Tuesday, 27 June 2017

विश्व गजलकार परिचय शृंखला-7

"बोतल खुली है रक्स में जाम-ए-शराब है"

आइ विश्व गजलकार परिचय शृखंलामे एकटा विशेष गजलकारसँ परिचय कराएब। ओहिसँ पहिने ई निवेदन कऽ दी जे किछु एहन रचनाकार एहन होइ छथि जे कि पाठ्य रूपमे प्रसिद्ध होइत छथि तँ किछु कोनो गायक द्वारा। आइ जिनकासँ हम परिचय कराएब ओ दोसर तरहँक रचनाकार छथि मने हिनक रचना गेलाक बादें प्रसिद्ध भेल। फना बुलंदशहरी (मूल नाम-- मुहम्मद हनीफ) पाकिस्तानक प्रसिद्ध शायर छलाह। प्राप्त जानकारीक अनुसारें ई गुजरावाला (Gujranwala) जिलाक अरूप स्थानक छलाह। बुलंदशहरी प्रसिद्ध शाइर क़मर जलालवीजीसँ शाइरीक शिक्षा लेने छलाह। एहिठाम ईहो जानब रोचक जे बुलंदशहरीजीक गुरू क़मर जलालवीजीक एकटा पोथीक नाम सेहो " मेरे रश्के क़मर" छनि। बुलंदशहरीजीक बेसी जीवनी नहि भेटैत अछि कारण कहियो हिनका पाठ्य रूपमे गंभीरतासँ नहि लेल गेलनि जाहि कारणे एक तरहें पाठ्य रूप बला पाठकक नजरिसँ ओझल छथि। जे गीत-कौआली सुनै छथि हुनका तँ शाइरक नाम बूझल रहैत छनि मुदा जीवनी नहि तँइ हमहूँ असमर्थ छी। जे रचनाकार गायक द्वारा प्रसिद्ध होइत छथि ओहो कोनो एकै-दू गायक द्वारा प्रसिद्ध होइत छथि। बुलंदशहरीजीक रचना "मेरे रश्के-क़मर, तूने पहली नजर, जब नजर से मिलायी मज़ा आ गया" जेनाहिते प्रसिद्ध कौआली गायक "नुसरत फतेह अली" गेला तेनाहिते बुलंदशहरीजीक नाम सभहँक सामने आबि गेल। ओना ओहिसँ पहिने सेहो हुनकर रचना सभ गाएल गेल छल मुदा "मेरे रश्के-क़मर" केर बाते किछु अलग छै। बुलंदशहरीजीक एकटा अन्य रचना " बोतल खुली है रक्स में जाम-ए-शराब है" सेहो प्रसिद्ध भेल। ई रचना नुसरतजीक अतिरिक्त मुन्नी बेगम द्वारा गाएल गेल छै आ व्यक्तिगत तौरपर हमरा मुन्नी बेगम बला भर्सन बेसी नीक लागल अछि।
भारतक साधारण जनता बुलंदशहरीजी नाम तखन चिन्हलक जखन कि  अरिजीत सिंह द्वारा "मेरे रश्के-क़मर" रचनाक नवका भर्सन आएल आ तकर बाद ई रचना फेरसँ भारतमे प्रसिद्ध भऽ गेल मुदा अफसोचजनक जे मूल रचनाकारक संबंधमे फेर सभ अपरिचित रहि गेल। एकठाम यूट्यूबपर एकरा अरिजीत सिंह द्वारा गाएल आ नुसरत फतेह अली द्वारा लिखल सेहो भेटत। चूँकि बुलंदशहरीजीक बारेमे बेसी तथ्य नहि अछि तँइ एहिठाम हम "मेरे रश्के क़मर" रचना सुनाबी जे कि नुसरत जी गेने छथि (परिशिष्टमे ई रचना सेहो देल गेल अछि) --



आब एही रचनाकेँ अरिजीत सिंह केर अवाजमे सुनू--


आब सुनू मुन्नी बेगमजीक अवाजमे ""बोतल खुली है रक्स में"--

एही रचनाकेँ फेरसँ मुन्निए जीक अवाजमे सुनू आ अंतर ताकू--



आब फना बुलंदशहरीजीक किछु प्रसिद्ध रचना देल जा रहल अछि जे कि विभिन्न गायक द्वारा गाएल अछि--

आँख उठी मोहब्बत ने अंगडाई ली ( गायक नुसरत फतेह अली खान)






उर्दू लिपिमे बुलंदशहरीक जीक रचना पढ़बाक लेल एहिठाम आउ-- https://issuu.com/rchakravarti/docs/deevaan-e-fanabulandshehri

परिशिष्ट--
मेरे रश्के-क़मर, तूने पहली नजर, जब नजर से मिलायी मज़ा आ गया 
बर्क़ सी गिर गयी, काम ही कर गयी, आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया


जाम में घोलकर हुस्न कि मस्तियाँ, चांदनी मुस्कुरायी मज़ा आ गया 
चाँद के साये में ऐ मेरे साक़िया, तूने ऐसी पिलायी मज़ा आ गया


नशा शीशे में अगड़ाई लेने लगा, बज्मे-रिंदा में सागर खनकने लगा
मैकदे पे बरसने लगी मस्तिया, जब घटा गिर के छायी मज़ा आ गया


बे-हिज़ाबाना वो सामने आ गए, और जवानी जवानी से टकरा गयी
आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से , देखकर ये लड़ाई मज़ा आ गया


आँख में थी हया हर मुलाकात पर , सुर्ख आरिज़ हुए वस्ल की बात पर
उसने शरमा के मेरे सवालात पे, ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया


शैख़ साहिब का ईमान बिक ही गया, देखकर हुस्न-ए-साक़ी पिघल ही गया
आज से पहले ये कितने मगरूर थे, लुट गयी पारसाई मज़ा आ गया


ऐ “फ़ना” शुक्र है आज वादे फ़ना, उस ने रख ली मेरे प्यार की आबरू
अपने हाथों से उसने मेरी कब्र पर, चादर-ऐ-गुल चढ़ाई मज़ा आ गया

क्रेडिट--


विश्व गजलकार परिचय शृंखलाक अन्य भाग पढ़बाक लेल एहि ठाम आउ--  विश्व गजलकार परिचय 


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