गुरुवार, 9 जनवरी 2025

गजल

अनलौं करेजा हमर स्वीकार करु

हमरासँ एना   अहाँ नहि बेपार करु


गरदनि उठा हजुर हमरा नहि देखबै

हम केकरा  लेल एते  सिंगार करु

 

सस्ता महग बाढ़ि रौदी सगरो भरल

सोइच गरीबक अहाँ किछु सरकार करु

 

हरलौं कते युगसँ तन मन धन बनि अपन

नहि आब ऐ आतमा पर अधिकार करु

 

झूठक बटोरल अहाँकेँ बहुमत रहल

‘मनु’ नहि सड़ल बाँटि जनता बेमार करु

 

(बहरे सगीर, मात्राक्रम - 2212-2122-2212)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों