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रविवार, 18 जुलाई 2021

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-35

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी। एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। अजुका रचना अछि "ये मुलाकात एक बहाना है"। एहि रचनाक हरेक पाँतिमे 212-212-1222 मात्राक्रम अछि। ई रचना वस्तुतः गजल छै। ई फिल्म "खानदान" मे गाएल गेल रहै। गीतकार छथि नक्श ल्यालपुरी। संगीतकार छथि खैय्याम। गायिका लता मंगेशकर। ई फिल्म 1979 मे आएल रहै जाहिमे जीतेन्द्र, सुलक्षणा पंडित, बिंदिया आदि कलाकार छलथि। एहि ठाम ईहो कहब आवश्यक जे 1965 मे सेहो खानदान नामक फिल्म आएल छल जाहिमे सुनील दत्त एवं नूतन आदि कलाकार छलथि।

ये मुलाकात एक बहाना है
प्यार का सिलसिला पुराना है

धड़कनें धड़कनों में खो जाएँ
दिल को दिल के करीब लाना है

मैं हूँ अपने सनम की बाहों में
मेरे कदमों तले ज़माना है

ख़्वाब तो काँच से भी नाज़ुक हैं
टूटने से इन्हें बचाना है

मन मेरा प्यार का शिवाला है
आपको देवता बनाना है

(212-212-1222) ई गजल निच्चा सुनि सकैत छी--


शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-34

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी। एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। अजुका गीत अछि "जिन्हें हम भूलना चाहे वो अक्सर याद आते हैं"। एहि गीतक हरेक पाँतिमे 1222-1222-1222-1222 मात्राक्रम अछि। ई फिल्म "आबरू" केर गीत अछि। गीतकार छथि जी.एल रावल। संगीतकार छथि सोनिक ओमी। गायक मुकेश। ई फिल्म 1968 मे आएल रहै जाहिमे अशोक कुमार, दीपक कुमार, विम्मी, शशिकला आदि कलाकार छलथि।

जिन्हें हम भूलना चाहे वो अक्सर याद आते हैं

बुरा हो इस मुहब्बत का वो क्यों कर याद आते हैं

भुलाये किस तरह उनको कभी पी थी उन आँखों से
छलक जाते हैं जब आँसू वो सागर याद आते हैं

किसी के सुर्ख लब थे या दिये की लौ मचलती थी
जहाँ की थी कभी पूजा वो मंदर याद आते हैं

रहे ऐ शम्मा तू रोशन दुआ देता है परवाना
जिन्हें किस्मत में जलना हैं वो जलकर याद आते हैं

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। 'उन आँखों से' केर तक्ती अलिफ-वस्लसँ कएल गेल अछि। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--



बुधवार, 2 सितंबर 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-33

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी। एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। अजुका गीत अछि 'खिलौना, जानकर तुम तो, मेरा दिल तोड़ जाते हो"। एहि गीतक हरेक पाँतिमे 1222-1222-1222-1222 मात्राक्रम अछि। ई फिल्म "खिलौना" केर गीत अछि। गीतकार छथि आनंद बक्षी। संगीतकार छथि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल। गायक मो.रफी। ई फिल्म 1970मे आएल रहै जाहिमे संजीव कुमार, मुमताज, शत्रुघ्न सिन्हा आदि कलाकार छलथि।

खिलौना, जानकर तुम तो, मेरा दिल तोड़ जाते हो
मुझे इस, हाल में किसके सहारे छोड़ जाते हो

मेरे दिल से ना लो बदला ज़माने भर की बातों का
ठहर जाओ सुनो मेहमान हूँ मैं चंद रातों का
चले जाना अभी से किस लिये मुँह मोड़ जाते हो

गिला तुमसे नहीं कोई, मगर अफ़सोस थोड़ा है
के जिस ग़म ने मेरा दामन बड़ी मुश्किल से छोड़ा है
उसी ग़म से मेरा फिर आज रिश्ता जोड़ जाते हो

खुदा का वास्ता देकर मना लूँ दूर हूँ लेकिन
तुम्हारा रास्ता मैं रोक लूँ मजबूर हूँ लेकिन
के मैं चल भी नहीं सकता हूँ और तुम दौड़ जाते हो

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--

गुरुवार, 21 मई 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-32

फिल्म: शिकारी (2000)
शाइर: समीर
गायक: कुमार सानु
संगीतकार: आदेश श्रीवास्तव
मुख्य कलाकारः गोविन्दा, करिशमा कपुर

बहर-ए-मुतकारिब मुसम्मन सालिम (122 x 4)

बहुत ख़ूबसूरत गज़ल लिख रहा हूँ
तुम्हे देखकर आजकल लिख रहा हूँ

मिले कब कहाँ, कितने लम्हे गुजारे
मैं गिन गिन के वो सारे पल लिख रहा हूँ

तुम्हारे जवां ख़ूबसूरत बदन को
तराशा हुआ इक महल लिख रहा हूँ

न पूछों मेरी बेकरारी का आलम
मैं रातों को करवट बदल लिख रहा हूँ

तक्तीअः

बहुत ख़ू / बसूरत / गज़ल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122
तुम्हे दे / खकर आ / जकल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

मिले कब / कहाँ कित / ने लम्हे / गुजारे
122 / 122 / 122 / 122
मैं गिन गिन / के वो सा / रे पल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

तुम्हारे / जवां ख़ू / बसूरत / बदन को
122 / 122 / 122 / 122
तराशा / हुआ इक / महल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

न पूछों / मेरी बे / करारी / का आलम
122 / 122 / 122 / 122
मैं रातों / को करवट / बदल लिख / रहा हूँ
122 / 122 / 122 / 122

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-31


फिल्म: आवारगी (1990)
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक: गुलाम अली
संगीतकार: अनु मलिक

मात्राक्रमः 1222-1222-1222-1222 (बहर-ए-हजज)

चमकते चाँद को टूटा हुआ तारा बना डाला
मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

बड़ा दिलकश बड़ा रंगीन हैं ये शहर कहते हैं
यहाँ पर हैं हज़ारों घर घरों में लोग रहते हैं
मुझे इस शहर ने गलियों का बंजारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

मैं इस दुनिया को अक्सर देखकर हैरान होता हूँ
न मुझसे बन सका छोटा सा घर दिन रात रोता हूँ
खुदाया तूं ने कैसे ये जहां सारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

मेरे मालिक मेरा दिल क्यूँ तड़पता है सुलगता है
तेरी मर्ज़ी तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है
किसी को गुल किसी को तूने अंगारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

यही आग़ाज़ था मेरा यही अंजाम होना था
मुझे बरबाद होना था मुझे नाकाम होना था
मुझे तक़दीर ने तक़दीर का मारा बना डाला
चमकते चाँद को टूटा.........

तक्तीअः

चमकते चाँ/द को टूटा/ हुआ तारा/ बना डाला
122 2/1 2 22/ 12 22/12 22
मेरी आवा/रगी ने मुझ/को आवारा/ बना डाला
12 22/12 2 2/ 1 222/12 22

बड़ा दिलकश/ बड़ा रंगी/न हैं ये शह/र कहते हैं
12 22/12 22/ 1 2 2 2/1 22 2
यहाँ पर हैं/ हज़ारों घर/ घरों में लो/ग रहते हैं
12 2 2/122 2/ 12 2 2/1 22 2
मुझे इस शह/र ने गलियों/ का बंजारा/ बना डाला
12 2 2/1 2 22/ 1 222/12 22

मैं इस दुनिया/ को अक्सर दे/खकर हैरा/न होता हूँ
1 2 22/1 22 2/ 12 22/12 22
न मुझसे बन/ सका छोटा/ सा घर दिन रा/त रोता हूँ
1 22 2/12 22/ 1 2 2 2/1 22 2
खुदाया तूँ/ने कैसे ये/ जहां सारा/ बना डाला
122 2/1 22 2/ 12 22/12 22

मेरे मालिक/ मेरा दिल क्यूँ/ तड़पता है/ सुलगता है
12 22/12 2 2/ 122 2/122 2
तेरी मर्ज़ी/ तेरी मर्ज़ी/ पे किसका ज़ो/र चलता है
12 22/12 22/ 1 22 2/1 22 2
किसी को गुल/ किसी को तू/ने अंगारा/ बना डाला
12 2 2/12 2 2/ 1 222/12 22

यही आग़ा/ज़ था मेरा/ यही अंजा/म होना था
12 22/1 2 22/ 12 22/1 22 2
मुझे बर्बाद होना था मुझे नाकाम होना था
12 22/1 22 2/ 12 22/1 22 2
मुझे तक़दी/र ने तक़दी/र का मारा/ बना डाला
12 22/1 2 22/ 1 2 22/12 22

सोमवार, 30 मार्च 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-30

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू।  हरेक पाँतिमे 122-122-122-122 मात्राक्रम अछि। फिल्म "शर्त" केर गीत अछि। गीतकार छथि एस.एह बिहारी। संगीतकार छथि हेमंत कुमार । गायक हेमंत कुमार, गीता दत्त (पुरुष-स्त्री भर्सन अलग-अलग छै)। ई फिल्म 1954 मे आएल रहै जाहिमे दीपक, श्यामा, आइ.एस जौहर, शशिकला आदि कलाकार छलथि।

न ये चांद होगा न तारे रहेंगे
मगर हम हमेशा तुम्हारे रहेंगे

बिछड़कर चले जाएँ तुमसे कहीं
तो ये ना समझना मुहब्बत नहीं
जहाँ भी रहे हम तुम्हारे रहेंगे

ज़माना अगर कुछ कहे भी तो क्या
मगर तुम न कहना हमें बेवफ़ा
तुम्हारे लिये हैं तुम्हारे रहेंगे

ये होगा सितम हमने पहले न जाना
बना भी न था जल गया आशियाना
कहाँ अब मोहब्बत के मारे रहेंगे

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--

मंगलवार, 24 मार्च 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-29

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू।  हरेक पाँतिमे 1222-1222 मात्राक्रम अछि। फिल्म "नसीब" केर गीत अछि। गीतकार छथि समीर। संगीतकार छथि नदीम-श्रवण । गायक कुमार शानू। ई फिल्म 1997 मे आएल रहै जाहिमे गोविंदा, ममता कुलकर्णी, सईद जाफरी आदि कलाकार छलथि।

कभी जो भूलना चाहूं
न जाने क्यूं मेरे दिलबर
मुझे तुम याद आते हो
मुझे तुम याद आते हो


कभी सावन के मौसम में
अगर गाए कहीं कोयल
किसी मेहंदी की टहनी पर
न जाने क्यूं मेरे दिलबर
मुझे तुम याद आते हो


किसी के हाथ से छूटे
अगर शीशे का पैमाना
छलक जाए अगर सागर
न जाने क्यूं मेरे दिलबर
मुझे क्यूं याद आते हो

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--
नोट-मुझे तुम याद आते हो प्रसिद्ध शब्दावली छै नसीब फिलमसँ पहिने एकटा रचना नुसरत फतेह अली द्वारा गएल गेल छै आ नसीब फिल्म बाद सेहो "भीड़ में तन्हाइ में" सन गीतमे एकर प्रयोग भेल छै। 

शुक्रवार, 6 मार्च 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-28

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। 2122-2122-2122-2 हरेक पाँतिमे अछि। फिल्म "पहचान" केर गीत अछि। गीतकार छथि नीरज। संगीतकार छथि शंकर-जयकिशन । गायक मुकेश। ई फिल्म 1969 मे आएल रहै जाहिमे मनोज कुमार, बबीता आदि कलाकार छलथि।



बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ

एक खिलौना बन गया दुनिया के मेले में
कोई खेले भीड़ में कोई अकेले में
मुस्कुरा कर भेंट हर स्वीकार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ   ...

मैं बसाना चाहता हूँ स्वर्ग धरती पर
आदमी जिस में रहे बस आदमी बनकर
उस नगर की हर गली तैय्यार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ   ...

हूँ बहुत नादान करता हूँ ये नादानी
बेच कर खुशियाँ खरीदूँ आँख का पानी
हाथ खाली हैं मगर व्यापार करता हूँ
आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ   ...

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


बुधवार, 4 मार्च 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-27

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू।122-122-122-122 हरेक पाँतिमे अछि। फिल्म "अगर तुम न होते" केर गीत अछि। गीतकार छथि गुलशन बावरा। संगीतकार छथि राहुल देव बर्मन । गायक किशोर कुमार आ लता मंगेशकर। ई फिल्म 1983 मे आएल रहै जाहिमे राज बब्बर, राजेश खन्ना, रेखा आदि कलाकार छलथि।


हमें और जीने की चाहत न होती
अगर तुम न होते,  अगर तुम न होते

(हमें जो तुम्हारा सहारा न मिलता
भंवर में ही रहते किनारा न मिलता - २)
किनारे पे भी तो लहर आ डुबोती
अगर तुम न होते,  अगर तुम न होते

तुम्हें क्या बताऊं के तुम मेरे क्या हो
मेरी ज़िंदगी का तुम्ही आसरा हो
मैं आशा कि लड़ियां, न रह रह पिरोती
अगर तुम न होते,  अगर तुम न होते

हर इक ग़म तुम्हारा सहेंगे खुशी से
करेंगे न शिकवा कभी भी किसी से
जहाँ मुझ पे हंसता, खुशी मुझपे रोती
अगर तुम न होते,  अगर तुम न होते

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  जनैत हेबै तैयो कही जे "हर इक" केर तक्ती "हरिक" भेल छै।
ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--





मंगलवार, 3 मार्च 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-26

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------
एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। 1222-1222-1222-1222 हरेक पाँतिमे अछि। फिल्म "धरती" केर गीत अछि। गीतकार छथि राजिन्दर कृष्ण। संगीतकार छथि शंकर-जयकिशन । गायक मुहम्मद रफी। ई फिल्म 1970 मे आए रहै जाहिमे बलराज साहनी, कामिनी कौशल, राजेन्द्र कुमार, वहीदा रहमान  आदि कलाकार छलथि।

खुदा भी आसमाँ से जब ज़मीं पर देखता होगा
मेरे महबूब को किसने बनाया सोचता होगा

मुसव्विर खुद परेशां है के ये तस्वीर किसकी है
बनोगी जिसकी तुम ऐसी हसीं तक़दीर किसकी है
कभी वो जल रहा होगा, कभी खुश हो रहा होगा

ज़माने भर की मस्ती को निगाहों में समेटा है
कली से जिस्म को कितने बहारों ने लपेटा है
नहीं तुम सा कोई पहले न कोई दूसरा होगा

फ़रिश्ते भी यहाँ रातों को आकर घूमते होंगे
जहाँ रखती हो तुम पाँव, जगह वो चूमते होंगे
किसीके दिल पे क्या गुज़री, ये वो ही जानता होगा

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


सोमवार, 6 जनवरी 2020

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-25

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------
एक बेर फेर बहरक कमाल देखू फिल्मी गीतमे देखू। 122-122-122-122 हरेक पाँतिमे अछि। फिल्म "ये रात फिर ना आयेगी" केर गीत अछि। गीतकार छथि एह.एस बिहारी। संगीतकार छथि ओ.पी नय्यर। गायक महेन्द्र कपूर। ई फिल्म 1965 मे आए रहै जाहिमे विश्वजीत, मुमताज, पृथ्वीराज कपूर, शर्मिला टैगोर आदि कलाकार छलथि।


मेरा प्यार वो है के, मर कर भी तुम को 
जुदा अपनी बाहों से होने न देगा
मिली मुझको जन्नत तो जन्नत के बदले
खुदा से मेरी जां तुम्हें मांग लेगा

ज़माना तो करवट बदलता रहेगा
नए ज़िन्दगी के तराने बनेंगे
मिटेगी न लेकिन मुहब्बत हमारी
मिटाने के सौ सौ बहाने बनेंगे
हक़ीकत हमेशा हक़ीकत रहेगी
कभी भी न इसका फ़साना बनेगा


तुम्हें छीन ले मेरी बाहों से कोई
मेरा प्यार यूं बेसहारा नहीं है
तुम्हारा बदन चांदनी आ के छूले
मेरे दिल को ये भी गवारा नहीं है
खुदा भी अगर तुमसे आ के मिलेगा
तुम्हारी क़सम है मेरा दिल जलेगा

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--




सोमवार, 4 नवंबर 2019

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-24

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------
एक रात में दो दो कोबर बनी
एक नैहर में एक सासुर में 
मिथिलांचलमे ई कोबर गीत कहियो धूम मचेने छल। ई कोबर गीत एकटा हिंदी फिल्मी गीतक पैरोडी अछि। मूल बोल एना छै " एक रात में दो-दो चाँद खिले, एक घूँघट में एक बदली में"। फिल्म "बरखा" केर ई नज्म जे कि मुकेश ओ लता मंगेशकर जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि राजेन्द्र कृष्ण। संगीतकार छथि चित्रगुप्त। ई फिल्म 1 January 1960 मे रिलीज भेलै। एहिमे जगदीप, नंदा, लीला चिटनिस आदि कलाकार छलथि। एहि नज्म वा गीतमे ठीकसँ बहरक पालन नै भेल अछि मुदा बहरक बहुत लग-लगीचमे अछि आ गायनमे एकरा एक मीटरमे बैसा देल गेल छै तँइ हम एहि गीतक चयन केलहुँ। पाठक एकरा पढ़ि अनुमान लगा सकै छथि जे नीक गजल-गीत लेल बहर कतेक अनिवार्य होइत छै। दू टा अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ मानि लेबाक जे उर्दू परंपरा छै गजलमे तकरे मैथिलीमे लेल गेल छै आ से प्रायः सभ जनिते हेता। 
एक रात में दो-दो चाँद खिले (9 दीर्घ)
एक घूँघट में एक बदली में (9 दीर्घ)

अपनी अपनी मंज़िल से मिले (9 दीर्घ आ 1 लघु)
एक घूँघट में एक बदली में (9 दीर्घ)

बदली का वो चाँद तो सबका है (9 दीर्घ आ 1 लघु)
घूँघट का वो चाँद तो अपना है (9 दीर्घ आ 1 लघु)

मुझे चाँद समझने वाले बता (7 दीर्घ आ 1 लघु)
ये सच है या सपना है (7 दीर्घ)

मालूम नहीं दो अंजाने (8 दीर्घ)
राही कैसे मिल जाते हैं (8 दीर्घ)

फूलों को अगर खिलना हो (7 दीर्घ आ 1 लघु)
वीराने में भी खिल जाते हैं (9 दीर्घ)

आब एहि गीतक मैथिली पैरोडी पढ़ू--

एक रात में दो दो कोबर बनी (9 दीर्घ आ 1 लघु)
एक नैहर में एक सासुर में (9 दीर्घ)

नहिरा के कोबर में डिबिया जरी (9 दीर्घ आ 1 लघु)
ससुरा के कोबर में बलब लगी (9 दीर्घ)

नहिरा के कोबर में पटिया सजी (9 दीर्घ आ 1 लघु)
ससुरा के कोबर में पलंगा सजी (10 दीर्घ)

नहिरा के कोबर में अम्मा मिली (9 दीर्घ आ 1 लघु)
ससुरा के कोबर सासू मिली (8 दीर्घ आ 1 लघु)

नहिरा के कोबर में भाभी मिली (9 दीर्घ आ 1 लघु)
ससुरा के कोबर जेठानी मिली (9 दीर्घ आ 1 लघु)
एहि कोबर गीतमे वर्णित भौतिक साधनपर देखबै तँ खाँटी मैथिल अवस्थाक दर्शन हएत। पहिल कोबरमे कनियाँकेँ डिबिया आ पटिया भेटलै से कोबर निश्चित रूपें नैहराक कमजोर आर्थिक स्थितिक वर्णन करैत छै तँ दोसर कोबर (सासुर बला)मे क्रमशः बल्ब आ पलंगसँ कनियाँक पति ओ ससुरक मजबूत आर्थिक स्थितिकेँ उजागर करैत छैक। संबंधमे अम्मा आ सासु केर वर्णन तँ ठीक मुदा मैथिल समाजक हिसाबें भाउजक संग ननदि हेबाक चाही छलै कारण लड़की अपन सासुरमे जेठ दियादिनी बदला ननदि केर संग सहज रहैत छै से ओ ननदि चाहे अपन हो कि पड़ोसिया बला। 
एकर तक्ती मैथिली नियमपर कएल गेल अछि।  दूनू गीत निच्चा सुनि सकैत छी ---

मूल हिंदी गीत

पैरोडी मैथिली गीत 


शनिवार, 8 जून 2019

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-23

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

फिल्म "बाबुल" केर ई नज्म जे कि तलत महमूद ओ शमशाद बेगम जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि शकील बदायूँनी। संगीतकार छथि नौशाद। ई फिल्म 1950 मे रिलीज भेलै। एहिमे दिलीप कुमार, नरगिस, सुलताना आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 22-22-22-22-22-22-2 अछि।  पूरा नज्म प्रेम-विरह आ गेयतासँ भरल अछि मुदा हरेक पाँतिमे बहरक पूरा पालन भेल छै।ई नज्म ओहन-ओहन लोकक मूँहपर थापर अछि जे कहै छथि जे बहरक पालनसँ कथ्य आ गेयता घटि जाइ छै।

मिलते ही आँखें दिल हुआ दीवाना किसी का
अफ़साना मेरा बन गया, अफ़साना किसी का

पूछो ना मोहब्बत का असर, हाय न पूछो
दम भर में कोई हो गया, परवाना किसीका

हँसते ही न आ जायें कहीं, आँखों में आँसू
भरते ही छलक जाये ना, पैमाना किसीका

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-22

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

फिल्म "हाँ मैंने भी प्यार किया" केर ई नज्म जे कि उदित नारायण जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि समीर। संगीतकार छथि नदीम-श्रवण। ई फिल्म 2002 मे रिलीज भेलै। एहिमे अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर, अभिषेक बच्चन आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 122-122-122-122 अछि।  पूरा नज्म प्रेम-विरह आ गेयतासँ भरल अछि मुदा हरेक पाँतिमे बहरक पूरा पालन भेल छै।ई नज्म ओहन-ओहन लोकक मूँहपर थापर अछि जे कहै छथि जे बहरक पालनसँ कथ्य आ गेयता घटि जाइ छै। एहि नज्मक रुबाइ "तेरे माथे की बिंदिया चमकती रहे...." माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै। संगे-संग नज्मक अंतिम पाँति "जा मैंने भी प्यार किया है" फिल्मी सिचुएशनकेँ देखेबाक लेल छै।

तेरे माथे की बिंदिया चमकती रहे
तेरे हाथों की मेंहदी महकती रहे
तेरे जोड़े की रौनक सलामत रहे
तेरी चूड़ी हमेशा खनकती रहे

मुबारक हो तुम को ये शादी तुम्हारी
सदा खुश रहो तुम दुआ है हमारी
तुम्हारे कदम चूमे ये दुनिया सारी

तुम्हारे लिए है बहारों के मौसम
न आये कभी ज़िन्दगी में कोई गम
हमारा है क्या यार हम है दिवाने
हमारी तड़प तो कोई भी न जाने
मिले ना तुम्हें इश्क़ में बेक़रारी

के जन्मो के रिश्ते नहीं तोड़े जाते
सफर में नहीं हमसफ़र छोड़े जाते
न रस्मों रिवाजो को तुम भूल जाना
जो ली है कसम तो इसे तुम निभाना
के हमने तो तन्हा उमर है गुजारी

जा मैंने भी प्यार किया है
हाँ मैंने भी प्यार किया है

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि।  ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--

शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-21

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

फिल्म "बहारें फिर भी आएंगी" केर ई नज्म जे कि महेन्द्र कपूर जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि कैफी आजमी। संगीतकार छथि ओ.पी.नैयर। ई फिल्म 1966 मे रिलीज भेलै। एहिमे धर्मेंद्र, तनुजा, माला सिन्हा आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 1222-1222-1222-1222 अछि।  पूरा नज्म जीवन-दर्शन आ गेयतासँ भरल अछि मुदा हरेक पाँतिमे बहरक पूरा पालन भेल छै।ई नज्म ओहन-ओहन लोकक मूँहपर थापर अछि जे कहै छथि जे बहरक पालनसँ कथ्य आ गेयता घटि जाइ छै।

बदल जाये अगर माली चमन होता नहीं खाली
बहारें फिर भी आती हैं बहारें फिर भी आयेंगी

थकन कैसी घुटन कैसी चल अपनी धुन में दीवाने
खिला ले फूल काँटों में सजा ले अपने वीराने
हवाएं आग भड़काएं फ़िज़ाएं ज़हर बरसाएं
बहारें फिर भी आती हैं बहारें फिर भी आयेंगी

अँधेरे क्या उजाले क्या ना ये अपने ना वो अपने
तेरे काम आएँगे प्यारे तेरे अरमां तेरे सपने
ज़माना तुझसे हो बरहम ना आये राह पर मौसम
बहारें फिर भी आती हैं बहारें फिर भी आयेंगी

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। "चल अपनी" एकर तक्ती अलिफ-वस्ल केर नियमसँ छै। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-20

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

फिल्म "हमराज" केर ई नज्म जे कि महेन्द्र कपूर जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि साहिर लुधियानवी। संगीतकार छथि रवि। ई फिल्म 1967 मे रिलीज भेलै। एहिमे सुनील दत्त, राज कुमार, मुमताज आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 212-212-212-212 अछि।


तुम अगर साथ देने का वादा करो
मैं यूँ ही मस्त नग़मे लुटाता रहूँ
तुम मुझे देखकर मुस्कुराती रहो
मैन तुम्हें देखकर गीत गाता रहूँ

कितने जलवे फ़िज़ाओं में बिखरे मगर
मैने अब तक किसीको पुकारा नहीं
तुमको देखा तो नज़रें ये कहने लगीं
हमको चेहरे से हटना गवारा नहीं
तुम अगर मेरी नज़रों के आगे रहो
मैं हर एक शै से नज़रें चुराता रहूँ

मैने ख़्वाबों में बरसों तराशा जिसे
तुम वही संग-ए-मरमर की तस्वीर हो
तुम न समझो तुम्हारा मुक़द्दर हूँ मैं
मैं समझता हूं तुम मेरी तक़दीर हो
तुम अगर मुझको अपना समझने लगो
मैं बहारों की महफ़िल सजाता रहूँ

मैं अकेला बहुत देर चलता रहा
अब सफ़र ज़िन्दगानी का कटता नहीं
जब तलक कोई रंगीं सहारा ना हो
वक़्त क़ाफ़िर जवानी का कटता नहीं
तुम अगर हमक़दम बनके चलती रहो
मैं ज़मीं पर सितारे बिछाता रहूँ

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--






सोमवार, 10 दिसंबर 2018

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-19

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

आइ देखू गोवर्धन राम त्रिपाठीजीक गुजराती उपन्यास "सरस्वतीचन्द्र"पर आधारित फिल्म "सरस्वतीचंद्र" केर ई नज्म जे कि लता मंगेशकर जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि साहिर। संगीतकार छथि कल्याणजी-आनंद जी। ई फिल्म 1968 मे रिलीज भेलै। एहिमे नूतन, मनीष, विजय चौधरी आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 2122-122-122-12 अछि। एहि नज्मक पहिल दू पाँति "कहाँ चला ऐ मेरे जोगी, जीवन से तू भाग के...." माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै।


कहाँ चला ऐ मेरे जोगी, जीवन से तू भाग के
किसी एक दिल के कारण, यूँ सारी दुनियाँ त्याग के

छोड़ दे सारी दुनियाँ किसी के लिए
ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए
प्यार से भी ज़रूरी कई काम हैं
प्यार सब कुछ नहीं जिंदगी के लिए

तन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या
मन से मन का मिलन कोई कम तो नहीं
खुशबू आती रहे दूर ही से सही
सामने हो चमन कोई कम तो नहीं
चाँद मिलता नहीं सबको संसार में
है दिया ही बहुत रौशनी के लिए

कितनी हसरत से तकती हैं कलियाँ तुम्हें
क्यूँ बहारों को फिर से बुलाते नहीं
एक दुनियाँ उजड़ ही गयी है तो क्या
दूसरा तुम जहाँ क्यूँ बसाते नहीं
दिल न चाहे भी तो साथ संसार के
चलना पड़ता है सबकी खुशी के लिए

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


ई गीत मूल स्वरमे सुनलाक बाद फेरसँ इएह गीत मरताब अली जीक अवाजमे सुनू एकटा अलग आनंद आएत।



शनिवार, 8 दिसंबर 2018

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-18

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

आइ देखू "प्यासा" फिल्म केर ई नज्म जे कि मोहम्मद रफी जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि साहिर लुधियानवी। संगीतकार छथि सचिन देव बर्मन। ई फिल्म 1957 मे रिलीज भेलै। एहिमे गुरू दत्त, वहीदा रहमान, माला सिन्हा आदि कलाकार छलथि। एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 122-122-122-122 अछि।

ये  महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनियाँ,
ये इंसाँ के दुश्मन समाजों की दुनियाँ,
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनियाँ,
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .

हर इक जिस्म घायल, हर इक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनियाँ है या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .

यहाँ इक खिलौना है इंसाँ की हस्ती
ये बस्ती हैं मुर्दा परस्तों  की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .

जवानी भटकती हैं बदकार बन कर
जवाँ जिस्म सजते है बाज़ार बन कर
यहाँ प्यार होता है व्योपार  बन कर
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .

ये दुनियाँ जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं है
जहाँ प्यार की कद्र कुछ नहीं है 
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है .

जला दो इसे फूक डालो ये दुनियाँ
जला दो इसे फूक डालो ये दुनियाँ
मेरे सामने से हटा लो ये दुनियाँ
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनियाँ
ये दुनियाँ अगर मिल भी जाए तो क्या है

एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। "हर इक" केर मात्राक्रम लेल अलिफ-वस्लक नियम देखल जाए मने एकर मात्राक्रम "हरिक" केर हिसाबसँ लेल जेतै। ई गीत निच्चा सुनि सकैत छी--


सोमवार, 24 सितंबर 2018

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-17

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

आइ देखू "अनारकली" फिल्म केर ई नज्म जे कि लता मंगेशकर जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि राजेंद्र कृष्ण। संगीतकार छथि सी.रामचंद्र। ई फिल्म 1953 मे रिलीज भेलै। एहिमे  प्रदीप कुमार, बीना राय आदि कलाकार छलथि।


इस इंतेज़ार-ए-शौक को जनमों की प्यास है
इक शमा जल रही है तो वो भी उदास है

मुहब्बत ऐसी धड़कन है जो समझाई नहीं जाती
ज़ुबां पर दिल की बेचैनी कभी लाई नहीं जाती

चले आओ, चले आओ तक़ाज़ा है निगाहों का
किसी की आरज़ू ऐसे तो ठुकराई नहीं जाती

मेरे दिल ने बिछाए हैं सजदे आज राहों में
जो हालत आशिक़ी की है वो बतलाई नहीं जाती

एहि नज्मक सभ पाँतिक मात्राक्रम 1222-1222-1222-1222 अछि। एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। मुदा एहि पाँति "मेरे दिल ने बिछाए हैं सजदे आज राहों में" मे बहर टूटल छै आ शाइर एकर गजल कहियो नै रहल छथिन। बहुत काल शाइर गजल वा नज्मसँ पहिने माहौल बनेबाक लेल एकटा आन शेर दैत छै ओना ई अनिवार्य नै छै। एहि नज्मसँ पहिने एकटा शेर "इस इंतेज़ार-ए-शौक को जनमों की प्यास है" माहौल बनेबाक लेल देल गेल छै।


रविवार, 9 सितंबर 2018

हिंदी फिल्मी गीतमे बहर-16

गजलक मतलामे जे रदीफ-काफिया-बहर लेल गेल छै तकर पालन पूरा गजलमे हेबाक चाही मुदा नज्ममे ई कोनो जरूरी नै छै। एकै नज्ममे अनेको काफिया लेल जा सकैए। अलग-अलग बंद वा अंतराक बहर सेहो अलग भ' सकैए संगे-संग नज्मक शेरमे बिनु काफियाक रदीफ सेहो भेटत। मुदा बहुत नज्ममे गजले जकाँ एकै बहरक निर्वाह कएल गेल अछि। ओना उर्दू केर पुरान नज्ममे निश्चित रूपे बहर भेटत मुदा अंग्रेजी प्रभावसँ सेहो उर्दू प्रभावित भेल आ बिना बहरक नज्म सेहो लिखाए लागल। मैथिलीमे बहुत लोक गजलक नियम तँ नहिए जानै छथि आ ताहिपरसँ कुतर्क करै छथि जे फिल्मी गीत बिना कोनो नियमक सुनबामे सुंदर लगैत छै। मुदा पहिल जे नज्म लेल बहर अनिवार्य नै छै आ जाहिमे छै तकर विवरण हम एहि ठाम द' रहल छी-----------------

आइ देखू "नगीना" फिल्म केर ई नज्म जे कि मोहम्मद अजीज जी द्वारा गाएल गेल अछि। नज्म लिखने छथि आनंद बख्शी। संगीतकार छथि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल। ई फिल्म 1986 मे रिलीज भेलै। एहिमे ऋषि कपूर, श्रीदेवी, अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा आदि कलाकार छलथि।


आज कल याद कुछ और रहता नहीं
एक बस आपकी याद आने के बाद
याद आने से पहले चले आईये
और फिर जाइये जान जाने के बाद

अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये
अपने दिल में मेरा घर बना दीजिये
क्या करूँ दिल कहीं और लगता नहीं
प्यार में आपसे दिल लगाने के बाद

इश्क़ के मैंने कितने फ़साने सुने
हुस्न के कितने किस्से पुराने सुने
ऐसा लगता है फिर इस तरह टूट कर
प्यार हमने किया एक ज़माने के बाद

आपका नाम दिल से निकलता नहीं
दिल्लगी में कोई ज़ोर चलता नहीं
आपको भूल जाने की कोशिश भी की
और तड़पा हूँ मैं भूल जाने के बाद

पहिल आ तेसर पाँतिक मात्राक्रम अछि 212-212-212-212 तेनाहिते दोसर आ चारिम पाँतिक मात्राक्रम अछि 212-212-212-212+1 मूल मात्राक्रम अछि 212-212-212-212 मुदा उर्दूमे (मैथिलीयोमे) छूटक तौरपर अंतिम लघु मान्य छै। एकर बादक बंद सभमे पहिल तीन पाँतिक मात्राक्रम 212-212-212-212 आ चारिम पाँतिक मात्राक्रम अछि 212-212-212-212+1 एकर तक्ती उर्दू हिंदी नियमपर कएल गेल अछि। एहि नज्मकेँ शेरमे सेहो बदलि सकैत छी जेना निच्चा बदलल गेल छै--

आज कल याद कुछ और रहता नहीं एक बस आपकी याद आने के बाद
याद आने से पहले चले आईये और फिर जाइये जान जाने के बाद

अपनी आँखों में मुझको बसा लीजिये अपने दिल में मेरा घर बना दीजिये
क्या करूँ दिल कहीं और लगता नहीं प्यार में आपसे दिल लगाने के बाद

मतलाक दूनू पाँति मात्राक्रम छै 212-212-212-212 212-212-212-212+1 आ तकर बाद दोसर शेरक पहिल पाँतिक मात्राक्रम छै 212-212-212-212 212-212-212-212 जे कि उर्दू सहित मैथिलियोमे छूटक तौरपर मान्य छै मने जँ एहि नज्मकेँ गजल कहल जाए ताहूमे कोनो दिक्कत नहि। ई गीत एहिठाम सुनि सकैत छी.........




तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों