Sunday, 19 May 2013

गजल



अछि जँ जिनगी तँ प्रेम केनाइ सिख लिअ
दुख बिसरि जगमे मन लगेनाइ सिख लिअ

काल्हिकेँ नै कोनो भरोसा बचल अछि
आइपर हिल मिल आबि जेनाइ सिख लिअ

जीवनक सुख दुख बाट दू छैक बुझलहुँ
दूबटीयापर हँसि कऽ गेनाइ सिख लिअ

अपन मनमे प्रेमक जगाबैत बाती
आँखि सभकेँ सोझाँ उठेनाइ सिख लिअ

के बुझेलक मनुछै अछूतगर पापी
पाप आबो संगे मिटेनाइ सिख लिअ

(बहरे खफीक, मात्रा क्रम २१२२-२२१२-२१२२)
जगदानन्द झा मनु             

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों