शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

गजल

अहाँ मुस्कैत रही  हमरा देखैत रही

अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही


रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही

सगर गुणगान अहाँकेँ हम गाबैत रही

 

मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही

अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही

 

अहाँ  ढारैत रही डुबि हम तीतैत रही

सुनरकी  संग मउध प्रेमक पीबैत रही

 

अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही

पिया अनुराग सँ ई जीवन जीबैत रही

 

(मात्रा क्रम 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे) 

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों