुधवार, 13 जून 2012

गजल



सगरे दुनिया छै पसरल आब विकल हारल मनुख
कतहु समाज और कतहु करेज से मारल मनुख

तम तम चेहरा सगरे हँसी ठोढ से उडि गेल जेना
कतहु पडल कतहु कनैत शोणित ढारल मनुख

सरकारी तंत्र के फेरा मे आब लोक भेल छैक बेदम
टाका गनैत चप्पल घसबैत मरै छै थाकल मनुख

पाहुन देखि दरबज्जा पर होएत छैक मोन विखिन्न
स्वार्थ तकैत चहुकात भेल अपने से बारल मनुख

रुबाइ


किछु मीत भेटल किछु प्रीत भेटल
चहकैत नभमे किछु गीत भेटल
जन्म लेब नहि छल हाथ मे अपन
जगकर्म करैत किछु रीत भेटल

गुरुवार, 31 मई 2012

गजल

दूर अकास मे तारा चमकल
कनिया हाथक चूडी खनकल

मधुरात्रि छै आब बीत रहल
फुलबाड़ी मे सिंघार गमकल

दीपक जोत सेहो भेल मलिन
चार पर चुनमुन चहकल

नंगरु भाइ चलला पसिखाना
चालि मुदा छै एखनो बहकल

बुधवार, 30 मई 2012

गजल


आखर पांती लय छी बैसल किछु भाव दिय लिखि गीत प्रिये
हाड़ पांजर लय छी बैसल किछु प्राण दिय मनमीत प्रिये

जीवन यात्रा सुगम करू अहां संग चलू अहां संग चलू
ली काटि बाट एहि जीवन कें छै बिछडब एकर रीत प्रिये

गदह पचीसी भवसागर कें पार करब अछि कठिन बहुत
कर्तव्य पालन करैत अहां संग हमहु जायब जीत प्रिये

वृद्धावस्था बैसल दुहुजन विगत जिनगी इयाद करब
व्यवस्थित बालक और सून घर जीवन भ गेल रीत प्रिये

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों