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बुधवार, 1 अगस्त 2012

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक ई बाल गजल


"ए"सँ एप्पल सेव कहाइए

"बी"सँ बुक ज्ञान दए जाइए


अंग्रेजीमे लीन भ' नेना सभ

माइएक बोली बिसरि जाइए


निज खगता जानि क' पढ़ाइ

विकासक सनेश द' जाइए


बूढ़ लोक अछि धरती पर

नेनाक बास चान भ' जाइए


वाइसँ यंग छै किछुए दिन

जएडसँ सभ जीरो भ' जाइए

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक ई बाल गजल



अ सँ अनार अछि मिट्ठ कसगर

आ सँ आम लागैए बड्ड रसगर



पिज्जा बर्गर तँ घुसि गेल मोनमे

केखनो कतौ दबा दैछ असगर



शिक्षा माध्यममे अंग्रेजी भेल हावी

फैशन अंग्रेजिया छै रभसगर



पीढ़ी नवकाकेँ नव रूपेँ सजाउ

अपन संस्कृति भ' गेल अजगर



तकनीकी ज्ञानमे नेना बढ़ए आगू

पितोक मोन होइछ हुलसगर



वर्ण-----13

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक ई बाल गजल



शुन्य भेल स्वप्न नुका क' राखू

अपन संस्कार जोगा क' राखू



अछि सूट-बूट शिक्षोमे लागू

मोनकेँ मैथिल बना क' राखू



कंप्यूटर गेम अछि सुन्नर

मगज टटका बना क' राखू



नेना लक्ष्यहीन नहि हुअए

तकर जोगार धरा क' राखू



केकरो बानि रहए केहनो

हृदेसँ अपन बना क' राखू


वर्ण----11

शनिवार, 28 जुलाई 2012

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जतेक चाही जी लिअ सपनामे

राखू यथार्थ संजोगि अपनामे

उधियाउ नै एकपेड़िया बाटपर

नै तँ जाएत नापल जिनगी नपनामे

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ऐ शत्रुकेँ तँ तोड़ै लेल दम चाही

मात्र चित्रगुप्त नै ऐ लेल यम चाही

अहाँसँ किछु नै बिगड़तै एकर

एकरा शोधै लेल तँ खाली हम चाही

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ताकि कनडेड़िए कतए नुकेलहुँ

कहू फेर किए नजरि फेरि लेलहुँ

बिहुँसैत बैसल छी सोंझा अहाँ

आब कहू अहीँ कोना फेर एलहुँ

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दै छिऐ आशीर्वाद लगा क' फानी

छी जोगारमे ऐखनो जे कते तानी

वाह की जमाना देखाइए हमरा

सत्य छै इएह मानी की नै मानी


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मोन भए उठल दुखित होहकारीसँ

उठि दर्शक भागल मारामरीसँ

प्रायोजक तँ पथने रहल कान अपन

कर्ता देखार भेला जतियारीसँ

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उमरे वर्षक संग बढ़ि जुआइ छै

नजरि सोंझा-सोंझी भए क' लजाइ छै

प्रेमक भाव जे नै पढ़ि पाबै अछि

तखन बुझू जे ओ हृदैसँ कसाइ अछि

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हिला देलक गगनकेँ मारि तीर

बचा लेलक जे अर्धनग्न चीर

द्रौपदीकेँ बढ़ा वस्त्र केलक रक्षा

संसार भरि बेटल छल वएह वीर

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जखन सभ केओ देखू नेहाल भेलै

तखन बुझू जे गोटी तँ लाल भेलै

दर्शक जखने झूमि उठल मनसँ

तखने तँ संयोजक मालोमाल भेलै

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दिअए सिनेह अपन नेना जानि कए

हमहूँ टुग्गर निमहब अपना मानि कए

जँ छोड़बै अनेरुआ सन हमरा

तँ फफकि मरब एकसर कानि कए

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टूटल छल नेह आब तँ जोड़ भए गेलै

छलै दुश्मन मुदा चितचोर भए गेलै

जखने लिखलकै पाँतीमे मोनक बात

दूनूक नेहक तँ भंडाफोड़ भए गेलै

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जड़ब अहाँ जरू दिया बाती जकाँ

गाएब तँ गाउ जेना पराती जकाँ

ताकि कनखिये मोन ने रिझाउ

अहाँ करू जुनि उकपाती जकाँ

शनिवार, 23 जून 2012

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल----



पहिलुक शब्द कौआ-मेना बिसरल जाइए

आब बसात पछबा सौंसे सिहकल जाइए


नुक्का-चोरी सभ तँ भागि गेलै हमरो गामसँ

ई विडीयो गेम सौंसे आब पसरल जाइए


पानि चोरा क' राखि लेलक पाइ बला देशमे

देखू आब गरीबक कंठ लहकल जाइए


कनेकबे जगह देलिए तँ माथ चढ़ि गेल

जमा धौंस हमरे उपर अड़कल जाइए


उड़ै छैक आँचर जखन-जखन हुनकर

से देखि हमरो मोन आब बहकल जाइए


17

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल----




केखन धोखा देत ई समान बजरुआ गारंटी नै

ई केखनो हँसाएत केखनो देत कना गारंटी नै


सरकार बनाबै एहन योजना गरीबक लेल

केखन जेतैक गरीबक अस्तित्व मेटा गारंटी नै


केकरोसँ किछु बाँचल नै छै ऐ दुनियाँमे आब

बड़कोसँ किछु बाँचल नै छै ऐ दुनियाँमे आब


सहलहुँ सभ दुख जे भेटल अनकासँ मुदा

अपनोसँ किछु बाँचल नै छै ऐ दुनियाँमे आब


सभ जेतै बिका खाली दामटा सही हेबाक चाही

सगरोसँ किछु बाँचल नै छै ऐ दुनियाँमे आब


अगड़ा केर नाम पर भेल बहुत राजनीति

पिछड़ोसँ किछु बाँचल नै छै ऐ दुनियाँमे आब

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल----



बड्ड मजा अबैत छै मुफ्त मालमे

मुदा दुख होइ अछि जीबैत मलालमे


सहि ने सकब समाज केर उपराग

नीक छल जे जीबैत रहितौं अकालमे


मोन ने भरैत छल अबैत वेतनसँ

आब हम अपनाकेँ गानै छी दलालमे


अपन जिनगी आगू बढ़ेबा लेल दोस

लागल छी हम तँ दोसरक हलालमे

आखर-----15

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल----



नेनाक नेनमतिसँ कष्ट होइ छै केकरो-केकरो

मुदा जँ सियान करै नेनमति तँ कष्ट हेतै सगरो


बुद्धि तँ जीबाक सभ लग छै राखि तथिआएल बुझू

मुदा बुद्धि बलें मात्र जीबैत देखै छी केकरो-केकरो


डरैए अन्हरियासँ सभ तकैए बाट बिहान केर

अन्हारसँ विलगि क' उजास भेटैए केकरो-केकरो


जँ हियाकेँ हेड़ाबए चाही तँ हेड़ा लिअ कतौ-केखनो

हियासँ हिया मीलि पबैए केखनो क' केकरो-केकरो


जगलोमे देखि लेत अछि सपना केखनो-केखनो

सूतलमे सपनाक यथार्थ भेटैए केकरो-केकरो

आखर-----20

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल----



अपन माटि-पानिक मोल पानिमे भसा गेलैए

तँए तँ आब शहरुआ रंग धौंस जमा गेलैए



अफसर आ बबुआनी भ' गेलैए मुट्ठीक खेल

सभ धिया-पुता तकनीकी ज्ञान ल' रमा गेलैए



देहकेँ जे खूब धुनियो क'नै पेलक बोनि ऐठाँ

शिक्षाक प्रतापे ओकरे धिया-पुता कमा गेलैए



गमैया लोक आबो जोगेने अछि पुरखाक थाती

शरहक चपेटमे आबि नवका झमा गेलैए



आब नै लुलुआबैए लोक अपन पड़ोसीयाकेँ

पाइसँ पटि सभहँक घर गम-गमा गेलैए



आखर-----18

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल----



पश्चिम केर ड्रेसमे मेल लगैए

फीगरसँ देखिऔ फीमेल लगैए


फैशन आ चालिसँ अछि आधुनिक

तैं ई पत्नीसँ बेसी रखैल लगैए


ई बजार भेल जाइए देहगर

तँए सभ देह केर खेल लगैए


बाहरसँ चिक्कन-चुनमुन देखू

भीतरसँ भारतीय रेल लगैए


आखर-----13

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों