रविवार, 31 मार्च 2024

गजल

की बनब चाहै छलौं हम कि बनि गेलौं

प्रेममे प्रियतम  अहीं केर   सनि गेलौं

 

आब नहि परिवारकेँ मोल कनिको छै

जेब खाली  होइते हम  तँ जनि गेलौं 


सुधि रहल नहि बोझ लदने अपन हमरा

पाबि चुटकी भरि  सिनेहेसँ कनि गेलौं

         

खूनमे सदिखन बसल नेह गामक अछि

छल लिखल  परदेशकेँ  गाम मनि गेलौं                 

 

आब प्रेमक ई अगण लय रहल जीवन

मोनमे बसिमनुहमर साँस  गनि गेलौं


(बहरे कलीब, मात्राक्रम  2122-2122-1222)

✍🏻 जगदानन्द झा ‘मनु’

 

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों