गुरुवार, 27 सितंबर 2018

गजल

अगबे भाषण झुट्ठा कहीं के
चुप बेहूदा कुत्ता कहीं के

भेटै नेहक बदला सिनेहे
नै संभव रे सुद्धा कहीं के

हिस्सा पबिते भागल लफंदर
रुक बेठूआ लुच्चा कहीं के

अपनाकेँ मानथि नमरी  सैंतल
हमरा कहलथि छुट्टा कहीं के

दुनियाँ मानै शैतान बड़का
अपना मोने सुच्चा कहीं के

सभ पाँतिमे 22-22-22-122 मात्राक्रम अछि। चारिम शेरमे एकटा दीर्घकेँ लघु मानबाक छूट लेल गेल अछि। सुझाव सादर आमंत्रित अछि।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों