अहाँ मुस्कैत रही हमरा देखैत रही
अहाँकेँ प्रेम गजल नव-नव सुनबैत रही
रुसल सजनी जँ रही प्रेमसँ बौसैत रही
सगर गुणगान अहाँकेँ हम गाबैत रही
मधुरगर बोल अहाँ सदिखन बाजैत रही
अहाँकेँ सुनि क सिनेहे हम ताकैत रही
अहाँ ढारैत रही डुबि हम तीतैत रही
सुनरकी संग मउध प्रेमक पीबैत रही
अहाँ जीतैत रही ‘मनु’ हम हारैत रही
पिया अनुराग सँ ई जीवन जीबैत रही
(मात्रा क्रम 1222-112-2222-112 सभ पाँतिमे)
✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’
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